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कितना भी अपने आपको समझा लो, कितना भी ये कह लो कि “अभी टाइम है" लेकिन सच्चाई से भाग नहीं सकते। ये लड़का अलग है, बिल्कुल अ...
11/04/2026

कितना भी अपने आपको समझा लो, कितना भी ये कह लो कि “अभी टाइम है" लेकिन सच्चाई से भाग नहीं सकते। ये लड़का अलग है, बिल्कुल अलग। जिस उम्र में लोग अंडर-19 का सपना देखते हैं, उस उम्र में ये बड़े-बड़े गेंदबाज़ों को ऐसे खेल रहा है जैसे गली क्रिकेट हो।

हाँ, तुलना करना आसान नहीं होता, लेकिन जब आपने 16 वर्षीय सचिन को दिग्गज स्पिनर अब्दुल कादिर को मारते हुए देखा या सुना था, ठीक वही निडरता आज इस नए लड़के में दिख रही है। नाम है सूर्यवंशी। ये सिर्फ रन नहीं बना रहा, ये मैसेज दे रहा है– “मैं आ गया हूँ।”

पिछले मैच में जिस तरह इसने भुवी और हैजलवुड जैसे खतरनाक गेंदबाज़ को खेला, वो कोई आम बात नहीं है। ये वो लेवल है जहाँ टैलेंट नहीं, आत्मविश्वास बोलता है। इससे पहले वोल्ट और बुमराह को भी ऐसे ही खेला था! पंद्रह साल की उम्र में जो ये कर रहा है, वो कई खिलाड़ी पूरे करियर में नहीं कर पाते। सिर्फ इसी सीजन में दूसरी बार 15 गेंद में फिफ्टी ठोक दी है। पावरप्ले में ही टीम को जीत की खुशबू आने लगती है!

दूसरी तरफ राजस्थान रॉयल इस वक्त सिर्फ जीत नहीं रही, दबदबा बना रही है। हर खिलाड़ी फॉर्म में, हर मैच में कंट्रोल। 3 खिलाड़ी (वैभव, यशस्वी, ध्रुव) ओरेंज कैप के लिए टॉप पर बैठे हैं और बिश्नोई के सिर पर पर्पल कैप है। टीम सर्वाधिक 8 अंक के साथ टेबिल टॉपर है। अपने चारों मैच जीत चुकी है।
टॉप 4 में जाना तय लग रहा है, सवाल ये है टॉप 2 में जाएगी या नहीं? क्या कोई इसे रोक भी पाएगा? राजस्थान के सभी समर्थकों को दिल से बधाई क्योंकि ये सिर्फ जीत नहीं, एक स्टेटमेंट है! इस साल आरसीबी को हराना आसान नहीं है! बहुत ही संतुलित और इनफॉर्म टीम है! ~गोविंद परिहार

जेसलमेर रियासत कालीन समय के खबरी ओर खोजी चतरू भील इनमें कुदरत की ऐसी देन थी कि पशुओं के पदचिन्ह सूंघ कर ओर धरती की धड़कन...
06/04/2026

जेसलमेर रियासत कालीन समय के खबरी ओर खोजी चतरू भील इनमें कुदरत की ऐसी देन थी कि पशुओं के पदचिन्ह सूंघ कर ओर धरती की धड़कन सुनकर दुश्मन सेना की संख्या ओर दूरी बता देते थे। आज ये विद्या समय के साथ साथ लुप्त हो चुकी है। सादर नमन् है चतरू भील को जिन्होंने अपनी इस कला से रियासत कालीन समय में एक अमिट छाप छोड़ी 🫡🫡

03/04/2026

भारत में कुछ बड़ा पक रहा है, और इस बार signals काफी साफ दिख रहे हैं।

सबसे पहले देशभर में लगातार Pakistani spies पकड़े जा रहे हैं, फिर अचानक Eid वाले दिन Pakistan के अंदर Lashkar-e-Taiba के base camp में घुसकर उसके एक top commander को खत्म कर दिया जाता है, वो भी उसके ही safe zone में।

इसके बाद खबर आती है कि Pakistan के former Army Chief General Javed Bajwa की मौत हो गई, reason बताया जाता है bathroom में slip होना, लेकिन honestly, इतनी simple story पर भरोसा करना थोड़ा मुश्किल लगता है।

