Afzal Ansari UP57

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29/03/2026

शाकिब सैफी और कनिका शर्मा को शादी मुबारक। 💐

नफ़रतों के माहौल में शादी का कामयाब होना, यक़ीनन दोनों के घरवालों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।









58 महिलाओं के यौन शोषण का वीडियो वायरल है... इसके बाद ये निर्लज्ज कह रहा कि ये धर्म का हिस्सा था....  सोचिए अगर ये किसी ...
29/03/2026

58 महिलाओं के यौन शोषण का वीडियो वायरल है... इसके बाद ये निर्लज्ज कह रहा कि ये धर्म का हिस्सा था.... सोचिए अगर ये किसी मदरसे का मामला होता तो... पूरा देश हिल जाता....

सनातन धर्म नहीं कहता किसी का यौन शोषण करो... धर्म के नाम पर ये जो घिनौनी हरकत हुई है इसके बाद तथाकथित धर्म रक्षक और सेनाएं कहां मर गई हैं... हिंदू सेना, करनी सेना,उपदेश राणा, गौरव गोस्वामी,मोनू मानेसर जैसे नफ़रती कहां मर गए.... कहा है खुशबू पाण्डेय कहां मर गए ये सब लो एक्शन... आपके धर्म पर कलंक लगा गए ये.... नवमी पर मस्जिद के आगे नाचना या गोमांस का आरोप लगा के किसी निर्दोष की हत्या कर देना ही धर्म रक्षा है क्या...?








मानना पड़ेगा गजब का टोपीबाज़ आदमी है ये बंदा 🤣
29/03/2026

मानना पड़ेगा गजब का टोपीबाज़ आदमी है ये बंदा 🤣








29/03/2026

"बदन मेरा मिट्टी का, सांसें मेरी उधार हैं, घमंड करूं तो किस बात का, यहां हम सब किराएदार हैं" ☝️






हमारे इलाके में एक बुजुर्ग सज्जन हैं। पहले साइकल से फेरी लगाते थे, रंग और धागे जैसी चीजें बेचने का। वो हाथ देखने के लिए ...
28/03/2026

हमारे इलाके में एक बुजुर्ग सज्जन हैं। पहले साइकल से फेरी लगाते थे, रंग और धागे जैसी चीजें बेचने का। वो हाथ देखने के लिए भी मशहूर हैं। एक महिला थीं, उन्होंने अपना हाथ दिखाया। वो बोले कि आपकी दो शादियां होंगी।

महिला हंसने लगीं। उनके दो बच्चे थे। बड़ी लड़की की उम्र करीब 7 साल थी। वो बोलीं कि अब इस उम्र में दो बच्चों की मां होकर कहां दूसरी शादी करूंगी। लेकिन, तकदीर ने ऐसा फेरा खाया कि उनके पति ने उन्हें छोड़ दिया। और उनकी मजबूरी में दूसरी शादी हुई।

उस बुजुर्ग ने कई और लोगों के बच्चों, विवाह और नौकरी के बारे में हाथ देखकर कई 'भविष्यवाणी' की, जिनमें से अधिकतर सही साबित हुई। मेरे दोस्त के बारे में भी उन्होंने बताया कि आप तीन नौकरी बदल चुके हैं और चौथी में आप स्थायी होंगे। जबकि उसने अपनी नौकरी बदलने के बारे में अपने परिवार तक को भी नहीं बताया था।

मुझे नहीं पता कि ये सब इत्तेफाक है या फिर उन्हें सच में ज्योतिष का बहुत तगड़ा ज्ञान है। लेकिन, उन्होंने कभी हाथ देखने के बदले कुछ मांगा नहीं। अगर कोई अपनी खुशी से कुछ देना चाहे, तो वो अलग बात है। नहीं तो मैंने हमेशा उन्हें साइकल पर ही फेरी लगाते देखा। घर भी बहुत सामान्य ही है।

ये सब बताने का मतलब बस यही है कि अगर किसी में जरा सी भी आध्यात्मिक ताकत होगी, तो वो उसकी बोली नहीं लगाएगा। उसे माया का लोभ नहीं होगा। जैसा कि आजकल बहुत से फर्जी बाबाओं और ज्योतिषियों का है। जिनका धर्म, ज्ञान और ज्योतिष से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं। जैसे कि न्यूमरोलॉजिस्ट यानी अंकों के आधार पर भविष्य बताने का दावा करने वाला अशोक खरात।

