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अखिल भारतीय परिवार पार्टी Let's strengthen democracy together in this direction Akhil Bharatiya Parivar Party welcomes all tho

03/10/2023
साथियों आज गांधी जयंती है आइए इस पावन पर्व पर हम यह प्रण लें कि हम जीवन को सच्चाई विनम्रता और करुणा के साथ जिएंगे। आशा ह...
02/10/2023

साथियों आज गांधी जयंती है आइए इस पावन पर्व पर हम यह प्रण लें कि हम जीवन को सच्चाई विनम्रता और करुणा के साथ जिएंगे। आशा है गांधी जी के सिद्धांतों का पालन करते हुए हम शांतिपूर्ण एवं सामंजस्य पूर्ण जीवन की ओर अग्रसर होंगे। आइए थोड़ा समझने का प्रयास करें कि गांधी आज भी महत्वपूर्ण क्यों है?

वर्तमान अस्थिरता के दौर में जहाँ एक ओर महामारी लोगों को हताश और बेहाल किये हुए है वहीं दूसरी ओर इसके आर्थिक परिणाम भी लोगों को भविष्य के प्रति आशंकित किये हुए हैं। कभी मणिपुर जैसे कांड लोगों को मानवीय मूल्यों पर चिंतन हेतु विवश करते हैं तो गरीबी, महंगाई एवं बेरोजगारी जैसे मसले समाज को झकझोरते हैं। आज संपूर्ण विश्व बाज़ारवाद के दौड़ में शामिल हो चुका है। लालच की परिणति युद्ध की सीमा तक चली जाती है। ऐसे में गांधीवाद की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक हो जाती है। तो क्या गांधीवाद को अपनाने के लिये हमें टोपी या धोती पहनने की जरूरत है या फिर ब्रह्मचर्य अपनाने या फिर घृणा करने की आवश्यकता है? नहीं, इनमें से कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि घृणा को दूर करने के लिये गांधीवाद को अपनाने की जरूरत है।

अब प्रश्न यह उठता है कि यह गांधीवाद है क्या? किसी भी शोषण का अहिंसक प्रतिरोध, सबसे पहले दूसरों की सेवा, संचय से पहले त्याग, झूठ के स्थान पर सच, अपने बजाय देश और समाज की चिंता करना आदि विचारों को समग्र रूप से गांधीवाद की संज्ञा दी जाती है। आज के दौर में जब समाज में कल्याणकारी आदर्शों का स्थान असत्य, अवसरवाद, धोखा, चालाकी, लालच व स्वार्थपरता जैसे संकीर्ण विचारों द्वारा लिया जा रहा है तो समाज सहिष्णुता, प्रेम, मानवता, भाईचारे जैसे उच्च आदर्शों को विस्तृत करता जा रहा है। विश्व शक्तियाँ शस्त्र एकत्र करने की स्पर्धा में लगी हुई है लेकिन एक छोटे से वायरस को हरा पाने में असमर्थ और लाचार साबित हो रही है। ऐसे में विश्व शांति की पुनर्स्थापना के लिये, मानवीय मूलों को पुन: प्रतिष्ठित करने के लिये आज गांधी को नए स्वरूप में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो उठा है।

गांधी जी धर्म व नैतिकता में अटूट विश्वास रखते थे। उनके लिये धर्म, प्रथाओं व आंडबरों की सीमा में बंधा हुआ नहीं वरन् आचरण की एक विधि थी। गांधी जी के अनुसार, धर्मविहीन राजनीति मृत्युजाल है, धर्म व राजनीति का यह अस्तित्व ही समाज की बेहतरी के लिये नींव तैयार करता है। गांधी जी साधन व साध्य दोनों की शुद्धता पर बल देते थे। उनके अनुसार साधन व साध्य के मध्य बीज व पेड़ के जैसा संबंध है एवं दूषित बीज होने की दशा में स्वस्थ पेड़ की उम्मीद करना अकल्पनीय है।

गांधीवादी दर्शन न केवल राजनीतिक, नैतिक और धार्मिक है, बल्कि पारंपरिक और आधुनिक तथा सरल एवं जटिल भी है। यह कई पश्चिमी प्रभावों का प्रतीक है, जिनको गांधीजी ने उजागर किया था, लेकिन यह प्राचीन भारतीय संस्कृति में निहित है तथा सार्वभौमिक नैतिक और धार्मिक सिद्धांतों का पालन करता है। गांधीजी ने ‘सर्वोदय’ के सिद्धांत को ग्रहण किया और उसे जीवन में उतारा।

गांधीजी ने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ छुआछूत उन्मूलन, हिन्दू-मुस्लिम एकता, चरखा और खादी को बढ़ावा, ग्राम स्वराज का प्रसार, प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा और परंपरागत चिकित्सीय ज्ञान के उपयोग सहित तमाम दूसरे उद्देश्यों पर कार्य करना निरंतर जारी रखा। सत्य के साथ गांधीजी के प्रयोगों ने उनके इस विश्वास को पक्का कर दिया था कि सत्य की सदा विजय होती है और सही रास्ता सत्य का रास्ता ही है। आज मानवता की मुक्ति सत्य का रास्ता अपनाने से ही है। गांधी जी सत्य को ईश्वर का पर्याय मानते थे। गांधीजी का मत था कि सत्य सदैव विजयी होता है।

और अगर मनुष्य का संघर्ष सत्य के लिये है तो हिंसा का लेशमात्र उपयोग किये बिना भी वह अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकता है।

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 #युवाओं, आपने अवश्य सुना होगा, "जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर ज़माना चलता है"।अखिल भारतीय परिवार पार्टीएक सकारात्मक राजनी...
20/09/2023

#युवाओं,
आपने अवश्य सुना होगा, "जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर ज़माना चलता है"।
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एक सकारात्मक राजनीतिक मंच है,जो आपके लिए स्वस्थ, सुदृढ़ और प्रगतिशील "भारत निर्माण" के सपनों को साकार करने में सहायक हो सकता है। राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने के माध्यम से, आप देश को अपनी आवाज़ सुना सकते हो और आप अपने विचारों को क्रियान्वित कर सकते हो। आप देशहित के लिए अद्वितीय क्षमता रखते हो।

तो उठो, अपने सकारात्मक "भारत नवनिर्माण" के सपनों को हकीकत में बदलो। आप देश को बताईए कि आप क्या करना चाहते हैं और आपका योगदान उसे बेहतर बनाने में कैसे मदद कर सकता है।
सांसद, विधायक, अथवा पार्षद के रूप में वास्तविक देशसेवा करना चाहते हैं तो अखिल भारतीय परिवार पार्टी के मंच पर आपका स्वागत है ।

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19/09/2023



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गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाए! आपकी सारी दुख विपत्तियां कट जाए !
श्री गणपति बप्पा जी आपके घर आएं! गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं !

