21/10/2023
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जनसंघ की वैचारिक स्वीकार्यता के कारण ही विश्व में भारत की धाक - आचार्य भारतभूषण
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अखिल भारतीय जनसंघ के 73 वें स्थापना-दिवस पर आज फ्रेंड्स कॉलोनी कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पं दीनदयाल उपाध्याय और प्रो बलराज मधोक के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य भारतभूषण पाण्डेय ने कहा कि स्वतंत्र भारत की राजनीति को राष्ट्रवादी-यथार्थवादी दिशा देने,देशहितों की रक्षा करने और सशक्त-समृद्ध भारत के पुनरोदय के लिए 21अक्टूबर1951 को नई दिल्ली में महान बलिदानी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में जनसंघ की स्थापना हुई थी।तब से आज तक अथक और अनवरत संघर्षों के बल पर जनसंघ ने अपनी वैचारिक स्वीकार्यता तथा विशिष्ट चारित्रिक पहचान से समाज को अनुप्राणित किया है और देश में प्रखर राष्ट्रवाद को बुलंद किया है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में भारत का जो गौरवपूर्ण स्थान बना है इसमें जनसंघ की नींव का महत्त्वपूर्ण योगदान है। जनसंघ अध्यक्ष ने कहा कि आनेवाले समय में जनसंघ प्रभावी विकल्प बन कर खड़ा होगा। राजनीति से अवसरवादी तथा अराष्ट्रवादी सत्तालोलुप तत्त्व विदा होंगे और मुकाबला केवल देशभक्त दलों के बीच ही होगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों में काम कर रहे राष्ट्रवादी कार्यकर्ता निरंतर हमारे संपर्क में हैं और लगातार हो रही अपनी उपेक्षा से आहत हो जनसंघ को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रदेश महासचिव कुमार सौरभ ने कहा कि आज की राजनीति में समर्पित कार्यकर्ताओ का सम्मान केवल जनसंघ में ही बच गया है। जनसंघ आरंभ से ही कार्यकर्ता आधारित संगठन है और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आगे लाकर जनोन्मुखी राजनीति के लिए संकल्पित है। स्वागत भाषण अखिलेश्वर नाथ तिवारी, संचालन मधेश्वर नाथ पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन सत्येन्द्र नारायण सिंह ने किया। कार्यक्रम में विश्वनाथ दूबे, नर्मदेश्वर उपाध्याय, सियाराम दूबे, महेंद्र पांडेय, सुरेंद्र कुमार मिश्र, उमेश सिंह कुशवाहा, वीरेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव आदि प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे।