02/05/2025
पाकिस्तान का आतंकवाद में योगदान एक जटिल और संवेदनशील विषय है, जिसमें राजनीतिक, सैन्य, धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय पहलू जुड़े हैं। नीचे इस विषय को विभिन्न कोणों से विस्तार से समझाया गया है:
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1. आतंकवाद का उदय – ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1980 के दशक में, सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान अमेरिका और सऊदी अरब ने पाकिस्तान के जरिए मुजाहिदीन को समर्थन दिया।
ISI (Inter-Services Intelligence) ने इन जिहादी समूहों को ट्रेनिंग, हथियार और पनाहगाहें दीं।
इस दौर में ही तालिबान और अल-कायदा जैसे संगठनों की नींव रखी गई।
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2. भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियाँ
कश्मीर फोकस:
पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर को "अधिकार" मानता है और वहां के अलगाववादी संगठनों को समर्थन देता रहा है।
लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठन ISI के संरक्षण में पले-बढ़े।
मुख्य आतंकी हमले (जिनका लिंक पाकिस्तान से रहा):
1999 - कारगिल युद्ध: घुसपैठ पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित थी।
2001 - संसद हमला (दिल्ली): जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकवादी शामिल।
2008 - 26/11 मुंबई हमला: लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने किया, प्लानिंग पाकिस्तान में हुई।
2016 - पठानकोट हमला, 2019 - पुलवामा हमला: जैश-ए-मोहम्मद का हाथ।
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3. पाकिस्तान के अंदर का आतंकवाद
पाकिस्तान खुद भी आतंकवाद से पीड़ित रहा है, खासकर:
TTP (Tehrik-i-Taliban Pakistan) द्वारा सेना और नागरिकों पर हमले।
शिया-सुन्नी संप्रदायिक हिंसा।
बलूचिस्तान और पख्तून क्षेत्रों में अलगाववादी गतिविधियाँ।
प्रमुख आतंकी घटनाएँ:
2014 - पेशावर स्कूल हमला: 140 से ज्यादा बच्चों की हत्या (TTP द्वारा)।
कई बार मस्जिदों, बाजारों, और स्कूलों में आत्मघाती हमले हुए हैं।
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4. अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
FATF (Financial Action Task Force) ने पाकिस्तान को "ग्रे लिस्ट" में डाला, क्योंकि वह आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने में नाकाम रहा।
अमेरिका और भारत ने कई बार पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह "अच्छे आतंकियों और बुरे आतंकियों" में फर्क करता है – मतलब कुछ समूहों को संरक्षण देता है, बाकी से लड़ता है।
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5. वर्तमान स्थिति
पाकिस्तान पर आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते वह कुछ आतंकी संगठनों पर कार्रवाई दिखाता है, लेकिन जड़ से उखाड़ने का प्रयास कमजोर रहा है।
आतंकी संगठन नाम बदलकर या राजनीतिक दल बनकर अभी भी काम कर रहे हैं (जैसे जमात-उद-दावा, तहरीक-ए-लब्बैक आदि)।
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निष्कर्ष:
पाकिस्तान ने एक दौर में आतंकवाद को "रणनीतिक संपत्ति" (Strategic Asset) के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन वही नीति अब उसके लिए खतरा बन गई है। आतंकवाद से न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा है, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, राजनीति और वैश्विक छवि भी प्रभावित हुई है।