सिरौना - मेरा गाँव

सिरौना - मेरा गाँव सिरौना- जहाँ ज़िन्दगी की कशिश पुरसुकून और निराली है !

प्रकृति की गोद में बसा सिरौना गाँव बिहार के पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी) जिला में अवस्तिथ है । यह गाँव चारो और से हरियाली एवं पेड़-पौधे से घिरा हुआ है। यहाँ की खेत काफी उपजाऊ एवं किसान लोग मेहनती है। कछुवा नदी गाँव के पास से ही गुजरती है। इस गाँव की प्राकृतिक सौन्द्रयता में पेड़ों का अहम् स्थान है, यहाँ पे सबसे ज्यादा आम का पेड़ लगा हुआ है जिसपे कोयल और बहुत से पक्षियों कलरव करते सुनायी पड़ते है । स

िरौना में हर पर्व-त्यौहार एक साथ मिलकर मनाया जाता है। यहाँ के लोग भक्ति-आस्था में काफी विश्वास रखते है। यहाँ का दुर्गापूजा, होली और छठ पर्व काफी लोकप्रिय है। युवाओ का होली के हुडदंग और हुलास , मस्ती और फाग देखने वाली होती है। छठ पर्व के शुभ अवसर पे देश-विदेश में रहने वाले सिरौना वासी अपने गाँव को चले आते है और सभी लोग एक साथ मिलकर कछुवा नदी के किनारे यह पर्व मनाते है जिसके देखने से हर्द्य आन्दित हो जाता है । यहाँ के सभी लोग दयालु, इमानदार एवं परोपकारी है।।
प्यारा है दिल से मेरा अपना गाँव...और यही है स्वर्ग अपना ।।

अत्यंत दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे ग्राम एवं पंचायत के प्रति अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले, जनसेवा ...
19/07/2026

अत्यंत दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे ग्राम एवं पंचायत के प्रति अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले, जनसेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानने वाले, लगभग 28 वर्षों तक सिरौना पंचायत के मुखिया रहे, जेपी आंदोलन के सच्चे सिपाही तथा आजीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे आदरणीय श्री गोपाल शर्मा जी का आज स्वर्गवास हो गया।

वे पिछले लगभग एक वर्ष से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। निरंतर उपचार के बावजूद उनके स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और अंततः वे हम सभी को छोड़कर आज वैकुण्ठ धाम को प्रस्थान कर गए।

उनका सरल स्वभाव, समाज सेवा के प्रति समर्पण तथा ग्रामवासियों के प्रति स्नेह सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उनका निधन हमारे गाँव एवं क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया।

ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत्-शत् नमन।
ॐ शांति। 🙏🙏

गाँव के खेतों में धान की रोपाई करते ग्रामीण हमारे कृषि समाज की जीवंत संस्कृति, परिश्रम और समर्पण का प्रतीक हैं। यही मेहन...
16/07/2026

गाँव के खेतों में धान की रोपाई करते ग्रामीण हमारे कृषि समाज की जीवंत संस्कृति, परिश्रम और समर्पण का प्रतीक हैं। यही मेहनत हमारे घरों तक अन्न पहुँचाती है और देश की समृद्धि की नींव बनती है।

गाँव की सुबह प्यारी और न्यारी होती है... सुख और सकारात्मकता से भरपूर। सामने खेतों में हरियाली और बच्चों की तरह नन्हीं फस...
07/07/2026

गाँव की सुबह प्यारी और न्यारी होती है... सुख और सकारात्मकता से भरपूर। सामने खेतों में हरियाली और बच्चों की तरह नन्हीं फसलों को बड़े होते निहारने का सुख अवर्णनीय है।

गाँव का देशी अमरूद… स्वाद में बेमिसाल, मिठास में लाजवाब! घर के पास लगे पेड़ के ये देशी अमरूद भले ही आकार में छोटे हों, ल...
05/07/2026

गाँव का देशी अमरूद… स्वाद में बेमिसाल, मिठास में लाजवाब! घर के पास लगे पेड़ के ये देशी अमरूद भले ही आकार में छोटे हों, लेकिन स्वाद और मिठास में किसी से कम नहीं। आजकल शहरों में मिलने वाले बड़े-बड़े, चमकदार अमरूद दिखने में आकर्षक जरूर होते हैं, पर उनमें वह प्राकृतिक स्वाद और मिठास कहाँ! प्रकृति की गोद में पले ये देशी फल ही असली स्वाद और सेहत का खजाना हैं।