विजय कुमार भारतीय
उत्तराखण्ड अल्मोड़ा
097168 36780

आज इरोड वेंकट रामास्वामी पेरियार का जन्म दिवस है  जिन्हें पेरियार (तमिल में अर्थ -सम्मानित व्यक्ति) नाम से भी जाना जाता ...
17/09/2023

आज इरोड वेंकट रामास्वामी पेरियार का जन्म दिवस है जिन्हें पेरियार (तमिल में अर्थ -सम्मानित व्यक्ति) नाम से भी जाना जाता था, बीसवीं सदी के तमिलनाडु के एक प्रमुख राजनेता थे जो दलित-शोषित व गरीबों के उत्थान के लिए कार्यरत रहे। इसने जातिवादी व गैर बराबरी वाले हिन्दुत्व का विरोध किया जो इसके अनुसार समाज के उत्थान का एकमात्र विकल्प था। पेरियार अपनी मान्यता का पालन करते हुए मृत्युपर्यंत जाति और हिंदू-धर्म से उत्पन्न असमानता और अन्याय का विरोध करते रहे। ऐसा करते हुए उन्होंने लंबा, सार्थक, सक्रिय और सोद्देश्यपूर्ण जीवन जीया था।

यूनेस्को ने अपने उद्धरण में उन्हें ‘नए युग का पैगम्बर, दक्षिण पूर्व एशिया का सुकरात, समाज सुधार आन्दोलन का पिता, अज्ञानता, अंधविश्वास और बेकार के रीति-रिवाज़ का दुश्मन’ कहा.

आईए समझे पेरियार का जीवन दर्शन क्या था:-

"ईश्वर की सत्ता स्वीकारने में किसी बुद्धिमत्ता की आवश्यकता नहीं पड़ती, लेकिन नास्तिकता के लिए बड़े साहस और दृढ विश्वास की जरुरत पड़ती है. ये स्थिति उन्हीं के लिए संभव है जिनके पास तर्क तथा बुद्धि की शक्ति हो." -

जो लोग प्रसिद्धि, पैसा, पद पसंद करते हैं, वे तपेदिक की घातक बीमारी की तरह हैं। वे समाज के हितों के विरोधी हैं।
आज हमें देश के लोगों को ईमानदार और निःस्वार्थ बनाने वाली योजनाएं चाहिए। किसी से भी नफरत न करना और सभी से प्यार करना, यही आज की जरूरत है।

जो लोगों को अज्ञान में रखकर राजनीति में प्रमुख स्थिति प्राप्त कर चुके हैं, उनका ज्ञान के साथ कोई संबंध नहीं माना जा सकता।

हम जोर-शोर से स्वराज की बात कर रहे हैं। क्या स्वराज आप तमिलों के लिए है, या उत्तर भारतीयों के लिए है? क्या यह आपके लिए है या पूंजीवादियों के लिए है?क्या स्वराज आपके लिए है या काला बाजारियों के लिए है? क्या यह मजदूरों के लिए है या उनका खून चूसने वालों के लिए है?

स्वराज क्या है? हर एक को स्वराज में खाने, पहनने और रहने के लिए पर्याप्त होना चाहिए। क्या हमारे समाज में आपको यह सब मिलता है? तब स्वराज कहाँ है?

आइए विश्लेषण करें। कौन उच्च जाति के और कौन निम्न जाति के लोग हैं। जो काम नहीं करता है, और दूसरों के परिश्रम पर रहता है, वह उच्च जाति है। जो कड़ी मेहनत करके दूसरों को लाभ प्रदान करता है, और बोझ ढोने वाले जानवर के समान बिना आराम और खाए-पिए कड़ी मेहनत करता है, उसे निम्न जाति कहा जाता है।

जो ईश्वर और धर्म में विश्वास रखता है, वह आजादी हासिल करने की कभी उम्मीद नहीं कर सकता।

जब एक बार मनुष्य मर जाता है, तो उसका इस दुनिया या कहीं भी किसी के साथ कोई संबंध नहीं रह जाता है।
धन और प्रचार ही धर्म को जिन्दा रखता है। ऐसी कोई दिव्य शक्ति नहीं है, जो धर्म की ज्योति को जलाए रखती है।

धर्म का आधार अन्धविश्वास है। विज्ञान में धर्मों का कोई स्थान नहीं है। इसलिए बुद्धिवाद धर्म से भिन्न है। सभी धर्मवादी कहते हैं कि किसी को भी धर्म पर संदेह या कुछ भी सवाल नहीं करना चाहिए। इसने मूर्खों को धर्म के नाम पर कुछ भी कहने की छूट दी है। धर्म और ईश्वर के नाम पर मूर्खता एक सनातन रीत है।

ब्राह्मणों ने शास्त्रों और पुराणों की सहायता से शूद्रों (वेश्या या रखैल पुत्र) को बनाया है। हमने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है। हमने तालाब खोदे हैं, मंदिरों का निर्माण किया है, धन दान किया है। लेकिन कौन आनंद ले रहा है? केवल ब्राह्मण आनंद ले रहे हैं।

ब्राह्मणों ने हमें हमेशा के लिए शूद्र बनाने की साजिश रची, जिसके परिणामस्वरुप हमें आर्य धर्म द्वारा दास के रूप में बनाया गया है। और अपने उच्च स्तर की सुरक्षा के लिए उन्होंने मंदिरों और देवताओं को बनाया है।

