Varun Mishra

Varun Mishra आधुनिकता की दौड़ मे हम बहुत कुछ खो चुके हैँ जिसे पाने का प्रयास भी हमें करना चाहिए...

06/02/2026
26/01/2026

सवर्ण होना इतना बड़ा अभिशाप?

19/01/2026

हमारे मुखिया प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते हैं।

क्यों?

इतना महान न्यायिक प्रक्रिया किसी देश का हो ही नहीं सकता।काश बेशर्मो को अब भी शर्मा आ जाता।
16/01/2026

इतना महान न्यायिक प्रक्रिया किसी देश का हो ही नहीं सकता।

काश बेशर्मो को अब भी शर्मा आ जाता।

पवन कल्याण ने बांटा अपने दिल का दर्द :थिरुप्परनकुंद्रम भगवान मुरुगन के छह धामों में पहला माना जाता है।  पहाड़ी पर दीप जल...
13/12/2025

पवन कल्याण ने बांटा अपने दिल का दर्द :

थिरुप्परनकुंद्रम भगवान मुरुगन के छह धामों में पहला माना जाता है। पहाड़ी पर दीप जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है।

लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज हिंदुओं को अपनी ही परंपराओं के लिए कोर्ट की मदद लेनी पड़ रही है।
और दुख तो ये है कि कानूनी लड़ाई जीतने के बाद भी अगर हम अपनी ही जगह पर एक साधारण, शांत अनुष्ठान नहीं कर सकते, तो फिर अपने ही देश में हमें न्याय कहाँ मिलेगा?”

“सच्चाई ये है कि दीपदान का हमारा अधिकार हाईकोर्ट ने दो बार माना—पहले सिंगल जज ने, फिर डिविज़न बेंच ने। यानी क़ानून हमारी तरफ था।
फिर भी, प्रैक्टिकली हमें पीछे हटना पड़ा। ये सोचना ही अजीब है कि कोई धार्मिक उत्सव एक हफ्ते बाद मनाया जा सकता है। कुछ चीज़ों का अपना ही समय होता है—जिन्हें बदला नहीं जा सकता।”

“लेकिन इस बार कार्तिगाई दीपम का वो पवित्र पल हमसे छिन गया। क्यों?
क्योंकि हिंदुओं को आसानी से इग्नोर किया जा सकता है—कभी सरकारें, कभी प्रशासन, कभी एनजीओ, कभी ‘बौद्धिक’ गैंग।
हर बार हिंदू ही एडजस्ट करते हैं।
हक़ मिल गया, पर अनुष्ठान खो गया।”

“इसीलिए अब वक्त आ गया है कि हम सिर्फ कोर्ट की जीत से ज़्यादा की मांग करें—हमें एक सनातन धर्म रक्षा बोर्ड चाहिए, जहाँ भक्त मिलकर अपने मंदिरों और परंपराओं का प्रबंधन कर सकें।”

“कुछ लोग खुलेआम हिंदू रीति-रिवाजों का मज़ाक उड़ाते हैं। क्या वे ऐसा किसी और धर्म के त्योहार पर करने की हिम्मत करते हैं?
क्या हमारे अधिकार (अनुच्छेद 25) सिर्फ कागज़ पर रह गए हैं?
क्या कोई अधिकारी हाईकोर्ट के फैसले को अपनी मर्ज़ी से पलट सकता है?”

“जो बात सबसे ज़्यादा चुभती है, वो ये कि प्रशासन बार-बार हिंदू मंदिरों और श्रद्धालुओं के खिलाफ़ खड़ा दिखता है—और कोई जवाबदेही भी नहीं होती।”

“हिंदुओं को भी बाकी धर्मों की तरह एकजुट होना पड़ेगा।
जब तक हम जाति, भाषा, क्षेत्र में बँटे रहेंगे, हमारी परंपराएँ हमेशा टारगेट होती रहेंगी।
अगर हम एक न्यूनतम साझा मुद्दे पर भी नहीं जुड़ पाए, तो धीरे-धीरे ये भावना खत्म हो जाएगी।”

“मेरी बस यही इच्छा है कि कश्मीर से कन्याकुमारी और कामाख्या से द्वारका तक हर हिंदू अपनी ही भूमि पर हो रहे अपमान को महसूस करे और उसके खिलाफ़ उठ खड़ा हो।

— पवन कल्याण

18/07/2025

-सुस्वागतम रोहित वेमुला बिल-

-जातिगत खाई घटाने का एक और राजनितिक छल.

