Ajaykumar Pandey

Ajaykumar Pandey उसूलो पे आँच आये तो टकराना जरूरी है, ज़ि?

08/11/2024

एक विभाजित समाज: सत्य का क्षय और एकता पर खतरा

हाल ही में, मैंने अपने स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप में एक बहुत ही परेशान करने वाली घटना देखी। एक संदेश प्रसारित किया गया जिसमें गुजराती समुदाय के खिलाफ निराधार और घृणित आरोप लगाए गए थे। इस तरह के झूठे आरोप, बिना किसी सबूत के, सिर्फ समाज में फूट डालने और नफरत फैलाने के लिए किए गए थे।
जब मैंने तथ्यों के साथ इस गलत सूचना का मुकाबला करने की कोशिश की, तो मुझे उपहास और तिरस्कार का सामना करना पड़ा। दुर्भाग्यवश, ग्रुप के अधिकांश लोग सच्चाई की तलाश करने के बजाय, घृणा फैलाने में अधिक रुचि रखते थे। यह अनुभव न केवल गुजराती समुदाय के लोगों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए भी चिंताजनक है।
यह घटना एक बड़े सामाजिक मुद्दे का लक्षण है: सत्य का क्षय और विभाजनकारी बयानबाजी का बढ़ता प्रभाव। हम विभिन्न समुदायों में इसी तरह के पैटर्न देखते हैं, जहां व्यक्तियों और समूहों को बिना किसी तथ्यात्मक आधार के बदनाम किया जाता है। चाहे वह किसी विशिष्ट जाति, धर्म या क्षेत्र को निशाना बना रहा हो, परिणाम एक ही है: सामाजिक सौहार्द का क्षय और नफरत का बढ़ावा।
ऐसी विभाजनकारी बयानबाजी के खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह डर और शक का माहौल पैदा करता है, जो अंततः हिंसा और सामाजिक अशांति को जन्म दे सकता है। जैसा कि हम अपने समाज के बढ़ते ध्रुवीकरण को देखते हैं, इस मुद्दे को तुरंत संबोधित करने की आवश्यकता है।
इस प्रवृत्ति का मुकाबला करने के लिए, हमें तथ्यों की जांच, आलोचनात्मक सोच और सहानुभूति को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमें हानिकारक रूढ़ियों को चुनौती देनी चाहिए और सम्मान और समझ की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।
घृणा फैलाने वालों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराना और खुले संवाद और रचनात्मक बहस को प्रोत्साहित करना जरूरी है।
सभी को मिलकर प्रयास करना होगा एक अधिक समावेशी और सहिष्णु समाज का निर्माण करने के लिए। आइए हम विभाजनों को पाटने और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करने का प्रयास करें जहां सत्य पूर्वाग्रह पर विजय प्राप्त करे और एकता विभाजन पर विजय प्राप्त करे।

24/10/2022


आतिशबाज़ी एक फारसी शब्द है। आतश या आतिश का अर्थ होता है - आग। हमारे देश के पौराणिक ग्रंथों में आतिशबाजी को 'अग्निक्रीड़ा' और बारूद को 'अग्नि चूर्ण' कहा गया है। यही बारूद आतिशबाजी की जान होती है, जिससे आतिशबाजी-पटाखों का निर्माण होता है

26/11 हम भूल नहीं सकते 13 साल पहले पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत की आत्मा पर हमला किया था।मुंबई में निर्दोष लोगों कों मौत ...
26/11/2021

26/11 हम भूल नहीं सकते 13 साल पहले पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत की आत्मा पर हमला किया था।मुंबई में निर्दोष लोगों कों मौत के घाट उतार दिया। हम पुलिसकर्मियों की शहादत भी नहीं भूल सकते।जिन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहूति दे दी और आतंकियों को ढेर कर दिया।

दीपावल्याः सहस्रदीपाः भवतः जीवनं सुखेन, सन्तोषेण, शान्त्या आरोग्येण च प्रकाशयन्तु।🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
04/11/2021

दीपावल्याः सहस्रदीपाः भवतः जीवनं सुखेन, सन्तोषेण, शान्त्या आरोग्येण च प्रकाशयन्तु।
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔

