27/09/2022
हमारे आदिवासी समाज को समझना चाहिए बात सिर्फ राजनीति की नहीं बात आदिवासियों की चर्चा की है जिन्हे अब तक बड़ी बड़ी राजनीतिक पार्टिया सिर्फ वोट बैंक के नजरिये से देखती थी लेकिन आज पड़े लिखें आदिवासी युवाओं के कारण उन बड़ी बड़ी राजनीतिक पार्टियों को आदिवासियों के प्रति धारणा बदलने को मजबूर होना पड़ रहा है आज सत्ताधारी पार्टिया आदिवासियों के पुरखों को आदिवासियों के इतिहास को और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की कम से कम बात तो करने लगी है इससे पहले आदिवासियों को उनके हक़ अधिकारों को उनके इतिहास उनके नायकों को कौन याद करता था लेकिन जयस जैसे क्रन्तिकारी वैचारिक संगठन मे राजनीतिक पार्टियों को आदिवासियों के प्रति बनाई हुई पुरानी धारणा बदलने को मजबूर कर दिया है लेकिन फिर भी आदिवासी समाज का बड़ा हिस्सा बड़े बड़े बुद्धिजीवी वर्ग जयस के अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर रहे है यह एक चिंतनीय विषय है आखिर कब तक दुसरो के नेतृत्व दुसरो के झंडे और डंडे उठाकर उनकी जय जय कार करते रहेंगे कब से कम आजादी के 75 साल बाद तो आदिवासियों के भीतर स्वाभिमान जागना चाहिए अब नहीं स्वाभिमान जागा तो फिर कब जागेगा इसलिए आदिवासी समाज के समस्त बुद्धिजीवी वर्ग से अपील करते है की कम से कम अब तो युवाओं के समर्थन मे खुलकर आ जाए अभी नहीं आओगे तो फिर कब आओगे जब सब कुछ लूट लिया जाएगा तब रोने गाने से क्या होगा अभी संघर्ष का समय है अभी कुछ हासिल करने का समय है इसलिए बिना देरी किया सभी को मिलकर संघर्ष करने की जरूरत है
_डॉ हिरालाल अलावा
राष्ट्रीय जयस संरक्षक