20/07/2026
भाग्य रेखा :: उन्नति और सफलता
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(1.1). यह मणिबन्ध से प्रारम्भ होती है। गहरा काला रंग लिये हुए यह रेखा जक को उसके पूर्वजों द्वारा किये जाने वाले कार्य करवाती है। जातक मूर्तिकला आदि के माध्यम से अपना परिवार भली भाँति चला सकता है। हल्का गुलाबी रंग होने से जातक को अन्य कार्यों से भी सफलता मिल सकती है। सूर्य रेखा भी स्पष्ट रूप से होने पर जातक नाम और पैसा दोनों कमायेगा।
(1.2). यह केतु से प्रारम्भ होती है। इसका फल भी लगभग उपरोक्त ही होता है और जातक प्रारभ्ध से ही नियंत्रित होता है।
(1.3). यह जीवन रेखा से प्रारम्भ होती है। जातक हर किसी की मदद करने को तत्पर रहेगा।
(1.4). यह शुक्र पर्वत पर तारे से प्रारम्भ होती है। पिता की मृत्यु के बाद जातक का पालन-पोषण किसी करीबी रिश्तेदार द्वारा किया जायेगा।
(1.5). यह शुक्र पर्वत से प्रारम्भ होती है। जातक परिश्रम और किसी करीबी व्यक्ति के माध्यम से जीवन निर्वाह करेगा।
(1.6-7). यह जीवन रेखा से प्रारम्भ होने वाली उच्च वर्ती शाखाएं हैं और अक्सर जातक की उन्नति का वक्त निर्धारित करती हैं। जातक को इस समय पर विशेष लाभ होगा। नौकरी में होने पर पदोन्नति होगी।
(1.8). यह इंद्र क्षेत्र से प्रारम्भ होती है। जातक को जीवन में देर (35-50 वर्ष की आयु) से जीवन यापन का योग होगा।
(1.9). यह मस्तिष्क रेखा से प्रारम्भ होती है। जातक का भाग्य 35 वर्ष की आयु में जाग्रत होगा।
(1.10). यह निम्न मंगल से प्रारम्भ होती है। भाग्य देर से उदय होगा और जातक भूमि, शारीरिक परिश्रम, सेना, पुलिस आदि के माध्यम से धन अर्जित करेगा।
(1.11). यह ह्रदय रेखा से प्रारम्भ होती है। जातक को सफलता 50 की उम्र के बाद हासिल होगी। उसके मित्र, सम्बन्धी, जानने वाले सहयोग करेंगे।
(1.12). यह राहु क्षेत्र से प्रारम्भ होती है। जातक परिश्रम से धन लाभ प्राप्त करेगा।
(1.13). यह चंद्र से प्रारम्भ होती है। जातक की खुद की मेहनत उसे आगे बढ़ायेगी। (1.14). यह धर्म क्षेत्र अथवा उच्च मंगल से उदय होती है। जातक की रूचि धर्म-कर्म में होगी।
(1.15). यह बुध पर्वत से प्रारम्भ होती है। जातक अपनी बुद्धि बल से धन अर्जित करेगा।
(1.16). यह सूर्य पर्वत से प्रारम्भ होती है। जातक के प्रशंसनीय कार्य उसकी मदद करेंगे।
(1.17). यह बृहस्पति पर्वत से प्रारम्भ होती है। जातक पर गुरु की कृपा होगी। वह धार्मिक होगा।
अकेली भाग्य रेखा ही भविष्य का निर्धारण नहीं करेगी। यही पर्वत सामान्य या विकसित हैं तो भी वह सफलता अर्जित करेगा। हाथ चौकोर होने पर जातक को प्रशिक्षित कारीगर की तरह सफलता मिलेगी। राहु, निम्न मंगल, जीवन रेखा, केतु से निकली रेखा और मणिबंध से निकली रेख उसे सहयोग देंगी।
हाथ की बनावट यदि लम्बाई लिये हुई तो उसे कला, लेखन में सफलता मिलेगी बशर्ते उसकी मस्तिष्क रेखा चंद्र पर झुकी हो, उँगलियाँ पतली, नोंकदार हों।
गहरी काला रंग लिए हुए रेखा जातक को शरीरिक श्रम के माध्यम से धन कमाने में मदद करेगी। गुलाबी रंग की रेखाएं जातक को मस्तिष्क, बुद्धि के प्रयोग से धनार्जन में सहयोग करेंगी।
अंगूठा दृढ़ और 90 अंश का कोण बनाने पर जातक व्यवहार कुशल और दृढ़ निश्चयी होगा।
पर्वत की सामान्य स्थिति अंगुली के नीचे बाचों बीच होगी। दायें-बायें होने पर पड़ोसी पर्वत का प्रभाव होगा। अंगुली के पास या दूर होने से भी प्रभाव बदल जायेगा। पर्वत बहुत ज्यादा उठा हुआ या दबा हुआ होने पर विपरीत प्रभाव दिखायेगा।
(2.1). भाग्य रेखा केतु क्षेत्र से निकल कर शनि पर्वत पर जा रही है।
(2.2). यह रेखा चंद्र पर्वत से निकलकर मस्तिष्क रेखा के समांतर, मुख्य भाग्य रेखा में जुड़ गई है। जातक का विवाह बहुत अच्छे व्यक्ति से होगा। दोनों मिलकर जीवन को सुचारु रूप से चलायेंगे।
(2.3). मंगल से आने वाली रेखा विपरीत लिंगी से सम्बन्ध के कारण भाग्य में दोष उत्पन्न करेगी। अकसर घर की औरतें अपने पति और बच्चों के मार्ग की बाधा बन जाती हैं।
(2.4). विपरीत लिंगी से सम्बन्ध होगा।
(2.5). कोई आपको पसन्द करने वाला सम्बन्ध बनायेगा और भाग्य दोष भी उत्पन्न करेगा। सम्पत्ति का योग भी होगा।
(2.6). विपरीत लिंगी से सम्बन्ध बनेगा।
(2.5-5). के बीच की रेखा भाग्य रेखा, मश्तिश रेखा, ह्रदय रेखा, सूर्य रेखा को काटकर बुध क्षेत्र में विवाह रेखा की ओर अग्रसर हो रही है। यह हर तरीके से नुकसान पहुँचायेगी। विवाह रेखा को काटने पर सम्बन्ध विच्छेद करा देगी।
(2.3-3). के ऊपर से मंगल से शुरू होकर जाने वाली रेखा भी उपरोक्त प्रभाव दिखायेगी।
(3). यव चिन्ह, काटती हुई रेखाएं परेशानी व्यवधान पैदा करेंगी। वर्ग मुसीवत से बचायेगा। तारा और काटा गुणक चिन्ह जीवन को संकट में डालेगा। गाँधी हिटलर के हाथ में तारे का चिन्ह शनि पर्वत पर था।
शनि के ऊपर पड़ी हुई रेखा परेशानी पैदा करेगी।
LUCK LINE भाग्य रेखा
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PtSantoshBhardwaj
(1.1). यह मणिबन्ध से प्रारम्भ होती है। गहरा काला रंग लिये हुए यह रे...