Dhosi

Dhosi धरती का सबसे बड़ा तीर्थ महाभारत में आर्थिक पर्वत के नाम से जाना जाने वाला महा तीर्थ ढोसी

02/07/2021

Haryana bachao sangharsh samiti dwaraHaryana Pradesh mai bijli bilo mai ki g*i badhotri ke virodh mai ANISHCHITKALIN BHUKH - HADTAL

22/06/2021
14/04/2020
सदियों से कर रही है ढोसी अपने विकास का इंतजार अब तो सुध ले ले इस की भी हरियाणा सरकार
19/12/2019

सदियों से कर रही है ढोसी अपने विकास का इंतजार
अब तो सुध ले ले इस की भी हरियाणा सरकार

24/11/2019

नारनौल बने ऐतिहासिक नगरी
सुझाव सहयोग और समर्थन के आकांक्षी
पार्षद प्रमोद तरेडिया Adv
9467261222

27/12/2015
26/12/2015

धरती की वो जगह जो प्राक्रतिक पौराणिक वैदिक इतिहास को आज भी समेटे हुए है जी हाँ श्रष्टि की रचना वेदों के आधार पर हुई है और चार वैदिक आश्रम एक ही जगह इस पुनीत तीर्थ के अलावा कहीं और नजर नहीं आयेंगे ! मह्रिर्षी च्यवन, मह्रिर्षी भृगु,मह्रिर्षी पीपलाद,मह्रिर्षी उद्दालक, के आश्रम का संगम धरती के कोने में दिखाई पड़ता है ! यहीं वो जगह है जहाँ ब्रह्मा जी की पुत्र वधु के पानी पर नाराज होकर चले जाने से पदचिन्हों के साथ - साथ उनके पीछे पानी की नदी बन कर चल पड़ी जो बाद में वधुसरा नदी के रूप जानी गई जो आज भी हरियाणा राजस्थान से गुजरने वाली दोहान नदी के रूप में जानी जाती है ! जी हाँ यहीं जगह जो महाभारत में आर्चिक पर्वत केरूप में जानी गई ! जहाँ पाण्डवों ने अपना लम्बा समय केवल इसलिये गुजारा ताकि सोमोतीअमावस्या के दिन धरती के इस महान तीर्थ पर स्नान कर धर्म लाभ लिया जा सके ! धर्मराज युधिष्ठर ने धरती के इस महान तीर्थ के बारे में कहाँ था कि आर्चिक पर्वत पर बने चंद्र्कूप पर यदि सोमोती अमावस्या के दिन स्नान करने का सौभाग्य पाने व्यक्ति को धरती के किसी अन्य तीर्थ को करने की जरूरत नहीं है चूँकि यह स्नान धरती के सभी तीर्थो का तीर्थ गुरु माना गया है ! " हे पांडव पुत्रों यदि यहाँ परहम सोमोती अमावस्या के दिन स्नान कर पाते है तो बिना युद्ध ही हमारी आकांक्षा पूर्ति हो सकती है ! हमारा विजय पताका तमाम ब्रह्मांड फहराया जा सकता है अर्थात पारिवारिक युद्ध "महाभारत" को भी टाला जा सकता है अत; हम सभी को सोमोती अमावस्या काइन्तजार करना ही उचित होगा और उन्होंने लम्बे अरसे यहाँ रहकर सोमोती अमावस्या का इन्तजार किया जो सालो तक भी उस समय सोमोती अमावस्या ना आई जिसका खेद आज तक भी सदा धर्म गुरुओ में बना रहा है ! यह वही जगह जहाँ मह्रिर्षी च्यवन ने लागातार 6000 वर्षो तक तपस्या की, और जब उनका शरीर मिट्टी का टीला बन गया तो तपनस्थली की ओर गुम रही राजकुमारी सुकन्या को मिट्टी के टीले से कुछ चमकीली सी चीज़ दिखाई दी ! जिसका रहस्य जानने की लालसा में राजकुमारी सुकन्या ने अपने हाथों में लिये दो शूल शीघ्र ही सीधे उस चमकीले जगह घुसा दिए जहाँ रक्त बहार आया खून को देखकर हैरान राजकुमारी सुकन्या मिट्टी के टीले पर हाथ लगाया तो 6000 वर्षो से गहन तपस्या में लीन मह्रिर्षी च्यवन उठ खड़े हुए ! इस सारे व्रतांत को सुनकर राजा जो राजकुमारी सुकन्या के पिताभी थे ने तुरंत राजकुमारी सुकन्या को अंधे हो गये वयोवृद्ध मह्रिर्षी च्यवन