03/06/2026
कुचामन में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को काले झंडे दिखाकर पानी, बिजली और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे जनहित के मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने तथा ज्ञापन देने वाले RLP कार्यकर्ताओं के विरुद्ध की गई पुलिस कार्रवाई और दर्ज किए गए मुकदमों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि किसी राजनीतिक कार्यकर्ता के खिलाफ केवल सत्ता पक्ष की आलोचना करने या लोकतांत्रिक विरोध व्यक्त करने के कारण मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और उस पर इनाम घोषित किया जाता है, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
लोकतंत्र में असहमति कोई अपराध नहीं होती। विरोध और असहमति नागरिकों के संवैधानिक अधिकार हैं। सरकारों को आलोचना सुनने का साहस रखना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र संवाद से चलता है, दमन से नहीं। यदि जनभावनाओं और लोकतांत्रिक विरोध का जवाब मुकदमों, गिरफ्तारियों और दबाव की राजनीति से दिया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर स्थिति होगी।
डीडवाना–कुचामन जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा RLP कार्यकर्ताओं को हिस्ट्रीशीटर अपराधियों की तरह प्रस्तुत करते हुए उन पर इनाम घोषित करना कई सवाल खड़े करता है। पुलिस का दायित्व कानून के अनुसार निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई करना है, न कि किसी राजनीतिक दबाव या प्रभाव में कार्य करना। ऐसी कार्रवाई से आमजन के बीच प्रशासन की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
लोकतंत्र में विरोध की आवाज को मुकदमों और दबाव से दबाने का प्रयास कभी भी स्थायी समाधान नहीं हो सकता। जनहित के मुद्दों को उठाने वालों को अपराधी की तरह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के सहभागी के रूप में देखा जाना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती असहमति के सम्मान में है, उसके दमन में नहीं।
यदि सरकार घोषित इनाम जैसे घिनौने कृत्य को वापिस नहीं लेती है, तो इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।
लोकतंत्र में सत्ता जनता के विश्वास, जनसमर्थन और जवाबदेही से चलती है, भय, दमन और प्रतिशोध की राजनीति से नहीं।"