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देश पहले, धर्म बाद में: संजय आज़ाद ने कही बड़ी बातजातिगत भेदभाव खत्म करने और अनेकता में एकता को भारत की असली ताकत बतायात...
10/09/2026

देश पहले, धर्म बाद में: संजय आज़ाद ने कही बड़ी बात

जातिगत भेदभाव खत्म करने और अनेकता में एकता को भारत की असली ताकत बताया

तीसरा पक्ष ब्यूरो : आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, जिन्हें संजय आज़ाद के नाम से भी जाना जाता है, ने देश, धर्म, जातिगत भेदभाव और सामाजिक एकता को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यदि उनके सामने धर्म और देश में से किसी एक को चुनने की स्थिति आए, तो वह हमेशा देश को चुनेंगे. उनके अनुसार, देश सुरक्षित और मजबूत रहेगा, तभी धर्म और आस्था भी सुरक्षित रहेंगे.

संजय आज़ाद ने जातिगत भेदभाव को खत्म करने को वास्तविक आजादी से जोड़ते हुए भारत की विविधता को उसकी ताकत बताया. उनके बयान में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समानता और संविधान की भावना को प्रमुखता दी गई है.

देश को प्राथमिकता देने का संदेश

संजय आज़ाद का कहना है, अगर मुझे धर्म और देश में से किसी एक को चुनना हो, तो मैं हमेशा देश को चुनूंगा. देश बचेगा तो धर्म बचेगा.

इस बयान का मूल संदेश राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देने से जुड़ा है.भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुभाषी देश में नागरिकों की अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के बावजूद संविधान सभी को समान नागरिक अधिकार देता है.

धर्म व्यक्ति की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है, जबकि देश सभी नागरिकों का साझा राष्ट्र है. ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा, संवैधानिक व्यवस्था और सामाजिक शांति को मजबूत रखना प्रत्येक नागरिक के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है.

जातिगत भेदभाव खत्म करना क्यों जरूरी?

संजय आज़ाद ने अपने बयान में कहा कि वास्तविक आजादी तभी मानी जाएगी जब जातिगत भेदभाव समाप्त हो. भारत के संविधान ने समानता और भेदभाव से सुरक्षा को मौलिक अधिकारों के रूप में स्थापित किया है.

संविधान का अनुच्छेद 15 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है. अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर की बात करता है, जबकि अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है.

हालांकि संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद सामाजिक स्तर पर समानता स्थापित करना केवल कानून का विषय नहीं है. शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अवसर और सामाजिक जागरूकता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

जाति के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव न हो और सभी नागरिकों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले, यही सामाजिक न्याय की मूल भावना है.

अनेकता में एकता को भारत की ताकत बताया

भारत की पहचान उसकी विविधता से बनी है। देश में अलग-अलग भाषाएं, धर्म, संस्कृतियां, खान-पान और परंपराएं हैं. इसके बावजूद संविधान सभी नागरिकों को एक समान नागरिक पहचान और अधिकार प्रदान करता है.

संजय आज़ाद ने इसी विविधता को भारत की ताकत से जोड़ते हुए कहा कि भारत की अनेकता में ही हमारी एकता और असली ताकत छिपी है.

इस विचार का महत्व इसलिए भी है क्योंकि विविधता को संघर्ष का कारण बनाने के बजाय सामाजिक सहयोग और राष्ट्रीय एकता का आधार बनाया जा सकता है.

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचारों और पहचान के लोगों का साथ रहना इसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता है.इसलिए सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण हैं.

धर्म और राष्ट्र के बीच संतुलन का सवाल

संजय आज़ाद के बयान में धर्म और राष्ट्र को लेकर प्राथमिकता का सवाल भी सामने आता है. उनका तर्क है कि देश मजबूत और सुरक्षित रहेगा तो नागरिक अपनी धार्मिक आस्था का पालन भी स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे.

भारतीय संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है. साथ ही, संविधान की मूल व्यवस्था सभी नागरिकों के लिए समानता और कानून के समक्ष बराबरी पर जोर देती है.

इस दृष्टि से राष्ट्रीय एकता और धार्मिक स्वतंत्रता को एक-दूसरे के विरोध में देखने के बजाय दोनों को संवैधानिक व्यवस्था के अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में समझा जा सकता है.

