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Apna Himachal It's home to scenic mountain towns and resorts such as Dalhousie. Host to the Dalai Lama, Himachal Pradesh has a strong Tibetan presence.

This is reflected in its Buddhist temples and monasteries.

शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर वन्यजीव सप्ताह के तहत हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग ने मिनी मैराथन का आयोजन किया...
04/10/2026

शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर वन्यजीव सप्ताह के तहत हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग ने मिनी मैराथन का आयोजन किया। विधायक हरीश जनारथा ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभागियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 5 और 8 किलोमीटर की दौड़ में बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

04/10/2026

कोकसर चेकपोस्ट से मिली जानकारी के अनुसार दो अक्तूबर को करीब 350 पर्यटक वाहन गुजरे, जबकि लोसर चेकपोस्ट से लगभग 620 वाहन निकले। इससे कुछ वाहन चंद्रताल की ओर निकले। पर्यटकों की बढ़ती आमद से स्थानीय होटल, होम स्टे, टैक्सी और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।

कोकसर चेकपोस्ट से मिली जानकारी के अनुसार दो अक्तूबर को करीब 350 पर्यटक वाहन गुजरे, जबकि लोसर चेकपोस्ट से लगभग 620 वाहन न...
04/10/2026

कोकसर चेकपोस्ट से मिली जानकारी के अनुसार दो अक्तूबर को करीब 350 पर्यटक वाहन गुजरे, जबकि लोसर चेकपोस्ट से लगभग 620 वाहन निकले। इससे कुछ वाहन चंद्रताल की ओर निकले। पर्यटकों की बढ़ती आमद से स्थानीय होटल, होम स्टे, टैक्सी और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।
बेशक पर्यटकों की बढ़ती संख्या जहां स्थानीय लोगों की आर्थिकी के लिए अच्छी मानी जा रही है, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से यह स्थिति चिंता का विषय भी बन रही है। चंद्रताल क्षेत्र बेहद नाजुक पारिस्थितिकी वाला क्षेत्र है। झील के समीप सीबी रेंज की पहाड़ियों में बड़ी संख्या में हिमनद मौजूद हैं। अक्तूबर में भी मौसम के अपेक्षाकृत गर्म रहने और बड़ी संख्या में वाहनों के हिमनदों के नजदीक पहुंचने से पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं। उनको लगता है कि अधिक लोगों की मौजूदगी इस प्राकृतिक ठिकाने के लिए सही नहीं है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित मनाली दौरे को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। राष्ट्रपति छह अक्त...
03/10/2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित मनाली दौरे को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। राष्ट्रपति छह अक्तूबर को दोपहर तक मनाली पहुंचेंगी और सात अक्तूबर तक मनाली में रुकेंगी। आठ अक्तूबर की सुबह वह मनाली से रवाना होंगी। राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान ड्रोन और पैराग्लाइडिंग के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के छह से आठ अक्तूबर तक प्रस्तावित मनाली दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मनाली को नौ सेक्टरों में बांटा गया है और करीब 600 जवान तैनात रहेंगे। इस दौरान ड्रोन और पैराग्लाइडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

हिमाचल प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को अपने 52 वर्ष पूर...
03/10/2026

हिमाचल प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को अपने 52 वर्ष पूरे कर लिए। दो अक्तूबर 1974 को मंडी-कुल्लू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन और हिमाचल गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट के विलय से अस्तित्व में आए निगम ने पांच दशकों से अधिक के सफर में प्रदेश के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों को सडक़ परिवहन से जोडऩे में अहम भूमिका निभाई है। स्थापना के समय निगम के पास 733 बसें और 379 रूट थे, जबकि आज इसका बस बेड़ा करीब 3300 से अधिक बसों तक पहुंच चुका है और लगभग 3700 रूटों पर सेवाएं संचालित की जा रही हैं। हिमाचल में सार्वजनिक परिवहन के विकास की शुरुआत राज्य के गठन के शुरुआती वर्षों में हुई।

1949-50 के दौरान परिवहन सेवाओं के राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 1958 में पंजाब सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और रेलवे के संयुक्त उपक्रम के रूप में मंडी-कुल्लू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन का गठन किया गया। दो अक्तूबर , 1974 को इसका हिमाचल गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट के साथ विलय हुआ और हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन का गठन किया गया। एचआरटीसी आज दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक सेवाएं दे रही है।

