30/08/2025
एक कहावत है कि "सरकारें यदि गलत हों तो आपका सही होना खतरनाक हो सकता है।" मोदीजी के मंत्री अनुराग ठाकुर ने छात्रों से पूछा कि पहला अंतरिक्ष यात्री कौन था? इस पर बच्चे उत्तर देते हैं "नील आर्मस्ट्रांग"।
अब अनपढ़, कुपढ़ में एक अंतर होता है। अनपढ़ जिन्हें नहीं पता कि कौन, क्या है लेकिन कुपढ़ जो अर्थ का अनर्थ करते हैं। यानी धर्म, माइथोलॉजी, अध्यात्म की बात भी अगर करनी है तो पहले उसे पढ़ तो लीजिए।
कई पौराणिक ग्रंथों सहित वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा के अनुसार हनुमान अपने बचपन में एक दिन सुबह उठे, भूख लगने के कारण सूर्य को एक बड़ा रसीला फल समझकर खा लिया।
अनुराग ठाकुर ने जो कहा हम उसकी बात करते हैं कि सूर्य अलग विषय है, चंद्रमा अलग विषय तथा अंतरिक्ष अलग विषय। अंतरिक्ष में पहला यात्री यूरी गागरिन गए थे जबकि मंत्री की सभा में बच्चे भी नील आर्मस्ट्रांग कहते हैं।
नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर जाने वाले पहले यात्री थे और सूर्य पर जाना फ़िलहाल एक कल्पना है पर मोदीजी के मंत्री ने सूर्य, चंद्रमा, ग्रह, अंतरिक्ष सब एक कर दिया सिर्फ़ इसलिए क्योंकि बात जैसे भी बस बोलनी थी।
परीक्षा में क्या लिखेंगे यह विषय तो बाकी है ही लेकिन छात्र जब तर्क करेंगे तब भावनाएं आहत होंगी उसका क्या? क्योंकि जो विषय कल मौलिकता स्वरूप पठनीय होगा वहां तर्क, वितर्क भी तो अवश्य ही होगा न?
तर्क, वितर्क वितर्क का विषय है यह भी कि पृथ्वी से 130 गुना बड़ा, आग का सूर्य कोई कैसे खा सकता है हालांकि तब हनुमान को शरीर बड़ा करने का वरदान था और नाम मारुति था। लेकिन इतना भार पृथ्वी पर कैसे संभव?
बहरहाल! विज्ञान कहता है कि सूर्य की किरणे यदि पृथ्वी पर ना पड़े तो पृथ्वी में हाहाकार मच जाएगा। तापमान गिर जाएगा इसलिए हनुमान द्वारा सूर्य निगलने के बाद सब सामान्य कैसे रहा यह तो लिखने, बोलने वाले ही जाने।
यदि सारी तकनीक हमारे पास थी, सारी विद्या, दवा, ज्ञान और विज्ञान था जिसे विदेशी आक्रांता चुरा लेकर गए जो भालू, बंदर, गिद्ध इत्यादि बोल, लिख पाते थे वह विद्या कहां विलुप्त हुई होगी? वह तो विदेशियों के पास भी नहीं?
अंत में यही कि किसी भी धर्म की किताब से दावा जितना मर्जी कोई बड़ा करे लेकिन उसको साबित करना आज की प्राथमिकता है। हम चाहते हैं कि हर पौराणिक बात सत्य हो लेकिन तर्क के लिए जगह और तथ्य के लिए वजह छोड़ जाओ बस। ी_विशाल।
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