आज की राजनीति में बयान की प्रासंगिकता

धर्म, जाति और पहचान से जुड़े मुद्दे भारतीय राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं. ऐसे माहौल में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समानता की बात राजनीतिक बहस का एक अलग पक्ष सामने रखती है.

संजय आज़ाद के बयान में रोजगार, शिक्षा या विकास जैसे किसी विशेष सरकारी कार्यक्रम की चर्चा नहीं है. इसलिए उनके वक्तव्य को मुख्य रूप से राष्ट्रीय एकता, जातिगत भेदभाव और सामाजिक समरसता से जुड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जाना चाहिए.

राजनीतिक बयानों का मूल्यांकन करते समय यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि कौन-सी बात नेता का दावा या विचार है और कौन-सी बात संवैधानिक या स्थापित तथ्य है.

संविधान और सामाजिक समानता का संबंध

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया है.सामाजिक समानता का उद्देश्य केवल कानूनी अधिकार देना नहीं, बल्कि समाज में सम्मान और अवसर की समानता को बढ़ावा देना भी है.

जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में कानून, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की अपनी-अपनी भूमिका है. केवल राजनीतिक बयान से सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं होता; इसके लिए संस्थागत प्रयास और समाज की भागीदारी भी आवश्यक होती है.

इसी संदर्भ में संजय आज़ाद का बयान राष्ट्रीय एकता के साथ सामाजिक बराबरी के प्रश्न को जोड़ता है.

निष्कर्ष

संजय आज़ाद के बयान का केंद्रीय संदेश तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है,देश को प्राथमिकता, जातिगत भेदभाव का अंत और अनेकता में एकता.

भारत की विविधता उसकी सामाजिक वास्तविकता है और समानता संविधान की मूल भावना का हिस्सा.ऐसे में राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए अलग-अलग धार्मिक, भाषाई और सामाजिक पहचानों के बीच सम्मान और समान नागरिक अधिकारों की भावना महत्वपूर्ण है.

हालांकि किसी भी राजनीतिक बयान को उसके संदर्भ में समझना जरूरी है. संजय आज़ाद का यह वक्तव्य उनके राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण को सामने रखता है, जबकि जातिगत भेदभाव और समानता का प्रश्न व्यापक संवैधानिक तथा सामाजिक विमर्श का हिस्सा है.

स्रोत: आम आदमी पार्टी-उत्तर प्रदेश () का X (ट्विटर) पोस्ट, राज्यसभा सांसद संजय आज़ाद () के बयान के आधार पर

10/09/2026

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10/09/2026

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IRCTC होटल मामले में आरोप तय, संजय सरावगी ने RJD पर साधा निशानाभाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- अदालत की प्रक्रिया आगे बढ़ी,...
10/09/2026

IRCTC होटल मामले में आरोप तय, संजय सरावगी ने RJD पर साधा निशाना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- अदालत की प्रक्रिया आगे बढ़ी, RJD को भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर जवाब देना चाहिए

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 10 सितंबर 2026: IRCTC होटल मामले में दिल्ली की अदालत द्वारा लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू परिवार पर निशाना साधा है.

संजय सरावगी ने कहा कि IRCTC होटल मामले में अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना एक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला अदालत को करना है, लेकिन उनके अनुसार इस घटनाक्रम ने RJD की राजनीति और उसके शासनकाल से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं.

उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक बयान का विषय नहीं है, बल्कि न्यायालय में चल रही प्रक्रिया से जुड़ा मामला है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने RJD से सवाल किया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले बार-बार न्यायिक प्रक्रिया तक क्यों पहुंचते रहे हैं.

परिवारवाद और भ्रष्टाचार को लेकर RJD पर हमला

संजय सरावगी ने RJD की राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के पास बिहार की जनता के सामने विकास का कोई स्पष्ट मॉडल नहीं है. उन्होंने RJD की राजनीति को परिवारवाद, जातिवाद और सत्ता के कथित दुरुपयोग से जोड़ते हुए आलोचना की.

उन्होंने तेजस्वी यादव से सवाल किया कि जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े मामले अदालत में विचाराधीन हैं, तो जांच या न्यायिक कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताने की कोशिश क्यों की जाती है.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार की जनता राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के कामकाज को देख रही है. उन्होंने दावा किया कि बिहार अब विकास, सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और RJD को भी अपनी पुरानी राजनीतिक शैली से बाहर निकलना चाहिए.

