Govind Singh Chauhan

Govind Singh Chauhan अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तदैव च:

This is New India 🔥We will move mountains.We will shake mountains.We won't give up on our own.
29/11/2023

This is New India 🔥

We will move mountains.
We will shake mountains.

We won't give up on our own.

21/10/2023

Seldom he does but this time it is jornalism !!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बृज प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला की सलाह का अनुसरण करते हुए जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, ...
11/10/2023

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बृज प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला की सलाह का अनुसरण करते हुए जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद) खासकर तत्कालीन पार्षद आशीष पाराशर ने जो किया, फिर वह वाकई मिसाल बन गया ।
आगरा शहर के एक हिस्से में लाखों लोगों को बड़ा राहत मिल गई। जो स्थान कभी शौचघर, कूड़ाघर, शराबी और जुआरियों का अड्डा के रूप में कुख्यात था, वहां अब “सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम” बन गया। ऐसा मोक्षधाम जो ताजगंज मोक्षधाम से भी विशाल है। आगरा का ऐसा दूसरा मोक्षधाम है, जहां विद्युत शवदाह गृह भी है। एक बड़ी बात यह भी है कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है, जो ताजगंज मोक्षधाम में संभव नहीं है।

आगरा के शाहगंज में मल्ल का चबूतरा (मल्ल का चौंतरा) पर करीब एक हजार साल प्राचीन श्मशान घाट है। श्मशान घाट तो नाम का था, वास्तव में यह इसका उपयोग शौच करने और कूड़ा फेंकने के लिए किया जा रहा था। जिनके पास ताजगंज मोक्षधाम जाने का साधन नहीं है, वे मल्ल का चबूतरा श्मशान घाट पर प्रियजन का अंतिम संस्कार करने के लिए विवश थे। जहां भी पैर रखो, वहीं पर शौच। नशेड़ियों का जमावड़ा। समाधियों पर बैठकर लोग जुआ खेलते थे।

अब यहां सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम का विशाल द्वार है। स्थान चमन हो गया है। कच्चा नाला पक्का बन गया है। बीच में सीमेंट की सड़क बन गई है। हरियाली है। पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री डॉ. अरुण सक्सेना ने किया। पौधा लगाने वालों की नाम पट्टिका लगी हुई है। पूर्वजों की समाधि बनाने के स्थान पर उनकी स्मृति में पौधा लगाने का आह्वान संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला ने किया है जो लोगो को अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रोहत्साहित करेगा व् समाज के काम आएगा ।

सतसंग भवन का उद्घाटन 15 नवम्बर, 2022 को किया गया । उद्घाटन के समय महापौर नवीन जैन और संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला मौजूद थे। यहां उठावनी, बैठक, सत्संग जैसे कार्यक्रम होने शुरू हो गए हैं। मोक्षधाम के जीर्णोद्धार की कहानी भी चित्रों में दर्शित है।
मोक्षधाम में कार्यालय, दुकान, व जनसुविधा निर्माण कार्य और विद्युत शवदाह गृह का लोकार्पण 15 नवम्बर, 2022 को किया गया। इसमें ताजगंज की तरह पूरी व्यवस्था है। विद्युत शवदाह गृह नवदुर्गा के बाद चालू हो जाएगा। लकड़ी की टाल शुरू होनी है। खंडहर हो चुके पुराने निर्माण को तोड़कर फूल रखने का स्थान बनाया जाना प्रस्तावित है

यह सब ऐसे ही नहीं हो गया। चार वर्ष का अथक परिश्रम है। कुछ चेहरे पर्दे के सामने रहे तो अधिकांश पर्दे के पीछे। तब जाकर मल्ल का चबूतरा श्मशान घाट को सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम का रूप दिया जा सका। आज यह ऐसा स्थान, जहां लोग प्रातःकाल भ्रमण के लिए आते हैं। एक समय वह भी था जब नाक पर रूमाल रखकर निकलते थे। यह ऐसी कहानी है जो प्रत्येक जनप्रतिनिधि के लिए प्रेरणादायी है कि अपने 5 साल के कार्यकाल में कोई ऐसा काम कर जाएं जो सदा याद रहे।

कोरोना महामारी का प्रकोप कम होते ही 26 जून, 2021 को संघ के क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी ने सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र मोक्षधाम के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया। समारोह में महापौर नवीन जैन, सांसद एसपी सिंह बघेल, प्रान्त प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला, प्रांत प्रचार प्रमुख केशव शर्मा आदि उपस्थित रहे। संकल्प लिया कि नगर निगम और समाज के सहयोग से मोक्षधाम का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
जीर्णोद्धार का शिलान्यास तो हो गया लेकिन शवदाह स्थल के पास बनी 120 से अधिक पक्की समाधियां कार्य में बाधा बनकर खड़ी हो गईं। समाधि बनाने वालों से संपर्क किया गया। उन्हें समझाया गया और समाधि स्थानांतरित करने पर राजी किया गया।
नगर निगम के माध्यम से सफई अभियान चलाया तो 100 से अधिक ट्रक कूड़ा निकला। सबसे बड़ी समस्या यहां अतिक्रमण थे, अतिक्रमण हटा दिए गए। चारदीवार बनाई गई ताकि फिर से अतिक्रमण न हो सके। मोक्षधाम का विकास पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के आधार पर हुआ है

संघ के बृज प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला ने श्मशान घाट का नामकरण किया – “सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम” साथ ही उन्होंने समाधि बनाने के स्थान पर पूर्वजों की याद में एक पौधा रोपने का सुझाव दिया, जो चल रहा है। एक मंदिर व नवगृह वाटिका बनाने बनाई जाएगी ।
सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम परियोजना का सामाजिक संदेश है। वह यह कि अगर कोई कुछ करने की ठान ले, निःस्वार्थ भाव के साथ प्राण-प्रण से जुट जाए तो सफलता मिलती है। इस कार्य में मेहनत इतनी खामोशी से की गई कि सफलता ने शोर मचा दिया है। मतलब अगर ठान लिया जाए तो मुश्किल कुछ भी नहीं है। यह काम करने वाले श्रेय नहीं लेना चाहते हैं।

सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम परियोजना में पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे डॉ. हरीश रौतेला से पूछा तो उन्होंने कहा कि समाज काम करता है। फिर उन्होंने इन पंक्तियों के माध्यम से पूरी बात कह दी-

सूरज हमें रौशनी देता, हवा नया जीवन देती है,
भूख मिटने को हम सबकी, धरती पर होती खेती है ।
औरों का भी हित हो जिसमें, हम ऐसा कुछ करना सीखें,
देश हमें देता है सबकुछ हम भी तो कुछ देना सीखें।

डॉ भानु प्रताप सिंह की कलम से…..

