Support Hindutva

Support Hindutva hindu

धीरेंद्र शास्त्री जी जिस दिन क्रिसमस पर सैकड़ो ईसाई आदिवासियो की घरवापसी करवाई थी, उसी दिन तय हो गया था कि चर्च अब धीरें...
21/01/2023

धीरेंद्र शास्त्री जी जिस दिन क्रिसमस पर सैकड़ो ईसाई आदिवासियो की घरवापसी करवाई थी, उसी दिन तय हो गया था कि चर्च अब धीरेंद्र शास्त्री पर मीडिया और वामपंथीयो के माध्यम से हमला करेगा और वही हो रहा है।। लेकिन उनका उद्देश्य और भाव दोनो पवित्र है, इसलिए उनका समर्थन जरूरी है...!!

ागेश्वरधाम 🙏🚩

13/06/2022

-हम हिन्दू हिंसक नहीं हैँ क्या यह हमारी गलती है?
-हम दुनिया को भयाक्रांत नहीं करते क्या यह हमारी गलती है?
-हमारा धर्म हमें पिशाच बनना नहीं वरन श्रेष्ठ मानव बनना सिखाता है क्या यह हमारी गलती है?
-हम दुनिया को काले परचम या ख, लीफा राज के अंतर्गत नहीं बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ लाना चाहते हैँ क्या यह हमारी गलती है?
-हम AK47 से विश्व को निचा दिखाना नहीं वरन योग अध्यात्म से विश्व ऊँचा उठाना चाहते हैँ क्या यह हमारी गलती है?
-हमें हिंसा की भाषा नहीं आती वरन मन्त्रों की भाषा आती है क्या यह हमारी गलती है?
-हमारा धर्म हमें व्यभिचार नहीं सिखाता बल्कि वैज्ञानिकता सिखाता है क्या यह हमारी गलती है?
-हमारा धर्म हमें जन्नत मे हूरों के स्वप्न नहीं दिखाता बल्कि जैसा कर्म वैसा अगला जन्म की व्यवस्था बताता है क्या यह हमारी गलती है?
-हमारा धर्म औरतों को खेती नहीं मानता बल्कि देव शक्ति व जगत जननी का स्वरूप मानता है क्या यह हमारी गलती है?
-हम अपने धर्म, अपने आराध्या, अपने शास्त्र पर किसी टिप्पणी पर अधीर और हिंसक नहीं होते बल्कि हमारे यहाँ शास्त्ररार्थ की परंपरा रही है क्या यह हमारी गलती है?
-हम धर्म व पैग़म्बर को लेकर संकीर्ण नहीं बल्कि व्यापक व प्रगतिशील विचार वाले रहे क्या यह हमारी गलती है?

क्या विश्व चाहता है की हम हिन्दू अपने इस परंपरागत व्यवहार को भूल जो जिस भाषा मे समझता है उसको उसी भाषा मे समझाने वाली नीति अपनायें ?

अगर यही चाहिए तो यही सही....लेकिन अब और नहीं...

अब धर्म की विजय.... और अधर्म का नाश ही होगा..... अवश्यम भावी होगा..

🚩जय श्रीराम 🚩

🚩जय सनातन धर्म 🚩

11/06/2022

*✓यदि एकत्र होने लगोगे मंगलवार को,*
*तो पत्थर नहीं खाने पड़ेगें शुक्रवार को*
*🙏🚩 जय जय श्री राम 🚩🕉️*
*🙏🚩 जय जय श्री हनुमान 🚩🕉️*

