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Pandu जय खैरा | जय झारखण्ड || जय हिंद |||

मैं पाण्डु हूँ !
वर्षों से उपेक्षित, अक्षम जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाकृत अकुशल नेतृत्व क्षमता का जीता- जागता प्रमाण !
संचार क्रांति के इस दौर में भी, यहाँ पहुँचने के लिए एक भी सरकारी सेवा(बस/ट्रेन) नहीं है |
सड़कें ऐसी, मनो किसी को कभी चलना ही नहीं हो उसपर !
अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का धनी ये क्षेत्र हमेशा ही सरकारी छलावे का शिकार रहा है |
प्रकृति प्रदत्त सुन्दरता ही दुश्मन बन गयी है इसकी |
रमणीक व

न-पहाड़ अब सैरगाह नहीं, नक्सलियों के पनाहगाह बन गए हैं |
कृषि प्रधान क्षेत्र में एक भी जल परियोजना आज तक नहीं बन सकी है, नहर इत्यादि सिंचाई के साधन तो कल्पना से परे है !
निरंतर अकाल-सुखाड़ की विभीषिका से त्रस्त, गरीब-मजदूर-किसान आखिर करे तो क्या |
एक तरफ नक्सल अत्याचार, दूसरी ओर, नक्सली बता जेल भेजने की पुलिसिया धमकी, और उसके नाम पे अवैध वसूली, अत्याचार |
जो सक्षम हैं दोनों ही तरफ से बच जाते हैं किसी तरह, काफी बड़ी कीमत चुकाकर |
परन्तु आम जन तो पिसते हैं, झेलते हैं - अकारण जेल, हत्या, व्यभिचार, न केवल उग्रवादियों बल्कि पुलिस द्वारा भी |
इस क्षेत्र के लिए कोई मानवाधिकार आयोग भी नहीं है, प्रदेश में, न ही देश में |
समय आ गया है, जनमानस के जागृत होने का, उठ खड़े होने का, अपने लिए नहीं तो कम-से-कम आने वाली नस्लों के लिए |
आ गया है वक्त, अपनी आवाज़ बुलंद करने का, भारतीय नागरिक होने का अहसास करने का !
हमें चाहिए सुगम यातायात के साधन !
उस स्तर की शिक्षा, जो दिल्ली में बैठे माननीयों के बच्चे पाते हैं |
चिकित्सा सुविधा, ताकि हम भी जीवित रहें, स्वस्थ-सकुशल |

कोई भी कारण नहीं, कि बांकी एक्स्प्रेस-वे की योजना मूर्तरूप न ले सके (N . H . - 98 - छतरपुर - ओबरा - रतनाग -कजरू -पाण्डु- उंटारी रोड -मोहम्मदगंज जपला - 4 लेन सड़क ) !
धुरिया के किनारे किनारे N .H .-98 से कुटमू-सिगसिगी रेलवे स्टेशन- मझिआंव तक 4 लेन सड़क, बन्ने में कोई बाधा नहीं है |
इन दो मुख्य सड़कों को जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की ' प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' का सदुपयोग, केवल जागरूक जनप्रतिनिधि ही कर सकते हैं |

जरूरत है कोयल/सोन नदी(मोहम्मदगंज- भीम बैराज, लहर बंजारी -कोयल/बांकी संगम, कोयल-सोन संगम ) से नहर निकल कर इस क्षेत्र को सिंचित हरा भरा करने की |
हम नहीं बोलते की हमें मेट्रो या ज्यादा स्पीड वाली ट्रेन दो, परन्तु कम से कम २०० साल पीछे का विकास तो दो !
एक अदद ट्राम ही दे दो, इस पिछड़े क्षेत्र को, हम 18वी शताब्दी में विकास से ही खुश हो जायेंगे |
एक सर्कुलर ट्राम-वे भी, इस खेत्र की आर्थिक विकास में अहम् योगदान दे सकती है |
क्या सरकार से इतनी उम्मीद बहुत ज्यादा है ?
कृपया जहाँ भी हो सके, जब भी मौका मिले, अपने जनप्रतिनिधियों से बात करें |
कम-से कम वो विधान-सभा, लोक-सभा, जिला-परिषद्, और अन्य उचित जगहों पर अपनी बात तो रखें |
शेष अगले अंक में |
धन्यवाद् ||
जय खैरा |
जय झारखण्ड ||
जय हिंद |||

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822132

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