Sonvarsha

Sonvarsha Sonvarsha is village situated in obra block of Aurangabad district , Bihar. Around 2000 people lives

 ; औरंगाबाद में चाचा ने दो भतीजे और एक भतीजी को कटर से काटकर मार डाला।औरंगाबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई ह...
27/03/2026

; औरंगाबाद में चाचा ने दो भतीजे और एक भतीजी को कटर से काटकर मार डाला।

औरंगाबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक चाचा ने अपने 3 भतीजे-भतीजियों को कटर से काटकर मार डाला। बताया जा रहा है कि चाचा ने फुल साउंड में गाना बजाया और सभी को काटता गया। दरवाजा खोलने में देरी होने पर उसने इस वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद खुद भी गला काटकर सुसाइड की कोशिश की। उसकी हालत भी गंभीर बनी है। घटना हसपुरा थाना क्षेत्र के खुटहन गांव की है।

मृतकों की पहचान गुड्डू पाल के बेटे अनीश कुमार (10), आयुष कुमार (7) और अनुष्का कुमारी (5) के रूम में हुई है।

आरोपी अमंत पाल ने घटना को क्यों अंजाम दिया, इसकी स्पष्ट जानकारी फिलहाल किसी को नहीं है। बताया जा रहा है कि आरोपी की अभी शादी नहीं हुई है।

शुक्रवार की सुबह घर से बाइक पर सवार होकर कहीं निकला था। जब घर पहुंचा तो दरवाजा खटखटाया। उसकी भाभी अनीता देवी बाथरूम में नहा रही थी।

जिसके कारण दरवाजा खोलने में देरी हुई। दरवाजा खोलने के बाद वह घर में घुसा और फुल साउंड में स्पीकर बजाकर कटर मशीन से तीनों बच्चों का बारी-बारी से गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद खुद का भी गला काट लिया। बच्चों के पिता गुड्डू ट्रेन में पैंट्री कार में खाना बनाने का काम करते हैं।

जानकारी के अनुसार, तीनों बच्चों के शव एक कमरे से मिले हैं। बॉडी एक साथ ही पड़ी थी। तीनों के गले पर गंभीर घाव हैं। कमरे में चारों ओर खून बिखरा है। पास ही चाचा भी पड़ा है। उसके भी गले से खून निकल रहा है।

मौके पर पहुंचे लोगों ने सभी को खून से लथपथ देखा। इसके बाद पता चला कि चाचा की सांस चल रही है। लोगों ने एंबुलेंस को कॉल किया। पहले उसे हायर सेंटर लाया गया। हालत गंभीर देखते हुए पटना रेफर किया गया है।

आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!भगवान शिव आप सभी को ढेर सारी खुशियां और समृद्धि प्रदान करें!🙏🙏🙏
15/02/2026

आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
भगवान शिव आप सभी को ढेर सारी खुशियां और समृद्धि प्रदान करें!🙏🙏🙏

बंजर जमीन से 1.30 करोड़ का मुनाफा! मिलिए औरंगाबाद के 'अमरूद किंग' नरेश कुमार से 👑बिहार के औरंगाबाद (देव) के रहने वाले कि...
20/01/2026

बंजर जमीन से 1.30 करोड़ का मुनाफा!

मिलिए औरंगाबाद के 'अमरूद किंग' नरेश कुमार से 👑

बिहार के औरंगाबाद (देव) के रहने वाले किसान नरेश कुमार ने वो कर दिखाया जिसे लोग नामुमकिन समझते थे। 125 एकड़ बंजर जमीन, जो कभी खाली पड़ी थी, आज वहां 'ताइवान पिंक अमरूद' की खुशबू महक रही है। 🍎

✨सफलता का फॉर्मूला:

हिम्मत: ₹6,000/एकड़ पर लीज पर ली बंजर जमीन।

तकनीक: ATMA से ट्रेनिंग ली और 'हाई-डेंसिटी फार्मिंग' को अपनाया।

स्मार्ट खेती: पीएम कृषि सिंचाई योजना के जरिए 'ड्रिप इरिगेशन' का इस्तेमाल।

सरकारी साथ: ₹50 लाख की लागत में ₹35 लाख की भारी सब्सिडी।

नतीजा? 6,000 क्विंटल बंपर पैदावार और ₹1.30 करोड़ का शुद्ध मुनाफा! 💰

नरेश जी की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और तकनीक सही हो, तो मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है।

अन्नदाता की जय! 🌾 भारत सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की भूख मिटाने की क्षमता रखता है। हमारे किसानों की मेहनत ने ...
31/12/2025

