09/04/2017
हिन्दी माध्यम में असफलता का कारण क्या?
जबकि वर्तमान पाठ्यक्रम व प्रश्न 100 प्रतिशत मानवीय विषयों पर आधारित हैं तथा इन विषयों पर हिन्दी माध्यम में आई.ए.एस. के क्षेत्र में विद्वानों की कमी नहीं है।
जिम्मेदार कौन?
परीक्षार्थी स्वयं,कोचिंग संस्थाएं व उनके सर,स्टडी मैटेरियल व क्लास नोट्स
पत्र-पत्रिकाएं व पुस्तकें
सभी जिम्मेदार हैं क्योंकि,
•परीक्षार्थी अपना स्वयं का आकलन किए बगैर परीक्षा की तैयारी में लग जाते हैं।
•कोचिंग संस्थाएं जो फाउण्डेशन कोर्स के नाम पर लाखों रूपये और परीक्षार्थियों का 18 से 24 महीने का समय बरबाद करते हैं । अंततः उन्हें एस.एस.सी. सामान्य अध्ययन स्तर की तैयारी करा कर उनके भाग्य पर छोड़ देते हैं।
•उनके सर, जो वर्तमान संदर्भ में स्वयं को नहीं ढाल पा रहे हैं और आज भी 2011 से पूर्व के पैटर्न पर ही पढ़ा रहे हैं, जबकि सभी सक्षम हैं और परीक्षा की जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं।
•पाठ्य सामग्री, प्रायः सभी कोंचिंग संस्थान स्टडी मैटेरियल, क्लास नोट्स आदि अपने विद्यार्थियों को उपलब्ध कराते हैं, परन्तु इनमें नयापन नहीं है। पूर्व में प्रकाशन संस्थानों द्वारा छापे गए गाइड प्रकार की सामग्रियों का ही नोट्स के रूप में प्रस्तुति है जो 2011 से पहले अपनी उपयोगिता खो चुकी हैं।
•पत्र-पत्रिकाएं और पुस्तकें, जो 2011 के बाद के पाठ्यक्रम, प्रश्नों की प्रकृति आदि में जो परिवर्तन हुए उनके अनुसार इनमें व्यापक परिवर्तन नहीं ला पायें तथा पूर्व की भांति ही खबरों, विषयों को प्रस्तुत करते रहे।
•चुकीं सभी जिम्मेदार है तो सभी को बदलना पड़ेगा। सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
•हमारे आंदोलन करने से या आंदोलन का समर्थन करने से UPSC अपने आप को नहीं बदलेगा, वे अपना स्तर वर्तमान हिन्दी माध्यम के छात्रों के लिए नीचे नहीं करेगा परंतु हमें अपने आप को UPSC के स्तर पर ले जाना होगा।
गलती कहां हुई?
पहली गलती,
•कोचिंग संस्थान के प्रबंधकों से, जो परीक्षार्थी की योग्यता को परखे बगैर उन्हें परीक्षा के लिए प्रोत्साहित कर एडमिशन ले लेते हैं।
दूसरी गलती,
• छात्र, जो इस नाम पर इस परीक्षा की तैयारी करने चले आते हैं कि उनका कोई दोस्त, परिवार के सदस्यों की इच्छा है कि वो आईएएस बने।
तीसरी गलती,
•माननीय सर लोगों की पढ़ाने के तरीके पर, चूंकि वर्तमान में प्रश्न उन क्षेत्रों से आ रहे हैं, जो व्यावहारिक हैं और समाज, अर्थव्यवस्था, मानवीय जीवन, भारत की संप्रभुता व उसकी अंतरराष्ट्रीय भूमिका, योगदान पर परंपरागत समझ के साथ समकालीन संदर्भ में होते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर में छात्रों से विषय की व्यापक समझ के साथ विश्लेषण करने की क्षमताओं का आंकलन किया जाता है।
•इसलिए सभी पक्षों को अपने पढ़ने-पढ़ाने के तरीके में व्यापक परिवर्तन लाना होगा। जो पांच सौ या एक हजार की संख्या वाले क्लास में संभव नहीं है। अतः परंपरागत तरीके यानि नोट्स लिखवाने से माक्र्स नहीं आएंगे या ज्यादा से ज्यादा प्रारंभिक परीक्षा पास किया जा सकता है। सफलता नहीं मिलेगीं।
चौथी गलती,
• हर उस व्यक्ति को जो शिक्षा को व्यवसाय मान बैठा है और छात्रों को एक प्रोडक्ट, वह यह भूल गया है, कि शिक्षा एक सेवा है ना कि व्यवसाय।
पांचवीं गलती
•छात्रों की, जो सिर्फ साक्षात्कार, विज्ञापन और संस्थानों के बहकावे में आकर बिना जांच-पड़ताल के किसी भी संस्थान में जाकर एडमिशन ले लेते हैं।
सुधार की जरूरत कहां?
•स्वयं की क्षमताओं का आकलन एवं परीक्षा की तैयारी के सही समय का चयन ।
•पाठ्य पुस्तकों व पाठ्य सामग्री का चयन व कोचिंग संस्थान के चयन में सावधानी ।
•सेल्फ स्टडी के माध्यम से तैयारी की रूपरेखा, अनावश्यक के सुझावों से दूरी बनाना ।
•क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है, इसका आकलन ।
•परीक्षा केन्द्रित होकर तैयारी की रणनीति यानि आई.ए.एस. या पी.सी.एस. की जरूरतों के अनुसार ।
•अपने अंदर विषयों को तार्किक रूप से समझने की क्षमता का विकास ।
•सहपाठियों व मार्गदर्शक का सोच-समझ कर चयन ।
•ऑनलाइन साइट, सामग्री व सोशल मीडिया के इस्तेमाल और जरूरतों को समझना।
•टेस्ट सीरीज, उत्तर लेखन शैली, निबध्ं लेखन कला आदि की तैयारी और समय का निधार्रण अनावश्यक के दबाव से बचना।
•10 + 2, स्नातक स्तर , नौकरी करते हुए, पार्ट टाइम, डिस्टेंस स्तर से तैयारी की रणनीति।
•इंजीनियरिंग व अन्य प्रोफेशनल की तुलना में तैयारी की रणनीति।
•अच्छे कॉलेज, संस्थान या सामान्य कॉलेज, संस्थान से पढ़े होने पर तैयारी की रणनीति ।
•स्थान यानि शहर के चयन की रणनीति ।
•अपनी कमियों की पहचान कर लक्ष्य को निर्धारित कर टाइम टेबल तैयार करना तथा समय की कीमत को समझना और उसके अनुसार क्लास, स्टडी मैटेरियल आदि को पढ़ने में तालमेल बैठाना।
•परीक्षा से पूर्व व बेसिक तैयारी की समाप्ति के बाद की रणनीति।
•न्यूज पेपर, पत्रिका, करेंट अफेयर्स आदि का चयन, उनके पढ़ने के तरीके व स्वयं के नोट्स बनाने की रणनीति ।