Dr. Harish Rautela

09/05/2023

मेवाड़ मुकुट महाराणा प्रताप की आज जयंती है। उनका जन्म ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया विक्रम संवत 1597 तदनुसार 9 मई वर्ष 1540 को हुआ था‌। भगवान एकलिंग के भक्त महाराणा को हमारा नमन।
महाराणा प्रताप जयंती पर ये पंक्तियां...

कब तक बोझ संभाला जाए
द्वंद्व कहां तक पाला जाए
दूध छीन बच्चों के मुख से
क्यों नागों को पाला जाए
दोनों ओर लिखा हो भारत
सिक्का वही उछाला जाए
तू भी है राणा का वंशज
फेंक जहां तक भाला जाए

अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तदैव च:

04/02/2023

मोहम्मद सिराज और उमरान मलिक टीका नहीं लगवाते क्योंकि वे सेकुलर वाली गोली नहीं चूसते!!

02/02/2023

पाकिस्तान की संसद में हिंदू सांसद का मार्मिक भाषण!!

भारत में पहली बार महिलाओं ने हिजाब जलाकर विरोध जतायाकोझिकोड. केरल में महिलाओं ने हिजाब जलाकर विरोध प्रदर्शन किया. भारत म...
11/11/2022

भारत में पहली बार महिलाओं ने हिजाब जलाकर विरोध जताया

कोझिकोड. केरल में महिलाओं ने हिजाब जलाकर विरोध प्रदर्शन किया. भारत में किसी संगठन द्वारा हिजाब जलाने का पहला मामला सामने आया है.
केरल के कोझिकोड टाउन हॉल के सामने मुस्लिम महिलाओं के समूह ने हिजाब में आग लगाकर विरोध प्रदर्शन किया. मुस्लिम महिलाओं ने ईरान में हिजाब विरोधी आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाते हुए हिजाब जलाया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना केरल युक्तिवादी संगम की ओर से हुए एक सेमिनार के दौरान हुई. भारत में क‍िसी संगठन की ओर से हिजाब जलाने का यह पहला मामला है.
कोझिकोड में फैनोस-साइंस एंड फ्री थिंकिंग शीर्षक से सेमिनार आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम के तहत मुस्लिम महिलाओं ने ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई और हिजाब जलाया.

https://vskbharat.com/muslim-women-protest-by-burning-hijab-for-the-first-time-in-india/

05/11/2022

गर्व कीजिए अपने राष्ट्रगान पर!!
जय हिंद!!जय भारत!!

विजय-दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!!
05/10/2022

विजय-दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!!

Exclusive first look at interiors of a new Hindu temple 🛕 in Jebel Ali, Dubai 🇦🇪.Doors will open to public on 5 October ...
09/08/2022

Exclusive first look at interiors of a new Hindu temple 🛕 in Jebel Ali, Dubai 🇦🇪.
Doors will open to public on 5 October 2022.
हर हर महादेव 🚩🚩🚩🚩🚩🚩

31/07/2022

As part of 75th years of India’s independence celebration ( ) and Har Ghar Tiranga campaign, ⁦⁩ performed underwater flag Demo at Sea.
Idea behind the initiative is to invoke feeling of patriotism in the hearts of the people & to promote awareness about the Indian National Flag.
Narendra Modi
Dr. Harish Rautela

24/07/2022

स्विजरलैंड में एक भारतीय छात्र ने बैगपाइप से राष्ट्रगान की धुन बजाकर सबका दिल जीत लिया!!

आओ मिलकर एक नया निर्माण करेंअधिक पेड़ लगाकर धरती का श्रंगार करें !!हरेला विश्व महोत्सव माह के अंतर्गत आज जिला गौतमबुद्धन...
22/07/2022

आओ मिलकर एक नया निर्माण करें
अधिक पेड़ लगाकर धरती का श्रंगार करें !!

हरेला विश्व महोत्सव माह के अंतर्गत आज जिला गौतमबुद्धनगर-गांव झट्टा के प्राथमिक विद्यालय में 100 से अधिक पौधों का पौधरोपण किया गया जिसमें हम सभी के साथ स्कूल की प्रधानाचार्य व अध्यापिकाएं सम्मिलित हुई।

प्रेरणा

इस सावन अपने मित्रों के हिसाब से कितने पेड़ लगा रहे है ??प्रेरणा Dr. Harish Rautela
20/07/2022

इस सावन अपने मित्रों के हिसाब से कितने पेड़ लगा रहे है ??

प्रेरणा Dr. Harish Rautela

प्रकृति और मानव को जोड़ने वाला उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला को वैश्विक रूप देने के लिए “विश्व हरेला महोत्सव परिवार” राष्ट्...
16/07/2022

प्रकृति और मानव को जोड़ने वाला उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला को वैश्विक रूप देने के लिए “विश्व हरेला महोत्सव परिवार” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-ब्रज क्षेत्र प्रचारक डॉ.हरीश रौतेला जी के तत्वावधान में महाराष्ट्र सदन, दिल्ली मनाया में गया I
जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में श्री भगत सिंह कोश्यारी जी (राज्यपाल-महाराष्ट्र पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड),परम पूज्य श्री अनंत प्रभु दास जी (अक्षत पात्र फाउंडेशन),डॉ.प्रदीप जोशी जी (पूर्व चेयरमैन संघ लोक सेवा आयोग),डॉ.अरुण कुमार सक्सेना जी (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार, उत्तर प्रदेश),श्री सुरेश चव्हाणके जी (अध्यक्ष सुदर्शन न्यूज़) उपस्थित रहे I
संपूर्ण कार्यक्रम की व्यवस्था व संचालन का दायित्व मेरे सहभागी श्री अरुण नेगी जी,श्री संदीप बालियान जी, श्री कुमार गौरव जी,श्री बलराम सिंह तोमर जी के साथ निर्वहन किया
वृक्षारोपण करके, करो प्रकृति को पूर्ण