अन्नदाता की जय! 🌾 भारत सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की भूख मिटाने की क्षमता रखता है। हमारे किसानों की मेहनत ने आज हमें वैश्विक खाद्य सुरक्षा का स्तंभ बना दिया है। गर्व है! 🇮🇳

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रही हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी  के एक अस्पत...
31/12/2025

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रही हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी के एक अस्पताल में 'भगवान कल्कि' का अवतार जन्म हुआ है। दावे के मुताबिक, इस नवजात बच्चे के दर्शन के लिए सैकड़ों अघोरी साधु अस्पताल पहुँच गए।

यह खबर पूरी तरह से भ्रामक और फर्जी है। वायरल फोटो AI की मदद से बनाई गई है और बनारस के किसी अस्पताल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। यह केवल सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज बटोरने के लिए फैलाया जा रहा है यह एक प्रोपेगेंडा है। ​ ​ ​

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03/07/2025

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Audio Credits:Track - HUM BIHARIArtist - SUDHLyrics - SUDHMusic - ‪‬ Video Credits:Produced by - SUDHDirected by - Ayush / Karan Co-Directed - SU...

वर्ष 2003, कश्मीर शोपियां: -   एक युवा कश्मीरी लड़का इफ्तिखार भट्ट, कंधे की लंबाई के बाल और पारंपरिक कश्मीरी परिधान फेरन ...
29/05/2025

वर्ष 2003, कश्मीर शोपियां: -
एक युवा कश्मीरी लड़का इफ्तिखार भट्ट, कंधे की लंबाई के बाल और पारंपरिक कश्मीरी परिधान फेरन पहने हुए खूंखार आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के पास उनके संगठन में सम्मिलित होने पहुंचा....... जब उससे पूछा गया कि वह भारतीय सेना से क्यों लड़ना चाहता है, तो उसने खालिस कश्मीरी में भारतीय सेना को भद्दी से भद्दी गालियां देते हुए एक पथराव के दौरान की गयी सैन्य कार्यवाही में हुए अपने भाई की मौत के लिए सेना को ज़िम्मेदार ठहराया।

उसकी कहानी सुनने और सेना के प्रति उसकी नफरत और उसके जुनून को देखते हुए उसे अपने काम का लड़का समझकर उसे सैन्य प्रशिक्षण हेतु पाकिस्तान ले जाया गया, जहां अन्य युवा जेहादियों की तुलना में इस युवा लड़के ने कहीं बढ़कर प्रदर्शन किया और उनसे कहीं अधिक मजहबी कट्टरता भी दिखाई, जिसे देखते हुए उसे नेतृत्व और वैचारिक प्रशिक्षण के लिए तुरंत ही चिह्नित कर लिया गया, और फिर कई स्तर के सैन्य वैचारिक और नेतृत्व प्रशिक्षण के बाद अंत में उसे LOC पार कर भारतीय सेना की चौकी पर हमला करने हेतु भेजा गया ।

उसकी क्षमताओं को देखते हुए एक अभूतपूर्व कदम उठाया गया और उसे अबू सबजार और अबू तोरा जैसे दशकों का अनुभव रखने वाले हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडरों का दायां हाथ नियुक्त किया गया , जिससे उसकी वास्तविक कॉम्बैट एक्शन स्किल्स और उसकी नेतृत्व क्षमताओं का भी विकास हो सके.......... 2004 में इफ्तिखार भट्ट ने अपने दोनों वरिष्ठ हिजबुल कमांडरों को आश्वस्त किया कि वह सेना की चौकी पर एक सफल हमला कर सकता है जिसमें भारतीय सेना को अधिकतम नुकसान होगा, फिर वह उन्हें उस स्थान पर ले गया जहां से वह भारतीय सेना पर हमला अंजाम देना चाहता था और उन्हें प्रभावित करते हुए उसने उन्हें सेना पर हमले की अपनी योजना की पूरी विस्तृत रणनीति बताई,

हिजबुल कमांडर अबू सबजार को इस बात पर संदेह हुआ कि बिना किसी असली कॉम्बैट अनुभव के यह युवा लड़का आखिर इतनी कुशलता, बारीकी व् सावधानीपूर्वक ऐसे जटिल सैन्य हमले की योजना कैसे बना सकता है.....
जिसके बाद उन्होंने उससे उसकी पृष्ठभूमि, उसके अतीत और उसकी कहानी के बारे में उससे सवाल पूछने शुरू कर दिये,