*सभी हिन्दू - मंगलवार आ रहा है। हर मंगलवार को आप मंदिर में पहुंचने की आदत डालें* जिस तरह ईसाई रविवार को चर्च जरूर जाता है। और मुसलमान शुक्रवार को मस्जिद जरूर जाता है। *हमें भी मंगलवार का दिन तय करना पड़ेगा बल और बुद्धि का दिवस शक्ति का दिवस हनुमान जी का दिवस।*
आप सभी को शिकायत होती है कि हिंदू कभी हिंदू के लिए खड़ा नहीं होता। कैसे होगा क्या आपने ऐसा कोई नियम बना रखा है जिसमें आप कम से कम सप्ताह में एक बार एक दूसरे से मिले।
आइए हम अपने वीरान पड़े मंदिरों को शक्ति और संगठन स्थल के रूप में विकसित करें।
*हर मंगलवार शाम को 7:00 से 7:30 के बीच आप चाहे कहीं भी है मंदिर अवश्य पहुंचे। हनुमान चालीसा एवं आरती का समय यही होता है।*
आप अपने घर पर हैं तो घर के पास के मंदिर में। दुकान पर है तो दुकान के पास के मंदिर में ऑफिस में है तो ऑफिस के पास किसी मंदिर में। अगर आप यात्रा पर भी हैं तो *आप जहां भी हैं वहां पर आसपास किसी भी मंदिर में हर मंगलवार 7:00 से 7:30 के बीच जरूर पहुंचे।*
*कल्पना कीजिए भारतवर्ष में लाखों लाखों मंदिर है अगर हर मंदिर में सिर्फ 50 से 100 लोग भी पहुंचेंगे और एक साथ उनके घंटों की शंख की और आरती की आवाजें गूंज आएगी तो एक मिश्रित संगीत जब पूरे भारतवर्ष में हर मंगलवार ठीक 7:00 से 7:30 के बीच में गूंजेगा तो यह आवाज पूरी दुनिया में जाएगी इसका असर बहुत ही दूरगामी होगा। विश्वास कीजिए आज की सभी समस्याएं कपूर की तरह उड़ जाएगी इतनी बड़ी संख्या में जब हिंदू अपने मंदिरों में पहुंचेगा वह भी हर सप्ताह तो किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं होगी कि हिंदू को छेड़ सके।*
हो सके तो अपने साथ अपनी धर्मपत्नी बच्चों को,पुरे परिवार को साथ लेकर मंदिर जाए जब आप इस तरह से नियमित रूप से हर मंगलवार मंदिर पहुंचेंगे तो वहां आपके आस पड़ोस में एक ही जो लोग हैं वह भी आपसे मिलेंगे आपकी जान पहचान पड़ेगी आपस में संबंध बढ़ेंगे और फिर आप एक दूसरे के सुख दुख में भी शामिल होंगे इसी तरह से हम सभी एकता के सूत्र में बंध जाएंगे।
*अगर संदेश पसंद आया है तो इसे सभी ग्रुपों में प्रसारित करें। और आज ही प्रण करें चाहे हम कुछ भी कर रहे हैं हर मंगलवार 7:00 से 7:30 के बीच हम मंदिर जरूर पहुंचेंगे अपने लिए नहीं अपने समाज और अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए। ध्यान रहे अब यह आवश्यक हो चुका है अगर आप इसे अभी भी टालते रहे तो बहुत बड़े खतरे में आप पढ़ने वाले हैं। जितना शीघ्र आप इसे शुरू करेंगे इतना जल्दी आप एक दूसरे से एकता के सूत्र में बंध जाएंगे।*
*‼️🚩🇮🇳 अखंड भारत 🕉️🙏‼️*

The only eyewitness
19/05/2022

The only eyewitness

11/04/2022

★★★माता पिता कोई फलों के वृक्ष नही है!

★आम का पेड़ -【 माता पिता】

★एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था। जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता। पेड़ के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता। उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया। बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया। कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया। आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता। एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा, "तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।" बच्चे ने आम के पेड से कहा, "अब मेरी खेलने की उम्र नही है , मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"
पेड ने कहा, "तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे, इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।" उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया। उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया। आम का पेड उसकी राह देखता रहता। एक दिन वो फिर आया और कहने लगा, "अब मुझे नौकरी मिल गई है, मेरी शादी हो चुकी है, मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।" आम के पेड ने कहा, "तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।" उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया। आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था। कोई उसे देखता भी नहीं था। पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी। फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा, "शायद आपने मुझे नही पहचाना, मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"
आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा, "पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।" वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा, "आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है, आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"

इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी। वो आम का पेड़ कोई और नही हमारे माता-पिता हैं दोस्तों । जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।

जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये। पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी, कोई समस्या खडी हुई।

★आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है। जाकर उनसे लिपटे, उनके गले लग जाये फिर देखना

★वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।
आप से प्रार्थना करता हूँ यदि ये कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया ज्यादा से ज्यादा लोगों को भेजे ताकि किसी की औलाद सही रास्ते पर आकर अपने माता पिता को गले लगा सके।

★ अन्यथा वो दिन भी आएगा जब आपका यह फलदार आम का पेड़ भी केवल ठूंठ बन कर खून के आंसू रोटा दिखेगा, पर कोई देखने सुनने वाला नही होगा, इतिहास कल का भविष्य होगा ही ,याद रखिये!

