03/07/2025
कई राज्य अब अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए अंग्रेज़ी के साथ-साथ अपनी स्थानीय भाषाओं को अपनाने पर ज़ोर दे रहे हैं। इसके चलते हिंदी को धीरे-धीरे दरकिनार किया जा रहा है। ऐसा विशेष रूप से उन राज्यों में देखा जा रहा है जहाँ बीजेपी सत्ता में नहीं है। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एमएनएस और उसके गुंडों द्वारा, जिन्हें विपक्षी दलों का भी समर्थन प्राप्त है, एक अराजकता की स्थिति पैदा की जा रही है ताकि बीजेपी सरकार को अस्थिर किया जा सके। संस्कृति की रक्षा के नाम पर यह एक 'फूट डालो और राज करो' की रणनीति है।
हमारे देश में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं—जिन्हें हम "Urban Naxal" और "गद्दार" के रूप में जानते हैं—जो देश की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। आज वे भाषाई स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं, कल सांस्कृतिक स्वतंत्रता की बात करेंगे, और परसों पूर्ण स्वतंत्रता की। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा देश "विविधता में एकता" की भावना से बना है। यही हमारी सदियों पुरानी पहचान है, और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत भी।
हमारे इतिहासहमारे इतिहासकारों ने हिंदी के बारे में बहुत अच्छी बातें कही हैं | कुछ ने इसे "जन-गण-मन की अभिलाषा" कहा है, तो कुछ ने "अपनी संस्कृति का आराधन"। कुछ कवियों ने इसे "माँ के आँचल की छाया" और "अपने गंधित शब्द सुमन" के रूप में भी व्यक्त किया है।