04/12/2025
दोस्तों,
9 अगस्त को काकोरी दिवस के 100 साल पूरे हुए हैं। 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन पर भारत की आजादी के लिए संघर्षरत हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटा था। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के लिए हथियार और अन्य संसाधन खरीदने के लिए धन जुटाना था। इस घटना के बाद कई क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी हुई और उन पर मुकदमा चला, जिसके परिणामस्वरूप रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहड़ी और रोशन सिंह को 19 दिसंबर, 1927 को फांसी दी गई।
जिस उद्देश्य यानि भारत से साम्राज्यवादी ताकतों को भगाने और देश से मानव द्वारा मानव की लूट को खत्म करने के लिए इन शहीदों ने और बाद में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी के कमांडर चंद्रशेखर आजाद व भगत सिंह और उनके साथियों ने अपनी कुर्बानियां दी; वो उद्देश्य आज भी अधूरे है और गोरे अंग्रेजों की जगह काले अंग्रेज सत्ता पर काबिज हैं। साम्राज्यवादी लूट और आम जनता का शोषण खत्म होने की बजाय और ज्यादा बढ़ चुका है। इसलिए आज उन शहीदों और उनके विचारों को याद करना और उनके सपनों के लिए संघर्ष करना और भी जरूरी हो जाता है।
ब्रिटिश साम्राज्यवादी बेशक 1947 में देश से चले गए हों। लेकिन अपनी फूट डालो राज करो और दमन की नीति को अपने भारतीय सहयोगियों को सौंप गए। आज भारत की सत्ता पर ब्राह्मणीय हिंदुत्ववादी फासिस्ट सत्ता विद्यमान है जिसने तंत्र के हर अंग पर अपना कब्जा कर लिया है और उसी पुरानी मनुस्मृति को लागू करना चाहती है जिसमें दलितों, पिछड़ों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों को कोई अधिकार हासिल नहीं थे। आज देश में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, शोषण, भ्रष्टाचार और निराशा चरम पर है। लेकिन शासक तंत्र आम जनता को कोई राहत देने की बजाए अपनी लूट और दमन को और तेज कर रहा है। शोषक और शासक तंत्र के खिलाफ जनता के विरोध और गुस्से की धार को कुंद करने के लिए उन्हें आपस में लड़ाया जा रहा है। जिस कारण हम देखते हैं कि आज समाज में आम तबकों के बीच छद्म नफरत को बढ़ाया जा रहा है। आज दिन रात अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। बल्कि इन हमलावरों को अब सत्ता का सरंक्षण भी प्राप्त है और वर्दीधारी बल ही अब इनके प्रति अत्याचार और हिंसा में प्रत्यक्ष शामिल हो रहे हैं। जगह जगह पूरे देश में जहां मुस्लिम अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को खुदाई के नाम पर तोड़ा जा रहा है, मुस्लिमों को उकसाने और दंगे भड़काने के लिए मस्जिदों के आगे तेज आवाज में डीजे और भड़काऊ गतिविधियों की संख्या में बाढ़ आ गई है।
भाजपा, आरएसएस द्वारा इंसानियत विरोधी मनुविधान थोपने की कोशिशों के चलते हरियाणा समेत देश भर में दलितों के प्रति नफरत और हिंसा की घटनाओं में तीव्र बढ़ोतरी हुई है। इस लुटेरी फासिस्ट सरकार के राज में एक दलित युवती से बलात्कार के बाद रात में ही उसकी लाश जला दी गई, जो कृत्य अंग्रेजों ने भगत सिंह और उनके साथियों के मृत शरीरों के साथ किया था।
जैसे - जैसे देश में देशी विदेशी पूंजीपतियों की लूट और मुनाफे की हवस बढ़ती जा रही है वैसे ही मजदूर, किसान और आदिवासियों के अपने जल, जंगल,जमीन बचाने के संघर्ष भी तेज होते जा रहे हैं। लेकिन अपनी फासिस्ट मशीनरी का इस्तेमाल कर यह सरकार इन संघर्षों को बड़ी बेरहमी से कुचल रही है और हजारों की संख्या में नक्सल उन्मूलन के नाम पर आदिवासियों का कत्लेआम कर रही है। ऑपरेशन कगार के नाम पर मध्यभारत के जंगलों में सरकार ने आदिवासी जनता के खिलाफ गृहयुद्ध छेड़ रखा है। इन नृशंस हिंसक कार्रवाइयों के खिलाफ कोई बोलने न पाए, इसलिए हर जगह दमनचक्र चलाया जा रहा है और जहां छात्रों, कलाकारों, लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों को अर्बन नक्सल के नाम पर जेलों में डाला जा रहा है वहीं अपनी जनता, जंगलों और कुदरती संसाधनों को बचाने के लिए लड़ रहे लोगों को माओवादियों के नाम पर झूठी मुठभेड़ों में मारा जा रहा है। स्टेन स्वामी की जेल में ही संस्थागत हत्या कर दी गई, जबकि जी एन साईं बाबा को तब तक जमानत नहीं दी गई जब तक कि वो मृतप्राय नहीं हो गए और जेल के बाहर वे ज्यादा दिन हमारे बीच नहीं टिक पाए। उमर खालिद, ग़ुल्फ़िशा, शारजील इमाम, एडवोकेट अजय, पत्रकार रूपेश जैसे हजारों लोग जो जनता के लिए आवाज उठाने के अपराध में जेल में डाल दिए गए उन्हें सालों बीत जाने के बाद अभी तक जमानत नहीं दी गई है। इसी तरह भीमकोरगांव केस के अभियुक्त अभी तक जेल में हैं।
भारत में अंग्रेजों ने साम्राज्यवाद विरोधी लड़ाई को कुचलने के लिए हिंदू मुस्लिम में फूट डालने की शुरुआत की जिसे आज उनका आनुषंगिक संगठन आरएसएस तेजी से आगे बढ़ा रहा है और देश में अपने फासीवादी हमलों को तेज कर रहा है। आज देश भर में अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर भयंकर जुल्म और राजकीय दमन ढाया जा रहा है।
इसलिए हम आवामी एकता मंच की तरफ से इस दिन को सांप्रदायिकता और फासीवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाते हुए 14 दिसंबर 2025 रविवार को नरवाना में "अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर बढ़ते दमन और हमारे कार्यभार" विषय पर सेमिनार कर रहे हैं। आप सभी से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेकर इसे सफल बनाने में अपनी भागेदारी सुनिश्चित करें।
दिनांक: 14 दिसंबर
समय: सुबह 11 बजे
स्थान: पब्लिक धर्मशाला, नजदीक रेलवे स्टेशन, नरवाना
मुख्य वक्ता: एडवोकेट राजेश कापड़ो
संपर्क: 9671771841 एडवोकेट संजय कुमार
9896565771 राजकुमार