अदालत की कार्रवाई और अंतिम फैसले में अंतर

IRCTC होटल मामले में आरोप तय होना न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इसे आरोपियों की दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता.आरोप तय होने के बाद मामले में सुनवाई और साक्ष्यों की न्यायिक समीक्षा आगे होती है. अंतिम निर्णय अदालत द्वारा मामले की पूरी सुनवाई के बाद किया जाएगा.

इसी बिंदु को लेकर संजय सरावगी ने कहा कि न्यायपालिका अपना काम कर रही है और जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया के अनुसार काम कर रही हैं. उन्होंने RJD से कानून की प्रक्रिया का सम्मान करने और मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने की अपील की.

RJD से पूछा- सत्ता सेवा के लिए थी या आर्थिक हितों के लिए?

संजय सरावगी ने RJD के सामने राजनीतिक सवाल रखते हुए पूछा कि सत्ता का इस्तेमाल जनता की सेवा के लिए किया गया था या परिवार के आर्थिक हितों के लिए. उन्होंने कहा कि RJD को बिहार की जनता के सामने इन सवालों का जवाब देना चाहिए.

उन्होंने लालू परिवार से जुड़े मामलों को आधार बनाकर RJD की राजनीति पर हमला करते हुए कहा कि बिहार की जनता अब भ्रष्टाचार और परिवारवाद की राजनीति के बजाय विकास और सुशासन चाहती है.

हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों के संबंध में यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी मामले में अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है. मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के फैसले के बाद ही सामने आएगा.

बिहार की राजनीति में फिर गरमाया भ्रष्टाचार का मुद्दा

IRCTC होटल मामले में अदालत की कार्रवाई ने बिहार की राजनीति में भ्रष्टाचार और परिवारवाद के पुराने मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। भाजपा इसे RJD के शासन और राजनीतिक विरासत पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में देख रही है, जबकि मामले का कानूनी पक्ष न्यायालय की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा.

आने वाले समय में इस मुद्दे पर RJD की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अदालत की कार्यवाही यह तय करेगी कि मामले में आरोपों का कानूनी निष्कर्ष क्या निकलता है। फिलहाल, आरोप तय होने के बाद मामला न्यायिक सुनवाई के अगले चरण में पहुंच गया है.

बिहार में बाढ़ का स्थायी समाधान क्यों नहीं? भाकपा माले ने NDA से मांगा जवाब भाकपा माले ने 14 जिलों में 40 लाख लोगों के प...
10/09/2026

बिहार में बाढ़ का स्थायी समाधान क्यों नहीं? भाकपा माले ने NDA से मांगा जवाब

भाकपा माले ने 14 जिलों में 40 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा कर राहत और मुआवजे की मांग उठाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर भाकपा माले ने राज्य सरकार और एनडीए पर तीखा हमला बोला है. 10 सितंबर 2026 को जारी प्रेस रिलीज में पार्टी ने बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि बिहार में पिछले 25 वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद बाढ़ का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया.

भाकपा माले का आरोप है कि हर चुनाव में बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने का वादा किया जाता है, लेकिन बाढ़ आने के बाद प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिलती. पार्टी ने कहा कि बाढ़ से मुक्ति के नाम पर वोट लेने के बावजूद समस्या लगातार बनी हुई है.

14 जिलों में 40 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा

भाकपा माले के अनुसार, मौजूदा बाढ़ से बिहार के 14 जिले और करीब 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. पार्टी ने दावा किया है कि बाढ़ के कारण लगभग 100 सड़कें और बांध टूट गए हैं, जबकि करीब 700 ग्रामीण सड़कें पानी में डूबी हुई हैं.

प्रेस रिलीज में राजधानी पटना के भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होने की बात कही गई है. पार्टी के मुताबिक, कई बाढ़ प्रभावित लोग तटबंधों और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर हैं.

बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारे की समस्या भी गंभीर चुनौती बन गई है. भाकपा माले ने कहा कि कई लाख एकड़ में लगी धान, मक्का और अन्य फसलें नष्ट होने का दावा किया गया है. पार्टी ने यह भी कहा कि कई स्थानों पर लोगों की मृत्यु हुई है.