से शादी कर उनकी सेवा करने काआदेश दे दिया विवाह उपरान्त मह्रिर्षी ने ढ़ोसी पर लगे आंवले व् अन्य जडीबुटीयों से अपना ईलाज किया जिससे वो फिर से दुनिया को देख पाये तदुपरान्त उन्होंने चंद्र्कूप जो ढ़ोसी पर स्थित है में स्नान किया जिसकी 6000 वर्षो से अधिक की वृद्ध काया 16-17 साल के जवान युवा में तब्दील हो गई ! आज भी मह्रिर्षी च्यवन की वह चंद्र्कूप,तपनस्थली,आंवले के पेड़ ढ़ोसी पर मौजूद है और मह्रिर्षी च्यवन के नाम से बिकने वाला च्यवनप्राश अति मशहूर है! जी हा ये वही जगह जिस आर्चिक पर्वत की तलहटी में (शेरों के गढ़ में) जंगलों के बीचों- बीच नाहरनौल नामक एक एसा ग्राम बसा हुआ था जो कई बार उजड़ा और कई बार जला दिया गया अंत में वहां के लोग ढ़ोसी से 11 किलोमीटर की दुरी पर स्थित तत्कालीन समय का अति प्राचीन और प्रसिद्ध चामुंडा मंदिर के समीप देवस्थान मोहल्ले में नाहरनौल को बसा दिया जो आज भी भारत में हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जिले के जिला मुख्यालय के तौर पर नारनौल के नाम से जाना जाता है ! जहाँ अजमेरासिंह, जोधासिंह,शेरशहाँ सूरी, भारतीय सरकार से राष्ट्रीय संत से उपाधि प्राप्त होने के कारण राष्ट्रीय संत कहलाये जाने वाले अमर मुनिजी युवा जैन संत चिराग मुनि जी, बाबा रामदेव ,साध्वी ऋदी जी, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस सतीश मितल, न्यायाधीश नरेश कुमार संघी तमिलनाडू के राज्यपाल रहे सुरजीत सिंह बरनाला व् सुभाष चन्द्र बोस के ख़ास सेक्रेटरी मि. संघी की जन्मस्थली, सतनामियों की संघर्षस्थली, विश्वविख्याय बुद्धिजीवी व्यक्ति बीरबल की कर्मस्थली, महान संगीतज्ञ तानसेन की गुरु नगरी,व् हास्यकवि सुरेन्द्रसिंह, ग्रीस संघी इतियादी कई महान हस्तियों के कारण भी चर्चा में रहा है ! मगर दुःख और विडम्बना की बात है कि आज भी धरती का महान तीर्थ सुविधाओं के अभाव में जाने का रास्ता होने के कारण अपने श्रदालुओं का इन्तजार कर रहा है मेरा मानना है अगर भारतीय सरकार इस महान तीर्थ की सुध लेले और चंद्र्कूप, व् मह्रिर्षी च्यवन की तपनस्थली तक वाया शिवकुंड नीचे से फोरलाईन रोड़ का निर्माण कर दे, या ट्राली सिस्टम कर दे, ऊपर चूँकि यह तीर्थ अंतर्राष्ट्रीय स्तर का है तो यहापर आने वाले श्रदालुओ, ट्यूरिस्टो के लिये नेशनल पिकनिक स्पॉट बनवा दे और इसे इंटरनेशनल ट्यूरिस्ट स्पॉट का दर्जा दिलवा दे तो घर घर में हो रहे महाभारत शायद रुक जाए ! इसलिये मै अपने फेसबुक परिवार के सभी सदस्यों से आग्रह करता हू की अपने राज्य सरकार के माध्यम से , व् विदेशों रह रहे श्रदालुओ व् सैलानियों अपने - 2 देशों में बैठे भारतीय राजदूतों के माध्यम से भारत की केंद्र सरकार को धरती के महान तीर्थ ढ़ोसी को इंटरनेशनल ट्यूरिस्ट स्पॉट का दर्जा दिलवाने , यहा पर आने वाले श्रदालुओ, ट्यूरिस्टो के लिये नेशनल पिकनिक स्पॉट बनवाने , चंद्र्कूप, व् मह्रिर्षी च्यवन की तपनस्थली तक वाया शिवकुंड नीचे से फोरलाईन रोड़ का निर्माण करने, या ट्राली सिस्टम कर देने व् अन्य सुविधाओं के लिये लिखे ! और करोड़ो हिन्दुओ की आस्थाओं को पुन : जाग्रत करे धन्यवाद !

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