01/09/2026
लगभग दो वर्ष पूर्व अगर आप किसी को ये कहते कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघसंचालक कनाडा आने वाले हैं तो वो आप पर पक्का हँस रहा होता। दो वर्ष पूर्व जब यहाँ मंदिरों को क्षति पहुंचाई जा रही थी और दीवारो पर हिंदुओं और भारतीयों के प्रति घृणित मैसेज लिखे जा रहे थे तो तब कोई सोच भी नहीं सकता था एक दिन ऐसा भी आयेगा।
जब ट्रैक्टर आंदोलन अपने पूरे चरम पर था तब यहाँ ऐसे भी किस्से सुनने को मिलते थे कि हिंदू बच्चों को स्कूलों bully किया जाता था। वैसे बच्चे जिन्होंने कनाडा में ही जन्म लिया, उनके केवल हिंदू होने पर उन्हें एक पार्टी और एक नेता का समर्थक मान लिया जाता था।
सुनाने बैठूँगा तो दिन निकल जायेगा लेकिन आज ध्यान देने वाली बात ये है कि पिछले दो वर्षों में क्या बदला?
एक कैनेडियन हिंदू होने के नाते ये बात कोई नकार नहीं सकता कि मार्क कार्नी की सरकार ने इन विषयों को गंभीरता से लिया और धीरे-धीरे ही सही परंतु भारत के साथ लगभग खत्म हो चुके संबंधों को सुधारने का प्रयास कर रही है।
ऐसे समय में भागवत जी का कनाडा दौरा स्वयं में बहुत कुछ कहता है। अमरीका से तुलना करें तो भागवत जी के दौरे पर जितना हंगामा उधर हुआ, कनाडा में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। हालाँकि ऐसा सबको लग रहा था कनाडा में हंगामा होगा लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा!
जहाँ तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बात है तो मेरे कल के शेयर videos में आप देख सकते हैं कि भागवत जी यहाँ कैसा स्वागत हुआ। पूरा हॉल “जय श्रीराम”, “हर हर महादेव”, “जय भवानी”, “वंदे मातरम्” के नारों से गूँज रहा था।
क्यों?
क्योंकि जब हिंदू देश से बाहर निकलता है तो उसकी संस्कृति ही उसकी पहचान होती है। ये वही संस्कृति है जिसे कर्मभूमि के प्रति कर्तव्यों के बारे में बतलाना नहीं पड़ता। ये वो “डीएनए” है जो exclusive है! उसे पता होता है कि घर के अंदर चाहे जितने मतभेद हों, जब बाहर की बात होती है तब एक दिखना पड़ता है।
कनाडा में हिंदू समुदाय सबसे अधिक सफल और नियम-क़ानून मानने वाला रहा है। परंतु “ब्राउन” होने के कारण हमारी गिनती “आस-पड़ोस” वालों के साथ होने लगती है। गोरों को सभी “ब्राउन” एक ही पृष्ठभूमि के लगते हैं। गलती कोई और करता है, नाम सभी का आता है।
पिछले कुछ वर्षों में “वखरा स्वैग नी” वालों ने जितना हिंदू धर्म को टारगेट किया, हिंदू आइडेंटिटी उतनी ही निखर कर गोरों के सामने आ गई। अब गोरों को भी ये समझ आने लगा है कि हर ब्राउन, हिंदू नहीं होता। भागवत जी के दौरे को इस प्रयास में कड़ी की तरह देखा जाए जिसके दूरगामी परिणाम सकारात्मक ही होंगे।
जहाँ तक संघ की बात है तो आशा है संघ इन सभी घटनाक्रमों को देख-सुन रही होगी और जो विश्वास हिंदू समाज ने इनपर किया है, वो उस विश्वास को dilute नहीं करेंगे या समय आने पर अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटेंगे..
शेष किसी और माध्यम से…
-कुमार दीपांशु (फेसबुक वॉल से साभार)