Mithiladarshan

Mithiladarshan मिथिला का गौरव है ,मिथिला की हर बात है

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27/11/2020

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आप सभी को मिथिला दर्शन() की ओर से रंगों और खुशियों के त्यौहार होली की मंगलमय हार्दिक शुभकामनाएं।
13/03/2017

आप सभी को मिथिला दर्शन() की ओर से रंगों और खुशियों के त्यौहार होली की मंगलमय हार्दिक शुभकामनाएं।

09/01/2017

शिलानाथ शिवमंदिर(शैवस्थल) :- भाग 2(द्वितीय)
शिलानाथ महादेव सम्पूर्ण मिथिला में सर्व जनप्रिय और सर्व सामान्य जन की मनोकामना पूर्ण करने वाले के रूप में लोकप्रसिद्ध है। जयनगर के पश्चिम कुछ दूर पर कमला तट पर शिलानाथ महादेव का प्राचीन मंदिर था। हालांकि वह मंदिर कमला में विलीन हो गया फिर भी कार्तिक और माघी पूर्णिमा में प्राचीन कमला धार में स्नान के पश्चात् भग्नावशिष्ट मंदिर का दर्शन कर यात्री अपनी आस्तिक भावना को प्रदर्शित करते हैं।शिलानाथ मंदिर का उल्लेख विष्णुधर्मोत्तर पुराण में भी मिलता है।
शिलानाथ शिवमंदिर(शैवस्थल) :- भाग 3(तृतीय) शीघ्र...

07/01/2017

जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(5)
1965 के आसपास बड़की पोखर के निकट एक डीह से बहुत ही आकर्षक काले पत्थर की मूर्ति मिली है जो कला की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। डीह में मोटी ईंट की दीवार जमींदोज है, मूर्ति दीवाल पर वहीं औंधी पड़ी थी, जो आंशिक भग्न रहने पर भी सुन्दर है, इसकी प्रतिकृति पटना संग्रहालय में भी है। कोई इस मूर्ति को लक्ष्मीनारायण का बताते हैं। जयनगर से शिलानाथ तक मंदिरों,गढ़, टीलों और डीहों के पुरावशेष हैं जिनमें नाममात्र ही प्राप्त हो पाया है।
जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(अंतिम भाग) अगले सप्ताह...

30/12/2016

मिथिलादर्शन(Mithiladarshan)
सीरीज-2; भाग-1(प्रथम)
शिलानाथ शिव मंदिर(शैवस्थल) :-(1)
पूर्व मध्य रेल के सुदूर उत्तर में नेपाल सीमा से सटे कमला नदी के तट पर स्थित एक सुन्दर शहर जयनगर से तीन किमी नैऋत्यकोण में अवस्थित मिथिला का प्राचीन प्रसिद्ध मंदिर शिलानाथ महादेव है। जयनगर-दरभंगा राष्ट्रीय राजपथ संख्या 105 के उत्तरी ओर दलश्रृंगार बलदेव महाविद्यालय के पीछे दुल्लीपट्टी गांव के निकट यह प्राचीन शिवालय स्थित है जहाँ रेल एवं सड़क दोनों यातायात की सुविधा तीर्थयात्रियों के लिए उपलब्ध है।
शिलानाथ शिवमंदिर(शैवस्थल) :- भाग 2(द्वितीय) शीघ्र...

30/12/2016

जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(4)
जयनगर के आग्नेय कोण में एक डीह गढ़ी के नाम से प्रसिद्ध क्षेत्र को कमला नदी ने तहस-नहस कर डाला है। इसके आसपास प्राचीन तालाबों के अवशेष मौजूद हैं तथा यहाँ के लोग इसे घुड़दौड़ पोखर, गढ़ी पोखर के नाम से पुकारते हैं। जागेश्वरनाथ महादेव मंदिर से दो किमी दक्षिण में 'झोटियावीर खंडहर' किसी विशाल खंडहर का अवशेष जान पड़ता है। खंडहर के सम्बन्ध में लोगों में कई किंवंदती भी प्रचलित है कोई इसे भुतहा गाछी तो कोई इसे विशेष प्रभाव वाला अघोरियों का क्रीड़ास्थल बताते हैं।
जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(5) शीघ्र...

28/12/2016

जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(3)
वर्तमान मंदिर का निर्माण जयनगर बाजार के बिलट मंडल द्वारा किया गया है। जयनगर के शिलानाथ मंदिर से कुछ दूर पेड़ तले पत्थरों के बीच दो प्रतिमाएं हैं जिसमें एक गणेश तो दूसरी दक्षिणकाली की है। दक्षिणकाली की प्रतिमा बिहार में ऐसा और कहीं नहीं है। यहाँ नेपाल सहित काफी दूर से श्रद्धालु आते हैं और अपनी मनोकामना पूरी करने हेतु कीर्तन-भजन और पूजा करते हैं। मंदिर काफी प्राचीन होने के साथ ही ऐतिहासिक महत्त्व का है, इससे इतिहासकारों को भी अध्ययन में मदद मिलता है।
जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(4) अतिशीघ्र...

26/12/2016

जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(2)
जागेश्वरनाथ शिव मंदिर तिरहुत-नागर शैली का है| यहाँ शिवलिंग गर्भगृह के मध्य में स्थापित है| यहाँ की लिंगमूर्ति काले कठोर पत्थर की और प्राचीन है| यहाँ पाल काल से ही शिवभक्तों का शासन और उपस्थिति रही है, यह मंदिर कर्नाट काल या 1000 वर्ष तक पुरानी हो सकती है, क्योंकि उसके आसपास उत्तर-मध्यकालीन सूर्य,गणेश और दक्षिणकाली की मूर्ति मिलना इसका संकेत है| महाशिवरात्रि और शिवपर्व में यहाँ विशेष श्रृंगार और पूजा का आयोजन किया जाता है...

जयनगर गाँव स्थित जागेश्वरनाथ शिवालय :-(3) अतिशीघ्र...

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