!!!!! इति, शुभमस्तु !!!!!

02/04/2022

्मीर_फाइल_का_असर

एक महिला पत्रकार की समीक्षा...

पढना इसे मजा आयेगा

दिल्ली में बस मे बैठे हुए थी कि अचानक मुझे आदेशात्मक शब्द सुनाई दिए "भैया सीट से हट जाओ, मेरे साथ मेरे बच्चे है।"

बुर्का ओढ़े महिला ने एक 25 साल के लड़के से कहा तो लड़के ने बड़ी शालीनता से कहा "आप महिला सीट पर जाओ। मै महिला सीट पर नहीं बैठा हूँ।"

वो बोली "वहां सब सीटों पर पहले से ही लेडीज बैठी हैं।"

लड़के ने अपने कान के हेडफोन को हटाते हुए कहा, "मैं क्या करूं? मुझे भजनपुरा जाना है जो अभी बहुत दूर है।"

वो अपने बच्चो की धौंस दिखाने लगी कि मेरे छोटे-छोटे 4 बच्चे हैं। आपको शर्म नही आती?
आप जेंटस हैं।
आप सीट नही छोड़ सकते?"

अब सब सवारियां मौन खड़ी तमाशा देखने लगी। मामला गर्म होने के साथ साथ मसालेदार हो रहा था। लड़के ने एक बड़ी अच्छी बात कही, "आप लोगो का यही ड्रामा है। हर साल एक बच्चा जनना और फिर अगले बच्चे की तैयारी। क्या आपने हमसे पूछकर बच्चे पैदा किये थे?

अजीब बात है?

बच्चे पैदा करो तुम और सीट छोड़े हम?

आपको बच्चों की इतनी ही फिक्र थी तो कैब करती या खाली बस में बैठती। अब तुम्हें सफर फ्री चाहिए, सीट भी चाहिये और दादागिरी भी चाहिए। जाइए मैं नही देता आपको सीट।"

तभी बस के कंडक्टर ने भी कहा "भाई दे दो सीट।" लड़का फिर बोला कि "मैं किसी महिला रिज़र्व सीट पर नही बैठा हुँ। भाई तू अपने टिकट काट।"

कंडक्टर शायद अरबी भेड़ था। कहने लगा "लेडी है! लगता है पेट से भी है!"

"तो मै क्या करूं?" युवक ने कहा..

कंडक्टर चुप होकर बस के बाहर देखने लगा। इतने में मुझे ये तो यकीन हो गया लड़का जागरूक है। वह उसको बातों ही बातों में धुनने को तैयार है। वो बुर्के वाली अक्कड से युवक के पास वाली सीट के पास ही खड़ी रही।

लड़का भी बुदबुदाता रहा कि बच्चे तुम पैदा करते रहो और सीट काफ़िर देंगे? फिर तुम्हें अपना घर देंगे? और फिर वही कश्मीर वाले हालात पैदा करोगे।"

उस महिला के आगे बैठै एक इन्सानियत के सेक्युलर कर्मचारी ने अपनी सीट ऑफर कर दी। वो धम्म से बैठ गयी। उसने दो शिशु शावक गोद मे बिठा दिए। परंतु दो शावकों को खडे रहना पडा। अब वो बगल वाले से अपने शावकों के लिए सीट मांगने लगी।"

लड़के ने जोर से उस सेक्युलर को ताना मारा "भाई साहब! घर भी दे दो अपना, ये बच्चे वहां अच्छा जीवन जिएंगे।"

इतने में कंडक्टर चिल्लाया "भाई! जिसे अप्सरा बॉर्डर उतरना हो उतर जाओ।"

बात वहीं रुक गयी और लड़का शांत हो गया। वो शाहीनबाग की शेरनी सीमापुरी उतर गई। मात्र 10 मिनट के सफर के लिये उस बुर्के वाली ने ये सब नाटक किया था।

