22/08/2026
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की ये टिप्पणियां पंजाब में लंबित जांच और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
यह मामला एक हत्या के प्रयास के केस की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें अमृतसर ग्रामीण पुलिस लगभग दो साल तक गिरफ्तारी नहीं कर सकी। इसके बाद हाई कोर्ट ने पंजाब में उन सभी FIRs की जानकारी मांगी, जिनकी जांच तीन साल से अधिक समय से लंबित है।
हाई कोर्ट ने पंजाब के सभी SSP और पुलिस कमिश्नरों से मांगा है:
तीन साल से अधिक समय से लंबित FIRs का विवरण।
जांच में देरी के कारण।
जांच को जल्द पूरा करने के लिए उठाए जा रहे कदम।
सभी SHOs के साथ बैठकें करके लंबित जांच को जल्द पूरा करने के निर्देश देने को भी कहा गया है। स्टेटस रिपोर्ट 14 अक्टूबर तक मांगी गई है।
अमृतसर ग्रामीण के आंकड़े बहुत गंभीर हैं
SSP अमृतसर ग्रामीण की रिपोर्ट के अनुसार:
565 FIRs की जांच तीन साल से अधिक समय से लंबित थी।
1,168 आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
केवल 48 आरोपियों को Proclaimed Offender/Person घोषित किया गया था।
80 मामलों की जांच संबंधी फाइलें तीन साल से अधिक समय बाद भी गायब थीं।
हाई कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति पुलिस के supervisory officers की लापरवाही को स्पष्ट रूप से दिखाती है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पिछले तीन वर्षों में संबंधित जिलों में तैनात रहे SSPs ने भी इस स्थिति का उचित संज्ञान नहीं लिया।
गायब पुलिस फाइलें और भी गंभीर मामला है
अगर जांच लंबित है तो सवाल है:
जांच पूरी क्यों नहीं हुई?
लेकिन अगर जांच की फाइल ही गायब है, तो सवाल और गंभीर हो जाते हैं:
मूल फाइल कहां गई?
फाइल किस अधिकारी या कार्यालय की हिरासत में थी?
फाइल आखिरी बार कब मौजूद थी?
उसकी देखभाल की जिम्मेदारी किसकी थी?
फाइल गायब होने के बाद क्या कार्रवाई की गई?
क्या किसी की जिम्मेदारी तय की गई?
इसलिए केवल यह कह देना कि फाइल “Reconstruct” कर दी जाएगी, इन सवालों का जवाब नहीं है। जहां कानून के अनुसार Reconstruction जरूरी हो, वहां वह की जा सकती है, लेकिन इससे यह पता लगाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती कि मूल रिकॉर्ड कहां गया और उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
सबसे बड़ा सवाल
यह अब केवल एक-दो मामलों की बात नहीं है। हाई कोर्ट ने पंजाब में तीन साल से अधिक समय से लंबित सभी जांचों का विवरण मांगा है।
इससे एक सीधा सवाल उठता है:
अगर जांच वर्षों तक लंबित रह सकती है, आरोपी गिरफ्तार नहीं होते और पुलिस की जांच फाइलें भी तीन साल से अधिक समय तक गायब रह सकती हैं, तो इन जांचों की निगरानी कौन कर रहा है और इन विफलताओं के लिए जवाबदेह कौन है?
मुद्दा केवल जांच में देरी का नहीं है। असली मुद्दा निगरानी, जिम्मेदारी और जवाबदेही का है।