सरकारी राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल

भाकपा माले ने सरकारी राहत और व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं. पार्टी का आरोप है कि राहत सामग्री के वितरण और व्यवस्था के नाम पर कथित तौर पर अनियमितताएं हो रही हैं. पार्टी ने सरकारी प्रयासों को नाकाफी बताते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में व्यापक तबाही की स्थिति है.

हालांकि, ये सभी आरोप भाकपा माले द्वारा जारी प्रेस रिलीज में किए गए दावे और आरोप हैं. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं की जा रही है.

गृह मंत्री के पुराने चुनावी वादे का जिक्र

अपने बयान में भाकपा माले ने गृह मंत्री की चुनावी सभा में बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के कथित वादे का भी जिक्र किया. पार्टी ने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी वादों के बावजूद 25 वर्षों में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका.

भाकपा माले ने यह भी आरोप लगाया कि गृह मंत्री बाढ़ की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण करने बिहार नहीं आए. पार्टी ने इसी मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए एनडीए से बाढ़ के स्थायी समाधान को लेकर जवाब मांगा है.

समुचित राहत और मुआवजे की मांग

भाकपा माले ने सरकार से बाढ़ पीड़ितों के लिए पर्याप्त राहत व्यवस्था करने और प्रभावित परिवारों को समुचित मुआवजा देने की मांग की है. पार्टी के मुताबिक, प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए भोजन, मवेशियों के चारे और अन्य जरूरी सहायता की व्यवस्था की जानी चाहिए.

पार्टी ने बाढ़ से हुए फसल नुकसान और अन्य क्षति के मद्देनजर प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई है.

बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए राज्यव्यापी अभियान

प्रेस रिलीज के अनुसार, भाकपा माले ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है. पार्टी का कहना है कि अलग-अलग जिलों में उसकी जिला कमिटियां प्रभावित लोगों की मदद में जुटी हुई हैं और बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं.

स्थायी समाधान पर फिर उठा सवाल

बिहार में हर वर्ष बाढ़ की चुनौती के बीच भाकपा माले ने एक बार फिर सरकार की बाढ़ प्रबंधन नीति और दीर्घकालिक समाधान पर सवाल खड़ा किया है. पार्टी का मुख्य सवाल है कि यदि दशकों से बाढ़ से मुक्ति का वादा किया जा रहा है, तो इसके बावजूद बड़ी आबादी को हर साल बाढ़ की मार क्यों झेलनी पड़ती है.

मौजूदा स्थिति में तत्काल राहत के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन और उचित मुआवजा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। वहीं, बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना और उसकी प्रभावी क्रियान्वयन व्यवस्था पर भी सार्वजनिक बहस जरूरी है.

08/09/2026

आबादी के हिसाब से हक चाहिए! जाति जनगणना पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान”
अखिलेश यादव ने जाति जनगणना की मांग दोहराते हुए कहा कि आबादी के अनुसार लोगों को उनका हक और सम्मान मिलना चाहिए, जानिए उनके बयान में क्या है खास

बलिया में आदिवासी अधिकारों को लेकर धरना, 2027 पर बड़ा ऐलानबैरिया में गोंड समाज ने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की मांग उ...
08/09/2026

बलिया में आदिवासी अधिकारों को लेकर धरना, 2027 पर बड़ा ऐलान

बैरिया में गोंड समाज ने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की मांग उठाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद की बैरिया तहसील में आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया.प्रदर्शन में आदिवासी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए.

धरना-प्रदर्शन के दौरान उपस्थित लोगों ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक संकल्प व्यक्त किया. प्रदर्शनकारियों और वक्ताओं ने कहा कि आगामी चुनाव में भाजपा सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए आदिवासी समाज एकजुट होकर संघर्ष करेगा.

जल, जंगल और जमीन के अधिकार का मुद्दा उठा

धरना-प्रदर्शन में आदिवासी समाज के अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बनाया गया.वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समुदाय आज भी अपने पारंपरिक जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है.

वक्ताओं का आरोप था कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद आदिवासी समाज को उसके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के हितों और अधिकारों से जुड़े सवालों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर मजबूती से उठाने की जरूरत है.

हालांकि, ये आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए हैं और लेख में इन्हें आरोप/दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है.