67 साल का ये आदमी मर्चेंट नेवी में अधिकारी रह चुका है। लेकिन, उसे छोड़कर लोगों का मूर्ख बनाने का धंधा शुरू किया और अरबों की संपत्ति बना ली। बड़े-बड़े नेता और अधिकारी उसके पैर धोते, सम्मान करते। और ये आदमी महिलाओं के साथ गंदे काम करके उसका वीडियो बनाता। उन्हें ब्लैकमेल करता। पुलिस ने 58 वीडियो बरामद किए हैं।

अशोक खरात के ग्राहकों में सब प्रभावशाली और अमीर ही लोग थे। उसकी निजी सलाह की फीस ही 50 लाख रुपये थी। इतनी बड़ी रकम तो गरीब लोग पूरी जिंदगी में देख ही नहीं पाते। इससे यह भी साबित होता कि जिन शहरी सफल लोगों को हम और आप पढ़ा-लिखा और समझदार समझते हैं, वो अंदर से कितने खोखले होते हैं। कोई भी फ्रॉड आदमी उनके पैसों और शरीर दोनों को बड़ी आसानी से लूट सकता है।

विश्वास और अंधविश्वास के बीच बड़ी महीन रेखा होती है। अगर आप दोनों के बीच अंतर नहीं कर पाएंगे, तो आपको कोई भी मूर्ख बनाकर ठग लेगा। फिर चाहे आप गरीब हों या फिर अरबपति।








चित्र में एक भावी दूल्हा अपने आज़ाद जीवन की अंतिम टट्टी करते हुए... इसके बाद ये विवाह के बंधन में बंधकर अपनी जनरल अवेयरने...
27/03/2026

चित्र में एक भावी दूल्हा अपने आज़ाद जीवन
की अंतिम टट्टी करते हुए...
इसके बाद ये विवाह के बंधन में बंधकर अपनी
जनरल अवेयरनेस की प्रथम कक्षा में प्रवेश करेगा।😁






पहले मैंने सुना था कि मोर सांप खाता है मुझे यकीन नहीं हुआ पर इन्हें देखकर पूरा यकीन हों गया...😁🙈
27/03/2026

पहले मैंने सुना था कि मोर सांप खाता है मुझे यकीन नहीं हुआ पर इन्हें देखकर पूरा यकीन हों गया...😁🙈





कभी कभी यूंही बैठ लिया करों इन रिक्शे पर ये महलबनाने के लिए नहीं घर का पेट भरने के लिए चलाते है।
08/11/2024

कभी कभी यूंही बैठ लिया करों इन रिक्शे पर ये महल
बनाने के लिए नहीं घर का पेट भरने के लिए चलाते है।

💐💐आपको और आपके परिवार कोदीपावली की हार्दिक शुभकामनाओॅ के साथ“प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं...
31/10/2024

💐💐आपको और आपके परिवार को
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओॅ के साथ
“प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं।
धन, वैभव, यश, ऐश्वर्य के साथ दीपावली पर माँ महालक्ष्मी
आपकी सुख सम्पन्नता स्वास्थ्य व हर्षोल्लास में वृद्धि करें,
इन्हीं शुभेच्छाओं के साथ।”
!! शुभ दीपावली !!
🙏🏻🙏🏻
आपका भाई
अफजल अंसारी
पूर्व प्रत्याशी ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत परसौनी

 #पुलिस_ने_एक_मुफ्त_यात्रा_योजना_शुरू_की_है, जहां कोई भी महिला जो अकेली है और उसे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच घर जान...
24/08/2024

#पुलिस_ने_एक_मुफ्त_यात्रा_योजना_शुरू_की_है, जहां कोई भी महिला जो अकेली है और उसे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच घर जाने के लिए वाहन नहीं मिल रहा है, वह पुलिस हेल्पलाइन नंबर (1091 और 7837018555) पर संपर्क कर सकती है और वाहन का अनुरोध कर सकती है। वे 24x7 घंटे काम करेंगे. नियंत्रण कक्ष वाहन या निकटतम पीसीआर वाहन/एसएचओ वाहन उसे सुरक्षित रूप से उसके गंतव्य तक ले जाएगा। यह #नि: #शुल्क किया जाएगा। इस संदेश को अपने जानने वाले सभी लोगों तक फैलाएं। अपनी पत्नी, बेटियों, बहनों, माताओं, दोस्तों और उन सभी महिलाओं को नंबर भेजें जिन्हें आप जानते हैं.. उन्हें इसे सेव करने के लिए कहें.. सभी पुरुष कृपया उन सभी महिलाओं के साथ साझा करें जिन्हें आप जानते हैं…। आपातकालीन स्थिति में महिलाएं *खाली संदेश या मिस्ड कॉल* दे सकती हैं.. ताकि पुलिस आपकी लोकेशन ढूंढ सके और आपकी मदद कर सके
#पूरे_भारत_में_लागू

