22/03/2017
Vastu Consaltant.
वास्तु बताता है कि आप किस रोग से और क्यों पीढित है ........
1..ईशान कोण ..भवन के ईशान कोण मे भारी निर्माण तथा शौचालय बनाने से अनिनद्रा , मानसिक रोग ,तनाव ,चिङचिङा पन ,एवं शरीर निरन्तर रोगी बने रहने लगता है ।
2..आग्नेय कोण..भवन मे आग्नेय कोण का विस्तार ,सोने से,या द्वार होने पर मानसिक तनाव ,उच्च रक्तताप ,आदि गम्भीर रोग होते है । इस दिशा मे भूमीगत जल स्थान होने से हैजा ,संतान पीङा,किङनी मे तकलीफ ,मानसिक अशांति इत्यादि रोग होते है ।
3..वायव्य कोण ...इस दिशा मे निरन्तर सोने या बैठने से बयाकुलता ,मन उच्चाटन,वायु विकार ,आदि रोग होते है ।इस कोण मे भूमीगत जल होने से मानसिक पीङा,अनिनद्रा ,बच्चे कम उम्र मे प्रोढ होने तथा इस दिशा मे द्वार होने से दुर्घटना होती है ।
4...नैतृतव कोण ..इस कोण का विस्तार ,भूमिगत जल का स्थान हो तो पुञ को रोग,मानसिक पीङा,भय,अनिनद्रा ,दुर्घटना जनित रोग,व गुर्दा मे जलित रोग देता है ।
5..उत्तर दिशा ..उत्तर मे भारी दझिण मे हलका या पूर्व मे भारी पश्चिम मे हलका रखने से स्वास्थ्यवर्धक उर्जा एवं हवा बाधित होती है जिससे अनिनद्रा ,मानसिक तनाव ,शारिरीक दुर्बलता व दीघँकालीन रोग होते है ।
6..पश्चिम दिशा ..इस दिशा मे भूमीगत जल होना मंदागनि ,महिला जनित रोग.दौरे पढना ,एवं अस्थिरता पैदा करता है ।
7..दझिण दिशा ..दझिण दिशा मे भूमीगत जल स्थान होने से महिला रोग,मानसिक अशांति व तनाव पैदा करता है ।
8..ब्रमह स्थान..यह स्थान घर का मध्यभाग होता है इस भाग मे निर्माण कार्य , भूमी गत जल स्थान , आग की स्थापना से विनाशकारी रोग.भ्रमिता का शिकार ,पेट से सम्बन्धित रोग,अनिनद्रा व मानसिक रोग होते है इस भाग से अगर ऊपर जाने के लिए सीढिया हो तो वह ङायबिटिज को आमंत्रित करती है ।
9..अगर भवन के दरवाज़ा आवाज़ करते है तो मानसिक अशांति ,अनिनद्रा व भय आदि की पीङा बनी रहती है ।
For Vastu Consaltancy and Solution DHIRAJ BORKAR NAGPUR 9890949168