Jago jain jago

Jago jain jago campaign By :- जैन एकता मंच "युवा शाखा"

09/07/2026

07/07/2026

जैन धर्म की आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नही होगा

आज दिनांक 7 जुलाई 2026 को पूर्व निश्चित कार्यक्रम के अनुसार जैन समाज की धार्मिक आस्था एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को सौंपा गया 10 सूत्रीय ज्ञापन । ज्ञापन में कहा गया कि जैन समाज भारत की प्राचीनतम आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है, जिसने अहिंसा, सत्य, अनेकांतवाद और करुणा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान समय में जैन समाज की धार्मिक भावनाओं, संत परंपरा, तीर्थस्थलों एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़े अनेक विषय गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं।प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा दिगंबर जैन संतों की पवित्र मयूर पिच्छी को लेकर दिए गए आपत्तिजनक एवं तथ्यहीन वक्तव्य पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि वे बिना किसी शर्त के सार्वजनिक रूप से जैन समाज से क्षमा मांगें तथा अपना बयान वापस लें। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से जैन तीर्थस्थलों की सुरक्षा, जैन संतों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय एवं राज्य जैन कल्याण बोर्ड के गठन, जैन अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा, राष्ट्रीय जनगणना में जैन धर्म की पृथक पहचान, प्राचीन जैन धरोहरों के संरक्षण तथा जैन धर्म एवं धार्मिक प्रतीकों के अपमान पर त्वरित एवं प्रभावी कानूनी कार्रवाई सहित 10 प्रमुख मांगों को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया गया।

30/06/2026

जैन संतों का सम्मान, देश का सम्मान।

26/06/2026

सकल जैन समाज ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जैन समाज के स्वाभिमान और धार्मिक आस्था का प्रश्न है।

हमारी मांग सरल और न्यायसंगत है—मेनका गांधी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और अपना बयान वापस लें।

संतों का सम्मान, धर्म का सम्मान और सत्य की रक्षा के लिए जैन समाज एकजुट है।

अब मौन नहीं, सम्मान की आवाज़ बुलंद होगी।

26/06/2026

जैन समाज किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि अपने धर्म, संत परंपरा और सम्मान का पक्ष रख रहा है।

उक्त वीडियो में मैंने स्पष्ट कहा है कि जैन संतों एवं पवित्र मयूर पिच्छी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी अस्वीकार्य है। हमारी मांग केवल इतनी है—सार्वजनिक माफी और बयान की वापसी।

यह आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अहिंसक रहेगा, लेकिन जैन समाज के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा।

 सकल जैन समाज करेगा आंदोलन, मेनका गांधी के बयान की सर्वसम्मति से कड़ी निंदामुज़फ्फरनगर, 25 जून 2026।गौरतलब है कि भाजपा न...
25/06/2026



सकल जैन समाज करेगा आंदोलन, मेनका गांधी के बयान की सर्वसम्मति से कड़ी निंदा

मुज़फ्फरनगर, 25 जून 2026।

गौरतलब है कि भाजपा नेता, पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा गत दिनों जैन संतों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने तथा संतों द्वारा प्रयोग की जाने वाली पवित्र मयूर पिच्छी के संबंध में दिए गए आपत्तिजनक एवं तथ्यहीन बयान से पूरे देश के जैन समाज में गहरा रोष व्याप्त है।

इसी विषय को लेकर दिनांक 25 जून 2026 को सायं 8:00 बजे जैन अतिथि भवन, मुज़फ्फरनगर में सकल जैन समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के विभिन्न संगठनों एवं प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

बैठक में मेनका गांधी द्वारा जैन संत परंपरा एवं पवित्र मयूर पिच्छी के संबंध में दिए गए आपत्तिजनक एवं तथ्यहीन बयान पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से उक्त बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया तथा मेनका गांधी से तत्काल सार्वजनिक रूप से जैन समाज से क्षमा याचना करने एवं अपना बयान वापस लेने की मांग की।

साथ ही बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जैन समाज के सम्मान, धार्मिक परंपराओं एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु "जैन सम्मान एवं अधिकार रक्षा अभियान" आंदोलन के रूप में संचालित किया जाएगा।