मुंबई आतंकी हमले के शहीदों को नमन।
26/11/2019

मुंबई आतंकी हमले के शहीदों को नमन।

सियावर रामचंद्र की जय 🙏🙏
26/11/2019

सियावर रामचंद्र की जय 🙏🙏

24/11/2019

Please Don't be Divide in Cast
Be the just
Always Care for
Think Hinduism Live
Always Care for

"Let Us Stand United Against Divisive Forces" 💪

#संगठित_हिन्दू_मजबूत_भारत
#हिन्दुत्‍व 🚩

11/10/2017

SC ban on firecrackers: Industry stares at Rs 1,000 crore loss,

30/07/2017

साले कांग्रेसी पगला गए है।
इनको किसानों की कर्ज़ माफी से उत्तर प्रदेश में दिक्कत होती है।
तो मध्य प्रदेश में उसीका मुद्दा बनाते है।
कल तक जो नीतीश कुमार को महागठबंधन के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान रहे थे आज वही नीतीश दोगला हो गया।
लालू और तेजस्वी घोटाले करके मर्द बन गए।
इन कांग्रेसियो की सारी गाड़ी सिर्फ 15 लाख और धारा 370 पे आके अटक गई है।
ये देश के डेवलपमेंट से ज्यादा भाजपा की गलतियों की बात करते है।
देश का डेवलपमेंट कोल् आवंटन और 2g घोटाले से भी नही हुआ था।
देश का विकास मनरेगा और बोफोर्स घोटाले से भी नही हुआ था।
देश का विकास आदर्श सोसाइटी घोटाले या आपातकाल से भी नही हुआ था।
ये जिस इंदिरा गांधी को पूजते है उन्ही का पोता और छोटी बहू भाजपा में क्यों है?? इसका जवाब आजतक गांधी परिवार के पास नही है।

और बात करते है आरोप लगाने की।
पहले जाके खुदके दाग मिटाओ फिर दुसरो पे कीचड़ उछालना।

इस दुष्टात्मा प्रशांत भूषण का मति भ्रष्ट हो गया है तभी ये हमारे आराध्य श्रीकृष्ण पर अभद्र टिप्पणी करने की कुचेस्टा किया ...
02/04/2017

इस दुष्टात्मा प्रशांत भूषण का मति भ्रष्ट हो गया है तभी ये हमारे आराध्य श्रीकृष्ण पर अभद्र टिप्पणी करने की कुचेस्टा किया है ।
श्री हरि जल्द ही इस पापी सत्यानाश करेंगे ।

01/04/2017

भारत में अल्पसंख्यक कौन ? यह सवाल अकसर उठता रहता है लेकिन इसका माकूल जवाब अभी तक नहीं मिल सका है. सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर के एक वकील द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका में इस संबंध, भाषा और धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय के पहचान को परिभाषित करने की मांग की गयी है. चूंकि 2011 की जनगणना के आंकड़ों में मुताबिक जम्मू-कश्मीर में 68 फीसद जनसंख्या मुसलमानों की है. अत: जनसंख्या के आधार पर इस राज्य में मुसलमान किसी भी दृष्टिकोण से अल्पसंख्यक नहीं कहे जा सकते हैं. अल्पसंख्यक समुदाय को चिन्हित नहीं करने की वजह से जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यकों को दिया जाने वाला हर लाभ मुसलमानों को मिल रहा है जबकि वहां जो समुदाय वास्तविक रूप से अल्पसंख्यक है, वो उन सुविधाओं से महरूम हैं.

