04/09/2026
बड़ा सवाल! दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल करने वाली पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित मारपीट के आरोपों ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा और सवाल पूछने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें दिल्ली पुलिस की ओर से हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। घटना को लेकर सामने आए वीडियो और चोटों के दावों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूरे मामले में आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर कोई पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल पूछता है, सरकार से जवाब मांगता है या किसी सार्वजनिक मुद्दे पर सवाल उठाता है, तो क्या उसके साथ दुर्व्यवहार या मारपीट स्वीकार की जा सकती है?
लोकतंत्र में पत्रकारों का काम ही सवाल पूछना और जनता के मुद्दों को सामने रखना है। सत्ता किसी भी दल की हो, पत्रकारों को सवाल पूछने की स्वतंत्रता और सुरक्षा मिलनी चाहिए। वहीं पुलिस और प्रशासन पर भी कानून के मुताबिक निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होती है।
अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी अधिकारी ने कानून के खिलाफ जाकर पत्रकारों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार किया, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। और यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो जांच के निष्कर्ष भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने चाहिए।
यह मामला किसी एक व्यक्ति या दल का नहीं, बल्कि पत्रकारिता, कानून और नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े सवाल का है।
140 करोड़ जनता से सीधा सवाल—क्या आप मानते हैं कि पत्रकारों को बिना डर सवाल पूछने का अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए?
YES — हाँ
NO — नहीं
अपनी राय कमेंट में लिखें और असहमति होने पर भी दूसरे पक्ष की बात का सम्मान करें।