अभियान के प्रथम चरण में 30 जून 2026 को "राष्ट्रव्यापी सोशल मीडिया जनजागरण अभियान" चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत देशभर में एक्स (X), फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप एवं यूट्यूब सहित सभी सोशल मीडिया मंचों पर अभियान चलाया जाएगा। जैन संतों, समाज के प्रबुद्धजनों एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि वीडियो संदेश जारी कर जैन धर्म के संबंध में फैलाई जा रही भ्रांतियों का तथ्यात्मक उत्तर देंगे तथा मेनका गांधी के बयान की निंदा करेंगे।

अभियान के द्वितीय चरण में 07 जुलाई 2026 को प्रातः 9:00 बजे से 11:00 बजे तक देशभर के प्रमुख जैन मंदिरों एवं धर्मस्थलों के बाहर "राष्ट्रव्यापी जैन सम्मान मौन आंदोलन" आयोजित किया जाएगा। सभी प्रतिभागी हाथों पर काली पट्टी बांधकर जैन समाज के सम्मान एवं धार्मिक परंपराओं की रक्षा का संकल्प लेंगे। इस दौरान मेनका गांधी को सद्बुद्धि प्रदान करने तथा विश्व शांति की कामना से सामूहिक णमोकार मंत्र का जाप भी किया जाएगा।

इसी दिन मौन आंदोलन के उपरांत प्रातः 11:30 बजे सभी जिलों में जिला अधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को ज्ञापन प्रेषित किए जाएंगे। ज्ञापन में मेनका गांधी से सार्वजनिक माफी, बयान वापसी तथा जैन धर्म एवं जैन संत परंपरा के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इन तीनों चरणों के पूर्ण होने के पश्चात सकल जैन समाज की पुनः बैठक आयोजित कर आंदोलन की समीक्षा की जाएगी तथा आवश्यकता अनुसार आगामी रणनीति एवं आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।

सकल जैन समाज ने सभी समाजजनों से इस अभियान में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं अहिंसक तरीके से अधिक से अधिक सहभागिता करने का आह्वान किया।

बैठक की अध्यक्षता संजय जैन "नावले वाले" ने तथा संचालन एडवोकेट निपुण जैन ने किया।

बैठक को मुख्य रूप से जैन एकता मंच (युवा शाखा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन, पंकज जैन (गांधी टेंट हाउस), प्रदीप जैन (कली वाले), रोहित जैन, नितिन जैन, प्रदीप जैन (चेतन मेडिकल), अमूल जैन,अनुज जैन,अमित जैन,प्रवीण जैन'चीनू' सहित अनेक गणमान्य समाजजनों ने संबोधित किया।

24/05/2026

रीवा में शांतिपूर्वक पैदल विहार कर रही जैन साध्वियों को अनियंत्रित कार द्वारा कुचलने की घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि संत समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। 🙏

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जहां-जहां भाजपा सरकारें हैं, वहां बार-बार साधु-संतों, साध्वियों और धर्मस्थलों से जुड़ी ऐसी दुखद घटनाएं क्यों सामने आती हैं?

आखिर क्यों संत समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है?
क्यों बार-बार अहिंसा और तप के मार्ग पर चलने वाले लोगों को ही निशाना बनने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है?

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को इस घटना पर सिर्फ औपचारिक बयान नहीं, बल्कि ठोस और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री मोहन यादव , एवं गृह विभाग को तत्काल:
👉 निष्पक्ष जांच
👉 दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी
👉 संत-साध्वियों की सुरक्षा के लिए विशेष नीति
👉 पैदल विहार मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था

सुनिश्चित करनी चाहिए।

जैन समाज अब सिर्फ संवेदना नहीं, सुरक्षा और न्याय चाहता है।

के.सी. जैन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष नियुक्त हुए जैन समाज के न्याय की लड़ाई लड़ने को कटिबद्ध जैन एकता मंच - गौरव जैनजैन एकता म...
06/01/2026

