अरिहन्त आज्ञा

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Matunga ke Raja Vasu pujya Dada
28/08/2026

Matunga ke Raja Vasu pujya Dada

आज के दर्शन देवाधिदेव, तीन लोक के नाथ 68 तीर्थं के फलदाता श्री फलवृद्धि पार्श्वनाथ दादा, मेड़ता रोड़, नागौर
28/08/2026

आज के दर्शन
देवाधिदेव, तीन लोक के नाथ 68 तीर्थं के फलदाता श्री फलवृद्धि पार्श्वनाथ दादा,
मेड़ता रोड़, नागौर

*सूरजमंडन पार्श्वनाथ – सूरत*  - सूरत शहर के गोपीपुरा विभाग में  _”हाथीवाला जिनालय”_ के नाम से प्रख्यात श्री  _धर्मनाथजी ...
27/08/2026

*सूरजमंडन पार्श्वनाथ – सूरत*

- सूरत शहर के गोपीपुरा विभाग में _”हाथीवाला जिनालय”_ के नाम से प्रख्यात श्री _धर्मनाथजी के मंदिर_ में भोयारे में _श्री सूरज मंडन पार्श्वनाथ_ प्रभु बिराजमान है|

- सम्राट अकबर के जीवन-परिवर्तन में महत्त्व का भाग भजनेवाले श्री शान्तिचन्द्र उपाध्याय के शिष्य रत्नचन्द्र गणी के वरद हस्तो से संवत् १६७९ कार्तिक वदी ५ के शुभ दिन गुरूवार को पुनर्वसु नक्षत्र में इस प्रतिमा की प्रतिष्ठा संपन्न हुई है !

*- इस प्रतिमा के अलौकिक रूप और लोकोत्तर प्रभाव को देखकर श्री शांतिदास शेठ ने इसी प्रभु प्रतिमा के सामने “चिंतामणी मंत्र” की आराधना संपन्न की थी|*

- नौ फनो युक्त यह प्रतिमा ६१ इंच ऊँची है, जिनके दर्शन-वंदन व पूजन से आत्मानंद हुए बिना नहीं रहती है|

उवसग्गहरम स्तोत्र की रचनाश्रीभद्रबाहुप्रसादात् एष योग: पफलतु’उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कंविसहर-विस-णिण्णासं...
24/08/2026

उवसग्गहरम स्तोत्र की रचना

श्रीभद्रबाहुप्रसादात् एष योग: पफलतु’

उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं
विसहर-विस-णिण्णासं मंगल कल्लाण आवासं ।१।

अर्थ-प्रगाढ़ कर्म-समूह से सर्वथा मुक्त, विषधरो के विष को नाश करने वाले, मंगल और कल्याण के आवास तथा उपसर्गों को हरने वाले भगवान् पार्श्वनाथ की मैं वन्दना करता हूँ।

विसहर-फुल्लिंगमंतं कंठे धारेदि जो सया मणुवो
तस्स गह रोग मारी, दुट्ठ जरा जंति उवसामं ।२।

अर्थ-विष को हरने वाले इस मंत्रारूपी स्पुफलिंग (ज्योतिपुंज) को जो मनुष्य सदैव अपने कंठ में धारण करता है, उस व्यक्ति के दुष्ट ग्रह, रोग, बीमारी, दुष्ट शत्रु एवं बुढ़ापे के दु:ख शांत हो जाते हैं।

चिट्ठदु दूरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहुफलो होदि
णर तिरियेसु वि जीवा, पावंति ण दुक्ख-दोगच्चं ।३।

अर्थ-हे भगवन्! आपके इस विषहर मंत्रा की बात तो दूर रहे, मात्रा आपको प्रणाम करना भी बहुत फल देने वाला होता है। उससे मनुष्य और तिर्यंच गतियों में रहने वाले जीव भी दु:ख और दुर्गति को प्राप्त नहीं करते हैं।

तुह सम्मत्ते लद्धे चिंतामणि कप्प-पायव-सरिसे
पावंति अविग्घेणं जीवा अयरामरं ठाणं ।४।

अर्थ-वे व्यक्ति आपको भलिभाँति प्राप्त करने पर, मानो चिंतामणि और कल्पवृक्ष को पा लेते हैं, और वे जीव बिना किसी विघ्न के अजर, अमर पद मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

इह संथुदो महायस भत्तिब्भरेण हिदयेण
ता देव! दिज्ज बोहिं, भवे-भवे पास जिणचंदं ।५।

अर्थ-हे महान् यशस्वी ! मैं इस लोक में भक्ति से भरे हुए हृदय से आपकी स्तुति करता हूँ। हे देव! जिनचन्द्र पार्श्वनाथ ! आप मुझे प्रत्येक भव में बोधि (रत्नत्रय) प्रदान करें।
ओं अमरतरु-कामधेणु-चिंतामणि-कामवुंफभमादिया।

ॐ, अमरतरु, कामधेणु, चिंतामणि, कामकुंभमादिया
सिरि पासणाह सेवाग्गहणे सव्वे वि दासत्तं ।६।

अर्थ-श्री पार्श्वनाथ भगवान् की सेवा ग्रहण कर लेने पर ओम्, कल्पवृक्ष, कामधेनु, चिंतामणि रत्न, इच्छापूर्ति करने वाला कलश आदि सभी सुखप्रदाता कारण उस व्यक्ति के दासत्व को प्राप्त हो जाते हैं।

उवसग्गहरं त्थोत्तं कादूणं जेण संघ कल्लाणं
करुणायरेण विहिदं स भद्दबाहु गुरु जयदु ।७।

अर्थ-जिन करुणाकर आचार्य भद्रबाहु के द्वारा संघ के कल्याणकारक यह ‘उपसर्गहर स्तोत्र’ निर्मित किया गया है, वे गुरु भद्रबाहु सदा जयवन्त हों।

वराह मिहिर, जो मृत्यु के पश्चात व्यंतर बना था, उसके उपसर्ग को शांत करने के लिए आचार्य भद्रबाहु स्वामी उवसग्गहरम स्तोत्र की रचना की।

रचनाकार: आ. श्री जिनहर्षसूरि महाराजअंतरजामी सुण अलवेसर, महिमा त्रिजग तुमारो;सांभळीने आव्यो हुं तीरे, जन्म मरण दुःख वारो....
24/08/2026

रचनाकार: आ. श्री जिनहर्षसूरि महाराज

अंतरजामी सुण अलवेसर, महिमा त्रिजग तुमारो;

सांभळीने आव्यो हुं तीरे, जन्म मरण दुःख वारो.

सेवक अरज करे छे राज! अमने शिवसुख आपो;

आपो आपो ने महाराज! अमने मोक्ष सुख आपो

सेवक…१

सहु कोनां मन वांछित पूरो, चिंता सहुनी चूरो;

एवुं बिरुद छे राज! तुमारूं, किम राखो छो दूरे

सेवक…२

सेवकने वलवलतो देखी मनमां महेर न धरशो;

करुणासागर केम कहेवाशो, जो उपकार न करशो

सेवक…३

लटपटनुं हवे काम नहीं छे, प्रत्यक्ष दरिशन दीजे;

धुंवाडे धीज्युं नहीं साहिब, पेट पड्यां पतीजे

सेवक…४

श्री शंखेश्वर मंडन साहिब! विनतडी अवधारो;

कहे जिनहर्ष मया करी मुजने, भवसागरथी तारो

सेवक…५

*प्रभु नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक व निर्वाण महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ✨❤️🙏*
21/07/2026

*प्रभु नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक व निर्वाण महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ✨❤️🙏*

*ॐ ह्रीं अर्हम् श्री विघ्नहरण अंतरीक्ष पार्श्वनाथाय नमः**श्री अंतरीक्ष पार्श्वनाथ दादा के आज के  दर्शन*  20-07-2026*कल म...
20/07/2026

*ॐ ह्रीं अर्हम् श्री विघ्नहरण अंतरीक्ष पार्श्वनाथाय नमः*

*श्री अंतरीक्ष पार्श्वनाथ दादा के आज के दर्शन*
20-07-2026

*कल मंगलवार*
*तारीख 21-07-2026*
*श्री अंतरीक्ष पार्श्वनाथ दादा का पूजा का समय*
*सुबह 09:00 से 12:00*
*दोपहर 03:00 से 06:00*