आपने वरिष्ठ कमांडरों में अपने प्रति अविश्वास को देख भड़कते हुए युवा लड़के ने उन्हें अपनी AK 47 दी और कहा कि यदि वे उसपर भरोसा नहीं करते हैं तो वे उसे तत्क्षण गोली मार सकते हैं, और कुछ कदम पीछे हटकर खड़ा हो गया,
इसके पहले हाथों में AK-47 पकड़े हिजबुल कमांडर किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाते, उस युवा लड़के ने बिजली की तेजी से TT-30 9mm टोक्रेव पिस्टल निकाली और दोनों को गोली मार दी, 2-2 गोलियां छाती पर व् एक-एक सिर पर, भारतीय सेना के पैरा एसएफ ऑपरेटर का टिपिकल सिग्नेशर मूव, दोनो हिजबुल कमांडरों को यह पता तक नही चला कि उनके संग क्या हुआ, इसके बाद उस लड़के इफ्तिखार भट्ट ने सारे हथियार समेटे और उन्हें लेकर पास के आर्मी कैंप तक टहलते हुए चला गया, उस लड़के का वास्तविक नाम था मेजर मोहित शर्मा, 1 पैरा एसएफ, (मद्रास रेजिमेंट) भारतीय सेना।

भारतीय सेना का यह अधिकारी वर्ष 2009 में कश्मीर में एक कोर्डन व् सर्च ऑपरेशन में मातृभूमि पर अपना सर्वस्व बलिदान कर गया, और अपने सेकेंड इन कमांड से कहे उसके अंतिम शब्द थे "सुनिश्चित करो कि कोई भी बचके निकलने न पाय।"

कड़वा यथार्थ वास्तविक हीरो फिल्मों, टीवी सीरियलों,वेब सीरीज़ व् सिनेमा हॉल की स्क्रीन पर नहीं पाए जाते...

ऐसे मां भारती के सपूत को कोटि कोटि नमन

एक नौजवान, एक किसान की बेटी से शादी करने की इच्छा लेकर किसान के पास पहुँचा।किसान ने गौर से उसकी ओर देखा और मुस्कुराते हु...
24/03/2025

एक नौजवान, एक किसान की बेटी से शादी करने की इच्छा लेकर किसान के पास पहुँचा।

किसान ने गौर से उसकी ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा,

"शादी हो सकती है, लेकिन एक शर्त है। अगर तुम इसे पूरा कर सको, तो मेरी बेटी तुम्हारी होगी।"

युवक ने उत्सुकता से पूछा, "क्या शर्त है?"

किसान ने समझाया,

"तुम मेरे खेत में जाओ। मैं तीन बैल छोड़ूँगा—अगर तुम इनमें से किसी भी एक की पूँछ पकड़ लो, तो मेरी बेटी से तुम्हारी शादी पक्की!"

युवक को चुनौती रोमांचक लगी, और वह खुशी-खुशी खेत में जा खड़ा हुआ।

पहला दरवाजा खुला…

जैसे ही किसान ने दरवाजा खोला, एक बेहद विशाल और खतरनाक बैल गरजता हुआ बाहर आया। युवक डर के मारे एक ओर हट गया और सोचने लगा, "चलो, अगला बैल सही रहेगा!"

दूसरा दरवाजा खुला…

इस बार पहले से भी ज़्यादा भयंकर बैल निकला। युवक के पसीने छूट गए! उसने फिर फैसला किया, "इससे भी बचना ही बेहतर है। तीसरे बैल का इंतज़ार करता हूँ!"

तीसरा दरवाजा खुला…

अब युवक के चेहरे पर मुस्कान आ गई। इस बार एक कमजोर, मरियल सा बैल निकला। उसने खुशी-खुशी अपनी मुद्रा बनाई, कमर कसी और पूँछ पकड़ने को तैयार हो गया।

लेकिन… इस बैल की पूँछ ही नहीं थी!

युवक ने अपना सिर पकड़ लिया। अब पछताने के अलावा कोई चारा नहीं था। खाली हाथ उसे लौटना पड़ा।

सीख :-

ज़िन्दगी अवसरों से भरी हुई है—कुछ आसान, कुछ कठिन। लेकिन अगर आप पहला अवसर गँवा देते हैं, तो जरूरी नहीं कि दूसरा या तीसरा आपके लिए सही हो। इसलिए, जो भी मौका मिले, उसे तुरंत पकड़ने की कोशिश करें!