न कोई स्वार्थ, न कोई मेहनताना… सिर्फ़ अपने गाँव के प्रति जिम्मेदारी। दुर्गा मंदिर के पास चापाकल पर जमी काई को गाँव के कु...
05/07/2026

न कोई स्वार्थ, न कोई मेहनताना… सिर्फ़ अपने गाँव के प्रति जिम्मेदारी। दुर्गा मंदिर के पास चापाकल पर जमी काई को गाँव के कुछ बच्चों ने स्वयं साफ़ किया, ताकि कोई ग्रामीण या राहगीर फिसलकर घायल न हो। ऐसी सेवा-भावना ही समाज की असली ताकत है। ईश्वर इन बच्चों को स्वस्थ, सुखी और सदैव प्रगतिशील बनाए। 🙏

गाँव के हाई स्कूल के मैदान में ग्रामीणों और छात्रों के लिए नई व्यायाम मशीनें लगाई गई हैं। यह एक सराहनीय पहल है।लेकिन एक ...
05/07/2026

गाँव के हाई स्कूल के मैदान में ग्रामीणों और छात्रों के लिए नई व्यायाम मशीनें लगाई गई हैं। यह एक सराहनीय पहल है।
लेकिन एक दुखद पहलू भी है। जहाँ नई मशीनें लगाई जा रही हैं, वहीं पहले से लगी कुछ मशीनें देखरेख के अभाव में खराब हो चुकी हैं।
हमारे बचपन में ऐसी सुविधाएँ नहीं थीं, फिर भी हम खेल-कूद कर स्वस्थ रहते थे। आज सुविधाएँ तो हैं, लेकिन बच्चों का झुकाव खेल-कूद की बजाय मोबाइल और सोशल मीडिया की ओर अधिक होता जा रहा है।
आइए, इन नई मशीनों का पूरा सदुपयोग करें और पुरानी मशीनों की मरम्मत भी कराएँ। सार्वजनिक संपत्ति हमारी अपनी धरोहर है, इसकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

प्रकृति जब अपने हाथों से मिठास परोसती है, तो उसका स्वाद शब्दों में नहीं, बस महसूस किया जा सकता है।
27/06/2026

प्रकृति जब अपने हाथों से मिठास परोसती है, तो उसका स्वाद शब्दों में नहीं, बस महसूस किया जा सकता है।

सुबह-सुबह खिड़की से आमों से लदा पेड़ दिख जाए, तो दिन अपने आप खूबसूरत हो जाता है।
27/06/2026

सुबह-सुबह खिड़की से आमों से लदा पेड़ दिख जाए, तो दिन अपने आप खूबसूरत हो जाता है।

प्रकृति की गोद में, महादेव का आशीष।
07/06/2026

प्रकृति की गोद में, महादेव का आशीष।

सिरौना की ऐतिहासिक धरती पर कल केवल एक उत्सव नहीं मना, बल्कि गाँव के नवनिर्माण की एक नई रूपरेखा भी रखी गई। हमने सरकार और ...
25/04/2026

सिरौना की ऐतिहासिक धरती पर कल केवल एक उत्सव नहीं मना, बल्कि गाँव के नवनिर्माण की एक नई रूपरेखा भी रखी गई। हमने सरकार और प्रशासन के समक्ष गाँव के सर्वांगीण विकास के लिए दो प्रमुख माँगें मजबूती से रखी हैं:

कछुआ नदी का सौंदर्यीकरण: हरनरैना सुलिश गेट से लेकर सिरौना छठ घाट पुल तक कछुआ नदी को वॉटर पार्क के रूप में विकसित करने की मांग। साथ ही, खेतों तक जाने वाली नहरों की सफाई और उचित देख-रेख ताकि हमारे किसानों को सुविधा हो।

धरोहरों का संरक्षण: गाँव के 8 मठ-मंदिरों, सार्वजनिक तालाबों और सभी पुराने कुओं को 'आदर्श स्थल' के रूप में जीर्णोद्धार और विकसित करने का आह्वान। ये केवल ढाँचे नहीं, हमारी पहचान हैं।

Address

गाँव/सिरौना, डाकघर/सिरौना, थाना/शिकारगंज
Motihari
845418

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