25/04/2026
*🌹जय श्रीमन्नारायण🌹*
*जीविते यस्य जीवन्ति,*
*विप्रा: मित्राणि बान्धवाः।*
*सफलं जीवितं तस्य,*
*आत्माऽर्थे को न जीवति।।*
अर्थात - जिसके जीवन से विप्र, मित्र और बंधुजन जीते है, उसी का जीवन सफल है। अपने लिए तो कौन नही जीता है अर्थात अपने लिए तो सभी जीते है।
*🙏💐🌻मङ्गलं सुप्रभातम्🌻💐🙏*