26/06/2026
इस मरे हुए समाज में जान फूंकने के लिए एक 28 वर्ष के युवा ने अपनी जान दे दी। अब ज़रा सोचिए ... समाज की स्थिति आखिर कितनी गंभीर हो चुकी है?
क्योंकि नेता भी इसी समाज से आते हैं, और नेताओं को चुनने वाले भी इसी समाज से आते हैं। इसलिए हर दोष केवल नेताओं पर डालकर हम अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते।
ज़रा सबसे छोटे चुनावों पर नज़र डालिए ... वार्ड सदस्य, पंचायत, मुखिया। वहां अक्सर यह नहीं देखा जाता कि सबसे योग्य कौन है, सबसे ईमानदार कौन है, सबसे सक्षम कौन है। देखा यह जाता है कि कौन कितनी मीठी बातें कर सकता है, कौन कितना बड़ा वादा कर सकता है, कौन किसका दोस्त है, किसने किसके साथ चाय-नाश्ता किया है, कौन किस जाति या कुनबे से आता है।
पढ़े-लिखे, योग्य और ईमानदार लोग समाज में कम नहीं हैं। लेकिन जब वे चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उन्हें वह सम्मान और समर्थन नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। दूसरी ओर दलाल, अवसरवादी और झूठ बेचने वाले लोग आसानी से भीड़ जुटा लेते हैं।
कुछ लोग पार्टी के इतने अंधभक्त हो जाते हैं कि उम्मीदवार को देखना ही छोड़ देते हैं। पार्टी ने चाहे जैसा व्यक्ति उतार दिया हो, उसका समर्थन तय है। मानो उम्मीदवार की योग्यता, चरित्र और काम का कोई महत्व ही न रह गया हो।
आज अधिकांश दलों में टिकट भी अक्सर उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनके घर में पहले से राजनीति रही हो। पिता, पति, माता, ससुर या परिवार का कोई सदस्य राजनीति में रहा हो तो टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाती है। और जनता भी इसे सहज मान लेती है। मानो राजनीति जनता की नहीं, कुछ परिवारों की निजी संपत्ति हो।
सबसे दुखद बात यह है कि जो लोग आपको वोट देने वाले नहीं होते, वही आपसे सबसे अधिक सवाल पूछते हैं। उन्हें दुनिया भर की राजनीति की जानकारी होती है, लेकिन अपने क्षेत्र में वर्षों से काम कर रहे व्यक्ति का नाम तक नहीं पता होता। वे आपके काम को देखने नहीं, आपको उलझाने आते हैं। वे चाहते हैं कि आप मेहनत करते रहें, लेकिन जीतें नहीं।
जो लोग चुनाव लड़ चुके हैं, विशेषकर मुखिया या वार्ड का चुनाव, वे जानते हैं कि ज़मीनी सच्चाई कितनी कठोर होती है। कई बार वर्षों की मेहनत जाति, पार्टी, रिश्तेदारी या निजी स्वार्थ के सामने हार जाती है।
सवाल यह भी है कि दशकों से कितनी योजनाएं आईं और चली गईं, कितने नेता आए और गए, लेकिन कई गांवों और क्षेत्रों की हालत???? देवभूमि क्षत्रिय संगठन स्वर्ण मोर्चा भाव पूर्ण श्रद्धांजली भरत तिवारी 28th June 2026, 4pm, स्थान माता चामुंडा मंदिर मोतीपुर मंडी,