29/07/2026
"गोवा जाओ और संजय दत्त को खत्म कर दो। गोवा में ना कर सको तो मुंबई आते ही एयरपोर्ट के बाहर उसे भून दो।" ये आदेश दिए थे अंडरवर्ल्ड सरगना अबू सलेम ने अपने गुर्गों को। इस लेख में ये पूरा किस्सा विस्तार से जानेंगे। फिल्म इंडस्ट्री और अंडरवर्ल्ड की एक बड़ी रोमांचक, और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी हम और आप जानेंगे।
संजय दत्त का जन्मदिन है आज। संजय दत्त आज 67 साल के हो गए हैं। 29 जुलाई 1959 को संजय दत्त पैदा हुए थे।
कोर्टरूम खचाखच भरा था। माहौल में व्याप्त तनाव साफ महसूस किया जा सकता था। अदालत में मुंबई ब्लास्ट के 100 से ज़्यादा आरोपी मौजूद थे। कुछ दर्जन वकील थे तो कुछ सीबीआई अफसर भी थे।
वो एक टाडा अदालत थी। उस दिन अदालत में मौजूद तमाम आरोपियों में दो ही ऐसे थे जिन पर सबकी नज़रें थी। जो अब दुश्मन थे। लेकिन किसी वक्त पर बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे। वो थे संजय दत्त और अबू सलेम।
मुन्ना भाई एमबीबीएस की सफलता के बाद संजय दत्त के मरते करियर को फिर से जान मिल गई थी। वो फिर से सफलता का स्वाद चख चुके थे। लेकिन फिर भी थके-थके से नज़र आ रहे थे।
दूसरी तरफ लगभग डेढ़ साल पहले पुर्तगाल से पकड़ा गया अबू सलेम एकदम क्लीन्ड शेव्ड, वैल ड्रैस्ड आदमी दिख रहा था। उसने बहुत सलीके से कपड़े पहने हुए थे। अच्छे जूते पहने हुए थे। बालों में बढ़िया जैल लगाया हुआ था। और कोई बढ़िया सा परफ्यूम छिड़का हुआ था जिसकी खुशबू अदालत में मौजूद कई लोगों को साफ महसूस हो रही थी।
संजय दत्त कुछ उनींदे से भी नज़र आ रहे थे। जबकी अबू सलेम मंद-मंद मुस्कुरा रहा था। संजय दत्त और अबू सलेम किसी वक्त पर बहुत अच्छे दोस्त थे। संजय दत्त के स्टारडम और उनकी पर्सनैलिटी के ऑरा से अबू सलेम कभी बहुत प्रभावित था।
मुंबई अंडरवर्ल्ड में उन दिनों एक बात चलती थी कि जिस दिन संजय दत्त ने अबू सलेम से पहली दफा हाथ मिलाया था उस दिन सलेम बहुत खुश हुआ था। इतना खुश की वो तीन दिनों तक नहाया नहीं था। और संजय दत्त व अबू सलेम का वो पहली दफा हाथ मिलाना तब हुआ था जब मुंबई दंगों से पहले अबू सलेम ने संजय दत्त को AK47 की डिलीवरी दी थी।
उस पहली मुलाकात के बाद संजय दत्त और अबू सलेम की कई मुलाकातें हुई थी। दोनों फोन पर बात करते थे। और जब भी संजय दत्त विदेश में शूटिंग करने या किसी इवेंट में शामिल होने जाते थे तो दुबई में दोनों मिला करते थे।
उन दिनों बॉलीवुड माफिया सर्किल्स में अबू सलेम और संजय दत्त की दोस्ती चर्चा का विषय बनी हुई थी। लेकिन फिर वक्त बदला। संजय दत्त ने अबू सलेम से दूरी बनानी शुरू कर दी। अबू सलेम को वो अच्छा नहीं लगा। उसने संजय को धमकाना शुरू कर दिया।
सलेम की धमकियों से संजय इतना चिढ़ते थे कि उससे नफरत करने लगे थे। उन्हीं दिनों संजय दत्त की छोटा शकील से भी दोस्ती थी। जबकी छोटा शकील व अबू सलेम एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन थे। दाउद इब्राहिम का राइट हैंड छोटा शकील अबू सलेम को एकदम नापसंद करता था। वो भी संजय को सलेम से दूर रहने की सलाह देता था।
दूसरी तरफ अबू सलेम को भी लगने लगा था कि छोटा शकील के कहने पर संजय उससे दूरी बना रहा है। और इसिलिए अबू सलेम संजय को धमकाने लगता था।
छोटा शकील और संजय दत्त के कनेक्शन्स का खुलासा एक टैलिफोन कॉल से हुआ था जिसे 14 जुलाई 2002 को रिकॉर्ड किया गया था। उस कॉल की ट्रांसस्क्रिप्ट को बाद में मकोका अदालत में संजय के खिलाफ सबूत के तौर पर पेश किया गया था।
उस वक्त मकोका अदालत में संजय दत्त ने अपनी सफाई में कहा था कि वो इतने ज़्यादा नशे में थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वो किससे और क्या बात कर रहे हैं। वो रिकॉर्डेड कॉल यूट्यूब पर मौजूद है।