जय श्री राम !!!!!🚩पूर्वी पाकिस्तान से 52 वर्ष पहले विस्थापित 63 हिंदू बंगाली परिवारों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने द...
19/04/2022

जय श्री राम !!!!!
🚩पूर्वी पाकिस्तान से 52 वर्ष पहले विस्थापित 63 हिंदू बंगाली परिवारों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिया आवासीय पट्टा🚩

उत्तर प्रदेश में करीब 52 वर्ष पहले से विस्थापित 63 परिवारों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्थापित कर दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में वर्ष 1970 में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 63 हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन के लिए कृषि भूमि के साथ ही साथ आवासीय पट्टा प्रदान किया।

मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सीएम योगी आदित्यनाथ ने विस्थापित 63 हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन के लिए स्वीकृति पत्र वितरित किया। 52 वर्ष पहले पूर्वी पाकिस्तान से भारत आए बंगाली हिंदुओं को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कानपुर देहात जिले के महेन्द्र नगर में बसाने की व्यवस्था की है। इन सभी परिवारों को आवास के साथ जीवन में आगे बढऩे के लिए कृषि योग्य दो-दो एकड़ जमीन भी दी है। जिससे कि इनका जीवन निर्वहन हो सकेगा। यह सभी 63 परिवार 1970 में पूर्वी पाकिस्तान से आकर मेरठ के हस्तिनापुर में रह रहे थे। यह सभी बीते कई वर्ष से आवास और खेती के लिए कृषि भूमि की मांग कर रहे थे। इनकी मांग को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुना और लखनऊ में सभी 63 परिवारों को आवंटन पत्र सौपें। मुख्यमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तथा कैबिनेट मंत्री/भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी थे।

कानपुर देहात में बसेंगे 63 परिवार : अब इन सभी 63 हिन्दू बंगाली परिवारों को कानपुर देहात जिले के रसूलाबाद के भैसायां गांव के महेंद्र नगर में बसाया जायेगा। बीते वर्ष 11 नवम्बर को ही यूपी कैबिनेट में इन परिवारों की पुनर्वास प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव पारित हो गया था। 1971 में बांग्लादेश से आये कुछ परिवारों को भी महेंद्र नगर में ही बसाया गया है और अब पूर्वी पाकिस्तान से आये परिवारों को बसाया जा रहा है। इन सभी परिवारों को आवास के अलावा खेती के लिए दो-दो एकड़ जमीन लीज पर दी गई है। हर परिवार को आवास के लिए 200 वर्ग मीटर जमीन और मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से घर बनाने के एक लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। परिवारों के सदस्यों को इनकी योग्यता अनुसार मनरेगा के तहत काम भी दिया जायेगा। सरकार ने इन परिवारों के लिए 300 एकड़ जमीन चिन्हित किया है और इस भूमि पर इन्हें सिंचाई की सुविधा भी मिलेगी ताकि इन्हें कोई दिक्कत न हो।

छलके खुशी के आंसू : 1970 में पूर्वी पाकिस्तान से 63 बंगाली परिवारों के लिए कानपुर देहात में 300 एकड़ जमीन चिह्नित की गई। इन्हें भूमि विकास और सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही मनरेगा से यहां काम कराया जाएगा, जिससे इन्हें अच्छी सुविधाएं मिल सके। इन्ही में से एक परिवार के पूर्वी पाकिस्तान से आए सुशील मंडल ने बताया कि पांच दशक से वह लोग संघर्ष कर रहे थे, लेकिन किसी सरकार में इन लोगों की सुनवाई नहीं हुई। आज हमारी आंखों में आंसू हैं, खुशी के आंसू हैं। किसी ने हमारा हक समझा तो वो सीएम योगी आदित्यनाथ हैं।

लम्बे समय से मेरठ में था प्रवास : मेरठ में करीब 52 वर्ष पहले 1970 में 65 बंगाली हिन्दू परिवार पूर्वी पाकिस्तान से भारत चले आये थे और हस्तिनापुर में बस गए थे। इन परिवारों के पुनर्वास के लिए इन्हें पास के ही मदन सूत मजिल में काम दिया गया था। 1984 में मिल बंद हो गई और इनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। दो परिवारों के सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है और 63 परिवार बीते 38 वर्ष से संघर्ष कर रहे थे।

दुर्योधन_की_जंघाआज का विचार दुर्योधन!महाभारत का ही नहीं विश्व के सबसे बड़े खलनायकों का आदिगुरू।आपको शायद यह शब्द अजीब लग ...
20/03/2022

दुर्योधन_की_जंघा
आज का विचार

दुर्योधन!

महाभारत का ही नहीं विश्व के सबसे बड़े खलनायकों का आदिगुरू।

आपको शायद यह शब्द अजीब लग रहा होगा लेकिन सत्य यही है। संसार में एक से एक हिंसक और खूँख्वार पात्र हुये लेकिन दुर्योधन संसार का पहला अनूठा खलनायक था।

क्या वह रावण से ज्यादा खतरनाक योद्धा था?
क्या वह अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर से बड़ा बर्बर था?
क्या वह तैमूर गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बादशाहों जैसा हत्यारा था?

नहीं, वह इन पैशाचिक गुणों में इनके आसपास भी नहीं था लेकिन उसमें एक ऐसी कला थी जिसने न केवल उस युग के जनसामान्य ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिर ऋषियों व राजाओं को भी भ्रमित कर दिया।

वह घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद स्वयं को विक्टिम प्रदर्शित करने में माहिर था।

वह झूठा नैरेटिव गढ़ने में माहिर था।

उसकी इस कला ने उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया बल्कि उल्टे पांडवों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया।

-भरतवंश में योग्यतम राजकुमार को राज्य देने की परंपरा थी और उसने जनसामान्य के सामने सिद्ध कर दिया कि उसे केवल उसके पिता की नेत्रहीनता की सजा मिल रही है।

-उसने धूर्ततापूर्वक मायामहल में हुई घटना को पूर्णतः झूठ बोलकर द्रोपदी द्वारा 'अंधे का बेटा' कहने से जोड़कर प्रस्तुत किया जबकि महाभारत के अनुसार द्रौपदी ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं था।

