05/11/2024
शारदा सिन्हा जी नहीं रही , खबर जब सुना तो लगा एक शख्स का निधन ही तो हुआ है । वैसे शख्स जिसकी कर्मभूमि का क्षेत्र का प्रथम अध्याय छठ से शुरू हुआ और जीवन के आखिरी अध्याय का समापन भी छठ में हुआ।
पर जब अभी घर पहुंचकर सोचते रहा तो लगा ,शारदा सिन्हा का मतलब क्या है
आज छठ महापर्व का पहला दिन है और छठी मैया का ही गीत पटना के सड़क से लेकर मेरे घर तक बज रहा है
फिर सोचने लगा आखिर गाना कौन कौन सा गाया है उन्होंने
"अगे माई हरदी चढ़ा दे " अरे यह गाना तो मेरे शादी के वीडियो में हल्दी वाले दिन में बजा था
फिर सोचा
"कहे तो से सजना , तोहरी सजनिया पग पग " अरे यह तो कई भाभियों को भैया के लिए गाते सुना
"बाबुल जो तूने सिखाया " अरे यह तो मेरे ही नहीं कई लोगों की शादी के विदाई का गाना है
"तार बिजली से पतले हमारे पिया " क्या गाना था
अब उनके बारे में ठीक से पढ़ना शुरू किया ,जानते है
दो चार ही हिंदी गाने गाए पर जो गाया ,क्या खूब गाया,क्या खूब बॉक्स ऑफिस पर चला,और सबसे बड़ी बात जो गाया सब सुपरहिट गाया। बॉलीवुड की चमक से भी फूहड़ता से समझौता नहीं किया ।
यह थी शारदा सिन्हा ।
आप स्वयं सोचिए अगर वे न होती ,उनके गीत न होते तो हमारे जीवन के खास पलो का आनंद क्या होता? जैसे जल बिन मछली।
कौन कहता है कि आप नहीं है, जब तक छठ पूजा है , जब तक शादियां है ,आप खासतौर पर बिहार के हर घर में गीतों के माध्यम से सजीव रहेंगी।
शारदा सिन्हा बनने के लिए शारदा सिन्हा को ही पुनर्जन्म लेना होगा।
आप जहां भी है आपको सादर नमन ।