व्यासजी गोंड ने दिलाया 2027 का संकल्प

धरना-प्रदर्शन के मुख्य अतिथि व्यासजी गोंड, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय गोंड महासभा, समाजवादी पार्टी के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रहे हैं.

उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद आदिवासी समाज के लोगों को 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संकल्प दिलाया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए समाज को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा.

व्यासजी गोंड ने आदिवासी समाज से अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाने का आह्वान किया. उन्होंने विशेष रूप से जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही.

भाजपा सरकार पर लगाए अधिकारों से वंचित करने के आरोप

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि सत्ता में आने के बाद से आदिवासी समुदाय को उसके अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं.

धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए उसके पारंपरिक संसाधनों और अधिकारों का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है. इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने संगठन और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की बात कही.

बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद

कार्यक्रम में गोंड महासभा और समाजवादी पार्टी से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.इनमें गोंड महासभा के जिलाध्यक्ष हरीहर प्रसाद गोंड, समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव हरेंद्र गोंड, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रदीप गोंड तथा विधानसभा अध्यक्ष अजित गोंड सहित कई लोग शामिल रहे.

इसके अलावा संजीत गोंड, शत्रुघ्न गोंड, धीरज गोंड, सुभाष गोंड, शिवसागर गोंड, बंधु गोंड, अशोक गोंड, बीरेंद्र गोंड, संजय गोंड, इन्द्र लोक गोंड, जय प्रकाश यादव, मुन्ना, श्यामू ठाकुर और कृष्ण बिहारी गोंड समेत अन्य आदिवासी नेता भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे.

2027 के चुनाव से पहले आदिवासी मुद्दों पर जोर

बैरिया में आयोजित यह धरना-प्रदर्शन आदिवासी अधिकारों के सवाल को आगामी राजनीतिक संघर्ष से जोड़ने की समाजवादी पार्टी की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है. कार्यक्रम में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जिस तरह का राजनीतिक संकल्प व्यक्त किया गया, उससे साफ है कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं.

फिलहाल कार्यक्रम में उठाए गए मुद्दे और भाजपा सरकार पर लगाए गए आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं. इन दावों पर संबंधित सरकारी या भाजपा पक्ष की प्रतिक्रिया इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है.

निष्कर्ष

बलिया की बैरिया तहसील में आदिवासी अधिकारों को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन में जल, जंगल और जमीन के अधिकार प्रमुख मुद्दे रहे.व्यासजी गोंड ने आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया. साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर रखने का राजनीतिक संकल्प भी दोहराया गया. इससे संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव से पहले आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर और अधिक प्रमुखता मिल सकती है.

पटना में 65% आरक्षण को लेकर उबाल, कॉलेजियम खत्म करने की मांग पर प्रदर्शन
08/09/2026

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पटना के गांधी मैदान से 65% आरक्षण की मांग को लेकर हजारों युवाओं ने प्रदर्शन किया, निजी संस्थानों और न्यायपालिका में .....

मेरठ में हॉस्टल को लेकर छात्रों का प्रदर्शन!चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में हॉस्टल की म...
08/09/2026

मेरठ में हॉस्टल को लेकर छात्रों का प्रदर्शन!

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में हॉस्टल की मांग को लेकर छात्रों और परिजनों ने धरना दिया . चंद्रशेखर आजाद के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा .

छात्रों ने सुरक्षित और किफायती हॉस्टल की मांग उठाई है

#मेरठ

पटना में भाजपा की बड़ी बैठक, सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों पर मंथन!पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय के अटल सभागार में ...
07/09/2026

पटना में भाजपा की बड़ी बैठक, सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों पर मंथन!

पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय के अटल सभागार में सोमवार को ‘सेवा संकल्प अभियान को लेकर भाजपा विधानमंडल दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक, विधान पार्षद और प्रदेश पदाधिकारी शामिल हुए.

बैठक में अभियान को व्यापक स्तर पर प्रभावी बनाने और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं व विकास कार्यों को आम जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि पार्टी के लिए राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है. उन्होंने सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर सीधा संवाद स्थापित करने की अपील की.

बैठक में गरीब, किसान, युवा, महिला और वंचित वर्गों से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया.

आगामी जनसंपर्क कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर नेताओं को दिशा-निर्देश दिए गए.भाजपा ने अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाने का संकल्प लिया.

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