11/10/2023
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बृज प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला की सलाह का अनुसरण करते हुए जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद) खासकर तत्कालीन पार्षद आशीष पाराशर ने जो किया, फिर वह वाकई मिसाल बन गया ।
आगरा शहर के एक हिस्से में लाखों लोगों को बड़ा राहत मिल गई। जो स्थान कभी शौचघर, कूड़ाघर, शराबी और जुआरियों का अड्डा के रूप में कुख्यात था, वहां अब “सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम” बन गया। ऐसा मोक्षधाम जो ताजगंज मोक्षधाम से भी विशाल है। आगरा का ऐसा दूसरा मोक्षधाम है, जहां विद्युत शवदाह गृह भी है। एक बड़ी बात यह भी है कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है, जो ताजगंज मोक्षधाम में संभव नहीं है।
आगरा के शाहगंज में मल्ल का चबूतरा (मल्ल का चौंतरा) पर करीब एक हजार साल प्राचीन श्मशान घाट है। श्मशान घाट तो नाम का था, वास्तव में यह इसका उपयोग शौच करने और कूड़ा फेंकने के लिए किया जा रहा था। जिनके पास ताजगंज मोक्षधाम जाने का साधन नहीं है, वे मल्ल का चबूतरा श्मशान घाट पर प्रियजन का अंतिम संस्कार करने के लिए विवश थे। जहां भी पैर रखो, वहीं पर शौच। नशेड़ियों का जमावड़ा। समाधियों पर बैठकर लोग जुआ खेलते थे।
अब यहां सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम का विशाल द्वार है। स्थान चमन हो गया है। कच्चा नाला पक्का बन गया है। बीच में सीमेंट की सड़क बन गई है। हरियाली है। पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री डॉ. अरुण सक्सेना ने किया। पौधा लगाने वालों की नाम पट्टिका लगी हुई है। पूर्वजों की समाधि बनाने के स्थान पर उनकी स्मृति में पौधा लगाने का आह्वान संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला ने किया है जो लोगो को अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रोहत्साहित करेगा व् समाज के काम आएगा ।
सतसंग भवन का उद्घाटन 15 नवम्बर, 2022 को किया गया । उद्घाटन के समय महापौर नवीन जैन और संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला मौजूद थे। यहां उठावनी, बैठक, सत्संग जैसे कार्यक्रम होने शुरू हो गए हैं। मोक्षधाम के जीर्णोद्धार की कहानी भी चित्रों में दर्शित है।
मोक्षधाम में कार्यालय, दुकान, व जनसुविधा निर्माण कार्य और विद्युत शवदाह गृह का लोकार्पण 15 नवम्बर, 2022 को किया गया। इसमें ताजगंज की तरह पूरी व्यवस्था है। विद्युत शवदाह गृह नवदुर्गा के बाद चालू हो जाएगा। लकड़ी की टाल शुरू होनी है। खंडहर हो चुके पुराने निर्माण को तोड़कर फूल रखने का स्थान बनाया जाना प्रस्तावित है
यह सब ऐसे ही नहीं हो गया। चार वर्ष का अथक परिश्रम है। कुछ चेहरे पर्दे के सामने रहे तो अधिकांश पर्दे के पीछे। तब जाकर मल्ल का चबूतरा श्मशान घाट को सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम का रूप दिया जा सका। आज यह ऐसा स्थान, जहां लोग प्रातःकाल भ्रमण के लिए आते हैं। एक समय वह भी था जब नाक पर रूमाल रखकर निकलते थे। यह ऐसी कहानी है जो प्रत्येक जनप्रतिनिधि के लिए प्रेरणादायी है कि अपने 5 साल के कार्यकाल में कोई ऐसा काम कर जाएं जो सदा याद रहे।
कोरोना महामारी का प्रकोप कम होते ही 26 जून, 2021 को संघ के क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी ने सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र मोक्षधाम के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया। समारोह में महापौर नवीन जैन, सांसद एसपी सिंह बघेल, प्रान्त प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला, प्रांत प्रचार प्रमुख केशव शर्मा आदि उपस्थित रहे। संकल्प लिया कि नगर निगम और समाज के सहयोग से मोक्षधाम का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
जीर्णोद्धार का शिलान्यास तो हो गया लेकिन शवदाह स्थल के पास बनी 120 से अधिक पक्की समाधियां कार्य में बाधा बनकर खड़ी हो गईं। समाधि बनाने वालों से संपर्क किया गया। उन्हें समझाया गया और समाधि स्थानांतरित करने पर राजी किया गया।
नगर निगम के माध्यम से सफई अभियान चलाया तो 100 से अधिक ट्रक कूड़ा निकला। सबसे बड़ी समस्या यहां अतिक्रमण थे, अतिक्रमण हटा दिए गए। चारदीवार बनाई गई ताकि फिर से अतिक्रमण न हो सके। मोक्षधाम का विकास पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के आधार पर हुआ है
संघ के बृज प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश रौतेला ने श्मशान घाट का नामकरण किया – “सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम” साथ ही उन्होंने समाधि बनाने के स्थान पर पूर्वजों की याद में एक पौधा रोपने का सुझाव दिया, जो चल रहा है। एक मंदिर व नवगृह वाटिका बनाने बनाई जाएगी ।
सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम परियोजना का सामाजिक संदेश है। वह यह कि अगर कोई कुछ करने की ठान ले, निःस्वार्थ भाव के साथ प्राण-प्रण से जुट जाए तो सफलता मिलती है। इस कार्य में मेहनत इतनी खामोशी से की गई कि सफलता ने शोर मचा दिया है। मतलब अगर ठान लिया जाए तो मुश्किल कुछ भी नहीं है। यह काम करने वाले श्रेय नहीं लेना चाहते हैं।
सत्यवादी राजा हरिश्चंद मोक्षधाम परियोजना में पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे डॉ. हरीश रौतेला से पूछा तो उन्होंने कहा कि समाज काम करता है। फिर उन्होंने इन पंक्तियों के माध्यम से पूरी बात कह दी-
सूरज हमें रौशनी देता, हवा नया जीवन देती है,
भूख मिटने को हम सबकी, धरती पर होती खेती है ।
औरों का भी हित हो जिसमें, हम ऐसा कुछ करना सीखें,
देश हमें देता है सबकुछ हम भी तो कुछ देना सीखें।
डॉ भानु प्रताप सिंह की कलम से…..
Dr. Harish Rautela