21/08/2025
भारत की सामरिक ताकत का नया अध्याय: अग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण :
भारत ने एक बार फिर अपनी रक्षा क्षमता का लोहा दुनिया को मनवा दिया है। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में देश की पहली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया गया। यह उपलब्धि न सिर्फ भारत की रक्षा नीति को मजबूत करती है, बल्कि एशिया और विश्व में शक्ति संतुलन के नए आयाम भी स्थापित करती है।
अग्नि-5 मिसाइल 5,000–5,500 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखने वाली अत्याधुनिक ICBM है।
MIRV टेक्नोलॉजी (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) से लैस, यह एक ही बार में अलग-अलग लक्ष्यों को नष्ट करने की क्षमता रखती है।
पाकिस्तान का लगभग हर कोना भारत की छोटी मिसाइलों की रेंज में है, लेकिन अग्नि-5 चीन सहित एशिया के बड़े हिस्से तक पहुंच बनाने में सक्षम है।
इसका संचालन थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों स्तरों पर सामरिक संतुलन देता है, जिससे भारत किसी भी चुनौती का पलटवार करने की क्षमता हासिल करता है।
अग्नि-5 का विकास पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने किया है।
19 अप्रैल 2012 को ओडिशा के व्हीलर आइलैंड (अब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप) से इसका पहला सफल परीक्षण किया गया।
इसके बाद कई चरणों में उड़ान परीक्षण हुए, जिनमें जनवरी 2018 का कैनिस्टर-बेस्ड परीक्षण ऐतिहासिक साबित हुआ।
वर्ष 2018 में इसे भारतीय परमाणु कमान प्राधिकरण (NCA) के अधीन सामरिक बल कमान (SFC) में शामिल कर लिया गया।
अग्नि-5 का सफल परीक्षण केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूती देने वाला कदम है।
यह मिसाइल भारत को Credible Minimum Deterrence (विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता) की दिशा में मजबूत करती है।
पड़ोसी देशों विशेषकर चीन और पाकिस्तान के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है।
सामरिक स्तर पर यह भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करता है, जिनके पास 5,000 किमी से अधिक दूरी तक मारक क्षमता वाली मिसाइल है।
थल, जल और नभ तीनों ही मोर्चों पर भारतीय सेना तेजी से मजबूत हो रही है।
थल सेना की आर्टिलरी और मिसाइल सिस्टम,
वायु सेना के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम,
भारतीय नौसेना की न्यूक्लियर पनडुब्बियां और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता,
इन सबके बीच अग्नि-5 भारत की सामरिक क्षमता को नए आयाम तक पहुंचाती है।
अग्नि-5 का सफल परीक्षण केवल एक रक्षा परियोजना की उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का सशक्त उदाहरण है। यह मिसाइल आने वाले समय में भारत की रक्षा ढाल ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक भी बनेगी।
भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है:
हम शांति के पक्षधर हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे।