03/09/2026
मनीषा और उर्मिला ने शायद कभी नहीं सोचा था कि हस्तकला उनके लिए सिर्फ एक हुनर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई पहचान बन जाएगी।
खींवसर फाउंडेशन ने उन्हें इस हुनर से जोड़ा, आगे बढ़ने का अवसर दिया और ऐसा मजबूत सहारा दिया, जिसने उनके सपनों को उड़ान दी।
आज वे पढ़ाई भी कर रही हैं, घर की जिम्मेदारियाँ भी निभा रही हैं और अपने हाथों की कला के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। उनके हुनर को देश दुनिया तक पहचान मिल रही है।
आखिर वह कौन सा अवसर था, जिसने उनके भीतर के आत्मविश्वास को जगा दिया और जिंदगी को एक नई राह दिखा दी?
जानिए मनीषा और उर्मिला की प्रेरक कहानी, उन्हीं की जुबानी...