-उसने पांडवों को धृतराष्ट्र के माध्यम से द्यूत खेलने की आज्ञा दी और 'द्यूत मर्यादा' के अंतर्गत जबरदस्ती पांडवों और द्रौपदी को दाँव पर लगाने के लिये मजबूर किया और दुनियाँ के सामने युधिष्ठिर को 'जुआरी' साबित कर दिया।

-उसकी फेक नैरेटिव गढ़ने की क्षमता का अंदाजा इसीसे लगा लीजिये कि उसने कृष्ण पर युद्ध के नियमों को तोड़ने वाला छलिया साबित कर दिया जबकि राजकुमार श्वेत से लेकर अभिमन्यु की निरीह हत्या से लेकर अर्जुन और भीम की हत्या के लिये इन एकल योद्धाओं पर क्रमशः सुशर्मा की पूरी संशप्तक सेनाओं और कलिंगराज की हाथियों की सेनाओं का आक्रमण तक करवाया।

संसार में अन्यायी और पापी होने के बाद भी स्वयं को विक्टिम प्रदर्शित करने वाला व्यक्ति और जनसमूह अत्यंत कुटिल और भयानक रूप से खतरनाक होता है और इस दृष्टि से दुर्योधन ऊपर वर्णित खलनायकों से दस गुना ज्यादा खतरनाक था।

क्या पांडव युद्ध जीत पाते?

सवाल ही नहीं था, अगर कृष्ण न होते।

और अगर आज बीस करोड़ ऐसे लोग जो क्रूरता में गजनवी और औरंगजेब हों और विक्टिम होने का नाटक करने में दुर्योधन के समान कुटिल, जो एक मस्तिष्क, एक आवाज, एक इकाई, एक सेना के रूप में आपके सामने आपका वजूद मिटाने को खड़े हों तो???

जरा देखिये अपने चारों ओर, वे आपके चारों ओर मौजूद हैं।

-उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद नग्न कर खुले बाजारों में बेचा लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे।

-उन्होंने 1946 में लगभग शत प्रतिशत रूप से पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया व पाकिस्तान का निर्माण कराने के बाद सफलतापूर्वक हिंदुओं पर नैरेटिव थोप दिया कि संविधान के कारण उन्होंने भारत में ही रुकने का फैसला किया जबकि संविधान विभाजन के तीन वर्ष बाद लागू हुआ था।

-उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी धार्मिक मान्यता के कारण तुर्की के खलीफा के पक्ष में सिर्फ खिलाफत आंदोलन में भाग लिया पर नैरेटिव इस तरह गढ़ा की भारत की स्वतंत्रता में उन्होंने बराबर भाग लिया।

-सर सैयद अहमद शाह से लेकर जिन्ना तक वे अंग्रेजों की गोदी में खेलकर राष्ट्र के साथ गद्दारी करते रहे लेकिन माफीनामे की पर्ची सफलतापूर्वक सावरकर के माथे पर लगा दी।

-उन्होंने जिंदगी में गांधीजी की तमाम चापलूसियों के बावजूद उनकी एक बात नहीं सुनी और जिन्ना को अपना नेता माना लेकिन गोडसे को लेकर सवाल सबसे पहले करते हैं।

-संसार में 99% प्रतिशत आतंकवादी घटनाओं के बावजूद सफलता पूर्वक स्थापित कर देते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं लेकिन निर्दोष साबित हुए साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित के माध्यम से हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ देते हैं।

-बछडाचोर अखलाक व चोर तबरेज की पिटाई में हुई दुर्घटनावश मृत्यु को मोबलिंचिंग का नैरेटिव गढ़ देते हैं लेकिन चंदन गुप्ता और निरीह भरत यादव की दर्दनाक मृत्यु को सामान्य घटना साबित कर देते हैं।

-महाकाल एक्सप्रेस के नामकरण व उसके शुभागमन प्रतीक के रूप में एक बर्थ के रिजर्वेशन पर धर्मनिरपेक्षता को खतरे का नैरेटिव सैट करते हैं और प्लेटफॉर्म पर दरगाह, सड़कों पर नमाज और रेलवे स्टेशन पर मस्जिद खड़ी करने से रोकने पर धार्मिक रूप से विक्टिम शो करते हैं।

-कश्मीरी हिंदुओं पर अकथनीय अत्याचार करते हैं और अपने खून सने हाथ जगमोहन व भाजपा कर दामन से पोंछते हैं।

आप कैसे लड़ोगे इन संगठित दुर्योधनों से?

लेकिन अंततः ्मीर_फाइल्स हमारे लिये कृष्ण का इशारा बनकर आई है।

पहली बार इ स्लामिक दुर्योधनों का नैरेटिव ध्वस्त हुआ है।

दुर्योधन की जंघा पर से वस्त्र हटा दिया है।

भीमसेन बनना अब आपकी जिम्मेदारी है।।

इनकी जंघाओं पर गदा का प्रहार करो।

इनका_आर्थिक_बहिष्कार_करो।

इनकी आजीविकाओं का बहिष्कार करो।

इनकी जंघायें तोड़ दो।

23/02/2022

वारिस खान के अनुसार " once a Masjid is always a Masjid.But once a temple is not always a temple"
Dr. Anand Ranganathan on Gyanwapi Mosque............

CDS जनरल श्री बिपिन रावत जी व उनकी धर्मपत्नी का निधन अत्यंत दुःखद है।एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी के रूप में श्री रावत जी स...
08/12/2021

CDS जनरल श्री बिपिन रावत जी व उनकी धर्मपत्नी का निधन अत्यंत दुःखद है।

एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी के रूप में श्री रावत जी सदैव याद किए जाएंगे।

उनका असामयिक निधन राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है।
नमन 🙏🙏

तैयारियां जोरों से चल रही है मित्रों!!जय श्री कृष्ण 🚩 . Harish Rautela
30/11/2021

तैयारियां जोरों से चल रही है मित्रों!!
जय श्री कृष्ण 🚩
. Harish Rautela

14/09/2021

अब्दुल्ला वंश, मुफ्ती वंश तथा कांग्रेसियों ने विशेष अधिकारों के साथ कश्मीर में अपनी सत्ता कायम रखने के लिये देश के संविधान में धारा 370 व 35A जोड़ने के साथ साथ वहां से अधिकांश हिन्दुओं व सिखों को अपनी सम्पत्ति छोड़कर भागने को मजबूर कर दिया था (और जिन्हें रहने दिया वे अबतक बेजुबान बनकर रहते रहे)
संविधान की धारा 370 व 35A हटाकर मोदी जी की सरकार ने जबसे जम्मू एवं कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया, वहां की फिजा किस तरह से बदल गई इसका उदाहरण देखिये इस वीडियो में जब मोहल्ले में अकेले रहने वाले हिन्दू ने मौलानाओं के समूह को रोक दिया अपने सामने की जमीन पर गायों को काटने से ।
जय श्री राम!!
Dr. Harish Rautela
विवेक सिंह

राधे राधे!!
06/09/2021

राधे राधे!!

