22/07/2026
गोरखपुर: कुशीनगर एक्सप्रेस में चलने वाले कोच अटेंडेंट अमरजीत कुमार को मई का मानदेय लगभग दो हजार रुपये कम मिला, तो उनके कान खड़े हो गए। सुपरवाइजर से मानदेय कटने का कारण पूछा। पता चला ट्रेन से कई चादर और तौलिये गायब हैं। वह मनमसोस कर रह गया, महीने का बजट गड़बड़ा गया। अमरजीत जैसे सैकड़ों जरूरतमंद कोच अटेंडेंट वातानुकूलित (एसी) कोचों में चलने वाले यात्रियों के अनुचित नागरिक व्यवहार की सजा पा रहे हैं।
छह माह के भीतर पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर मैकेनाइज्ड लाउंड्री से 15.40 लाख रुपये कीमत के 15,871 बेडरोल (लिनेन- चादर, तौलिया, तकिया का खोल और कंबल आदि) गायब हो चुके हैं। कोच अटेंडेंटों ने कोचों से गायब होने वाले लिनेन की कीमत का 70 प्रतिशत हिस्सा अपनी जेब से चुकाया है।
दिसंबर, 2025 से मई, 2026 के बीच सर्वाधिक लिनेन एसी टू और थर्ड से गायब हुए हैं। इसमें सबसे अधिक 6,337 छोटे तौलिये हैं। लोगों ने कंबल को भी नहीं छोड़ा है। ठंड के दिनों में दिसंबर, 2025 में सबसे अधिक 240 कंबल गायब हुए हैं। छह माह में ही 812 कंबल गायब हो चुके हैं। तकियों के कवर ले जाने में भी कोई संकोच नहीं दिखा। अकेले मई, 2026 में 1008 तकियों के खोल गायब हुए हैं।
एसी टू और थ्री ही नहीं, एसी फर्स्ट में भी तकियों के खोल, चादर और तौलिए गायब हुए हैं। हालांकि, एसी फर्स्ट के यात्रियों का नागरिक व्यवहार अन्य की अपेक्षा अधिक जिम्मेदारी भरा रहा। एसी फर्स्ट कोचों से छह माह में कुल 71 लिनेन ही गायब हुए।
रेलवे प्रशासन ने गायब लिनेन से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की, लेकिन बोझ 12-14 हजार पाने वाले जरूरतमंद अटेंडेंटों पर पड़ा। यही कारण है कि कोच अटेंडेंट रास्ते भर डरे और सहमे रहते हैं कि कहीं लिनेन गायब न हो जाए। इसी के चलते कि वे यात्रियों के बर्थ पर बैठने या मांगने पर ही बेडरोल का पैकेट उपलब्ध कराते हैं। कोच अटेंडेंटों से वसूली के बाद भी रेलवे को 30 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बेडरोल की वितरण व रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियां साफ बच जा रहीं हैं। गोरखपुर लाउंड्री से प्रतिदिन करीब 24 हजार बेडरोल के पैकेट तैयार होते हैं, जिन्हें यहां से बनकर चलने वाली 32 ट्रेनों के एसी कोचों के यात्रियों को उपलब्ध कराया जाता है।