नौगाँव

नौगाँव Nowgong Distt Chhatarpur
नौगांव जिला छतरपुर
(2)

19/07/2026

बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग पर एक और गंभीर आरोप सामने आया है।

कोड़ा गांव के निवासी बृजकिशोर पांडे ने आरोप लगाया है कि गौशाला के नाम पर उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। उनका कहना है कि जमीन पर जाल लगा दिए गए हैं, पिलर गाड़ दिए गए हैं और अब उन्हें अपनी ही जमीन तक जाने नहीं दिया जा रहा।

इन आरोपों के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि शिकायत सही है, तो संबंधित पक्षों की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।

भूमि विवाद और अतिक्रमण जैसे मामलों में प्रभावशाली व्यक्ति हो या आम नागरिक, कानून का समान रूप से लागू होना ही न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी है।

क्या जमीन कब्जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए?

बाबा बागेश्वर बोले" भाई शालिगराम गर्ग के साथ कोई संबंध नहीं...लेकिन मालिकाना हक कैसे ?छतरपुर। बाबा कह रहे की उनका छोटे भ...
15/07/2026

बाबा बागेश्वर बोले" भाई शालिगराम गर्ग के साथ कोई संबंध नहीं...लेकिन मालिकाना हक कैसे ?

छतरपुर। बाबा कह रहे की उनका छोटे भाई शालिगराम गर्ग के साथ कोई संबंध नहीं है। फिर शालिगराम के पास यह फार्च्यूनर गाड़ियों का काफिला कैसे आ रहा है। बागेश्वर धाम जनसेवा समिति की दानराशि से जो जमीनें खरीदीं जा रही हैं। उसमें समिति की ओर खसरा में शालिगराम को मालिकाना हक किस आधार पर दिया जा रहा है...यह बात बाबा बागेश्वर ने तब बोली थी जब भाई सालिगराम ने राजनगर के कोडा गाँव मे किसान को गोली मारी थी,जमीन विवाद के चलते

रामायण में लिखा है...भाई तो भाई होता है....

भाई के बिना रावण हारा,भाई के साथ भगवान राम जीते... समय कैसा भी हो,भाई भुजा के समान होता है ..भाई,भाई होता है....

12/07/2026

शेखर सुमन का शो 'शेखर टुनाइट' बेहद पॉपुलर है। कम वक्त में ही इसने नए कीर्तिमान बना दिए हैं। वैसे तो शेखर सुमन अपने शो में सत्ता में बैठी सरकार से लेकर राजनीतिक और अन्य मुद्दों पर अपने व्यंग्य और कॉमेडी की चाशनी में भिगोया तंज कसते हैं, पर इस बार उन्होंने आमिर खान को भी लपेटे में ले लिया। 61 साल के आमिर खान ने हाल ही तीसरी बार शादी की है। इसी को लेकर शेखर सुमन ने एक तगड़ा मोनोलॉग 'शेखर टुनाइट' में सुनाया। शेखर सुमन ने कहा कि सत्ता में बैठे राजनेताओं को गठबंधन के मामले में आमिर खान से सीखना चाहिए कि कैसे नए पुराने साथियों को भी साथ लेकर चला जाता है। उन्होंने तंज कसा कि जहां पार्टियां 'डबल इंजन सरकार' नहीं चला पा रहीं, वहीं आमिर खान 'ट्रिपल इंजन सरकार' चला रहे हैं और वह भी परफेक्शन के साथ।

शेखर सुमन ने कहा कि आमिर खान ने आने वाली कई पीढ़ियों को एक अनूठा विज़न दिया है। और वो विज़न है किसी लक्ष्य को तब तक पाने की कोशिश करना जब तक वह हासिल न हो जाए। शेखर सुमन ने फिर आमिर पर तंज कसते हुए कहा कि भले ही और किसी के अच्छे दिन आएं या न आएं, पर एक्टर के जरूर आ गए हैं। बल्कि उन्होंने अपने काम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सोच में डाल दिया है।

   #नौगांव      #नौगांवछावनी
26/06/2026

#नौगांव #नौगांवछावनी

20/06/2026
20/06/2026

चीन का काला सच
Dark reality of china

90 के दशक में कुमार सानू बनाम उदित नारायण जब हिंदी फिल्म संगीत को मिले दो बेताज बादशाह।🎙️90 का दशक हिंदी फिल्म संगीत का ...
13/06/2026

90 के दशक में कुमार सानू बनाम उदित नारायण जब हिंदी फिल्म संगीत को मिले दो बेताज बादशाह।🎙️

90 का दशक हिंदी फिल्म संगीत का स्वर्णिम दौर माना जाता है। यह वह समय था जब कैसेट्स, रेडियो और म्यूजिक चैनलों पर दो आवाजों का जादू सबसे ज्यादा सुनाई देता था - कुमार सानू और उदित नारायण। दिलचस्प बात यह है कि 1990 में आई "आशिकी" ने कुमार सानू को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया, वहीं उसी साल रिलीज हुई "दिल" के गीतों ने उदित नारायण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

उदित नारायण ने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया है कि उन्हें लगा था कि अब वह इंडस्ट्री पर एकछत्र राज करेंगे, लेकिन हकीकत में अगले कई वर्षों तक कुमार सानू के साथ उनका जबरदस्त और स्वस्थ मुकाबला चलता रहा। यह प्रतिस्पर्धा इतनी दिलचस्प थी कि श्रोताओं को हर हफ्ते नए और बेहतरीन गाने सुनने को मिलते थे।🎼

कुमार सानू की आवाज में दर्द, रोमांस और मेलोडी का अनोखा मिश्रण था। "धीरे धीरे से", "नजर के सामने", "मेरा दिल भी कितना पागल है" और "तुझे देखा तो ये जाना सनम" जैसे गीतों ने उन्हें रोमांटिक गानों का पर्याय बना दिया। दूसरी ओर उदित नारायण की आवाज में ताजगी, मासूमियत और ऊर्जा थी। "पहला नशा", "जादू तेरी नजर", "राजा को रानी से प्यार हो गया" और "कुछ कुछ होता है" जैसे गीतों ने उन्हें युवाओं का पसंदीदा गायक बना दिया।👌

इस मुकाबले की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि दोनों ने एक-दूसरे को बेहतर बनने के लिए प्रेरित किया। अगर कुमार सानू किसी फिल्म में यादगार गीत गाते थे तो उदित नारायण अगली फिल्म में उतना ही मजबूत जवाब देते नजर आते थे। संगीतकार भी दोनों की खूबियों का पूरा फायदा उठाते थे और श्रोताओं को शानदार धुनें मिलती थीं।🎶

90 के दशक में मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और मुकेश के बाद पहली बार ऐसा दौर आया जब दो पार्श्वगायक लगभग बराबरी के स्तर पर लोकप्रियता की लड़ाई लड़ रहे थे। यही कारण है कि आज भी उस दौर के गाने सुनने पर यह बहस छिड़ जाती है कि कुमार सानू बेहतर थे या उदित नारायण।

असल में जीत किसी एक की नहीं थी। जीत भारतीय संगीत प्रेमियों की थी, जिन्हें एक ही दौर में दो ऐसे महान गायक मिले जिन्होंने रोमांटिक संगीत को नई पहचान दी। यही वजह है कि 90 के दशक का जिक्र होते ही कुमार सानू और उदित नारायण की आवाजें आज भी कानों में गूंजने लगती हैं।💫

आपसे बस एक सवाल सबसे ज्यादा आपने किसको सुना कौन था आपका फेवरेट! 👌
पैज को Follow जरूर करे 🙏

Address

Nowgong
471201

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when नौगाँव posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share