इस कॉल रिकॉर्ड वाले वाक्ये से पहले ही अबू सलेम की अपने पूर्व बॉस अनीस इब्राहिम से बात बहुत ज़्यादा खराब हो चुकी थी। सलेम को पता था कि अनीस इब्राहिम और छोटा शकील उसकी हर हरकत पर नज़र रखने की कोशिश करते हैं।
उस वक्त अबू सलेम को जो नहीं पता था तो वो ये कि अनीस इब्राहिम और छोटा शकील ने उसे संजय दत्त की मदद से अमेरिका के न्यूजर्सी शहर में मार गिराने का प्लान बनाया है।
दरअसल, 1993 के मुंबई धमाकों के बाद अबू सलेम सलेम अमेरिका भाग गया था। उस ज़माने में बहुत कम लोगों को पता था कि अबू सलेम अमेरिका में है। और वो शिकागो में शिफ्ट होने की प्लानिंग कर रहा है। ये साल 2001 की बात है।
सलेम उन दिनों न्यूजर्सी और लॉस एंजेल्स में अपना बेस बनाने की कोशिशों में लगा था। उन्हीं दिनों न्यूजर्सी में एक बॉलीवुड नाइट प्रोग्राम आयोजित किया गया था। सलेम को जब पता चला कि उस प्रोग्राम में संजय दत्त भी आ रहे हैं तो उसने संजय को फोन किया और कहा कि वो न्यूजर्सी में उनसे मिलेगा। सलेम चाहता था कि संजय के बहाने अन्य फिल्मस्टार्स से भी मिल लेगा।
सलेम ने अपने न्यूजर्सी में होने की बात सिर्फ संजय को ही बताई थी। किसी और को उसकी लोकेशन का कुछ पता नहीं था। लेकिन उस बॉलीवुड नाइट प्रोग्राम वाले दिन ही सलेम को खबर मिली की छोटा शकील ने उसी इवेंट में उसे जान से मारने के लिए फील्डिंग लगाई है।
शकील के गनमैन स्टेडियम में उसकी हत्या करने के लिए तैयार रहेंगे। सलेम को देखते ही गोली मारने के आदेश छोटा शकील ने अपने गनमैन को दिए थे। सलेम को छोटा शकील की ताकत का अंदाज़ा था। वो जानता था कि छोटा शकील कितना कैपेबल है।
उस दिन से कुछ महीने पहले, 15 सितंबर 2000 के दिन छोटा शकील ने बैंकॉक में छोटा राजन के ठिकाने पर हमला कराया था। उस हमले में छोटा राजन बहुत मुश्किल से अपनी जान बचा सका था।
इसी बीच किसी ने सलेम को ये भी बताया कि छोटा शकील को न्यूजर्सी में उसके होने की खबर संजय दत्त ने दी थी। सलेम के पास इस पर भरोसा करने की एक वजह भी थी।
सलेम ने संजय के अलावा किसी और को नहीं बताया था कि उस दिन वो कहां आने वाला है। सलेम को संजय दत्त पर बहुत गुस्सा आया। उसने संजय दत्त को सज़ा देने का फैसला किया।
कुछ महीने बाद अबू सलेम ने अपने चार गुर्गों को संजय दत्त पर नज़र रखने का हुक्म दिया। सलेम को खबर मिली की संजय दत्त अपने दोस्त और डायरेक्टर संजय गुप्ता संग गोवा में है। सलेम ने अपने गुर्गों से कहा कि गोवा जाओ और संजय दत्त को खत्म कर दो। या फिर जब वो मुंबई वापस लौटे तो एयरपोर्ट पर ही भून देना उसे।
किसी तरह संजय दत्त को सलेम की उस साजिश की जानकारी मिल गई। संजय ने अपने मदद के लिए लोगों पर फोन करने शुरू कर दिए। ज़ाहिर है, वो सब भी अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग ही थे।
संजय अबू सलेम से बातचीत करके मामले को खत्म करना चाहते थे। उन्होंने कुछ लोगों के ज़रिए सलेम तक अपना पैगाम पहुंचाया भी। लेकिन सलेम ने इन्कार कर दिया। वो संजय दत्त को माफ करने के मूड में कतई नहीं था।
संजय दत्त और संजय गुप्ता कई दिनों तक होटल रूम से बाहर निकले ही नहीं। वो वहीं से बैठे-बैठे सलेम से मैटर सॉल्व करने की कोशिशों में लगे रहे। तभी इनकी बात हुई अकबर खान नाम के एक आदमी से। ये वही आदमी था जिसने 1993 के धमाकों के बाद सलेम को पुलिस से बचाया था।
जब मुंबई पुलिस सलेम को हर जगह खोज रही थी तब अकबर खान खुद अपनी कार से सलेम को नेपाल तक छोड़कर आया था। ज़ाहिर है, अबू सलेम अकबर खान का बहुत अहसानमंद था।
सलेम ने अकबर खान से वादा किया था कि वो अकबर खान के किसी काम को कभी मना नहीं करेगा। अकबर खान से संजय गुप्ता की जान-पहचान थी। संजय गुप्ता ने अकबर खान से कहा कि वो सलेम से बात करे।
