Ashish Kumar Pandey

Ashish Kumar Pandey Born to simplify the complicated. To create the best versions of future technologies. To be kind to others and to me. However, Dashansh Technologies PVT. LTD.

To improve lives through food security & healthcare. To help as many as possible as much as possible for as long as possible. Getting into a 9-5 job was as limited an idea for me as a frenetic adventurer hence I choose entrepreneurship and founded the social enterprise "Dashansh Group"

Dashansh Group works for the welfare of society. For this, it creates a network of social good, technology and e

ncouraging connection between all the sections of the society through its three wings Foundation, Technologies & Social Helpline. Dashansh Foundation and its operations are envisioned on the same theme as of the SDGs of the United Nations. develops IT infrastructure with Research & Development, for operations, organisational structure, marketing and strategies for transparent functionings, promoting socio-cultural, economic and government schemes & activities, and Dashansh Social Helpline, a News, Infotainment & Media Publications House exploring India, outsourcing and exchanging "knowledge & information", through social media and other mediums.

01/07/2022

SC : एजी! गाली दे रहा है...!

कह रहा है, और जज साहब की .

29/06/2022

देश में हर साल 50000 से ज़्यादा मौतें सर्प दंश से होती हैं जहां सिर्फ बिहार में 4500 मौतें सर्पदंश से हो रही हैं. मगर सच यह है कि इन में से अधिकतम को बचाया जा सकता है इसके लिए समुचित उपचार की आवश्यकता है न कि किसी प्रकार के झाड़ फूंक की.

इसी सिलसिले में जीवन जागृति सोसायटी द्वारा सर्पदंश जागरूकता अभियान एवं बटेश्वर स्थान पर डूबने से बचाने की मुहिम चलाई गई. इस अभियान की शुरुआत कहलगांव एवं पीरपैंती प्रखंड से हुई है. एस डी ओ मधुकांत कुमार एवं प्रखंड विकास अधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति में इस अभियान की शुरुआत हुई.

20/07/2021
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान का एक लड़का अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार के लिए पंक्ति में खड़ा था।यह फोटो लेने वाले फ...
17/07/2021

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान का एक लड़का अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार के लिए पंक्ति में खड़ा था।

यह फोटो लेने वाले फोटोग्राफर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बच्चा स्वयं को रोने से रोकने के लिए अपने होठों को इतनी जोर से दबाये हुए था कि उसके होठो से खून निकलकर नीचे गिरने लगा था।

जब शमशान का रखवाला उसका नंबर आने पर कहता है कि "जो बोझा तुमने अपनी पीठ पर ढों रखा है वह मुझे दे दो" तो बच्चा कहता है "यह बोझा नही मेरा भाई है" ओर कहते हुए वहां से निकल जाता है।

जापान में आज भी यह तस्वीर शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

07/07/2021
Gender Equality Is a Myth.!!
07/07/2021

Gender Equality Is a Myth.!!

बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये । वे बड़े ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने...
26/06/2021

बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये ।

वे बड़े ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे।

राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।

जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था।

राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे ।

राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो ।

“ आदमी ने ऐसा ही किया।

इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ
गया जिससे वो उड़ा था।

ये देख ,राजा को कुछ अजीब लगा.“ क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”,राजा ने सवाल किया।

” जी हुजूर ,इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं।”

राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे और वो अपने दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ना देखना चाहते थे।

अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा।

फिर क्या था , एक से एक विद्वान् आये और बाज
को उड़ाने का प्रयास करने लगे , पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता।

फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ , राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं। उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर
दिखाया था। वह व्यक्ति एक किसान था।

अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ। उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा , ” मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ , बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया।

“ “मालिक ! मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ , मैं ज्ञान
की ज्यादा बातें नहीं जानता , मैंने तो बस वो पेड़ की डाल ही काट दी जिसपर बैठने का बाज आदि हो चुका था और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा। “
.......

जीवन में ऊपर उड़ने के लिए तमाम तरह के अवगुणों का डाल काटना अनिवार्य है।अपनी कमियों या कमजोरियों को दुरुस्त किए बग़ैर जीवन में ऊँचाई की कल्पना भी बेमानी है........

मंज़िलें उन्हीं को मिलती है
जिनके सपनों में जान होती है...
पंखों से कुछ नहीं होता
हौसलों से उड़ान होती है...!!

25/06/2021

रामायण में कथा आती है कि एक बार भगवान राम और लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे। उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ दिए। जब वे स्नान करके बाहर निकले तो लक्ष्मण ने देखा की उनकी धनुष की नोक पर रक्त लगा हुआ था, उन्होंने भगवान राम से कहा -" भ्राता ! लगता है कि अनजाने में कोई हिंसा हो गई ।"

दोनों ने मिटटी हटाकर देखा तो पता चला कि वहां एक मेढ़क मरणासन्न पड़ा है ।

भगवान् राम ने करुणावश मेंढक से कहा- " तुमने आवाज क्यों नहीं दी? कुछ हलचल, छटपटाहट तो करनी थी, हम लोग तुम्हे बचा लेते। जब सांप पकड़ता है तब तुम खूब आवाज लगाते हो, धनुष लगा तो क्यों नहीं बोले?"

मेंढक बोला - प्रभु! जब सांप पकड़ता है तब मैं 'राम- राम' चिल्लाता हूँ, एक आशा और विश्वास की किरण होती है, प्रभु अवश्य पुकार सुनेंगे। पर आज देखा की साक्षात् भगवान् श्री राम स्वयं धनुष लगा रहे है तो किसे पुकारता ? आपके सिवा किसी का नाम याद नहीँ आया, बस इसे अपना सौभाग्य मानकर चुपचाप सहता रहा।"

सच्चे भक्त जीवन के हर क्षण को भगवान् का आशीर्वाद मानकर उसे स्वीकार करते हैं, सुख और दुःख प्रभु की ही कृपा और कोप का परिणाम तो हैं ।। सियावर रामचंद्र की जय🚩

समय मनुष्‍य के बने मार्गो के प्रति नहीं चलता, मनुष्‍य को समय के बने मार्ग प्रति चलना होता है। इसी को नियति कहते हैं। 🙏🙏
22/06/2021

समय मनुष्‍य के बने मार्गो के प्रति नहीं चलता, मनुष्‍य को समय के बने मार्ग प्रति चलना होता है। इसी को नियति कहते हैं।
🙏🙏

Address

At-Sadar Bazar, PO&PS-Jamalpur
Munger
811214

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ashish Kumar Pandey posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Ashish Kumar Pandey:

Share

Category