तन समर्पित, मन समर्पितऔर यह जीवन समर्पितचाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं।माँ भारती के चरणों में व हिंदू धर्म रक्...
30/08/2021

तन समर्पित, मन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं।
माँ भारती के चरणों में व हिंदू धर्म रक्षण में एक योगदान।

जय श्री राम......
Dr. Harish Rautela
विवेक सिंह

24/07/2021

अपने खोये वैभव को प्राप्त करने के लिए पहले पुराना इतिहास जानना जरूरी है। आइये जानें
Dr. Harish Rautela

श्रावण मास में मनाये जाने वाला हरेला सामाजिक रूप से अपना विशेष महत्व रखता हैं तथा समूचे उत्तराखण्ड राज्य में अति महत्वपू...
16/07/2021

श्रावण मास में मनाये जाने वाला हरेला सामाजिक रूप से अपना विशेष महत्व रखता हैं तथा समूचे उत्तराखण्ड राज्य में अति महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक माना जाता है।
आए सभी साथ मिलकर हरेला को वैश्विक त्यौहार के रूप में मनाये और अपने पर्यावरण एवं पृथ्वी को बचाए।
Dr. Harish Rautela

वृंदावन का रंगजी मंदिर-183 साल से बारिश की बूंदों को सहेजने का सफरजमीन की कोख से पानी का बेहिसाब दोहन करने से हालात बिगड...
07/07/2021

वृंदावन का रंगजी मंदिर-183 साल से बारिश की बूंदों को सहेजने का सफर
जमीन की कोख से पानी का बेहिसाब दोहन करने से हालात बिगड़े है । भविष्य की चिंता में वर्तमान समय में बारिश की बूंदों का संचयन करने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन वृंदावन का रंगजी मंदिर प्रबंधन काफी पहले ही जल संकट को लेकर सचेत हो गया थ।
यहाँ 183 साल पहले ही बारिश की बूंदों को सहेजने का काम शुरू हो गया थ। मंदिर के विशाल पुष्करणी सरोवर (तालाब) में बारिश का पानी एकत्र किया जाता ह।
दक्षिण भारतीय संस्कृति के रंग जी मंदिर का वर्ष 1833 में निर्माण शुरू हुआ था,करीब पांच साल में विशाल मंदिर बनकर तैयार हु। खास बात यह है की मंदिर निर्माण के साथ यहां बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए ही 100 मीटर लंबा और इतना ही चौड़ा पुष्कर्णी का निर्माण भी हुआ थ। बारिश के दिनों में पूरे मंदिर का पानी पुष्कर्णी में ही जाता ह।
25 बीघा में छोटे-बड़े 13 मंदिर
25 बीघा क्षेत्रफल में बने रंगजी मंदिर परिसर में छोटे बड़े 13 मंदिर ह। पूजन के दौरान मंदिर में इस्तेमाल होने वाला पानी भी पुष्कर्णी में ही जाता ह।पुष्कर्णी में तीन कुँए है,प्रत्येक की गहराई 100 मीटर बताई जाती ह। बारिश का पानी पुष्कर्णी से इन कुओं के जरिए भूगर्भ में जाता ह। समय-समय पर पुष्कर्णी की सफाई होती है,ताकि गंदा पानी भूगर्भ में ना जा।
इसलिए मंदिर को कहा जाता है दिव्यदेश
पुराणों में भगवान नारायण के लोक को दिव्यदेश की संज्ञा दी गई ह। दिव्यदेश की पहचान पांच प्रमुख स्तंभों से होती है,यह रंगजी मंदिर में स्थापित ह। इनमें गरुड़ स्तंभ, गोपुरम, पुष्कर्णी, पुष्प उद्यान और गौशाला होना अनिवार्य ह। उत्तर भारत का ये पहला दिव्यदेश ह।
25 तिरुमाली,हर मकान में कुआं
मंदिर परिसर में 25 तिरुमाली (मकान) बने है। एक मकान में प्रबंधन से जुड़े पुजारियों आदि के 4 परिवार रहते है। प्रत्येक मकान में एक कुआं भी है जिसके पानी का इस्तेमाल परिवार करता है।
183 साल पहले ही रंगजी मंदिर में बारिश के पानी को सहेजने का काम शुरू हुआ थ। नियमित देखरेख के चलते पुष्कर्णी का जल इतना साफ है कि उसे दैनिक उपयोग में भी ला सकते है।
Dr. Harish Rautela

End of an era. Flying Sikh Milka Singh is no more.
19/06/2021

End of an era.
Flying Sikh Milka Singh is no more.

“ हमारे चारों ओर सहस्र मानव हैं, जो भूखे एवं निराश्रित हैं, जो जीवन की निम्नतम आवश्यकताओं से भी वंचित हैं ; उनकी कष्ट कथ...
07/06/2021

“ हमारे चारों ओर सहस्र मानव हैं, जो भूखे एवं निराश्रित हैं, जो जीवन की निम्नतम आवश्यकताओं से भी वंचित हैं ; उनकी कष्ट कथाएँ पाषाण समान कठोर हृदयों को भी पिघला देती हैं। निश्चित ही वह ईश्वर है, जिसने गरीब, निराश्रित व पीड़ित का रूप धारण किया है, अतः अपने समाज के प्रत्येक परिवार को कम से कम एक दुःखी बंधु को आश्रय देने का निश्चय करना चाहिए। अपने समाज के किसी साधनहीन बंधु को गले लगाकर उसे अपने परिवार का एक सदस्य जैसा स्वीकार कर उसके रहने-खाने व शिक्षण की व्यवस्था करने का दायित्व हमें स्वीकार करना चाहिए।” - माधव सदाशिव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’

.Harish Rautela

बाबा केदारनाथ जी के कपाट खुले ।बाबा हम सभी का कल्याण करें ।हर हर महादेव!!
17/05/2021

बाबा केदारनाथ जी के कपाट खुले ।बाबा हम सभी का कल्याण करें ।
हर हर महादेव!!