के.सी. जैन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष नियुक्त हुए

जैन समाज के न्याय की लड़ाई लड़ने को कटिबद्ध जैन एकता मंच - गौरव जैन

जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) द्वारा संगठनात्मक विस्तार, युवाओं की सक्रिय भागीदारी तथा जैन समाज की एकता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से युवा शाखा में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जा रहे हैं । केंद्रीय नेतृत्व के सर्वसम्मत निर्णय के अनुसार जैन समाज के वरिष्ठ, अनुभवी एवं समर्पित व्यक्तित्व इंदौर निवासी डाँ के.सी. जैन को संगठन में मध्यप्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। डाँ के.सी. जैन, निवासी इंदौर (मध्यप्रदेश), अपने सामाजिक अनुभव, संगठनात्मक दक्षता एवं दूरदर्शी सोच के लिए जाने जाते हैं। संगठन को विश्वास है कि उनके मार्गदर्शन में युवा शाखा को नई दिशा, ऊर्जा एवं मजबूती प्राप्त होगी तथा जैन समाज से जुड़े धार्मिक, सामाजिक एवं समसामयिक विषयों पर प्रभावी कार्य किया जा सकेगा।
वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में युवाओं की संगठित, सजग एवं सकारात्मक भूमिका अत्यंत आवश्यक है। डाँ के.सी. जैन के नेतृत्व व संरक्षण में युवा शाखा द्वारा युवाओं को संगठन से जोड़ने, सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने, शिक्षा-रोजगार, सामाजिक न्याय, सुरक्षा एवं जैन समाज से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल की जाएगी।
जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) को पूर्ण विश्वास है कि डाँ के.सी. जैन अपने अनुभव, ऊर्जा एवं नेतृत्व क्षमता के बल पर संगठन की नीतियों व उद्देश्यों को जमीनी स्तर तक पहुँचाते हुए युवा शाखा को एक सशक्त मंच के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही समाज में आपसी एकता, भाईचारा एवं समरसता को बढ़ावा मिलेगा।
संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं समाजजनों ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की है कि उनके मार्गदर्शन में युवा शाखा नए आयाम स्थापित करेगी और जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) के सामाजिक उद्देश्यों को नई गति प्राप्त होगी।
युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन ने बताया कि जैन एकता मंच के संस्थापक व श्रद्धेय राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. श्री सतीश जैन जी के देवलोक गमन के पश्चात संगठन के कार्य में कुछ शिथिलता आ गई थी, परंतु इस असीम दुःख से उभरते हुए अब सभी साथीगण द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि संगठन के कार्यों को पुनः गति प्रदान करते हुए समीक्षा व स्कूटनी कर शीघ्र ही समस्त संगठन के गठन का कार्य पूर्ण किया जाएगा। जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) सदैव की भांति जैन समाज की धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ लड़ने के लिए कटिबद्ध रहेगा।

युवा शाखा को मजबूती देने हेतु जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) द्वारा महत्वपूर्ण नियुक्तियाँजैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.)...
18/12/2025

युवा शाखा को मजबूती देने हेतु जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) द्वारा महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ

जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) द्वारा संगठनात्मक विस्तार, युवाओं की सक्रिय भागीदारी तथा जैन समाज की एकता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से युवा शाखा में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं। केंद्रीय नेतृत्व के सर्वसम्मत निर्णय के अनुसार युवा शाखा के लिए दो प्रमुख प्रदेशों में कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है।
इस क्रम में श्री उमंग जैन, निवासी मुम्बई, महाराष्ट्र को महाराष्ट्र प्रदेश का तथा श्री भाग्येश जैन, निवासी सिवाई माधोपुर, राजस्थान को राजस्थान प्रदेश का युवा शाखा, जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) का कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
संगठन का मानना है कि वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में युवाओं की संगठित, सजग एवं सकारात्मक भूमिका अत्यंत आवश्यक है। नव नियुक्त पदाधिकारी अपने-अपने प्रदेशों में युवाओं को संगठन से जोड़ने, सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने, शिक्षा-रोजगार, सामाजिक न्याय, सुरक्षा एवं जैन समाज से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर प्रभावी पहल करने का कार्य करेंगे।
जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) को विश्वास है कि श्री उमंग जैन एवं श्री भाग्येश जैन अपने अनुभव, ऊर्जा एवं नेतृत्व क्षमता के बल पर संगठन की नीतियों व उद्देश्यों को जमीनी स्तर तक पहुँचाते हुए युवा शाखा को एक सशक्त मंच के रूप में स्थापित करेंगे। साथ ही वे समाज में आपसी एकता, भाईचारा एवं समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं समाजजनों ने दोनों नियुक्तियों का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की है कि उनके नेतृत्व में युवा शाखा नए आयाम स्थापित करेगी और जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.) के सामाजिक उद्देश्यों को नई गति प्राप्त होगी।
युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन ने बताया कि जैन एकता मंच के संस्थापक व श्रद्धेय राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. श्री सतीश जैन जी के देवलोक गमन के पश्चात संगठन के कार्य में कुछ शिथिलता आ गयी थी परंतु इस असीम दुःख से उभरते हुए अब सभी साथीगण द्वारा निर्णय लिया गया है कि कार्य को गति प्रदान करते हुए संगठन की समीक्षा व स्कूटनी कर शीघ्र ही समस्त संगठन के गठन का कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा व जैन एकता मंच,राष्ट्रीय सदैव की भांति जैन समाज की धार्मिक-सामाजिक व राजनैतिक लड़ाई को लड़ने के लिये सदैव की भांति कटिबद्ध है ।

