30/08/2026
🚨 **अहमदाबाद का वो जैन सेठ परिवार, जिसने अकाल के कठिन समय में मंदिर निर्माण को बनाया सेवा और रोजगार का माध्यम!** 🙏✨
भारत के इतिहास में जैन समाज की पहचान केवल व्यापार और समृद्धि से नहीं, बल्कि **दान, सेवा, शिक्षा और समाज कल्याण** से भी रही है।
इसी गौरवशाली परंपरा की एक प्रेरणादायक कहानी जुड़ी है **अहमदाबाद के हठीसिंह परिवार** से—एक ऐसा जैन व्यापारी परिवार, जिसने अपनी संपत्ति का उपयोग केवल अपने वैभव के लिए नहीं, बल्कि धर्म और समाज के लिए भी किया।
आज **Dev Darshan** पर जानिए हठीसिंह परिवार की ऐसी कहानी, जो आज भी सेवा और परोपकार की प्रेरणा देती है। 👇
💎 **1. अहमदाबाद के प्रतिष्ठित जैन व्यापारी परिवारों में एक**
19वीं शताब्दी में हठीसिंह परिवार अहमदाबाद के प्रमुख जैन व्यापारी परिवारों में गिना जाता था। परिवार की आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इसी परिवार के **सेठ हठीसिंह केसरीसिंह** ने अहमदाबाद में एक भव्य जैन मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया—जो आगे चलकर शहर की पहचान बन गया।
🏛️ **2. अकाल के कठिन समय में शुरू हुआ हठीसिंह जैन मंदिर**
अहमदाबाद का प्रसिद्ध **हठीसिंह जैन मंदिर** वर्ष **1848** में पूर्ण हुआ। यह मंदिर भगवान **धर्मनाथ**, अर्थात् 15वें जैन तीर्थंकर, को समर्पित है।
अहमदाबाद नगर की विरासत संबंधी जानकारी के अनुसार, सेठ हठीसिंह ने कठिन अकाल के समय मंदिर निर्माण के माध्यम से **कारीगरों और श्रमिकों को रोजगार देने** का निर्णय लिया था।
लेकिन मंदिर पूरा होने से पहले ही उनका निधन हो गया।
इसके बाद उनकी पत्नी **हरकुंवर शेठानी** ने अपने दृढ़ संकल्प और समर्पण से मंदिर निर्माण का कार्य पूरा करवाया।
यानी यह मंदिर केवल पत्थरों और संगमरमर से बनी इमारत नहीं था—
**यह उस समय धर्म, रोजगार और मानव सेवा को एक साथ जोड़ने का उदाहरण भी बना।** 🙏
👩🏫 **3. हरकुंवर शेठानी—धर्म के साथ शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की मिसाल**
हठीसिंह परिवार की सबसे प्रेरणादायक शख्सियतों में से एक थीं **हरकुंवर शेठानी**।
अहमदाबाद की विरासत संबंधी जानकारी के अनुसार, उन्होंने मंदिर को पूरा करवाने के साथ-साथ **महिला शिक्षा और समाज कल्याण** के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए।
उन्होंने **1855 में लड़कियों के लिए Harkunvarba and Jyotiba Kanyashala** शुरू की और शिक्षक प्रशिक्षण की दिशा में भी काम किया। विधवाओं और महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं से भी उनका जुड़ाव रहा।
उनकी सामाजिक सेवाओं के कारण उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा **“Nek Sakhavati Bahadur”** की उपाधि भी दी गई थी।
🤝 **4. हठीसिंह परिवार और नेहरू परिवार का रिश्ता**
समय के साथ इस परिवार का संबंध भारत के प्रसिद्ध **नेहरू परिवार** से भी जुड़ा।
हठीसिंह परिवार के **गुणोत्तम पी. (राजा) हठीसिंह** का विवाह **कृष्णा नेहरू** से हुआ था, जो जवाहरलाल नेहरू की सबसे छोटी बहन थीं।
नेहरू पोर्टल के अनुसार, कृष्णा नेहरू ने 1933 में G.P. Hutheesing से विवाह किया था। बाद के वर्षों में राजा हठीसिंह सार्वजनिक जीवन और राजनीति से भी जुड़े रहे।
🏛️ **5. आज भी अहमदाबाद की पहचान है हठीसिंह जैन मंदिर**
आज भी **हठीसिंह जैन मंदिर** अहमदाबाद के प्रमुख जैन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है।
सफेद संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी, सुंदर शिखर, देवकुलिकाएँ और विशाल **मानस्तंभ** इस मंदिर को बेहद विशिष्ट बनाते हैं।
अहमदाबाद नगर की विरासत वेबसाइट इसे शहर के प्रसिद्ध और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण जैन स्थलों में गिनती है।
✨ **Dev Darshan का संदेश**
हठीसिंह परिवार की कहानी हमें एक बहुत सुंदर बात सिखाती है—
**धन की असली कीमत इस बात में नहीं कि वह कितना जमा किया गया,
बल्कि इस बात में है कि उससे कितने जीवनों में प्रकाश आया।**
एक मंदिर बना…
लेकिन उसके साथ **रोजगार मिला, धर्म की सेवा हुई, शिक्षा को बढ़ावा मिला और समाज कल्याण की एक परंपरा आगे बढ़ी।**
यही तो भारतीय दान परंपरा की खूबसूरती है। 🙏
🛕 **अगर आप कभी अहमदाबाद जाएँ, तो हठीसिंह जैन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।**
👇 **क्या आपने कभी हठीसिंह जैन मंदिर के दर्शन किए हैं?**
अगर किए हैं तो कमेंट में अपना अनुभव जरूर बताइए और लिखिए—
**🙏 जय जिनेन्द्र 🙏**
❤️ **जैन समाज के ऐसे गौरवशाली इतिहास और प्रेरणादायक कहानियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए पोस्ट को SHARE करें।**