03/10/2026

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हिमाचल प्रदेश में जमीन के बंदोबस्त की लंबी प्रक्रिया को अब छोटा किया जा रहा है। प्रदेश सरकार इसके लिए बंदोबस्त के नियमों...
03/10/2026

हिमाचल प्रदेश में जमीन के बंदोबस्त की लंबी प्रक्रिया को अब छोटा किया जा रहा है। प्रदेश सरकार इसके लिए बंदोबस्त के नियमों में बदलाव कर रही है। बदलाव के बाद पांच साल में बंदोबस्त कर जमीन की सीमाएं तय की जाएंगी। अभी तक जो व्यवस्था चल रही है, उसके अनुसार 40 साल में एक बार बंदोबस्त करने का प्रावधान है। बंदोबस्त के नियम बदलने को लेकर सचिवालय में राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई है। इसमें भूमि अभिलेख निदेशक, बंदोबस्त और राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में निदेशक भूमि अभिलेख को कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में सेवानिवृत्त अधिकारी (जिन्होंने पहले बंदोबस्त किया है) को भी शामिल करने को कहा है। 10 दिन के भीतर कमेटी अधिसूचित होगी। एक महीने के भीतर कमेटी मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन कर नियमों में जरूरी बदलाव के सुझाव देगी।

हिमाचल में इस साल सेब की फसल पिछले सीजन के मुकाबले में करीब 20 हजार मीट्रिक टन कम है। अब तक 3.87 लाख मीट्रिक टन सेब बाजा...
03/10/2026

हिमाचल में इस साल सेब की फसल पिछले सीजन के मुकाबले में करीब 20 हजार मीट्रिक टन कम है। अब तक 3.87 लाख मीट्रिक टन सेब बाजार पहुंचा है, जबकि पिछले सीजन में इसी अवधि तक 4.07 लाख मीट्रिक टन पहुंच चुका था। कम आवक का असर आने वाले दिनों में बाजार भाव पर पड़ सकता है। उत्पादन में गिरावट के पीछे मौसम को प्रमुख कारण माना जा रहा है। साल दर साल सेब बागवानी पर जलवायु परिवर्तन की मार बढ़ रही है। दिसंबर 2023 से मई 2024 के बीच पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से चिलिंग ऑवर प्रभावित हुए। इसके बाद बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और मौसम में असमानता से फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इस बार ड्रॉपिंग भी अधिक रही और सेब सीजन करीब 15 दिन देरी से शुरू हुआ। वहीं, जम्मू-कश्मीर में हालत और खराब है, जहां उत्पादन 40 फीसदी तक घट गया है।

हिमाचल प्रदेश में बिजली संकट गहराने लगा है। मानसून सीजन में कम बारिश के कारण जल विद्युत परियोजनाओं में घटे उत्पादन ने हि...
03/10/2026

हिमाचल प्रदेश में बिजली संकट गहराने लगा है। मानसून सीजन में कम बारिश के कारण जल विद्युत परियोजनाओं में घटे उत्पादन ने हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड की चिंता बढ़ा दी है। हालात ये हैं कि कई क्षेत्रों में अघोषित कट लगने शुरू हो गए हैं। राजधानी शिमला में बीते दो दिनों से पीक आवर्स में 15-15 मिनट के कट लग रहे हैं। प्रदेश में मौजूदा समय में रोजाना करीब 280 से 300 लाख यूनिट तक बिजली उत्पादन हो रहा है, जबकि खपत 380 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई है। यानी प्रतिदिन 80 से 100 लाख यूनिट तक की कमी सामने आ रही है। कमी पूरा करने के लिए बोर्ड बाहरी स्रोतों से बिजली जुटाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन उत्तरी ग्रिड और ओपन मार्केट से भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। हिमाचल की बिजली व्यवस्था मुख्य रूप से जल विद्युत परियोजनाओं पर निर्भर है। मानसून में सामान्य से करीब 11 फीसदी कम बारिश होने का असर सीधे परियोजनाओं के उत्पादन पर पड़ा है।

02/10/2026

हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने के बाद बदलाव के संकेत हैं। मौसम विभाग के 2 अक्तूबर के बुलेटिन के अनुसार 5 अक्तूबर को एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश/बर्फबारी, जबकि 6 और 8 अक्तूबर को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी होने की संभावना है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के भी आसार हैं। वहीं, 6 अक्तूबर को ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, शिमला और सिरमौर के एक-दो स्थानों पर आंधी-तूफान, बिजली चमकने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है

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