— जारीकर्ता —
गौरव कुमार जैन
राष्ट्रीय अध्यक्ष, युवा शाखा,जैन एकता मंच, राष्ट्रीय (रजि.)

दिनांक :- 18/12/2025

डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म को अलग कॉलम न देना ऐतिहासिक भूल होगी — गौरव जैनभारत सरकार द्वारा वर्ष 2027 में पहली बार ...
13/12/2025

डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म को अलग कॉलम न देना ऐतिहासिक भूल होगी — गौरव जैन

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2027 में पहली बार पूर्णतः डिजिटल जनगणना कराने के निर्णय लिया गया है जिस पर जैन एकता मंच,राष्ट्रीय(रजि.) के युवा शाखा राष्ट्रीय अध्यक्ष व सपा नेता गौरव जैन ने स्पष्ट कहा है कि यह प्रक्रिया तभी सार्थक होगी जब उसमें जैन धर्म को एक स्वतंत्र धार्मिक पहचान के रूप में अलग कॉलम प्रदान किया जाए।

गौरव जैन ने कहा कि जैन धर्म भारत की धरती पर जन्मा विश्व का प्राचीनतम जीवंत धर्म है, जिसकी अपनी स्वतंत्र दर्शन-परंपरा, आचार-संहिता, साधु-संत परंपरा, मंदिर व्यवस्था, तीर्थ, धार्मिक ग्रंथ और सामाजिक संरचना है। इसके बावजूद अब तक की जनगणनाओं में जैन समाज को कभी ‘अन्य’ श्रेणी में, तो कभी मिश्रित रूप से दर्शाया गया, जिससे जैन समाज की वास्तविक जनसंख्या,सामाजिक ज़रूरतें,नीति-निर्माण साथ ही सामाजिक-धार्मिक व राजनैतिक अधिकार भी प्रभावित हुए है।

उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और पहचान के अधिकार के अंतर्गत जैन धर्म को अलग कॉलम देना सरकार की जिम्मेदारी है। डिजिटल जनगणना पारदर्शिता और सटीकता की बात करती है, तो फिर जैन समाज की सटीक गिनती से परहेज़ क्यों?

गौरव जैन ने यह भी कहा कि जैन समाज देश के आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक और नैतिक विकास में सदैव अग्रणी रहा है। बावजूद इसके, यदि जनगणना में सही आंकड़े ही दर्ज नहीं होंगे तो समाज से जुड़े योजनात्मक निर्णय कैसे न्यायसंगत होंगे।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जनगणना 2027 के धर्म कॉलम में “जैन” को स्पष्ट, स्वतंत्र और पृथक विकल्प के रूप में शामिल किया जाए, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के साथ कोई ऐतिहासिक अन्याय न हो।

अंत में उन्होंने कहा कि यह मांग किसी से टकराव की नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार, ऐतिहासिक सत्य और सामाजिक न्याय की है, और जैन समाज इस विषय पर एकजुट होकर शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आवाज़ उठाता रहेगा।

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