 #मुख्तारअंसारी-:-अंसारी परिवार-:-       👇👇गौरवशाली विरासत 👇👇पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों गाज़ीपुर-बलिया-आज़मगढ़ की ...
02/04/2024

#मुख्तारअंसारी-:-अंसारी परिवार-:-
👇👇गौरवशाली विरासत 👇👇

पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों गाज़ीपुर-बलिया-आज़मगढ़ की आपसी सीमा से सटे भूभाग को "खित्ता ए अंसार" कहा जाता है।

बताते हैं कि मुगलकाल से पहले पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लाहोअलैहेवसल्लम के सहाबी अबू अय्यूब अल-अंसारी के साथी यहां आकर बस गये। इसलिए इसे "खित्ता ए अंसार" अर्थात "अंसार का क्षेत्र" कहा जाने लगा।

धीरे धीरे मऊ , युसुफपुर मुहम्मदाबाद, रसड़ा, नगरा , बिल्थरा रोड , मधुबन , घोसी, मुबारकपुर , मुहम्मदाबाद गोहना , ग़ाज़ीपुर क्षेत्र के हर बिरादरी के मुसलमान अपनी अलग पहचान दिखाने के लिए अपने नाम के आगे "अंसारी" लिखने लगे।

मैं भी उसी "खित्ता ए अंसार" का रहने वाला हूं इसलिए इस इतिहास को अच्छी तरह जानता हूं।

भारत 1983 का क्रिकेट विश्व कप जीत चुका था और यह वह दौर था जब कपिल देव का जुनून लोगों के सर चढ़कर बोल रहा था। तब मेरे बचपन में ग़ाज़ीपुर का रहने वाला मेरा कज़िन कहता था कि एक दो साल रुक जाओ ग़ाज़ीपुर से एक ऐसा क्रिकेटर देश में छाएगा कि कपिल देव को भूल जाओगे।

मैंने नाम पूछा तो बोला "मुख्तार अंसारी"

ग़ाज़ीपुर से 21 किलोमीटर दूर यूसुफपुर मुहम्मदाबाद में 1880 में जन्में डाक्टर मुख्तार अहमद अंसारी अपने समय के सर्वश्रेष्ठ सर्जन मेडिकल डाक्टर थे जिनके पास MD और MS दोनों डिग्री थी।

उनकी प्रतिभा देखते हुए इंग्लैंड ने उन्हें मुफ्त में स्कालरशिप देकर रिसर्च के लिए अपने यहां आमंत्रित किया और उन्होंने लंदन में लॉक हॉस्पिटल और चैरिंग क्रॉस हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दीं।

इंग्लैंड में रहते हुए उन्होंने सर्जरी में इतनी ख्याति प्राप्त की कि आज इंग्लैंड के मशहूर "चैरिंग क्रॉस हॉस्पिटल" में उनके कार्य के सम्मान में एक "अंसारी वार्ड" अभी भी मौजूद है।

बाद में डाक्टर मुख्तार अहमद अंसारी अपने प्रोफेशन को छोड़कर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद गए और महात्मा गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने लगे।

डाक्टर मुख्तार अहमद अंसारी का परिवार अफगानिस्तान में हेरात के सूफी संत अब्दुल्ला अंसारी के पैतृक वंश का दावा करता है जो हज़रत मुहम्मद सल्लाहोअलैहेवसल्लम के सहाबी अबू अय्यूब अल-अंसारी के साथी थे।

डाक्टर मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता आंदोलन में 1927 में कांग्रेस के अध्यक्ष थे , और यह इतिहास है कि उन्हें देखते ही महात्मा गांधी उनके सम्मान में खड़े हो जाया करते थे।

स्वतंत्रता आंदोलन में डाक्टर मुख्तार अहमद अंसारी का कद कितना बड़ा था यह इससे अंदाज़ा लगाइए कि वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों के अध्यक्ष थे।

वह जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के संस्थापकों में से एक थे, 1928 से 1936 तक वे इसके कुलाधिपति भी रहे , खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व किया और तुर्की के कमाल पाशा के खिलाफ देश में आंदोलन का नेतृत्व किया , बाद में उनके खिलाफ़त आंदोलन को महात्मा गांधी ने पुर्ण समर्थन दिया।

यह आंदोलन मुहम्मद अली जिन्ना के सामने महात्मा गांधी की स्वीकृति मुसलमानों में स्थापित कर गया और मुहम्मद अली जिन्ना को मुठ्ठी भर मुसलमानों का ही साथ मिला।