ये घटना दिल्ली लोकल बस रूट नं• 33 की है जो नोएडा सेक्टर 37 से भजनपुरा की तरफ जाती है। रोज की तरह लोग इसमे घुसते है और अधिका़श अपने आफिस और दूसरे काम के लिए निकलते है। मैं महिला सीट पर बैठी ये सब नाटक देख रही थी। (दिल्ली एनसीआर की बसों में एक लाइन महिलाओ के लिए आरक्षित रहती है।)

मैं मंद-मंद मुसकराई और सोचने लगी कि "जागना जरूरी है। अरे ढेर सारे बच्चे पैदा वो करें और survive हमे करना पड़ रहा है।

वर्षों से यही चल आ रहा है लेकिन ये अब आगे नही चलना चाहिए। शायद ही नहीं बल्कि यकीनन अब लोगो में जागरूकता आ रही है जो अब हर शहर गांव व दूरदराज तक पहुंचनी चाहिए।"

--एक महिला पत्रकार..
😳 🙄 🤔 🙆‍♂️

14/03/2022

गौमाता को रोटी खिलाने वाले और रोटी के साथ गौमाता को खाने वाले कभी एक नही हो सकते।
ये सेक्सुलरिज्म छोड़ दो भाइयों

05/03/2022

वो यूक्रेन में भी भारत का झंडा लेकर बेखौफ घूम रहें हैं..
और कुछ को यहां भी डर लगता है।

22/02/2022

#विडंबना
आने वाले 20 वर्षो में हिन्दुओं के घरों से कुछ रिश्ते हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। भाई, भाभी, देवर, देवरानी, जेठ, जेठानी, काका, काकी सहित अनेक रिश्ते हिन्दुओं के घरों से समाप्त हो जाएंगे।

बस ढाई तीन लोगों के परिवार बचेंगे, न हिम्मत देने वाला बड़ा भाई होगा, न तेज तर्राट छोटा भाई होगा,न घर मे भाभी होगी, न कोई छोटा देवर होगा, बहु भी अकेली होगी, न उसकी कोई देवरानी होगी न जेठानी। कुल मिलाकर इस एक बच्चा फैशन और सिर्फ मैं मैं की मूर्खता के कारण ...

हिन्दु परिवार खत्म होते जा रहे हैं, दो भाई वाले परिवार भी अब आखरी स्टेज पर हैं । अब राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न सीता उर्मिला मांडवी जैसे भरे पूरे परिवार असम्भव हो चले हैं । पहले कच्चे घरो में भी बड़े परिवार रह लेते थे अब बड़े बंगलो में भी ढाई तीन लोग रहने का फैशन चल पड़ा है। मन दुखी होता है सोचकर, हम हिन्दुओ को ईमानदारी से इस दिशा में सोचना चाहिए। इस चुनौती पूर्ण सदी में हम एक बच्चे को कहा कहा अड़ा पाएंगे और उसमें हिम्मत कौन भरेगा बिना भाइयों के कंधे पर हाथ रखे। हिंदुओं की घटती हुई जनसंख्या चिंता का विषय है!

हिंदुओं को अपना ट्रेंड परिवर्तन करना होगा बच्चों की शादी की उम्र 20 से 24 तक निश्चित करें कामयाब बनाने के चक्कर में 30 से 35 तक खींच रहे हैं इतने में एक पीढ़ी का अंतर हो जाता है आपकी कामयाबी के समय में सामने वाला बीस का आंकड़ा पार कर देता है....!

सोचनीय विषय है..🙏

19/02/2022

बात स्कूल ड्रेस की नहीं
संगठित शक्तिप्रदर्शन की
और हिन्दुओं के लिए
आत्मचिंतन की है

दुर्भाग्यकिसी ने कारसेवकों पर गोली चलवाई, वो आजतक मुस्लिम वोटों की फसल काट रहा है और शायद अजीवन काटेगा.....और किसी को रा...
19/02/2022

दुर्भाग्य

किसी ने कारसेवकों पर गोली चलवाई, वो आजतक मुस्लिम वोटों की फसल काट रहा है और शायद अजीवन काटेगा.....
और किसी को राममंदिर का निर्माण करवाने के बाद भी हिंदुओं को समझा-समझा कर वोट मांगना पड़ रहा है।
🙏🏻🚩 जय श्री राम 🚩🙏🏻
अपना मतदान सोच समझ कर करें।

बजरंग बली की जय
18/02/2022

बजरंग बली की जय

Address

Malpura
283105

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Support Hindutva posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category