बाकी आपकी समझदारी।।

चाणक्य की नीति हूँ , आर्यभट्ट का आविष्कार हूँ मैं ।महावीर की तपस्या हूँ , बुद्ध का अवतार हूँ मैं।अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।...
22/03/2025

चाणक्य की नीति हूँ , आर्यभट्ट का आविष्कार हूँ मैं ।
महावीर की तपस्या हूँ , बुद्ध का अवतार हूँ मैं।
अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।।

बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

#बिहार_दिवस

आज 13/03/025 को ग्राम सोनवर्षा में शिव मंदिर के प्रागंण में अखण्ड सह कीर्तन का आयोजन किया गया है, अतः जितने भी श्रद्धालु...
13/03/2025

आज 13/03/025 को ग्राम सोनवर्षा में शिव मंदिर के प्रागंण में अखण्ड सह कीर्तन का आयोजन किया गया है, अतः जितने भी श्रद्धालु है आकर शामिल होकर पुण्य के भागी बने,🙏🙏🙏

वो चालीस बार से ज्यादा सलेक्शन में गया। एक भी जगह सलेक्ट नहीं हुआ। कभी गेंदबाजी में फेल होकर बल्लेबाज बनने की सोचा, तो क...
11/03/2025

वो चालीस बार से ज्यादा सलेक्शन में गया। एक भी जगह सलेक्ट नहीं हुआ। कभी गेंदबाजी में फेल होकर बल्लेबाज बनने की सोचा, तो कभी हारकर विकेटकीपर बन गया।

ज़िंदगी उसे क्या बनाना चाहती थी, समझ नहीं आ रहा था। आख़िरकार एक दिन सपनों की पिच पर बोल्ड होने के बाद उसने तय कर लिया कि अब हमेशा के लिए क्रिकेट छोड़ देगा और पढ़ाई करेगा।

फिर पांच साल उसने आर्टिटेक्ट की पढ़ाई की और पढ़ाई के बाद तीन साल की नौकरी।

नौकरी से भी मन ऊब गया...तो बाप को फोन किया कि पापा ये नौकरी हमसे नहीं हो रहा। बस एक बार और ट्राई करने दो, इस बार नहीं हुआ तो पक्क़ा क्रिकेट छोड़ दूंगा।

पिता ने इजाज़त दे दी तो उसने नौकरी छोड़कर भारत का सबसे फ़ास्ट बॉलर बनने का सपना देख लिया। औऱ हमेशा की तरह उसमें भी फेल हो गया। इतने फेलियर के बाद तो बस अंतिम प्रण ही बाकी था।

अंतिम बार तय किया कि अबकी स्पिन बॉलिंग करूँगा और अगर इस बार कुछ न हुआ तो पक्का क्रिकेट छोड़ दूंगा।

अब जरा कल के मैच में आते हैं।

चार-पाँच ओवर के बाद खूंखार ट्रैविस हेड शमी और पांड्या को अपने चिर-परिचित स्टाइल में मार रहा है...देश के करोड़ों लोगों की सांस थम गई हैं।

मेरे आस-पास कुछ लोगों ने तो डरके मारे टीवी तक बन्द कर लिया है कि हेडवा ससुरा फार्म में आ गया बे, अब तो आस्ट्रेलिया तीन सौ रन बना लेगा।

तभी कप्तान रोहित शर्मा बॉल उसी लड़के को थमातें हैं, जो एक दिन क्रिकेट से हार मानकर आर्टिटेक्ट बन गया था।

दूसरी ही बाल होती है... हेड सामने है...देखते ही देखते इस आर्टिटेक्ट ने हेड को आउट करके भारत की जीत का नक्शा प्रस्तुत कर दिया है और टीवी पर नज़र गड़ाए करोड़ो भारतीयों की बांछे खिल गईं हैं।

बार-बार वरुण चक्रवर्ती के बारे में सोचता हूँ तो लगता है कि क्या वरुण की कहानी उन तमाम मिडिल क्लॉस लड़कों की कहानी नही है, जो थक-हारकर सपने और नौकरी की लड़ाई में एक दिन नौकरी के हाथों क्लीन बोल्ड हो जाते हैं और वहीं सेम पिच पर जीवन भर घीसते रहतें हैं।

वरुण आज नौकरी कर रहे होते तो न जाने कहाँ होते। लेकिन आज अपने उस एक फैसले से हम सबके सामने हैं..गर्व का विषय बनकर।

क्रिकेट में हार-जीत तो लगा रहेगा...

लेकिन जिस देश का सबसे गरीब बच्चा भी बाल और बैट का जुगाड़ कर लेता है। डंडे से स्टम्प बना लेता है..उस देश में वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ियों का आते रहना ज़रूरी है।

ये कहानियां फेल होने के बाद भी सपने देखना और उसे हर हाल पूरा करना सिखाती हैं।

शाबाश वरुण... ❤️

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