धनी लोग, शिक्षित लोग, व्यापारी और पुरोहित वर्ग जातिप्रथा, धर्म, शास्त्र और ईश्वर से लाभ उठा रहे हैं। इनकी वजह से इनको कोई परेशानी नहीं होती है। इन्हीं सब चीजों से इनका उच्च स्तर बना हुआ है। इस तथ्य को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि इस भारत देश को जाति व्यवस्था द्वारा बर्बाद कर दिया गया है।

हम द्रविड़ियन इस देश के मूल निवासी हैं। हम प्राचीन शासक वर्ग से आते हैं। किन्तु आज हम चौथे वर्ण के अधीन बना दिए गए हैं। क्यों? हमारी इस वर्तमान अपमानजनक स्थिति के लिए हमारे पूर्वज, पुरखे और हमारे राजा ज़िम्मेदार हैं, जिन्होंने शर्मनाक व्यवहार किया था।

जब सभी मनुष्य जन्म से बराबर हैं, तो यह कहना कि अकेले ब्राह्मण ही उच्च हैं, और दूसरे सब नीच हैं, जैसे परिया (अछूत) या पंचम, एकदम बकवास है। ऐसा कहना शातिरपन है। यह हमारे साथ किया गया एक बड़ा धोखा है।

एक धर्म को प्यार को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए। वह हर एक को दूसरों की सहायता करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उसे हर एक को सत्य का सम्मान करना सिखाना चाहिए। दुनिया के लिए ऐसा ही धर्म आवश्यक है, जिसमें ये सारे गुण हों। एक सच्चे धर्म का इसके सिवा कोई अन्य महत्वपूर्ण काम नहीं है।

अगर धर्म यह कहे कि मनुष्य को मनुष्य का सम्मान करना चाहिए, तो हम कोई आपत्ति नहीं करेंगे। अगर धर्म यह कहे कि समाज में न कोई उच्च है और न नीच, तो हम उस धर्म के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे।अगर धर्म यह कहे कि किसी को भी उसकी पूजा करने के लिए कुछ भी खर्च करने की ज़रूरत नहीं है, तो हम उस भगवान का विरोध नहीं करेंगे।

ब्राह्मण आपको ईश्वर के नाम पर मूर्ख बना रहे हैं। वह आपको अन्धविश्वासी बनाता है। वह आपको अस्पृश्य के रूप में निंदा करके बहुत ही आरामदायक जीवन जीता है। वह आपकी तरफ से भगवान को प्रार्थना करके खुश करने के लिए आपके साथ सौदा करता है। मैं इस दलाली के व्यवसाय की दृढ़ता से निंदा करता हूँ और आपको चेतावनी देता हूँ कि इस तरह के ब्राह्मणों पर विश्वास न करें।

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G20 सम्मेलन की सच्चाईG20 की बैठक खत्म हो गई है सरकार ने बरसात के मौसम की तरह हमारा और आपका पैसा भी पानी की तरह बहा डाला ...
16/09/2023

G20 सम्मेलन की सच्चाई

G20 की बैठक खत्म हो गई है सरकार ने बरसात के मौसम की तरह हमारा और आपका पैसा भी पानी की तरह बहा डाला है 990 करोड़ खर्च करने का बजट था लेकिन मोदी सरकार ने 4000 करोड रुपए यानी चार गुना पैसा सिर्फ विलासिता में फूंक डालें । सोने चांदी की थाली नहीं भी होती तब भी विदेशी खाना खा सकते थे लेकिन सरकार का क्या जाता है? अपने चुनावी प्रोपेगेंडा के चक्कर में देश को चूना लगा दिया g20 के 17 बैठके अलग-अलग देश में हो चुके हैं क्या उन 17 देशों ने भी भारत की तरह पैसा पानी की तरह बहा दिया किस देश ने g20 पर अब तक कितना खर्च की G20 की अब तक की बैठकों से आखिर हासिल क्या हुआ जी-20 के देश अपनी ही बैठक में लिए गए निर्णय को आखिर क्यों नहीं मानते. क्या जी-20 केवल बोल-बचन(Show-piece) संगठन बनकर रह गया है?ं

साथियों! पहला सवाल आखिर इस सम्मेलन से देश को क्या मिला? 1000 करोड़ की जगह 4000 करोड़ खर्च करके नरेंद्र मोदी को चेहरा चमकाने का मौका मिला अपनी hordings लगवाने का मौका मिला चुनाव से पहले हवा बनाने का मौका मिला। गोदी मीडिया से अपना महिमामंडन करवाने का बढ़िया मौका मिला फोटो खिंचवाने का मौका मिला । इस g20 सम्मेलन का सबसे दुखद पहलू यह है मोदी सरकार ने गरीबों को पर्दों के पीछे छुपा कर खुद को विकास-पुरुष चक्रवर्ती सम्राट बताया ।लेकिन देश को क्या मिला भारत को मिला खर्च वह भी एक फर्जी बोझ क्योंकि भारत अकेले ऐसे नहीं है जिन्होंने g20 की बैठक करवाई है इससे पहले भी 2008 से लेकर 2022 तक 17 बैठके हो चुकी हैं लेकिन इन देशों ने भारत की तरफ पानी की तरह पैसा नहीं बहाया। पिछली बैठक बाली, इंडोनेशिया में हुई थी इंडोनेशिया ने उस बैठक पर केवल 364 करोड रुपए खर्च किए थे हमने कितना उड़ा दिया 4000 करोड़।

आई समझे हमारे और आपके टैक्स के पैसे को कैसे विलासिता में बहाया गया जब जापान में 2019 में g20 की बैठक हुई थी तो जापान ने g20 पर 2000 करोड रुपए खर्च किए थे 2018 में अर्जेंटीना में जब tG20 की बैठक हुई तो वह भी 931 करोड़ खर्च कर पाया था जब 2017 में जर्मनी में g20 के बैठक हुई थी तो जर्मनी भी 642 करोड रुपए ही खर्च किए रूस ने कितना खर्च किया था 170 करोड रुपए g20 सम्मेलन के लिए जो बजट बनाया वह था 900 करोड रुपए का और खर्च कर डाले 4000 करोड़ रुपये जबकि भारत में g20 सम्मेलन अपने देश की राजधानी में रखा था अब आप सोचिए राजधानी में पहले से ही किसी कूटनीतिक सम्मेलन आयोजित करने का infrastructure पहले से ही मौजूद है आखिर भाजपा ने ₹4000 करोड रुपए कहां फूंक डाले अगर भारत अपनी राजधानी छोड़कर किसी दूसरे शहर जैसे बेंगलुरु हैदराबाद में g20 का सम्मेलन कराता तो लग रहा है मोदी सरकार को IMF या world bank से कर्ज लेना पड़ता।