माँ भारती के अमर सपूत, अद्वितीय योद्धा, निडरता, साहस, पराक्रम एवं बलिदान के प्रतीक पुरुष, स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति, कुशल...
09/05/2021

माँ भारती के अमर सपूत, अद्वितीय योद्धा, निडरता, साहस, पराक्रम एवं बलिदान के प्रतीक पुरुष, स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति, कुशल नेतृत्वकर्ता, भारत के महानायक महाराणा प्रताप जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।

मातृभूमि के लिए आपका त्याग और बलिदान राष्ट्र के लिए अप्रतिम प्रेरणा है।

टीका उत्सव पर देशवासियों से आग्रह।Dr. Harish Rautela
11/04/2021

टीका उत्सव पर देशवासियों से आग्रह।
Dr. Harish Rautela

मातृभूमि की  निःस्वार्थ-समर्पित राष्ट्र सेवा के प्रतीक, विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे...
01/04/2021

मातृभूमि की निःस्वार्थ-समर्पित राष्ट्र सेवा के प्रतीक, विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे वटवृक्ष की नींव रखने वाले परम श्रद्धेय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन ।

Slow suffocation will sound the death knell of our Temples. When Temples were demolished in the past, people committed t...
30/03/2021

Slow suffocation will sound the death knell of our Temples. When Temples were demolished in the past, people committed their lives to building them back. . Community cannot be bystanders to Life ebbing away from its own Soul. -Sadhguru

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पर्व और त्योहार हम सभी की खुशहाली का आधार बनें, हर्ष और उमंग का माध्यम बनें। यह हर्ष और उमंग केवल विशिष्ट आयोजन तक ही सी...
28/03/2021

पर्व और त्योहार हम सभी की खुशहाली का आधार बनें, हर्ष और उमंग का माध्यम बनें।
यह हर्ष और उमंग केवल विशिष्ट आयोजन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसे हमारे जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।
होलिका पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!!

क्षत्रिय धर्म!!
18/03/2021

क्षत्रिय धर्म!!

फूलदेई : उत्तराखंड का एक लोकपर्व और बसन्त ऋतु के स्वागत का त्यौहारउत्तराखण्ड यूं तो देवभूमि के नाम से दुनिया भर में जाना...
14/03/2021

फूलदेई : उत्तराखंड का एक लोकपर्व और बसन्त ऋतु के स्वागत का त्यौहार

उत्तराखण्ड यूं तो देवभूमि के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है। इस प्रदेश की एक ये खासियत है कि जटिल परिस्थितियों के बाद भी यहां के लोग अपने लोक पर्वों को मनाना भी नहीं भूलते। ये लोक त्यौहार किसी ना किसी रुप में प्रकृति से जुड़े होते हैं। प्रकृति ने जो उपहार उन्हें दिया है, उसके प्रति आभार लोक त्यौहार मना कर चुकाने का प्रयास करते हैं। फूलदेई भी प्रकृति को आभार प्रकट करने वाला त्यौहार है। चैत्र मास की संक्रान्ति को फूलदेई के रुप में मनाया जाता है। जो बसन्त ऋतु के स्वागत का प्रतीक है। प्रकृति को आभार प्रकट करने वाला लोकपर्व है ‘फूलदेई’ चैत के महीने की संक्रांति को, जब ऊंची पहाड़ियों से बर्फ पिघल जाती है, सर्दियों के मुश्किल दिन बीत जाते हैं, उत्तराखंड के पहाड़ बुरांश के लाल फूलों की चादर ओढ़ने लगते हैं, तब पूरे इलाके की खुशहाली के लिए फूलदेई का त्योहार मनाया जाता है। सर्दी और गर्मी के बीच का खूबसूरत मौसम, फ्यूंली, बुरांश और बासिंग के पीले, लाल, सफेद फूल और बच्चों के खिले हुए चेहरे… ‘फूलदेई’ से यही तस्वीरें सबसे पहले ज़ेहन में आती हैं। नए साल का, नई ऋतुओं का, नए फूलों के आने का संदेश लाने वाला ये त्योहार गांवों और कस्बों में मनाया जाता है।
इस दिन घर गांव के छोटे-छोटे बच्चे सुबह-सुबह जंगली फूल और फलों को चुनकर लाते हैं औऱ फिर एक थाली या टोकरी में इनको सजाकर इनके साथ चावल और नारियल आदि लेकर हर घर की देहरी पर लोकगीत को गाते हुए देहरी की पूजा करते हैं। जिसके फलस्वरुप घर का मुखिया उनको चावल, आटा या अन्य कोई अनाज और दक्षिणा देकर विदा करता है। इस दिन से लोकगीतों के गायन का अंदाज भी बदल जाता है, होली के फाग की खुमारी में डूबे लोग चैती गायन में डूब जाते हैं। ऋतुराज बसंत प्राणी मात्र के जीवन में नई उमंग लेकर आता है। पेड़ों पर नई कोपलें और डालियों पर तरह-तरह के फूल भी इसी मौसम में खिलते हैं। बसंत के इसी उल्लास को घर-घर बांटने की ये एक अनूठी परंपरा है। ये त्योहार आमतौर पर किशोरी लड़कियों और छोटे बच्चों का पर्व है।
फूल देई, छम्मा देई,
देणी द्वार, भर भकार,
ये देली स बारम्बार नमस्कार,
फूले द्वार…फूल देई-छ्म्मा देई
फूलदेई से जुड़ी हैं कई लोककथाएं फूलदेई त्योहार में एक द्वारपूजा के लिए एक जंगली फूल का इस्तेमाल होता है, जिसे फ्यूली कहते हैं। इस फूल और फूलदेई के त्योहार को लेकर उत्तराखंड में कई लोक कथाएं मशहूर हैं। जिनमें से एक लोककथा कुछ यूं है-
एक वनकन्या थी, जिसका नाम था फ्यूंली। फ्यूली जंगल में रहती थी। जंगल के पेड़ पौधे और जानवर ही उसका परिवार भी थे और दोस्त भी। फ्यूंली की वजह से जंगल और पहाड़ों में हरियाली थी, खुशहाली। एक दिन दूर देश का एक राजकुमार जंगल में आया। फ्यूंली को राजकुमार से प्रेम हो गया। राजकुमार के कहने पर फ्यूंली ने उससे शादी कर ली और पहाड़ों को छोड़कर उसके साथ महल चली गई। फ्यूंली के जाते ही पेड़-पौधे मुरझाने लगे, नदियां सूखने लगीं और पहाड़ बरबाद होने लगे। उधर महल में फ्यूंली ख़ुद बहुत बीमार रहने लगी। उसने राजकुमार से उसे वापस पहाड़ छोड़ देने की विनती की, लेकिन राजकुमार उसे छोड़ने को तैयार नहीं था…और एक दिन फ्यूंली मर गई। मरते-मरते उसने राजकुमार से गुज़ारिश की, कि उसका शव पहाड़ में ही कहीं दफना दे। फ्यूंली का शरीर राजकुमार ने पहाड़ की उसी चोटी पर जाकर दफनाया जहां से वो उसे लेकर आया था। जिस जगह पर फ्यूंली को दफनाया गया, कुछ महीनों बाद वहां एक फूल खिला, जिसे फ्यूंली नाम दिया गया। इस फूल के खिलते ही पहाड़ फिर हरे होने लगे, नदियों में पानी फिर लबालब भर गया, पहाड़ की खुशहाली फ्यूंली के फूल के रूप में लौट आई। इसी फ्यूंली के फूल से द्वारपूजा करके लड़कियां फूलदेई में अपने घर और पूरे गांव की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।