अकबर खान ने सलेम से कहा कि वो संजय दत्त पर हमला ना कराए। सलेम संजय को छोड़ना तो नहीं चाहता था। लेकिन अकबर खान की बात को वो टाल नहीं सकता था। क्योंकि अकबर खान के अहसानों के बोझ में वो बहुत गहरा दबा हुआ था।
आखिरकार उसने अकबर खान से कहा कि उसके लड़के संजय दत्त पर हमला नहीं करेंगे। लेकिन इन दोनों को अकबर खान की कार में बैठकर ही एयरपोर्ट से अपने घर जाना होगा।
ये खबर सुनकर सजंय दत्त की जान में जान आई। आखिरकार वो गोवा से मुंबई लौटे और अकबर खान की ह्यूंडई सैंट्रो कार में सवार होकर अपने घर तक पहुंचे।
ये जो अकबर खान नाम का व्यक्ति था, जो 1993 के ब्लास्ट के बाद अबू सलेम को नेपाल भगाकर आया था, वो कोई बड़ा काईयां आदमी था। उसने फ्री में संजय दत्त और सजंय गुप्ता की मदद नहीं की थी।
वो बाद में कई दफा संजय गुप्ता के लोखंडवाला ऑफिस में उनसे मिलने पहुंचा था। और उसने कई लाख वसूले थे। हालांकि सलेम से बचाने की फीस के तौर पर नहीं। उधार मांगकर।
लेकिन वो उधार उसने कभी नहीं चुकाया। चुकाता भी क्यों? उसके लिए तो वो संजय दत्त और संजय गुप्ता की जान बचाने की कीमत थी। मजबूर संजय गुप्ता भी उस समय उस अकबर खान को कुछ ना कह सके।
अकबर खान नाम के उस व्यक्ति ने संजय दत्त को भी नहीं बख्शा। उसने संजय दत्त से अपनी एक थर्ड क्लास फिल्म में काम कराया। वो भी एकदम फ्री में। जबकी उस वक्त संजय दत्त की मार्केट प्राइस करोड़ों में थी।
वो फिल्म कौन सी थी ये तो पता नहीं लग सका। लेकिन रेडिफ डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उस वक्त बहुत लोग हैरान थे कि संजय दत्त ने इतनी घटिया फिल्म में काम किया क्यों। वो संजय के करियर की सबसे बड़ी डिज़ास्टर फिल्मों में से एक थी। आपको पता हो तो बताइएगा मुझे भी।
बताया जाता है कि बाद में संजय दत्त के बारे में अबू सलेम अपने चमचों के सामने शेखी बघारते हुए कहा करता था कि उसने संजय दत्त को इसलिए माफ किया क्योंकि संजय ने उससे सेटेलाइट फोन पर बात करके रोते हुए माफी मांगी थी।
उस ज़माने में सेटेलाइट फोन पर एक मिनट बात करने के लिए एक हज़ार रुपए चुकाने पड़ते थे। सलेम ये भी कहता था कि उसने संजय दत्त को सिर्फ इसलिए माफ किया क्योंकि संजय दत्त दिल का अच्छा आदमी है।
उस दिन कोर्टरूम में संजय दत्त अबू सलेम से दूर रहने के लिए सबसे पीछे वाली सीट पर कुछ दूसरे आरोपियों संग बैठे गए थे। जबकी सलेम के चारों तरफ एटीएस के अफसरों ने अपना सुरक्षा घेरा बनाया हुआ था। इसलिए ताकि कोई सलेम को नुकसान ना पहुंचाए। और सलेम किसी भी तरह से संजय दत्त को नुकसान पहुंचा सके।
सुनवाई के दौरान हुए ब्रेक में कई आरोपियों ने सलेम को घेर लिया। कुछ सलेम के गले मिल रहे थे। कुछ उससे दुआ-सलाम कर रहे थे। संजय दत्त चुपचाप एक कोने में खड़े थे। फिर वो रूम से बाहर निकल गए।
अबू सलेम संजय दत्त से मिलना चाहता था। या कम से कम संजय दत्त को एक दफा घूरना चाहता था। कहते हैं कि अबू सलेम एक दफा जिसे घूर लेता था उसकी हालत खराब हो जाती थी। जब ATS अधिकारियों के साथ सलेम कोर्टरूम की सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था तब संजय दत्त उसे वहीं खड़े मिले।
संजय दत्त के चेहरे पर ऑकवर्डनेस साफ देखी जा सकती थी। लेकिन सलेम उन्हें देखकर सिर्फ मुस्कुरा रहा था। संजय को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या कहे।
आखिरकार उन्होंने अबू सलेम से कहा,"सलाम अलैकुम भाई।" सलेम ने भी फौरन जवाब दिया,"वालैकुम सलाम।" "खैरियत?" संजय दत्त ने सलेम से पूछा। लेकिन सलेम ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। वो वहां से चला गया। संजय दत्त ने राहत की सांस ली।