990 करोड़ की जगह 4000 करोड रुपए खर्च करने को घोटाला नहीं कहा जाएगा?क्या किसी और की सरकार में होता तो यह घोटाला हो सकता था लेकिन बीजेपी सरकार में पैसों की कोई भी misconduct, misuse घोटाला नहीं होती जैसे commonwealth games जब कांग्रेस ने करवाए थे तो आप उसे commonwealth scam कह सकते हैं बेडशीट तकिया टॉयलेट टिशू पेपर आदि को बाजार भाव से ऊपर का बता कर उसे आप घोटाला कर सकते हैं लेकिन लेकिन जब भाजपा सरकार तय सुदा रकम से ज्यादा खर्च करती है तो उसे नहीं उसकी गुणवत्ता बढ़ाना कहते हैं

द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में गड़बड़ झाला 18 करोड़ प्रति किलोमीटर की जगह खर्च कर दिए गए ढाई सौ करोड रुपए प्रति किलोमीटर देश की संवैधानिक संस्था कैग ने कहा कि यह बहुत बड़ा गड़बड़ झाला है यह तो भ्रष्टाचार की अति है लेकिन मोदी सरकार ने कहा कि ऐसा है भैया हमने तो बहुत अच्छी सड़क बनाना है बनाने में बहुत ज्यादा पैसा लग जाता है मजबूत में अंतर कर सके बढ़िया और बहुत बढ़िया का पता लगाने के लिए किसी के पास क्या पैमाना है?

पर प्रश्न यह उठता है जी-20 की बैठक से दुनिया को क्या मिला है दोस्तों G-20 की बैठक के निर्णय किसी काम के नहीं होते। यह लोग Global warming और आर्थिक हालात पर 2008 से चर्चा कर रहे हैं लेकिन क्या आर्थिक हालात सुधर गए और क्या Global warming का कुछ हुआ? G20 के देश कहते हैं कि गर्मी को कम करने के लिए कोयले की ऊर्जा को हमें बंद करना होगा कोयल का इस्तेमाल क्या कोई बंद कर सकता है क्या g20 में कोयले का उपयोग बंद करने की बात कही गई थी लेकिन दोस्तों 2022 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बताया कि दुनिया भर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है इस साल कोयले में निवेश 10% बढ़ाकर डेढ़ सौ अरब डालर होने की उम्मीद है जी-20 की बैठक में जो निर्णय लिए जाते हैं उन निर्णय को मानने के लिए या निभाने के लिए क्या कोई बाध्यकारी व्यवस्था है? अगर गोदी मीडिया या भाजपा सरकार डींग हांके की हमने यह समझौता कर लिया वह समझौता कर लिया तो आप समझ लीजिए की g20 में कोई समझौता होता ही नहीं है केवल बातचीत होती आपस में सहयोग की सहमति बनती है ना तो जी-20 का समूह किसी को सजा दे सकता है ना तो किसी को बाध्य भी कर सकता है। नाटो किसी की पैसों से मदद कर सकता है ना तो न्याय कर सकता है।

2021 में g20 ने एक बड़े टैक्स सुधार का समर्थन किया इसमें हर देश के लिए कम से कम 15% का वैश्विक न्यूनतम कर शामिल था इसने नए नियमों का भी समर्थन किया जिसके तहत अमेजॉन जैसे बड़े-बड़े व्यापारियों को उन देशों में कर का भुगतान करना होगा जहां उनके उत्पादन बेचे जाते हैं। भले ही उनके कार्यालय ना हो Global minimum tax agreement का एक बड़ा कदम है लेकिन अब तक यह लागू नहीं हुआ है। और दिल्ली की बैठक में भी कोई खास सहमति या प्रगति नहीं हो पाई है

तो क्या हम जी-20 की बैठकें गांव की उन पंचायत घरों की बैठकों से तुलना करें जहां पर हमारे बड़े बुजुर्ग जाकर टाइम पास करते हैं? यह पीपल के पेड़ के नीचे वाली टाइम पास वाली चर्चा नहीं है यहां इस चर्चा के लिए 990 करोड़ उड़ाने के लिए सरकार ने तय किए थे लेकिन सरकार ने 4000 करोड़ उड़ा डालें हमारे टैक्स का पैसा सोने चांदी की थाली महंगे होटल मेहमानों को घूमने के लिए किराए पर मंगाई गई 20 लैंबॉर्गिनी उनके किराए के ड्राइवर उनकी ट्रेनिंग में उड़ा दिए गए मोदी जी बड़ा पैसा बचाने पर जोर देते हैं, रेडियो में मान की बात पर बड़ा ज्ञान झाड़ते हैं अपने नेताओं से ही कह देते हैं कि अपनी अपनी रेंज रोवर गाड़ियां दो-दो दिन के लिए सरकारी कार्यक्रमों के लिए उधर दीजिए मेहमान लैंबॉर्गिनी की जगह पर रेंज रोवर से घूम लेते तो क्या उनके शान में गुस्ताखी हो जाती। Security issues तो पहले मोदी की लाल आंखों से हल हो चुके हैं जी-20 हर बार अलग-अलग देश में होता है सरल भाषा में समझे तो आपने 20 दोस्तों को पार्टी दी है हर साल इन 20 दोस्तों में कोई ना कोई दोस्त आपको पार्टी देगा देता रहेगा मतलब कि आपने एक बार 20 को खिलाया बारी बारी 20 दोस्त हर साल नंबर लगाकर आपको पार्टी देते रहेंगे।

g20 की शुरुआत की बात करें तो 2008 में दुनिया recession से आर्थिक मंदी से जूझ रहे थे अमेरिका की आर्थिक हालत बदतर हो गई थी इसलिए अमेरिका में जब इसकी 2008 में पहली बैठक हुई थी तो आर्थिक मामलों पर ही बात हुई थी अमेरिका ने बाकी देशों के साथ भारत से पूछा कि अमेरिका कैसे बर्बाद हो गया है और इसको आबाद कैसे किया जा सकता है? तब मनमोहन सरकार ने अमेरिका को बताया कि कमाई से ज्यादा कर्ज लेना छोड़ दो यही तुम्हारी बर्बादी के लक्षण है की जितनी चादर हो उतना ही पैर फैलाना चाहिए। तब अमेरिका को ज्ञान मिला था और उसने मनमोहन सरकार की कई सुझावों और नीतियों पर अमल भी किया था। और उसका उसको फायदा भी मिला।

