23/09/2026
बहुत आसान है देश में मुसलमान कार्ड खेलना, और बिहार में यादव कार्ड खेलना।
किसी भी घटना की जिम्मेदारी लेने और जनता के सवालों का जवाब देने से बेहतर समझा जाता है कि घटना में अगर कोई यादव है, तो उसके नाम और जाति का कार्ड खेल दो और पूरी घटना को जातीय राजनीति में बदल दो।
जमुई कांड में 7 आरोपी बताए जा रहे हैं, लेकिन अगर उनमें से एक आरोपी यादव है, तो पूरी चर्चा उसके यादव होने पर क्यों केंद्रित की जा रही है?
सवाल तो सभी आरोपियों से होना चाहिए, जांच सभी की होनी चाहिए और कानून सभी पर बराबर लागू होना चाहिए।
हम तो साफ कहते हैं—
अगर कोई यादव है और उसने अपराध किया है, तो उसे यादव होने का कोई फायदा नहीं मिलना चाहिए। कानून अपना काम करे और उसे उसके अपराध की सजा मिले।
क्योंकि याद रखिए—
**आरोपी की कोई जाति नहीं होती।
आरोपी सिर्फ आरोपी होता है।**
किसी अपराधी के अपराध को उसकी जाति से जोड़कर पूरी जाति को बदनाम करना भी गलत है और जाति के नाम पर किसी आरोपी को बचाना भी उतना ही गलत है।
बिहार के मुख्यमंत्री से सवाल है—
घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा?
पीड़ित को न्याय कब मिलेगा?
क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर चुनाव और राजनीति के हिसाब से जाति के कार्ड खेले जाएंगे?
जनता को जाति की राजनीति नहीं, न्याय चाहिए।
महाभारत का उदाहरण भी हमारे सामने है। द्रौपदी के चीरहरण जैसी घटना में अन्याय हुआ, और अंततः उस अन्याय के परिणाम पूरे समाज और सत्ता को भुगतने पड़े। कंस भी यादव कुल से था, लेकिन उसके अत्याचार के कारण पूरा यादव समाज दोषी नहीं हो जाता। श्रीकृष्ण भी उसी यादव परंपरा से जुड़े थे, जिन्होंने अधर्म के विरुद्ध खड़े होकर कंस का अंत किया।
इसलिए किसी व्यक्ति के कर्म का फैसला उसकी जाति देखकर नहीं, उसके कर्म देखकर होना चाहिए।
आज जरूरत है कि हम जाति और धर्म के चश्मे से अपराध देखना बंद करें।
अपराधी चाहे यादव हो, मुसलमान हो, राजपूत हो, ब्राह्मण हो या किसी भी जाति-समुदाय से हो—अपराधी सिर्फ अपराधी है।
न यादव कार्ड चलेगा,
न मुसलमान कार्ड चलेगा,
न किसी और जाति का कार्ड चलेगा।
चलेगा तो सिर्फ कानून।
चलेगा तो सिर्फ न्याय।
और सरकार से भी यही सवाल है—
जाति की राजनीति बंद कीजिए और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी लीजिए। जनता को जवाब चाहिए, जाति का कार्ड नहीं।