भगवान भोलेनाथ की पावन आराधना को समर्पित 'महाशिवरात्रि' के पर्व की आपको अनंत शुभकामनाएं।देवाधिदेव महादेव की कृपा से आपके ...
11/03/2021

भगवान भोलेनाथ की पावन आराधना को समर्पित 'महाशिवरात्रि' के पर्व की आपको अनंत शुभकामनाएं।
देवाधिदेव महादेव की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और सद्भाव का वास हो।
समस्त जगत का कल्याण हो।

हर हर महादेव!!

28/02/2021

*"हिंदुस्तान ही खालिस्तान है" और "सारा खालिस्तान ही हिंदुस्तान है"* डॉ इंद्रेश कुमार

पंजाब के Nangal (नंगल) और लुधियाना ' में कुछ कार्यक्रम थे । प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान वहां आमंत्रित मुख्य अतिथि से खालिस्तान समर्थक एक बंधु ने तीख़ा प्रश्न करते हुए कहा- खालिस्तान की मांग पर आप (हिन्दुओं) को क्या कहना है?

मुख्य अतिथि ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया :-

जब देश को और धर्म को आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत शीश देने वाले वीरों की आवश्यकता थी तब "पिता दशमेश" गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने "ख़ालसा पंथ" का सृजन करते हुए "संत-सिपाही" परंपरा की नींव डाली थी जिसमें हर जाति, वर्ण और क्षेत्र के लोग शामिल हुए ताकि धर्म बच सके। यानि खालसा पंथ लोगों को समाज को और राष्ट्र को जोड़ने के लिए आया था लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोगों ने इस पवित्र शब्द का दुरूपयोग कर इस शब्द का प्रयोग भारत को तोड़ने के लिए और लोगों को बांटने के लिए इस्तेमाल किया और नाम दिया "खालिस्तान"।

तो ऐसा करने वालों को ये जरूर सोचना चाहिए कि वो "दशम पातशाह" की शिक्षाओं का अनुकरण कर रहे हैं या उसके विपरीत जा रहे हैं? उन्हें ये जरूर सोचना चाहिए कि उनके आचरण से पवित्र "खालसा" शब्द शोभित हो रहा है अथवा इस पवित्र शब्द दुरूपयोग हो रहा है?

इसके बाद उन्होंने प्रश्न करने वाले से कहा-

सतगुरु "नानक देव जी" की प्राकट्य स्थली 'तलवंडी साहिब' वर्तमान पाकिस्तान में है, चतुर्थ पातशाही "गुरु रामदास जी" की प्राकट्य स्थली चूना मण्डी, लाहौर में है और वह भी दुर्भाग्य से आज पाकिस्तान में आता है। दशम पातशाह "गुरु गोविंद सिंह जी" का प्रकाश बिहार के पटना साहिब में हुआ था तो जहाँ तक खालिस्तान का ही प्रश्न है तो मुझे आपसे इतना पूछना है कि जो खालिस्तान आप मांग रहे हो उसमें हमारे गुरुओं की ये प्राकट्य स्थली शामिल होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए?

प्रश्न पूछने वाला मौन था तो इन्होंने आगे कहा-

"करतारपुर साहिब" जहाँ गुरु नानक देव जी ज्योति-जोत में समाये थे वो आज पाकिस्तान में हैं, पंचम "गुरु अर्जुन देव" जी ने 'लाहौर' में शरीर छोड़ा था और दशम पातशाह "गुरु गोविंद सिंह जी" महाराज 'नांदेड़ साहिब', महाराष्ट्र में ज्योति-ज्योत में समाये थे। मुझे आपसे इतना ही पूछना है कि जो खालिस्तान आप मांग रहे हो उसमें हमारे गुरुओं के ज्योति-ज्योत में समाने की ये स्थली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए?

प्रश्नकर्ता मौन था तो उन्होंने आगे कहा-

"दशमेश पिता" ने जब "खालसा "सजाया था तो शीश देने जो पंच प्यारे आगे आये थे उनमें से एक 'भाई दयाराम' थे जो लाहौर से थे, दूसरे मेरठ के 'भाई धरम सिंह जी' थे, तीसरे जगन्नाथपुरी, उड़ीसा के 'हिम्मत सिंह जी' थे, चौथे द्वारका, गुजरात के युवक 'मोहकम चन्द जी' थे और पांचवें कर्नाटक के बीदर से भाई 'साहिब चन्द सिंह' जी थे तो मेरा प्रश्न ये है कि उस खालिस्तान के अंदर इन पंच प्यारों की जन्म-स्थली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए?