इसलिए जब भी आप किसी से पूछेंगे कि g20 की बैठकों में क्या होता है तो वह आपको यही बताया कि आर्थिक मामलों पर चर्चा होती है और पूछने पर यह बताया की ग्लोबल वार्मिंग पर बात होती है g20 बड़े-बड़े देश का संगठन है लेकिन केवल दिखाने के लिए यह लोग कोई निर्णय नहीं ले सकते भारत में g20 में अभी यूक्रेन और रूस के युद्ध के बारे में भी बातचीत हुई लेकिन बात का कोई मतलब नहीं है अंतरराष्ट्रीय अदालत (international court of justice) से "पुतिन" की गिरफ्तारी का वारंट निकला हुआ है क्या g20 "पुतिन" को गिरफ्तार करवा पाएगा बिल्कुल नहीं।

कुल मिलाकर g20 से प्राप्त कुछ नहीं होता बस 20 देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति एक जगह पर मिलकर फोटो खिंचवाते हैं मजे करते हैं और चले जाते हैं

g20 में दुनिया की आर्थिक हालातो के सुधारने की बात होती है लेकिन इक्का दुक्का अपवाद को छोड़कर कोई खास असर दुनिया में हुआ हो ऐसा कभी नहीं देखा जी-20 की बैठक में आप खूब तड़क-भड़क देखेंगे सजावट देखेंगे 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के प्रमुख को देखेंगे एजेंडा तय करना देखेंगे। लेकिन अगर आप गहराई से पड़ताल करेंगे तो अभी तक की-20 से कुछ भी हासिल नहीं हुआ है जलवायु परिवर्तन जैसे मसलों पर पहले समझौते के बाद भी कुछ भी नहीं हुआ g20 के सदस्यों पर कोई बाध्यता नहीं है कि वह जी-20 के मंच पर किए गए अपने वादों को निभाएंगे ही वही g20 के पास भी ऐसा कोई साधन नहीं है जिसके तहत इन बातों को लागू करने के लिए कुछ किया जा सके जैसे United nation में बातचीत होती है चर्चा होती है तो उनके पास धन है उनके पास सी है उनके पास सेना है शक्ति है जिसका इस्तेमाल कई मसलों में United nation करता है इन g20 में ऐसा कुछ नहीं है g20 बिना दांत और नाखून वाला शेर है।

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16/09/2023

'इन 14 एंकरों का बॉयकॉट करेगी INDIA'1- अदिति त्यागी 2- अमन चोपड़ा3- अमीश देवगन 4- आनंद नरसिम्हन5- अर्णब गोस्वामी 6- अशोक...
15/09/2023

'इन 14 एंकरों का बॉयकॉट करेगी INDIA'

1- अदिति त्यागी 2- अमन चोपड़ा
3- अमीश देवगन 4- आनंद नरसिम्हन
5- अर्णब गोस्वामी 6- अशोक श्रीवास्तव
7- चित्रा त्रिपाठी 8- गौरव सावंत
9- नविका कुमार 10- प्राची पराशर
11- रुबिका लियाकत 12- शिव अरुर
13- सुधीर चौधरी 14- सुशांत सिन्हा

मैं हिंदी हूंमैं भारत का अभिमान हूंभारतवासी का स्वाभिमान हूंमैं हिंदी हूं,मैं बीते कल का गौरव गाथा हूं,आने वाले कल का वि...
14/09/2023

मैं हिंदी हूं
मैं भारत का अभिमान हूं
भारतवासी का स्वाभिमान हूं
मैं हिंदी हूं,
मैं बीते कल का गौरव गाथा हूं,
आने वाले कल का विजय तिलक हूं,
मैं बचपन का खिलखिलाता संस्कार हूं,
बुजुर्गों का आशीर्वाद हूं
मैं हिंदी हूं,
कितनी भी आजाए मुश्किलें,
कितना भी बदल जाए वक़्त,
मुस्कुराहटों से बयां होती हूं मैं,
आंसुओ से जज़्बात बन जाती हूं,
मैं हिंदी हूं,
जरा गौर से देखो मुझे,
मै देखे हुए ख़्वाबों की डोर हूं,
जिस छांव तले रुकते हैं पथिक,
मैं वो सुकून हूं,
मैं हिंदी हूं,
मैं संस्कृति की जननी, सभ्यता का आगाज़ हूं,
मैं हिंदी हूं।

#अखिलभारतीयपरिवारपार्टी की तरफ से हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

14/09/2023

मुस्कुराओ, अगर आज कहीं से हार गए हो
किसी को उस जीत की तुमसे ज़्यादा ज़रूरत थी शायद
मुस्कुराओ, अगर कुछ खो गया है
जिसके नसीब का था उसको मिल गया है शायद

मुस्कुराओ, अगर दिल टूट गया है
किसी का जोड़ने के लिए किसी का तोड़ना पड़ता होगा शायद
और रह जाए अगर दिल में फिर भी दर्द कहीं तो बाँटकर मुस्कुराओ
और है अगर दिल में खुशी ज़्यादा तो same process दोहराओ

मुस्कुराओ, जब बार-बार ये सोचकर हताश हो जाते हो
कि इससे अच्छा ये हो जाता, इससे अच्छा वो हो जाता
तब ये सोचकर मुस्कुराओ कि इससे बुरा हो जाता तो क्या हो जाता

मुस्कुराओ, अगर सर पे है छत, बदन पर कपड़ा और है थाली में खाना
और है अगर ज़रूरत से ज़्यादा तो बाँटकर घर आना
मुस्कुराओ, जब पूछे कोई कि ज़िंदगी जीने का है क्या सलीक़ा
मुस्कुराओ ये कहकर कि हमने ज़िंदगी से मुस्कुराना ही सीखा