*शाम को आंगी,दर्शन एवं आरती*
*08:00 से 10:00*

Aahwan
19/07/2026

Aahwan

गुणस्थान--1.श्रीखंड के समान स्वाद कौन से गुणस्थान का होता है ?  ३ रे सम्यग् मिथ्या दृष्टि  (मिश्र) गुणस्थान l2. साधू मेँ...
18/07/2026

गुणस्थान--
1.श्रीखंड के समान स्वाद कौन से गुणस्थान का होता है ?
३ रे सम्यग् मिथ्या दृष्टि (मिश्र) गुणस्थान l

2. साधू मेँ कितने गुणस्थान पाए जाते है ?
९ ,(६-१४) गुणस्थान l

3 .केवली के कितनेे गुणस्थान है ?
२, गुणस्थान (सयोगी केवली - अयोग केवली) l

4 सिद्ध भगवान मेँ कितने गुणस्थान पाए जाते हे ?
एक भी नहीँ l

5. तीर्थंकर कितने गुण स्थानोँ को स्पर्श नहीँ करते है.? कौन से ?
५ - १,२,३,५,११ इन गुनास्थानों को l

6. तीर्थंकर गोत्र किस गुणस्थान मेँ बंधता है ?
४- ८ गुणस्थान में l

7. नरक आयु कौनसे गुणस्थान मेँ बंधता है ?
पहले गुणस्थान में I

8. तिर्यंच आयु कौन से गुणस्थान मेँ बंधता है ?
दूसरे गुणस्थान में l

9 मनुष्य आयु का बंध कौन से गुणस्थान मेँ होता है ?
१,२,४ गुणस्थान में I

10. देव आयु का बंध कौनसे गुणस्थान तक होता है ?
१ से ७ तक (३ को छोडकर ) l

11. तीसरे गुणस्थान में आयु का बंध करने पर जीव कौन सी गति मे जाता है ?
तीसरे गुणस्थान मेँ आयु का बंध नहीँ होता है I

12. अभवी मे कितने और कौनसे गुणस्थान होते हेँ ?
१- पहला l

13. नपुसंक वेद का बंध कितने गुणस्थान तक होता है ?
पहले गुणस्थान तक l

14. स्त्रीवेद का बंध कितने गुणस्थान तक होता है ?
दूसरे गुणस्थान तक l

15 पुरुष वेेद का बंध कितने गुणस्थान तक होता है ?
९ वें गुणस्थान तक l

16 कौन से गुणस्थान वाले वितराग अवस्था में रहते हुए भी मोक्ष नहीँ जाते हे ?
११ वें गुणस्थान वाले l

17 निवृत्तिबादर गुणस्थान का दूसरा नाम क्या हे ?
अपूर्व करण गुणस्थान l

18.१२ वें गुणस्थान में कितने कर्मो की सत्ता रहती है ?
७ कर्मो की l

19 अमर गुणस्थान कितने और कौनसे ?
३- गुणस्थान ३,१२,१३

20 .अप्रतिपाती (अपडीवाई ) गुणस्थान कितने और कौनसे ?
३ गुणस्थान १२,१३,१४

21. वाटे बहता जीवों में कितने और कौनसे गुणस्थान पाए जाते हे ?
३ गुणस्थान १,२,४

22 कौन से गुण स्थान अपने स्थान से गिरते हें ?
२,७,११ गुणस्थान l

23. किस-किस गुणस्थान में आयु का बंध नहीँ होता हे ?
३ और ८-१४ गुणस्थान l

24 किस गुणस्थान में योग नहीं होता है ?
१४ वें गुणस्थान I

25 कौन से गुणस्थान में कषाय का उदय होता है पर बंध नहीँ होता है ?
१० वें गुणस्थान में I

26.कौन से गुण स्थान में कषाय का बंध ,उदय में नहीँ पर सत्ता में हे ?
११ वें गुणस्थान में I

27. जीव कौन से गुणस्थान में दो बारा नहीं जा सकता हे ?
१२,१३,१४,वें गुणस्थान में I

28. दूसरे गुणस्थान की उत्कृष्ट स्थिती कितनी है ?
6 आवलिका I

29. ४थें गुणस्थान प्राप्त जीव कितने बोलो का बंध नहीँ करता है ?
७ बोलों का l

30. ग्यारहवे गुणस्थान में काल करने वाला कहा जाता है ?
अनुत्तर विमान l

18/07/2026

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