06/02/2022
संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया। कला एवं संगीत को आजीविका के रूप में लेने वाले कलाकारों के लिये आप हमेशा प्रेरणास्रोत रही और रहेंगी। स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर की स्मृतियों को प्रणाम और विनम्र श्रद्धांजलि।
"तेरी आवाज़ ही पहचान है....!"
स्वर कोकिला, भारत रत्न लता मंगेशकर को संगीत विरासत में मिली। भारतीय संगीत जगत में साक्षात सरस्वती पुत्री लता जी उपलब्धियों पर गौर किया जाए तो ये हम भारतीयों के लिये गौरवशाली विरासत है। बीस से अधिक भारतीय भाषाओं में तीस हजार गीत गाने वाली दीदी का नाम 'गिनीज़ बुक रिकॉर्ड' में दर्ज है। भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार, महाराष्ट्र भूषण, राजीव गांधी पुरस्कार, एन. टी.आर. पुरस्कार, नूरजहां पुरस्कार, जी सिने, स्क्रीन, फ़िल्म फेयर, स्टारडस्ट, आई.आई.ए. एफ. सहित दादा साहेब लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, 1972, 1975 और 1990 के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार, 1958, 1962, 1965, 1969, 1993, 1994 का फ़िल्म फेयर पुरस्कार...! करीब 70 वर्ष से ज्यादा लंबी कैरियर की ये फेहरिस्त बहुत लंबी है।
उनके पिता दिनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय गायक और रंगकर्मी थे। इनके परिवार से भाई हृदयनाथ मंगेशकर और बहनों उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आशा भोंसले सभी ने संगीत को ही अपनी आजीविका चुना। लता जी का जन्म इंदौर में हुआ था लेकिन उनकी परवरिश महाराष्ट्र मे हुई। वह बचपन से ही गायक ही बनना चाहती थीं। इनके गीत की चर्चा करना सूर्य को दीप दिखाने जैसा है। एक कलाकार के तौर पर लता जी की उपलब्धियाँ हम भारतीयों के लिये गौरव की बात है और ये हमारी विरासत है। भारत सरकार ने इनकी अंत्योष्टि राजकीय सम्मान के साथ किया।
रंग मार्च उनकी स्मृतियों को प्रणाम करती है और उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है। नमन ! 💐
पेंटिंग रंग मार्च से सम्बद्ध कलाकार लक्ष्मी सिंह की है।