03/10/2026
हिमाचल प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को अपने 52 वर्ष पूरे कर लिए। दो अक्तूबर 1974 को मंडी-कुल्लू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन और हिमाचल गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट के विलय से अस्तित्व में आए निगम ने पांच दशकों से अधिक के सफर में प्रदेश के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों को सडक़ परिवहन से जोडऩे में अहम भूमिका निभाई है। स्थापना के समय निगम के पास 733 बसें और 379 रूट थे, जबकि आज इसका बस बेड़ा करीब 3300 से अधिक बसों तक पहुंच चुका है और लगभग 3700 रूटों पर सेवाएं संचालित की जा रही हैं। हिमाचल में सार्वजनिक परिवहन के विकास की शुरुआत राज्य के गठन के शुरुआती वर्षों में हुई।
1949-50 के दौरान परिवहन सेवाओं के राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 1958 में पंजाब सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और रेलवे के संयुक्त उपक्रम के रूप में मंडी-कुल्लू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन का गठन किया गया। दो अक्तूबर , 1974 को इसका हिमाचल गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट के साथ विलय हुआ और हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन का गठन किया गया। एचआरटीसी आज दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक सेवाएं दे रही है।