05/02/2026
देश और राजनीति
कभी कभी सोचता हूँ तो लगता है कि सोचना ही बंद कर दूँ । आख़िर सोची तो किस विषय पर सोचू जब चहुँओर अँधेरा ही दिखता है । देश का समाज देखूँ तो दिग्भ्रमित दिखता है राजनीति देखूँ तो विचारशून्य विचारधारा वाली लगता है । अर्थव्यवस्था देखूँ तो भ्रमजाल जैसा तिलिस्म दिखाई पड़ता है जो ऊपर ऊपर तो सतरंगी लेकिन अंदर से खोखला और ताश का महल जैसा है जो कब बिखर जाएगा पता ही नहीं चलता । संस्कृति भी अब पाश्चात्य व्यवस्था के साथ पतनशील और अनेकता में एकता को तार तार करता प्रतीत होता है ।तो अब सोचू तो सोचू किस विषय पर !
आज हमारे देश में मतलबपरस्ती और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए हमारे देश के लोग किसी भी हद तक गिर सकते हैं । सरकार में इतनी कूबत नहीं है कि वह वैसा डिसीजन ले सके जो देश हित में हो और देश के नागरिकों के सर्वांगीण विकास में सहायक हो ।बस येन केन प्रकारेन बस सत्ता में बने रहें और सत्तासुख का आनंद लेते रहें । योजनाएं एकता और समृद्धि के लिये नहीं बनती अपितु कमीशन और विभाजन के लिये बनाई जा रही है जिसका परिणाम आज समाज और राष्ट्र कमजोर होते जा रहा है । देश में विषमता इस कदर बढ़ रही है कि वो दिन दूर नहीं दिखता जब देश और राज्य बटेंगे । आज समावेशी विकास की जगह एक ख़ास समुदाय के तुष्टिकरण के लिए नीतिया बनायी जाती है ।
हम जैसे लोग या तो मूकदर्शक हैं या सही समय का इंतज़ार कर रहे हैं जब परिस्थितिया विकट होंगी तो या तो दफ़न हो जाएँगे या व्यवस्था परिवर्तन के ख़ातिर मारेंगे या मरेंगे । हम सरकार की शब्दावली में सवर्ण है जिसकी ना सरकार है ना प्रशासन है ना सरकार की नीतियों में हैं ना नियत में हैं । हम तो वह बेचारे हैं जहाँ सरकार की लोककल्याणकारी योजनाएं दम तोड़ देती हैं । अपने हक और हकूक के लिये सड़को पर उतरना पड़ता है । अपने जान ज़मीन इज्जत और भविष्य के लिये हथियार उठाना पड़ता है ।
कभी हम अपना सबकुछ देकर भी सामंती और मनुवादी होते हैं। जिस देश के स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिये जान लुटाकर भी शोषक सिद्ध किये जाते हैं । हमारी काबिलियत को आरक्षण और सरकार की नीतियों द्वारा रोज़ कुचला और प्रताड़ित किया जाता है । आख़िर हम करे तो क्या करें ।। जो जानते हैं उन्हें इतना ज़रूर पता है कि लोग कुछ भी करले हम पत्थर पर डब जमाना जानते हैं हम विपरीत परिस्थितियों में भी फूल 🌹 खिलाना जानते हैं। हम सवर्ण हैं हर हाल में उगना जानते हैं ।।
।।जय रणवीर ।।
।।जय बाबा ब्रह्मेश्वर ।।