प्रश्न पूछने वाला मौन था तो उन्होंने आगे कहा-

सिख धर्म के अंदर 5 तख्त बड़ी महत्ता रखते हैं, इनमें से एक तख्त श्री पटना साहिब में है जो बिहार की राजधानी पटना शहर में स्थित है। 1666 में "गुरु गोबिंद सिंह जी" महाराज का यहाँ प्रकाश हुआ था और आनंदपुर साहिब में जाने से पहले उन्होंने यहाँ अपना बचपन यहाँ बिताया था और लीलाएं की थी। इसके अलावा पटना में गुरु नानक देव जी और गुरु तेग बहादुर जी के भी पवित्र चरण पड़े थे। एक और तख़्त श्री हजूर साहिब महाराष्ट्र राज्य के नांदेड़ में है। तो मेरा प्रश्न ये है कि ये सब पवित्र स्थल आपके खालिस्तान में होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए?

इतना कहने के बाद भी वो रुके नहीं और आगे कहा-

महाराजा रणजीत सिंह ने जिस विशाल राज्य की स्थापना की था उसकी राजधानी लाहौर थी। उनके महान सेनापति हरिसिंह नलवा की जन्म स्थली और शरीर त्याग स्थली दोनों ही आज के पाकिस्तान में है, इसके अलावा अनगिनत ऐसे संत जिनका बाणी पवित्र श्री गुरुग्रंथ साहिब में है वो सब भारत के अलग-अलग स्थानों में जन्में थे तो मेरा प्रश्न है कि आपके इस खालिस्तान में ये सब जगहें आनी चाहिए कि नहीं आनी चाहिए?

प्रश्नकर्ता जब तिलमिलाकर रह जाने के सिवा कुछ कह न सका तो उन्होंने उससे कहा-

इन सारे प्रश्नों के उत्तर तभी मिल सकते हैं और ये सारे ही स्थल तभी खालिस्तान के अंदर तभी आ सकते हैं जब आप और मैं ये मानें कि सारा "हिंदुस्तान ही खालिस्तान है" और "सारा खालिस्तान ही हिंदुस्तान है"। मान लो अगर आपने खालिस्तान ले भी लिया तो क्या इन जगहों पर वीजा और पासपोर्ट लेकर आओगे जो आज तुम्हारे अपने है? आप तो बड़े छोटे मन के हो जो इतने से खालिस्तान मांग कर खुश हो रहे हो और मैं तो आपको खालिस्तान में पूरा अखंड हिंदुस्तान दे रहा हूँ। है हिम्मत मेरे साथ ये आवाज़ उठाने की?

वो कसमसाकर रह गया और पूरी सभा-स्थली तालियों से गूँज उठी। सरस्वती को अपने कंठ में धारण करने वाले ये प्रमुख वक्ता थे संघ प्रचारक "इन्द्रेश कुमार" जो संभवत: इस्लाम के चौदह सौ सालों के इतिहास में पहले गैर-मुस्लिम हैं जो उनकी आँखों में आँखे डालकर सच कहने का साहस रखते हैं। वो जब जहर से भरे नव-बौद्ध और अनूसूचित जाति और जनजाति समाज के बीच बोलते है तो उनके भाषण के बाद उसके नाम के जयकारे लगने लगते हैं, वो जब बौद्ध-जैन और सिख समाज से संवाद करते है तो उन्हें सुनने वाले को लगता ही नहीं कि वो हिंदुत्व की मूल धारा से ज़रा भी अलग हैं।

किसी को गाली दिए बिना, उकसाए बिना, चिढ़ाए बिना, अपमानित किये बिना सत्य कहने का हौसला और हुनर मुझे इसी पुण्यात्मा से मिला है।
🙏🙏

गोधरा के राम भक्त कारसेवक अमर हुतात्माओं को कोटिशः नमन्...
27/02/2021

गोधरा के राम भक्त कारसेवक अमर हुतात्माओं को कोटिशः नमन्...

ऑस्ट्रेलिया के गोरे लोगो में भी जगाया प्रभु श्रीराम के लिए समर्पण भाव..सुखपर तालुका भुज के युवा स्वयंसेवक आनंद कतीरा व्य...
26/02/2021

ऑस्ट्रेलिया के गोरे लोगो में भी जगाया प्रभु श्रीराम के लिए समर्पण भाव..
सुखपर तालुका भुज के युवा स्वयंसेवक आनंद कतीरा व्यवसाय के लिए कुछ वर्षो पहले ऑस्ट्रेलिया के एड़ीलेड सिटी मे रहने गए है और अभी वहां अपनी शॉप चलाते है
श्रीराम जन्मभूमि मंडूर निर्माण के लिए उनके परिवार ने 550000(साड़े पांच लाख ) का अमूल्य
समर्पण करने के बाद सोचा की शॉप पे खरीदी करने आते स्थानिय गोरो क़ो भी इस पवित्र कार्य का सहभागी बनाना चाहिए, दूसरे ही दिन आनंद भाई ने श्रीराम के नाम से बोर्ड बनाकर समर्पण पेटी दुकान के टेबल पर रख दिया..
जो भी कस्टमर आते उनको संक्षेप मे अयोध्या राम मंदिर की महत्ता बताते और 500 साल का इतिहास समझाते, साथ ही अब जो भव्य मंदिर बन रहा है उसमे आर्थिक सहायता के लिए 135 करोड़ नागरिकों का कैसे अभियान चल रहा है उसकी पर विस्तार से जानकारी देते और जब मंदिर बन जाये तब भारत आके दर्शन करने का निमंत्रण भी देते है !
इतने बड़े और लम्बे संघर्ष के बाद मिले भव्य विजय की गाथा सुनकर भावविभोर हुए गोरो ने दानपेटी मे अपना यथाशक्ति अपना समर्पण देते रहते, तीन चार दिन बाद दानपेटी खोली तो ऑस्ट्रेलिया के डॉलर जो भारतीय रुपयो मे 75,500/-रुपए जो तुरंत ही भारत निधि समर्पण समिति क़ो भेज दिये,

भावार्थ :RSS जैसे संगठन के सात्विक विचार बीज क़ो साथ लेकर गये व्यक्तिगत रुप से भले ही दुनिया के किसी भी कोने मे रहे परन्तु वो वहां अपनी जन्मभूमि के प्रति समर्पित ही रहता है साथ मे स्वयं की मातृभूमि और संस्कार क़ो कभी नहीं भूलेगा
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