14/03/2021
*******खुदारा वाज़ आओ********
मर्दुद वसीम रिज़वी एक मोहरा है
देश अमन मोहब्बत एकता भाईचारा विरोधी ताक़तो का काम है फ़साद और झगड़े पैदा कर आपस में बांटना तोड़ना और राज करना
मेरे प्यारे दिल अज़ीज़ो मौजुदा सिहासी हालात को मद्देनज़र रखते हुए सब्र के साथ साथ अक़्ल ए सलीम अक़्ल ए सयूर से काम लें ऐसे लोगों को अपने मक़्शद में हर्गिज़ कामयाब न होने दें लिहाज़ा सुरत ए हाल तसव्वुर से भी मुख्तलिफ़ होगी
वसीम रिज़वी ने जो किया है, वो धार्मिक मर्यादा के परे है, पर उस किये का असली स्वरूप अभी सामने नहीं आया है, वसीम रिज़वी ने सिर्फ़ चिंगारी लगाई है, उस चिंगारी को आग में बदलने के लिए उसने हमसे और आपसे बिना कुछ कहे मदद मांगा है, जो हम उम्मीद से बढ़ कर उसे दे रहे हैं, ये पोस्ट उस चिंगारी को आग में बदलने से रोकने के लिए एक छोटी सी कोशिश है।
सुप्रीम कोर्ट में हर रोज़ कई PIL दाख़िल की जाती है, वसीम रिज़वी की PIL उसी कई PIL में से एक है, लेकिन बाक़ी PIL को छोड़ हम वसीम रिज़वी के PIL के पीछे पड़ गए है, पड़ना भी चाहिए आख़िर इतने वाहियात PIL को सुप्रीम कोर्ट ने एक्सेप्ट कैसे कर लिया है। हालांकि न्यायालय का धर्म मे हस्तक्षेप भारत के संविधान को काउंटर करता है पर चुकी देश का माहौल ऐसा है साथ मे चुनाव भी है, इसे देखते हुए न्यायालय का PIL एक्सेप्ट करना कोई बड़ी बात नहीं लग रही है।
ख़ैर, ऐसा लगता है, वसीम रिज़वी सरकार को लुभाने की कोशिश कर रहा है, ताकि उसपर लगे आरोपो से मोदी सरकार ख़त्म कर दे, उसके लिए उसने ऐसे मुद्दे पर PIL डाल हम आपसे मदद मांगी है, जिससे पूरे देश मे इस्लाम के अगेंस्ट माहौल बनाया जा सकता है। हम जितना उस मुद्दे में पड़ेंगे वसीम रिज़वी और उसके इरादे से बीजेपी को उतना ही फायदा होगा और बिला वजह का ये मुद्दा राजनीतिक गलियारे में घूमेगा जिसे पकड़ कर मेन स्ट्रीम मीडिया वाले टीवी डिबेट करवा कर अल्लाह के कलाम की सरेआम बेहुरमती करेंगे।
एक और बात ग़ौर ओ फ़िक्र कर समझने वाली है, क़ुरान की जिस आयात को पकड़ कर, सुन्नी वहाबी शिया अलग अलग मतलब निकालते है, ग़ैर मुस्लिम उस क़ुरान की कुछ आयतों को कैसे बिना तफ़्सीर के समझ पाएंगे, इसे समझने के लिए क़ुरान की सूरः बकरा आयात नंबर 26 (क़ुरान को पढ़ कर कुछ लोग हिदायत पाएंगे और क़ुरान को पढ़ कर कुछ लोग ग़ुमराह हो जाएंगे) पढ़िए।
वसीम रिज़वी मरदूद है, उसपर जितनी नालत भेजी जाए कम है, पर ऐसा कोई काम हमें नहीं करना है, जिसकी वजह से उस चिंगारी में आग लगे, वरना उसमे घी डालने वालों की कमी नहीं है, फिर आप उस मुद्दे को संभाल नहीं पाएंगे, हज़ार बिना पढ़े, सर पैर के जाहिलाना सवाल होंगे, जिसका जवाब तो होगा लेकिन जाहिलों को कौन सी बात समझ आती है और थेथरलोजी का कोई जवाब नहीं होता है, ये हम आप सभी जानते हैं।
अब ये आप की मर्ज़ी है, चाहें तो वसीम रिज़वी के साथ हो जाइए या अल्लाह के कलाम पर यकीन रखिये, जिसमे उसने क़ुरान की हिफाज़त का ज़िम्मा ख़ुद लिया है।