एक टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016-17 में अल्पसंख्यकों के लिए निर्धारित प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप का फायदा जिन छात्रों को मिला है उनमें 1 लाख 5 हजार से अधिक छात्र मुसलमान समुदाय से आते हैं जबकि सिख, बौद्ध, पारसी और जैन धर्म के 5 हजार छात्रों को इसका फायदा मिल सका है. इसमें भी हिन्दू समुदाय के किसी भी छात्र को इसका फायदा नहीं मिला है जबकि जनसंख्या के आधार पर जम्मू-कश्मीर में हिन्दू मुसलमानों से बहुत कम हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत उन लोगों के लिए कुछ अलग से प्रावधान किया गया है जो भाषा और धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक श्रेणी में आते हैं. लेकिन इसकी सटीक व्याख्या और परिभाषा नहीं होने की वजह से इसका बड़े स्तर पर दुरुपयोग भी हो रहा है. जमू-कश्मीर इसके दुरुपयोग का ताजा उदाहरण है. हालांकि ऐसा नहीं है कि यह मामला महज जम्मू-कश्मीर तक सीमित है. इसको अगर ध्यान से देखें तो भारत के तमाम हिस्सों में अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित नहीं किए जाने की वजह से किसी समुदाय के साथ अन्याय हो रहा है.

दरअसल अल्पसंख्यक उस समुदाय को माना जाता है जिसे अल्पसंख्यक कानून के तहत केंद्र की सरकार अधिसूचित करती है. भारत में मुस्लिम, सिख, बौध, इसाई, पारसी और जैन समुदाय को अल्पसंख्यक के तौर पर अधिसूचित किया गया है. हालांकि केंद्र के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की तर्ज पर राज्यों में भी अल्पसंख्यक आयोग की शुरुआत हुई लेकिन अभी भी देश के 15 से ज्यादा राज्य ऐसे हैं जहां राज्य अल्पसंख्यक आयोग काम नहीं कर रहा है. इसी वजह से जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर भ्रम की स्थिति कायम है और जिस समुदाय को अल्पसंख्यक माना जाना चाहिए उसके उलट लोगों को लाभ मिल रहा है.

दरअसल तमाम राज्यों में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा अधिसूचित समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है जबकि जनगणना के आंकड़े कुछ और बयां करते हैं. इस संबंध में एक रोचक तथ्य और है जिसपर गौर किया जाना चाहिए.

जनगणना 2011 के आंकड़ों के मुताबिक देश में मुसलमानों की कुल जनसंख्या 17 करोड़ 22 लाख है, जो कि कुल आबादी का 14.2 फीसद है. पिछली यानि 2001 की जनगणना में यह आबादी कुल आबादी की 13.4 फीसद थी. अर्थात मुसलमानों की आबादी में आनुपातिक तौर पर .8 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है. वहीं देश का बहुसंख्यक समुदाय अर्थात हिन्दू समुदाय कुल जनसंख्या का 79.8 फीसद है, जो कि 2001 में 80.5 फीसद था. अर्थात, कुल जनसंख्या में हिन्दुओं की हिस्सेदारी कम हो रही है. इसके अतिरिक्त अगर अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की बात करें तो इसाई समुदाय और जैन समुदाय की स्थिति में कोई कमी नहीं आई है जबकि सिक्ख समुदाय की हिस्सेदारी में .2 फीसद की मामूली कमी आई है. कमोबेश ऐसी ही स्थिति बौध समुदाय की भी है. अब अगर कुल जनसंख्या में इन समुदायों की वृद्धि दर अथवा कमी गिरावट की दर का विश्लेषण करें तो मुस्लिम समुदाय की वृद्धि दर कुल जनसंख्या की वृद्धि दर से 6.9 फीसद ज्यादा है. देश की जनसंख्या इन वर्षों में 17.7 फीसद की दर से बढ़ी है जबकि मुसलमान समुदाय की वृद्धि दर 24.6 फीसद रही है.