मुस्कुराओ, मुस्कुराओ, even…
Even if you have to walk miles and miles
Because it’s okay if your glass is half empty
You can always fill it with smiles, मुस्कुराओ

14/09/2023

तूफ़ान मे भी ज़लता रहें वह दिया ब़नो,
ब़रसात मे सैलाब़ न लाए वह दरिया बनों,
क्योकि सहनशीलता सें विकास होता हैं,
और उग्रवादिता सें विनाश होता हैं।

जीवन फूलो का बिस्तर नही कांटो का सफ़र हैं,
अपनी गाड़ी मे ब्रेक़ लगाए चलों टेढी मेढ़ी डग़र हैं,
इस सफर मे हर कोईं कभी सुख़ तो कभी दुख ढोता हैं
क़भी कोई हंसता हैं तो क़भी कोई रोता हैं।

तूफ़ान मे भी जलता रहें वह दीया ब़नो,
बरसात मे सैलाब़ न लाए वह दरिया ब़नो,
क्योकि सहनशीलता सें विकास होता हैं,
और उग्रवादिता सें विनाश होता हैं।

ग़म मे तुम टूट़ ना ज़ाना, ख़ुशी मे ब़ह ना जाना,
हर हालात मे हंसते रहना, हंस के मुश्कि़ल को भग़ाना,
यहां हर कोईं अच्छे लम्हो को पिरोता हैं,
और ब़ुरे दिनो मे अपना तकिया भिग़ोता हैं।

तूफ़ान मे भी ज़लता रहें वह दीया ब़नो,
ब़रसात मे सैलाब़ न लाए वह दरिया बनों,
क्योकि सहनशीलता से विक़ास होता हैं,
और उग्रवादिता से विनाश होता हैं।

गर मिल गईं हो मन्जिल तो ख़ुद को रुक़ने ना देना,
ख़ुद को Update क़रते रहना, अपनी Energy ना ख़ोना,
क्योकि Update से मन आलस क़ो ख़ोता हैं,
और Positive energy से ख़ुद को सजोता हैं।

तूफ़ान मे भी ज़लता रहें वह दीया ब़नो,
ब़रसात मे सैलाब़ न लाए वह दरिया ब़नो,
क्योकि सहनशीलता से विक़ास होता हैं,
और उग्रवादिता सें विनाश होता हैं।

एक़ पल को रुक़कर अपनें अतीत को देख़ो,
जिसमे तुम कितनें उत्साही थे मन्जिल पाने क़ो,
ख़ोना ना क़भी खुद पे जो भरोसा हैं,
डटे रहो ग़र बहतीं हवा का झोका हैं।

तूफ़ान मे भी जलता रहें वह दीया ब़नो,
ब़रसात मे सैलाब़ न लाए वह दरिया बनों,
क्योकि सहनशीलता सें विकास होता हैं,
और उग्रवादिता सें विनाश होता हैं।

आशा भोसले: आज स्वर साम्राज्ञी आशा जी का 90 वां जन्म दिवस है ।संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली आशा भोसले बहु...
08/09/2023

आशा भोसले: आज स्वर साम्राज्ञी आशा जी का 90 वां जन्म दिवस है ।संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली आशा भोसले बहुआयामी प्रतिभा के लिए जानी जाती हैं। सुरों की सरताज आशा भोसले विगत 75 वर्षो से अपनी आवाज के जादू से हम सभी का मन मोह रही हैं। संप्रति आज भी कार्यशील है । आप अपना 90 वां जन्मदिन दुबई में एक live concert करके मना रही हैं। 90 वर्ष की अवस्था में live concert करना व दो-तीन घंटे लगातार खड़े होकर गाना सचमुच उनमें एक दैवीय शक्ति है और हम लोगों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।उन्होंने बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए हैं। संगीत की जब-जब बात होगी, तब-तब आशा भोसले का नाम लिया जाएगा। आशा भोसले संगीतकारों के लिए एक प्रेरणा है। जब भी कोई महिला संगीत की दुनिया में कदम रखती है, वह उनकी तरह गाने का प्रयास करती है और करें भी क्यों न आज भी उनकी आवाज हमारी रूह तक पहुंचती हैं। आशा भोसले ने "आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा", "दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए" "यह मेरा दिल प्यार का दीवाना" "चुरा लिया है तुमने जो दिल को" जैसे सदाबहार गानों को अपनी आवाज दी हैंऔर यह अंतहीन सूची है।

#अखिलभारतीयपरिवारपार्टी ईश्वर से प्रार्थना करता है सरस्वती मां के इस दैवीय वरदान को चिर-आयु प्राप्त हो। और आप सदैव हमको और हमारे आने वाली तमाम पीढ़ियों को यूं ही आनंदित एवं भाव-विभोर करती रहें।




रात अंधियारी कारी, जन्मे जब कृष्ण मुरारी,खुली गईं तब बेड़ियां सारी, जब जन्म लिए बनवारी।धन्य हुए वासुदेव देवकी, खुशियां जी...
07/09/2023

रात अंधियारी कारी, जन्मे जब कृष्ण मुरारी,
खुली गईं तब बेड़ियां सारी, जब जन्म लिए बनवारी।

धन्य हुए वासुदेव देवकी, खुशियां जीवन में पधारी,
कंस के अन्त की तब तो, हो गई पूरी तैयारी।

खुल गए सब ताले झट से, सो गए दरबान भी सारे,
कान्हा को लेकर फिर, वासुदेव गोकुल को पधारे।

गोकुल में फैली खुशियां, सब ने फिर जश्न मनाया,
जग का उद्धार करने, कृष्णा इस जग में आया।

प्रभु के दर्शन करने को, आये फिर नर और नारी,
सबका है अन्त अब आया, जितने हैं अत्याचारी।

अखिल भारतीय परिवार पार्टी की तरफ से समस्त देशवासियों को श्री कृष्ण जन्मोत्सव की हार्दिक बधाइयां

#अखिलभारतीयपरिवारपार्टी

07/09/2023

ज्योतिर्मा राय पाठक भारतीय
राष्ट्रीय अध्यक्षा महिला एबीपीपी
लोकसभा प्रभारी (मऊ)
8 अक्तूबर के कार्यक्रम के लिए जन संपर्क |