डाक्टर मुख्तार अहमद अंसारी के बेटे सुबहानउल्लाह अंसारी भी एक बेहतरीन क्रिकेटर थे और दिल्ली की सेंट स्टीफंस कॉलेज की क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे।

उनका अपने क्षेत्र में इतना सम्मान था कि युसुफ़पुर मोहम्मदाबाद नगर पंचायत के चुनाव में उनके विरुद्ध किसी का उम्मीदवार होना हर कोई सुब्हानुल्लाह अंसारी के अपमान करने की दृष्टि से देखता था। यही कारण है कि वह सदैव ही निर्विरोध चेयरमैन चुने जाते थे।

सुबहानुल्लाह अंसारी की पत्नी और मुख्तार अंसारी की मां बेगम राबिया देश के लिए शहीद हो गये नौशेरा के शेर ब्रिगेडियर उस्मान की भतीजी थीं।

कौन ब्रिगेडियर उस्मान? जिन्हें पाकिस्तान ने आफर दिया था कि पाकिस्तान का सेनाध्यक्ष पद और ₹50 हज़ार का वेतन आपका इंतजार कर रहा है ,और फिर जिनके सर पर पाकिस्तान ने उसी ₹50 हजार का ईनाम रखा।

तब जब मात्र ₹60/- रूपए की पेंशन की लालच में कुछ लोग देश के खिलाफ अंग्रेजी हुकूमत के तलवे चाट रहे थे तब ब्रिगेडीयर उस्मान ने पाकिस्तान के आफर पर लात मार कर काश्मीर को बचाते हुए देश के लिए शहीद हो गए।

ग़ाज़ीपुर के पीजी कॉलेज का यह युवा सनसनी क्रिकेटर मुख्तार अंसारी इन्हीं सुबहानुल्लाह अंसारी के तीन बेटों सिबगतुल्लाह अंसारी, अफज़ाल अंसारी के बाद तीसरे सबसे छोटे बेटे और डाक्टर मुख्तार अहमद अंसारी के पोते थे।

बाप दादा और नाना ब्रिगेडियर उस्मान का गौरवशाली इतिहास समेटे 6 फिट 5 इंच लंबे मुख्तार अंसारी राजकीय इंटर कालेज ग़ाज़ीपुर के मैदान पर तेज़ गेंदबाज़ी किया करते थे ।

मुख्तार अंसारी के सबसे बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी एक सरकारी स्कूल में अध्यापक थे तो उनसे छोटे बेटे अफज़ाल अंसारी जीविकोपार्जन के लिए एक सिनेमा हाल चलाते थे और मुख्तार अंसारी पढ़ाई के साथ साथ क्रिकेट खेल रहे थे।

कहते हैं कि तेज़ गेंदबाज़ मुख्तार अंसारी अपने अध्ययन काल में इतने तेज़ गेंदबाज़ थे कि उस क्षेत्र में होते हर क्रिकेट टूर्नामेंट में हर टीम तेज़ गेंदबाज़ मुख्तार अंसारी को अपनी टीम में रखना चाहती थी। गेंदबाजी करते वक्त बल्लेबाजों का मिडिल स्टंप उखाड़ना तेज़ गेंदबाज़ मुख्तार का सबसे पसंदीदा शौक था , आफ या लेग स्टंप उखड़ता तो वह इसे अपनी गेंदबाजी की कमी मानते थे।

अंसार खित्ते में भुमिहार जाति का सदैव से दबदबा रहा है , कल्पनाथ राय के घोसी से सांसद और फिर मंत्री बनने के बाद भुमिहारों का जलवा और बढ़ा , कल्पनाथ राय का वर्चस्व और दबदबा इतना बढ़ा कि वह जेल में रहते हुए भी घोसी लोकसभा चुनाव जीत जाते थे।

युसुफपुर मुहम्मदाबाद भूमिहारों का गढ़ था , कल्पनाथ राय के वर्चस्व और दबदबे से उस क्षेत्र के भूमिहार बेलगाम हो गये और अत्याचार बढ़ने लगा। इस बिरादरी के कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा गरीबों पर अत्याचार, ज़मीन हड़पना इत्यादि जैसी बातें आम हो गयीं।

मगर अंसारी परिवार और तीनों बेटे इस सबसे दूर शराफ़त के साथ अपने जीवन में व्यस्त थे कि अचानक एक घटना हो गई जिससे पूरा परिदृश्य ही बदल गया।