वहीं इन्हीं मानदंडों पर अगर हिन्दू समुदायों के वृद्धि दर की बात करें तो कुल जनसंख्या के वृद्धि दर की तुलना में हिन्दुओं की जनसंख्या .9 फीसद की कमी के साथ 16.8 फीसद की वृद्धि दर से बढ़ी है. इसके इतर भी कुछ अन्य आंकड़े वर्गीकृत हुए हैं जैसे देश में लगभग 29 लाख लोग किसी को धर्म को नहीं मानने वाले हैं जो कि कुल जनसंख्या का बहुत छोटा हिस्सा है. उत्तरप्रदेश और असम जैसे राज्यों में मुस्लिम आबादी तुलनात्मक रूप से अधिक है. उत्तरप्रदेश के 21 जिले ऐसे हैं जहां मुसलमानों की हिस्सेदारी 20 फीसद से अधिक है. उत्तर प्रदेश के ही 6 जिले ऐसे हैं जहां मुसलमान समुदाय हिन्दू समुदाय के बराबर अथवा ज्यादा भी है. जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार मिजोरम में 2.75फीसद, लक्षदीप में 2.77 फीसद, जम्मू-कश्मीर में 28.44 फीसद, नागालैंड में 8.75 फीसद, मेघालय में 11.53 फीसद, मणिपुर में 41.39 फीसद, अरुणाचल प्रदेश में 29.04 फीसद और पंजाब में 38.4 फीसद हिन्दू हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक तय करने का पैमाना क्या है ? क्या यहां हिन्दुओं को अल्पसंख्यक समुदाय को मिलने वाला लाभ मिल रहा है ?

भारत में अल्पसंख्यक शब्द की अवधारणा पुरानी है. सन 1899 में तत्कालीन ब्रिटिश जनगणना आयुक्त द्वारा कहा गया था भारत में सिख, जैन, बौद्ध, मुस्लिम को छोड़कर हिन्दू बहुसंख्यक हैं. यहीं से अल्पसंख्यकवाद और बहुसंख्यकवाद के विमर्श को बल मिलने लगा. ब्रिटिश नियामकों से एक कदम आगे बढ़कर भारत में जब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया तो माननीय सर्वोच्च नयायालय के मुख्य न्यायाधीश आर.एस लाहोटी ने अपने एक निर्णय में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग भंग करने का सुझाव तक दिया था लेकिन उसपर कोई अमल नहीं हुआ. अल्पसंख्यक शब्द को लेकर संघीय ढांचे में संघ के राज्यों के विविध भौगोलिक परिवेश के अनुकूल यह तय किया जाय कि कहां कौन ‘अल्पसंख्यक’ माना जा सकता है! जिस ढंग से अल्पसंख्यक शब्द को आज परिभाषित किया गया है वो ‘हिन्दू समुदाय’ के लिए वाकई चिंताजनक है और हिन्दू सगठनों की चिंता बेजा नहीं है. आज अगर संघ प्रमुख जनसंख्या के इस असंतुलन पर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं तो उसके विविध पक्षों क समझने की जरुरत है.

हिंदुत्व विचारक

अजयकुमार पांडेय
राष्ट्रीय स्वमसेवक संघ

01/04/2017

सेक्युलर vs कम्युनल -2⃣

बड़े ही मज़े की बात है मेरे देश में..।।।

कुछ लोग भाजपा को कम्युनल कहती है क्योंकि वो भारत में Uniform CIVIL Code लाना चाहती है ...।।।

Uniform Civil Code का मतलब होता है किसी भी धर्म के लिए कोई भी अलग कानून नहीं...

तो मैं आज उन विद्वानों से पूछना चाहूंगा
जो भाजपा या संघ परिवार को कम्युनल कहती है...

अरे यूनिफार्म सिविल कोड से बड़ी क्या secularism आएगी देश में??

राम मंदिर बनाने के लिए आपको तकलीफ है कि देश के हिन्दू कम्युनल हो चुके है???
लेकिन यूनिफार्म सिविल कोड से आपके धर्म के निजी मामलो मर दखल होती है..?? आखिर क्यों ?

ये क्या लॉजिक है भाई ??
मतलब हिन्दुओ ने ही सेक्युलर होने का ठेका के रख है?

बाकी धर्म धर्म है...हिन्दू धर्म के कोई सिद्धांत नहीं??

इसीलिए हिन्दुओ को कम्युनल कहने से पहले खुद सेक्युलर हो जाओ...हिन्दू हमेशा से ही सेक्युलर रहा है...जिस दिन कम्युनल हो गया...तो मेरे हिसाब से पोलिस हटाने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी...

जय श्री राम

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