इसी बीच LoC पर भी activity बढ़ जाती है, ceasefire violations की खबरें, drones की movement, और border areas में alert level high।

फिर Indian Army के Lieutenant General Prateek Sharma एक press conference में traditional और non-traditional warfare की बात करते हैं, यानी लड़ाई सिर्फ बंदूक से नहीं, intelligence, cyber और covert operations से भी लड़ी जा रही है।

उसके अगले ही दिन Army Chief Dwivedi जी Jagannath Mandir जाकर आशीर्वाद लेते हैं और साफ शब्दों में कहते हैं कि आने वाले दिनों में Indian Army कुछ “बहुत बड़ा” करने वाली है, साथ ही publicly Operation Sindhu 2.0 का hint भी दे देते हैं।

फिर Indian Air Chief Marshal Amarpreet Singh जी Patna Sahib जाकर आशीर्वाद लेते हैं, और जब Army और Air Force दोनों इस तरह active दिखें, तो बात छोटी नहीं होती।

उधर Kashmir में अचानक security forces की deployment बढ़ जाती है, कुछ sensitive इलाकों में internet restrictions भी देखने को मिलती हैं, जो usually बड़े operations से पहले होता है।

और अब last 24 hours में, PM Modi की सभी states के CM के साथ emergency meeting, Ajit Doval की high-level security बैठक, Rajnath Singh की defense ministers के साथ discussions।

इतने सारे dots जब एक साथ जुड़ते हैं, तो picture साफ नजर आने लगती है।

भाई, इस बार कुछ बड़ा होने वाला है,
लग रहा है Dhurandhar 3 के लिए पूरी script ready है, और curtain उठने ही वाला है।

छोटू सिंह रावणा तो बस शतरंज का प्यादा है असली खेल तो पीछे बैठे राजदरबार के अनुभवी खिलाड़ी खेल रहे हैं जिनके लिए आम क्षत्...
03/04/2026

छोटू सिंह रावणा तो बस शतरंज का प्यादा है असली खेल तो पीछे बैठे राजदरबार के अनुभवी खिलाड़ी खेल रहे हैं जिनके लिए आम क्षत्रिय सिर्फ भीड़ है और खुद को वो आज भी ताजधारी समझते हैं

राजस्थान के क्षत्रियों का वर्चस्व खत्म नहीं हुआ उसे धीरे धीरे घोंट कर खत्म किया गया और सबसे मज़ेदार बात यह है कि यह काम किसी दुश्मन ने नहीं बल्कि अपने ही राजपरिवारों ने बड़ी नफ़ासत से किया

आज़ादी के बाद जब क्षत्रियों को 51 सीटों का आरक्षण मिलने की बात थी तब असली डर बाहर वालों से नहीं था डर था इन महलों में बैठे लोगों को कि कहीं खेत में हल चलाने वाला क्षत्रिय भी उनके बराबर खड़ा न हो जाए इसलिए अधिकार की थाली खुद ही लात मारकर गिरा दी गई और आज उसी पर विलाप भी नहीं है

और अब जब कोई रवींद्र सिंह भाटी जैसा व्यक्ति खड़ा होता है जो दरबार में हाज़िरी लगाने नहीं जाता तो समस्या यह नहीं है कि वह किसी विचारधारा से जुड़ा है समस्या यह है कि वह झुकता नहीं है और यही सबसे बड़ा अपराध है

सच तो यह है कि राजपरिवार और क्षत्रिय का रिश्ता अब खून का नहीं स्वार्थ का रह गया है बाहर से एक जैसे दिखते हैं लेकिन अंदर से दो अलग समाज बन चुके हैं एक जो आज भी ताज के सपने देखता है और दूसरा जो अपने हक के लिए लड़ना चाहता है

अब फैसला क्षत्रियों को करना है कि वो इतिहास की तस्वीर में फ्रेम बनकर रहेंगे या खुद तस्वीर बनेंगे

14/03/2026

क्या अमेरिका ईरान को हरा देगा???
#ईरान #अमेरिका

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13/03/2026

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13/03/2026

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13/03/2026
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