05/09/2023



अखिल भारतीय परिवार पार्टी

गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरुः साक्षात परब्रहम तस्मैः श्री गुरुवेः नमः

विजय कुमार भारतीय
उत्तराखंड अल्मोड़ा
097168 36780

गिरते है जब हम, तो उठाते है शिक्षकजीवन की राह दिखाते है शिक्षक |अँधेरे जहाँ पर बनकर दीपक,जीवन को रोशन करते है शिक्षक |कभ...
05/09/2023

गिरते है जब हम, तो उठाते है शिक्षक
जीवन की राह दिखाते है शिक्षक |
अँधेरे जहाँ पर बनकर दीपक,
जीवन को रोशन करते है शिक्षक |
कभी नन्ही आँखों मैं नमी जो होती,
तो अच्छे दोस्त बनकर हमे हसांते है शिक्षक |
झटकती है दुनिया हाथ कभी जब,
तो झटपट हाथ बढ़ाते है शिक्षक |
जीवन डगर है जीवन समर है
जीवन संघर्ष सिखाते है शिक्षक |
देकर अपनी ज्ञान की पूंजी,
हमे योग्य बनाते है शिक्षक |
इस देश और दुनिया के लिये,
एक अच्छा समाज बनाते है शिक्षक |
नहीं हो कही अशांति,
बस यही एक पैगाम फैलते है शिक्षक |
गिरते है जब हम, तो उठाते है शिक्षक ||

#अखिलभारतीयपरिवारपार्टी

भारत के सुदूर दक्षिण में, केरल राज्य है प्याराप्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, ईश्वर का अपना देश न्याराफूलों का त्योहार ओणम, ...
30/08/2023

भारत के सुदूर दक्षिण में, केरल राज्य है प्यारा
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, ईश्वर का अपना देश न्यारा
फूलों का त्योहार ओणम, यहां का वसंत-उत्सव कहा जाता है
ओणम पर हमारी संस्कृति का, सर्वोत्तम रूप प्रकट हो जाता है

ओणम चिंगम माह में आता है, आनंद-उत्सव छा जाता है
महाप्रतापी राजा महाबली के, स्वागत में मनाया जाता है
महाबली बड़े दानवीर अति धर्मिष्ट, उदार महान थे
उनके केरल शासनकाल में, सब जनमानस एक समान थे

अखिल भारतीय परिवार पार्टी की ओर से समस्त देशवासियों की ओणम की हार्दिक शुभकामनाएं

#अखिलभारतीयपरिवारपार्टी

पावन राखी पर्व का, नाता यह अनमोलनेह बंधी इस डोर का,कोई मोल न तोलरक्षाबंधन  का बहुत, प्रिय पावन त्योहारभ्रात कलाई सज रहा,...
30/08/2023

पावन राखी पर्व का, नाता यह अनमोल
नेह बंधी इस डोर का,कोई मोल न तोल

रक्षाबंधन का बहुत, प्रिय पावन त्योहार
भ्रात कलाई सज रहा, रंग बिरंगा प्यार

तिलक माथ करती बहन,ले पूजा का थाल
भैया जग में हो सदा, तेरा ऊँचा भाल

राखी बाँधी भाव से,करना तुम स्वीकार
करे कामना ये बहन ,सुखी रहे परिवार

रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को ढेर सारी शुभकामनाएँ! धागों के माध्यम से कलाइयों पर संबंधों का विश्वास बॉंधने वाली समस्त बहनों और उनके भाईयों के बीच का स्नेह सदैव असंदिग्ध एवं आजीवन प्रगाढ़ रहे।

अखिल भारतीय परिवार पार्टी

#अखिलभारतीयपरिवारपार्टी

जातिय जनगणना : वक्त की जरूरत या ढकोसला बिहार की जातिगत जनगणना का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. इसे लेकर वहां सुनवाई चल रही...
29/08/2023

जातिय जनगणना : वक्त की जरूरत या ढकोसला

बिहार की जातिगत जनगणना का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. इसे लेकर वहां सुनवाई चल रही है. इस बीच अदालत में केंद्र सरकार के हलफनामे को लेकर भ्रम पैदा हो गया है. दरअसल, केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर घंटे भर में ही दो अलग-अलग हलफनामा जमा कर दिए. इन दोनों में ही अलग-अलग बातें कही गईं हैं. घंटे भर में ही जातिगत जनगणना के मसले पर केंद्र के sharp U-Turn पर नई बहस छिड़ गई है. पहले हलफनामे के पैरा 5 में लिखा था कि केंद्र के अलावा और कोई संस्था जनगणना या जनगणना जैसी प्रक्रिया नहीं करवा सकती.

नए हलफ़नामे में पैरा 5 के अनजाने में शामिल होने की बात कही गई है. इसका अर्थ यह हुआ राज्य जातीय जनगणना करा सकते हैं जातिगत गणना को लेकर बिहार सरकार और केंद्र में महीनों से ठनी हुई है. इस बीच विपक्ष ने आरोप लगाया है कि जातीय गणना कराने के बिहार सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के हलफनामे और कुछ घंटों बाद इसमें सुधार ने "भाजपा को बेनकाब कर दिया है" और उसके "सर्वेक्षण को रोकने के इरादे" को उजागर कर दिया है.

हाल के दिनों में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक चिंतकों ने भारत में जाति जनगणना कराने की मांग की है। अब प्रश्न उठता है कि ओ.बी.सी. समाज द्वारा यह मांग क्यों की जा रही है? इसके ज़ोर पकड़ने का सबसे प्रभावी कारक आरक्षण है। बीते समय के दो परिवर्तनों ने इसकी गति और तेज़ कर दी है, पहला EWS आरक्षण और दूसरा राज्यों को ओ.बी.सी. वर्ग की पहचान करने का अधिकार दिया जाना। इन दोनों संशोधनों से दो संभावनाएँ पैदा हुई। पहली यह कि आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा अमान्य हो सकती है और दूसरी यह कि राज्य अपने स्तर पर ओ.बी.सी. वर्ग की पहचान सुनिश्चित कर उसी अनुपात में उन्हें आरक्षण का लाभ दे सकें। इन्हीं दोनों संभावनाओं ने ओ.बी.सी. जाति जनगणना की मांग में तेज़ी ला दी है। इस मांग को और गति मद्रास उच्च न्यायालय के एक फैसले ने दे दी जिसमें जाति जनगणना को आवश्यक बताया गया है। अब यह विचारणीय है कि ओ.बी.सी. वर्ग द्वारा की जा रही जाति जनगणना की मांग उचित है या नहीं?

