24/08/2026
"बिहार विकास की तरफ नही बढ़ रहा, सिर्फ विनाश को टालने का प्रयास कर रहा है."
CAG report की विवेचना ( इसपर एक video series बनाऊँगा तब तक कागज देखिए )
"subsidy funds का इस्तेमाल" : पाप छुपाएं अभियान , पांच साल का data संलग्न है.
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है जहा से सबसे ज्यादा पलायन होता है, रोजगार के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि उद्योग, कृषि एवं पशुपालन को बढ़ाया जाए, अब देखिए किसको क्या बढ़ावा दिया जा रहा है :
1) पशुपालन को बढावा देने के लिए सालाना subisdy: Rs 242.53 ( पहले से घटा)
2) कृषि को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी: Rs 302.42 (पहले से बहुत घटा )
3) उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सालाना subsidy: 1339.90 Crore ( थोड़ा बड़ा)
4) बिजली विभाग में सालाना सब्सिडी खपत : 15,343.00 करोड़ रुपए, बिजली वाली subsidy पाप भ्रस्टाचार छुपाने के लिए दिया जाता है।
कुल सब्सिडी का 4/5 भाग बिजली ने स्वाहा किया विकास क्या होगा ?
A) जो बिजली अन्य राज्य rs 2.48 में खरीदते है वहीं बिजली बिहार सरकार 7.21 पैसे में खरीदती है। सस्ती चीजों को महंगे दाम पे खरीदने की कला सिर्फ बिहार के मंत्री और अधिकारी जानते है।
B)Transmission loss : transmission line में कितना सस्ता माल लग गया की जहां 8% transmission loss होना चाहिए वहां 45% तक का claim हुआ है ? लोग मारे गए है transformer फटने से, तार गिरने से ? कितना सस्ता सामान सब लगा दिए और क्यों ? फिर दुनिया में सबसे ज्यादा transmission loss जोड़ के इस बिजली को और महंगा किया जाता है।
तत्पश्चात हमारी मेहनत की कमाई के पैसे से subsidy देकर इस महंगी बिजली को हमारे लिए सस्ता किया जाता है, हम पे एहसान जताया जाता है।
SUBSIDY भी ऐसी वैसी नहीं, बिहार की कुल SUBSIDY का 4/5 सब्सिडी सिर्फ बिजली में जाता है।
उसपर तुर्रा SMART METER लगाया जाता है जिसे पुडुचेरी जैस राज्य हटवा चुके है, अमीर राज्यों ने लगवाया ही नहीं, अब कुछ लोग इस smart meter को खून चूसने वाला syringe कहते है, खैर ख़ून सिर्फ दोयम दर्जे के नागरिकों चूसा जाता हैं, अधिकारी और नेताओं का नहीं।
Data source : बिहार AG के द्वारा signed, Bihar report No.02 of 2026 SFAR हिन्दी/ 16.04.2026
CERC petition SM/01, 2021
बिहार विधान सभा में बिजली खरीद की चर्चा और report.