24/09/2026
🇮🇳 निर्वाचन आयोग के भीतर उठ रहे सवाल…
अब जवाब देश की जनता को चाहिए!
हाल की खबरों में निर्वाचन आयोग के दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची, Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण तथा कुछ निर्णयों की प्रक्रिया को लेकर लिखित आपत्तियाँ दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन अलग-अलग मतों को सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए अपने सभी निर्णयों को कानून के अनुरूप और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। (The Indian Express)
ऐसे समय में आम जनता के मन में कुछ स्वाभाविक सवाल उठना लाजिमी है—
❓ अगर निर्वाचन आयोग के अंदर ही किसी निर्णय की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों न हो?
❓ मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑडिट योग्य क्यों न हो?
❓ यदि किसी निर्वाचन आयुक्त ने किसी प्रक्रिया को नियमों के विरुद्ध बताया है, तो उस पर आयोग की स्पष्ट कानूनी स्थिति जनता के सामने क्यों न रखी जाए?
❓ मतदाता डेटा और चुनावी सॉफ्टवेयर की सुरक्षा एवं नियंत्रण की स्वतंत्र जांच क्यों न कराई जाए?
❓ क्या हर योग्य नागरिक को अपना नाम मतदाता सूची में होने और किसी भी बदलाव के विरुद्ध प्रभावी अपील का स्पष्ट अधिकार सुनिश्चित नहीं होना चाहिए?
❓ क्या निर्वाचन आयोग के सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में सभी आयुक्तों की भूमिका और मतभेदों का रिकॉर्ड पर्याप्त रूप से पारदर्शी नहीं होना चाहिए?
🇮🇳 मेरी स्पष्ट मांग
मैं किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के पक्ष में यह मांग रखता हूँ—
🔹 निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज सभी महत्वपूर्ण आपत्तियों और उनके जवाबों को उचित सीमा तक सार्वजनिक किया जाए।
🔹 मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया का स्वतंत्र एवं पारदर्शी ऑडिट कराया जाए।
🔹 चुनावी सॉफ्टवेयर और मतदाता डेटा की सुरक्षा की स्वतंत्र तकनीकी जांच हो।
🔹 किसी भी योग्य मतदाता का नाम केवल तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न हो।
🔹 निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत किया जाए।
लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से मजबूत नहीं होता—
लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब हर नागरिक को विश्वास हो कि उसका वोट सुरक्षित है और उसकी आवाज निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया में दर्ज होगी।
आपकी राय क्या है?
क्या निर्वाचन आयोग के भीतर उठे इन सवालों पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए?
🇮🇳 जय हिंद | जय बिहार
डॉ. राजेश कुमार चौरसिया, एम.डी.
शिशु एवं बाल्य रोग विशेषज्ञ, हाजीपुर
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी, जनसुराज
129 – महनार विधानसभा क्षेत्र
📞 9097181058
#निर्वाचनआयोग #लोकतंत्र #मतदाताअधिकार #मतदातासूची #चुनावीसुधार #पारदर्शिता #जवाबदेही #महनार #वैशाली #बिहार #जनसुराज