05/09/2022
1929 में गली गली में शोर मचा था सर्वपल्ली राधाकृष्णन थीसिस चोर है. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने ही छात्र जदुनाथ सिन्हा की PHD थीसिस चुराकर अपने नाम से लंदन में किताब छपवा ली.
जदुनाथ सिन्हा ने अपनी पीएचडी की थीसिस सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अलावा प्रोफेसर बजेंद्रनाथ सील को भी एक कॉपी जांच के लिए दी थी. सर्वपल्ली की चोरी पकड़ी गई.
जदुनाथ सिन्हा न्याय के लिए न्यायालय गए, बजेंद्रनाथ सील की गवाही से जदुनाथ सिन्हा केस जीत सकते थे लेकिन बजेंद्रनाथ सील ने मामले से खुद को अलग कर दिया कारण वे एक आम छात्र के लिए सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे ताकतवर शख्स से दुश्मनी मोल नही ले सकते थे.
न्यायालय में सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पैरवी करने के लिए देश के सबसे बड़े वकील सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई सरत चंद्र बोस, धीरेंद्र नाथ मित्र और एन एन सिरकार PRO BONO के आधार पर खड़े हुए, प्रो बोनो का अर्थ है बिना किसी भुगतान के तीनों वकील सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पैरवी न्यायालय की.
सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पास ECONOMY CAPITAL, CULTURAL CAPITAL और SOCIAL CAPITAL तीनों था. जवाहरलाल नेहरू, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उसके समय के कई दिग्गज सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पक्ष में थे.
आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन बुद्धिमत्ता के मामले में मजबूत जदुनाथ सिन्हा पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारी दबाव बनाया. जज को पटाया गया, जदुनाथ सिन्हा को समझाया गया. अपनी हार देखते ही सर्वपल्ली ने न्यायालय के बाहर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोग से जदुनाथ सिन्हा पर दबाव बनाकर केस का सेटलमेंट किया.
✍🏼✍🏼Kranti Kumar
✍🏻✍🏻Kranti Kumar