अखिल भारतीय परिवार पार्टी का मानना है कि तीन कारणों से यह सर्वथा उचित मांग है। पहला कारण यह कि यदि कोई सामाजिक वर्ग भेदभाव का शिकार है तो उसे मुख्यधारा में ले आने के लिये सबसे प्राथमिक कार्य है उसकी वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया जाए; यह अध्ययन उनकी वास्तविक संख्या, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति से संबंधित होना चाहिये। यदि वास्तविक स्थिति का पता ही नहीं होगा तो उनके उत्थान हेतु नीति-निर्माण कैसे संभव हो पाएगा। यह किसी से छिपा नहीं है कि ओ.बी.सी. वर्ग सामाजिक अन्याय का लंबे समय से शिकार रहा है। साथ ही, हमें यह भी ज्ञात है कि यदि किसी वर्ग की सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने संबंधी उपायों को अपनाने में बहुत देरी की जाए तो उस वर्ग में असंतोष मुखर होने लगता है जो कि कभी-कभी हिंसा का मार्ग अपनाने तक चला जाता है। प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहे देश में ऐसा न होने पाए, उसके लिये समय-पूर्व सतर्कता आवश्यक है।

ओ.बी.सी. वर्ग की जाति जनगणना की मांग के पक्ष में दूसरा कारण सामाजिक न्याय व समावेशी विकास से संबंधित है। कोई भी देश सही अर्थों में तभी विकसित व सफल राष्ट्र की श्रेणी में आता है जब वह समाज के सभी वर्गों का कल्याण सुनिश्चित करता है। ओ.बी.सी. वर्ग यदि भेदभाव का शिकार है और यह कहता है कि उसे उसकी आबादी के अनुपात में संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं तो यह माना जाना चाहिये कि देश के संसाधनों के वितरण में व्यापक असमानता व्याप्त है। संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण से इस तरह की असमानता को समाप्त कर सामाजिक न्याय व समावेशी विकास संबंधी पहल किया जाना देश के विकास हेतु अति आवश्यक है, जिसकी शुरुआत वंचितों की गणना करने से होनी चाहिये।

ओ.बी.सी. जनगणना की आवश्यकता का तीसरा कारण इस वर्ग की विभिन्न जातियों के मध्य व्याप्त विसंगतियों का समाधान करने से संबंधित है। दरअसल एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिया था कि ओ.बी.सी. वर्ग की सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक स्थिति का समय-समय पर अध्ययन कराया जाना चाहिये ताकि इस वर्ग की ऐसी जातियों को जो सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक आधार पर भेदभाव से मुक्त हो गई हों, उन्हें ओ.बी.सी. वर्ग से निकालकर सामान्य वर्ग में शामिल किया जा सके। इससे इस वर्ग में शामिल वंचित जातियों के उत्थान के अवसर भी बढ़ेंगे और ओ.बी.सी वर्ग की विभिन्न जातियों के मध्य व्याप्त विसंगतियों को भी दूर किया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त यह भी कि केवल इस संभावित भय के कारण इसे रोकना उचित नहीं है कि जाति जनगणना देश में जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा देगी। भारत की राजनीति में जाति का प्रभाव हमेशा से रहा है और अभी आगे भी बने रहने की संभावना है। हमें यह समझना चाहिये कि यह समस्या लोकतंत्र की व्यवस्था में व्याप्त कमियों को दर्शाती है जिसका समाधान तलाशा जाना बौद्धिक स्तर पर अभी बाकी है। ऐसे में लोकतंत्र की विसंगतियों का बहाना बनाकर किसी वर्ग की भेदभाव की स्थिति को बरकरार रखना कहीं से भी उचित नहीं है। साथ ही जाति जनगणना के बाद आरक्षण की 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा का कोटा बढ़ाए जाने की मांग को समझना भी आवश्यक है।

हमें सबसे पहले तो यह समझना होगा कि 50 प्रतिशत की यह सीमा कोई अंतिम व आदर्श लकीर नहीं है। इस तथ्य पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है कि राज्यों की आबादी में जातीय भिन्नताएँ व्याप्त हैं। अनुसूचित जाति व जनजाति के संदर्भ में जनगणना होने के कारण यह आसानी से तय कर दिया जाता है कि उक्त राज्य में उनके लिये कितना प्रतिशत आरक्षण होगा, किंतु ओ.बी.सी. की गणना न होने से वे इस लाभ से वंचित रह जाते हैं।

अतः समय आ गया है कि केंद्र के स्तर पर भले ही अधिकतम कोटे की सीमा का ध्यान रखा जाए किंतु राज्यों के स्तर पर इस सीमा में आवश्यकतानुसार बदलाव ज़रूरी है। इस बदलाव के लिये यह आवश्यक है कि अब जाति जनगणना में और देरी न की जाए।

#अखिलभारतीयपरिवारपार्टी

28/08/2023
कब तक बोझ संभाला जाएद्वंद्व कहां तक पाला जाएतू भी है राणा का वंशज फेंक जहां तक भाला जाए दूध छीन बच्चों के मुख से क्यों न...
28/08/2023

कब तक बोझ संभाला जाए
द्वंद्व कहां तक पाला जाए
तू भी है राणा का वंशज
फेंक जहां तक भाला जाए

दूध छीन बच्चों के मुख से
क्यों नागों को पाला जाए
दोनों ओर लिखा हो भारत
सिक्का वही उछाला जाए

"वाहिद" के घर दीप जले तो
मंदिर तलक उजाला जाए
तू भी है राणा का वंशज
फेंक जहां तक भाला जाए

अखिल भारतीय परिवार पार्टी की ओर से नीरज चोपड़ा को पूरे राष्ट्र को गौरवान्वित करने वाली उपलब्धि हासिल करने के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।



#नीरजचोपडा

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Noida
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