युसुफपुर मोहम्मदाबाद में ही इसी बिरादरी से एक दबंग बाहुबली ठेकेदार थे सच्चिदानंद राय जिन्होंने सत्ता के दंभ में आकर मुख्तार अंसारी के पिता चेयरमैन सुबहानुल्लाह अंसारी का भरे बाज़ार सबके सामने अत्यधिक अपमान किया और गाली-गलौज की।

जीवन भर समाज में इज़्ज़त पाते रहे सुबहानुल्लाह अंसारी सामूहिक रूप से हुए अपने इस अपमान से बेहद दुखी हुए और टूट से गये। यह उनके छोटे बेटे मुख्तार अंसारी को देखा नहीं गया।

पिता के इस अपमान का बदला लेने का फैसला क्रिकेटर मुख्तार अंसारी ने किया मगर भूमिहार बिरादरी इतनी ताकतवर थी कि सच्चिदानंद राय से भिड़ना असंभव था।

बेहद सीधे साधे और शरीफ़ परिवार से आने वाले मुख्तार अंसारी के लिए तो यह और भी असंभव था।

तब मुख्तार अंसारी ने उस क्षेत्र के ही कुछ असरदार लोगों से मदद मांगी जिसमें गाजीपुर के मुड़ियार गांव के साधू सिंह और मकनू सिंह ने मुख्तार अंसारी की इस शर्त के साथ मदद का आश्वासन दिया कि जब ज़रूरत होगी उन्हें भी मदद करनी पड़ेगी।

ग़ाज़ीपुर के मुड़ियार गांव में ही पुर्वांचल में गैंगवॉर का बीज पड़ा जिसके बाद एक के बाद एक दर्जनों हत्याएं हुईं।

पिता के अपमान से व्यथित मुख्तार अंसारी ने साधू सिंह और मकनू सिंह के इस शर्त को कबूल कर लिया और 17 जुलाई 1986 को सच्चिदानंद राय की हत्या हो गई।

यहीं से अंसारी परिवार और भूमिहार लोगों के बीच जंग की नींव पड़ी जो अभी तक जारी है।

अब कर्ज़ उतारने का वक्त मुख्तार अंसारी का था , सैदपुर में ही साधू सिंह और मकनू सिंह को चुनौती मिल रही थी वहीं के दो सगे भाई छत्रपाल सिंह और रंजीत सिंह से।

साधू सिंह और मकनू सिंह ने मुख्तार अंसारी को बुलाया और रंजीत सिंह की हत्या करने का आदेश देकर अपनी की गई मदद को वसूलना चाहा जिसे सुनते ही मुख्तार अंसारी विचलित हुए और फिर मना कर दिया। उन्हें साधू सिंह और मकनू सिंह के उन पर किये एहसान की ऐसी कीमत का अंदाजा नहीं था।

ऐसी चर्चा रही है कि साधु सिंह और मकनू सिंह ने मुख्तार अंसारी को उनके नाना दादा और बाप की परंपरा विरासत और ज़बान का हवाला दिया और फिर देश के एक उभरते हुए तेज़ गेंदबाज़ ने अपने ऊपर किए एहसान का बदला चुकाने का फैसला कर लिया।

मुख्तार अंसारी ने इस काम के लिए जो रणनीति तैयार की वह अकल्पनीय थी , उन्होंने मेदिनीपुर गांव में रंजीत सिंह के घर के ठीक सामने रहने वाले रामू मल्लाह से दोस्ती की ,और वहीं उठने बैठने लगे।

रामू मल्लाह के घर की बाहरी दीवार में एक छेद हुआ और मौका देख कर एक ऐसा ही छेद रंजीत सिंह के 10 मीटर दूर घर की दिवार में कराया गया।

अब रामू मल्लाह के आंगन से रंजित सिंह के आंगन में उस दोनों छेद के माध्यम से देखा जा सकता था।

एक दिन रंजीत सिंह अपने आंगन में बैठे थे कि रामू मल्लाह के आंगन से दोनों छेदों को निशाने में लेकर एक गोली चली और रंजीत सिंह की हत्या हो गई।

हालांकि अभी तक किसी भी हत्याओं में मुख्तार अंसारी का नाम सीधे तौर पर नहीं आया‌। मगर क्षेत्र में यह चर्चा आम थी कि यह किसने किया।

इस कारण दबंग भूमिहारों से पीड़ित हर गरीब लोग मुख्तार अंसारी के पास अपनी फरियाद लेकर आने लगे और मुख्तार अंसारी सबकी यथासंभव मदद करने लगे और इसी कारण वह भूमिहारों के अत्याचार के विरुद्ध एक नायक के रूप में उभरने लगे।

क्रमशः1 Copy mohd Zahid
Mukhtar Ansari MLA
Afzal Ansari
Abbas Ansari

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