अब बस इंतजार है उस बिल का जिसमे सवर्णो को देखते ही गोली मारने का प्रावधान आ जाये।

"अब समझ आया... वो तीर असल में विज्ञान था!"बचपन में जब मैं रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिक देखती थी, तो युद्ध के दृश्य म...
10/06/2025

"अब समझ आया... वो तीर असल में विज्ञान था!"

बचपन में जब मैं रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिक देखती थी, तो युद्ध के दृश्य मेरे मन को रोमांच से भर देते थे। रंग-बिरंगे तीर, एक-दूसरे से टकराते हुए… रथों का टूटना, धनुषों का कटना, और पृष्ठभूमि में गूंजती दिव्य चौपाइयाँ – वो सब किसी जादू से कम नहीं लगता था।

तब सोचा करती थी – क्या ये सब केवल कल्पना है? अलंकार मात्र?

पर आज… जब मैंने D4 एयर डिफेंस सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर में ‘तीर से तीर’ यानी मिसाइल से मिसाइल को टकराकर हवा में ही खत्म होते देखा — मेरी आंखें भर आईं… क्योंकि मेरे धर्मग्रंथ अब कल्पना नहीं, साक्षात् सत्य लगने लगे।

आज जब मैं भारत के रक्षा कवच को देखती हूँ, तो मुझे सिंहिका की याद आती है — रामायण की वो राक्षसी जो आकाश मार्ग से जाने वाले प्राणियों की छाया पकड़ती थी। क्या ये समुद्र के नीचे रावण द्वारा स्थापित एयर डिफेंस सिस्टम नहीं था?

और लक्ष्मण रेखा? क्या वह अदृश्य लेज़र बीम प्रोटेक्शन जैसा नहीं था? जो दिखाई नहीं देता था, लेकिन कोई पार करता तो जलकर भस्म हो जाता!

महाभारत में संजय द्वारा धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाना — क्या वो किसी आधुनिक लाइव ब्रॉडकास्ट या सैटेलाइट फीड से कम था?

सच कहूं, आश्चर्य इस बात पर नहीं होता कि वो सब तकनीकें थीं...
आश्चर्य इस बात पर होता है कि जब पश्चिम के लोग गुफाओं में रहते थे, तब मेरे पूर्वज मिसाइल डिफेंस सिस्टम और एयर वॉर टेक्नोलॉजी इस्तेमाल कर रहे थे।

अब तो गर्व होता है — हर चौपाई, हर श्लोक, हर रेखा पर।
मेरे धर्मग्रंथ केवल आध्यात्मिक नहीं, वैज्ञानिक भी हैं।
और मेरे पूर्वज — केवल ऋषि नहीं, ब्रह्मज्ञानी वैज्ञानिक भी थे।

गर्व है मुझे — अपने सनातन धर्म पर, अपनी संस्कृति पर, और उन ग्रंथों पर जिन्हें आज की वैज्ञानिक आँखें भी झुककर नमन करती हैं।

🚩 जय श्रीराम।
जय सनातन।
जय महाकाल। 🚩

25/05/2024

आपन गाँव

यूँ तो समेट लाए हर चीज़ गाँव से मगर,धागे तुम्हारे नाम के बरग़द पे ही रह गए ।
10/05/2024

यूँ तो समेट लाए हर चीज़ गाँव से मगर,
धागे तुम्हारे नाम के बरग़द पे ही रह गए ।

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