03/05/2026
▪️मैने कभी नही पढ़ा-देखा-सुना कि अमेरिका में बोर्ड इग्जाम के रिजल्ट आ रहे हैं या यूके में ल़डकियों ने बाजी मार ली है या आस्ट्रेलिया में किसी छात्र के 99.5 % आऐ हैं।
अप्रैल-मई के महीने में हिंदुस्तान के हर घर में दस्तक देती है एक भय एक उत्तेजना, एक जिज्ञासा, एक मानसिक विकृति... हर माता-पिता, हर बोर्ड के इग्जाम मे बैठा बच्चा, हर बीतते हुए पल को एक डिप्रेशन, एक इनसेक्योरीटी में काट रहा होता है कि क्या होगा ?
माता-पिता फ़सल की तरह बच्चो को पाल रहे हैं कि कब फ़सल पके कब उनकी अधूरी रह चुकी आकांक्षाये पूरी होंगी, कब वे फ़सल काटेंगे?
हमारे पूंजीवादी इनवेस्टर्स को क्या प्रोडक्ट चाहिये इस हिसाब से शिक्षा और उसके उद्देश्य तय हो रहे हैं। एक परिवार सुख-चैन त्याग, दिन-रात खट के, सँघर्षो, घोर परिश्रम में गुज़र जाता है। उस परिवार का अपना अस्तित्व, सुख चैन और मानवीय भावनाएं इसलिये भेंट चढ जाती है क्योंकि टीसीएस को एक बेहतरीन साफ्टवेयर डेवलपर चाहिये.. या मेकेन्से को बेस्ट ब्रेन चाहिये.. या रिलायन्स को बेहतरीन गेम डिजाइनर चाहिये।
हमारी शिक्षा व्यवस्था व उसके आदर्श कहाँ रह गये ?
हमारे स्कूल देश के बेस्ट नागरिक नही देश के बेस्ट मजदूर बनाने में दिन-रात एक करके जुटे हुए हैं और माता-पिता बच्चो को बच्चा नही, एक मेकेनिकल डीवाईस बनाने को प्रतिज्ञाबद्ध हैं।
बच्चों को जीने दो.. दुनिया खत्म नही होने जा रही। उन्हे बेस्ट Employee नही, बेस्ट Citizen बनाने में यकीन रखो दोस्तो।
बचपन की भी खुद से कुछ अपेक्षाएं होती हैं, अपने निस्वार्थ स्वप्न होते हैं, उनका हमारे लिये कोई अर्थ नही पर बच्चों के लिये वो जन्नत से कम नही। प्लीज- बच्चों की दुनिया मत उजाड़ो, उन्हे मनोरोगी मत बनाओ।
ये एक मानसिक रुग्णता ही तो है। toppers की खबरें, उन्हे मिठाई खिलाते माता-पिता की फोटो, क्या ये एक आम सामान्य स्तर के बच्चों को मानसिक हीनता की अनुभूती नही देंगे ?
अरे..टापर तो दो चार होंगे, बाकी देश का बोझ तो 99% इन्ही फूल से कोमल सामान्य बच्चों ने ही उठाना है। उनकी मुस्कान मत छीनो, देश से उसकी सृजनात्मक शक्ति मत छीनो।
जैसे हमारे लिये नेपाल के माँ-बाप मजदूर तैयार कर रहे हैं, वैसे ही हम टाटा, रिलायंस, एल एंड टी, मारुति, मेकेन्से, देन्सू , etc के लिये मजदूर तैयार कर रहे हैं।
वे कुछ भी बन जाएं, एमएनसी में सीईओ हो जाएं पर जो बचपन की रिक्तता हमने आरोपित कर दी है वो उन्हे जीवन भर खलेगी और मानवीय विकृतियों के रुप में फलेगी। हमको बेस्ट सीईओ मिलेंगे, जिनकी प्राथमिकता उनकी कंपनी होगी, देश और परिवार नही। खैर ये सब तो चलता रहेगा ......📌
[ :- आपके संस्कार भारती में Academic Excellence के अतिरिक्त पे ज्यादा जोर रहता है ..]
Vijay Ranjan