Sudhir Kumar Rajak

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18/11/2025

पत्रकार ने बूथ से वोट कर बाहर आयी महिला से पूछा क्या आपके इलाके में विकास हुआ है.

महिला ने जी हां काम हुआ है, हमारे बैक खाते में सरकार ने 10,000 रुपए ट्रांसफर किया गया है.

10,000 रुपए को महिला विकास समझ रही हैं. सरकार ने 10,000 ट्रांसफर कर वोटिंग पैटर्न को प्रभावित किया है, ऐसा लोग आरोप लगा रहे हैं.

चुनाव आयोग तो BJP की गोद मे बैठा है. विपक्ष भी आरोप लगाने अलावा कुछ कर नही पा रहा है.

वोटर को भी समझ चाहिए, 10,000 रुपए कितना दिन चलेगा. 15 दिन, 20 दिन और उसके बाद ? लेकिन 10,000 वोट से दम बनी सरकार पांच साल चलेगी. और युवा बाहर जाकर करेंगे दिहाड़ी मजदूरी करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के मुख्य न्यायधीश आदरणीय बी० आर० गवई जी के ऊपर जातिवादी अधिवक्ता के द्वारा जो जूता उछाला गया है ...
08/10/2025

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के मुख्य न्यायधीश आदरणीय बी० आर० गवई जी के ऊपर जातिवादी अधिवक्ता के द्वारा जो जूता उछाला गया है इसका आज पटना हाइकोर्ट बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया गया।

यह जूता उछालना देश के लोकतंत्र,संविधान और न्यायिक व्यवस्था को धूमिल करता है केंद्र की सरकार ऐसे जातिवादी अपराधी पर देश द्रोह का मुकदमा दायर करे और सीधे फांसी की सजा दे।

दलित समाज के लोग कितने भी बड़े पद पर चले जाते है लेकिन जातिवादी मानसिकता हमेशा अपमानित करते रहता है ऐसे में देश के सभी जनता जो न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास करते है और मानते है उनका घोर अपमान किया गया है इस अपमान का बदला पूरा देश लेकर रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश बी० आर० गवई जी .......का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान
#सुप्रीमकोर्ट

दलित समाज ज़ब अपने अधिकार के लिए संघर्ष करता है तो दलित विरोधी NDA सरकार दलित समाज पर जातिसूचक गाली देकर Bihar Police लाठ...
27/09/2025

दलित समाज ज़ब अपने अधिकार के लिए संघर्ष करता है तो दलित विरोधी NDA सरकार दलित समाज पर जातिसूचक गाली देकर Bihar Police लाठीचार्ज से दर्जनों छात्र घायल हो गए है जिनका इलाज पीएमसीएच पटना में चल रहा है।

Nitish Kumar जी आपका पुलिस जातिवादी गुंडा बन गया है जो दलितों को गाली गलौज कर के लाठी चार्च किया जो कही से जायज नहीं है इसका हिसाब लेकर रहेंगे।

SS /ST की छात्रवृति, बजट, रोस्टर, कर्मचारी का प्रमोशन मे आरक्षण ना देना सरकार की दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

दलित समाज के छात्र/ युवा बुद्धिजीवी, कर्मचारी आपको समझना होगा की सरकार आपके हक़ अधिकार की बात को महत्त्व नहीं देती है।

आपके खून मे GEN - Z की तरह उबाल आना चाहिए, लड़ाई लंबी है, निजी क्षेत्र न्यायपालिका मे आरक्षण चाहिए।

दलित सांसद मंत्री विधायक से सवाल कीजिए अपने संवैधानिक अधिकार आरक्षण के लिए।

सिख पंथ के संस्थापक एवं प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस पर कोटि-कोटि नमन। उन्होंने विश्व को...
16/09/2025

सिख पंथ के संस्थापक एवं प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस पर कोटि-कोटि नमन। उन्होंने विश्व को समरसता, सेवा, सहिष्णुता और आध्यात्मिक चेतना का पाथेय प्रदान किया। उनका संपूर्ण जीवन लोक-मंगल और मानवता के कल्याण की साधना का अद्भुत उदाहरण है। आज भी उनकी शिक्षाएँ हमें सत्कर्म, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

#श्रीगुरु_नानक_देव_जी

बाबसाहेब भीमराव अंबेडकर के बारे में सबसे बड़ा झूठ ये है कि वो सिर्फ़ दलितों के नेता थे.सच तो ये है कि अगर डॉक्टर अंबेडकर...
15/09/2025

बाबसाहेब भीमराव अंबेडकर के बारे में सबसे बड़ा झूठ ये है कि वो सिर्फ़ दलितों के नेता थे.

सच तो ये है कि अगर डॉक्टर अंबेडकर दलितों के मसीहा हैं तो महिलाओं के लिए भी भगवान से कम नहीं हैं.

ये डॉक्टर अंबेडकर ही थे जिन्होंने भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाया…वरना स्विट्ज़रलैंड जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1971 में जाकर मिल पाया.

जिस जमाने में महिलाएँ चारदीवारी में बंद रहा करती थीं, डॉक्टर अंबेडकर ने उस दौर में कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिलवाया…वरना अमेरिका जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1993 में मिला.

महिलाओं को नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें संपत्ति में बराबर अधिकार दिलाने की वकालत भी डॉक्टर अंबेडकर ने ही की थी.

ध्यान रहे कि…
बाबासाहेब ने मनुस्मृति को सिर्फ़ इसलिए नहीं जलाया था कि इसमें दलित विरोधी बातें लिखी थीं…बल्कि इसलिए भी जलाया था क्योंकि इसमें महिलाओं को ग़ुलाम बनाने के तरीक़े लिखे थे.

कुल मिलाकर देश की महिलाओं को याद रखना चाहिए कि भारत में महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा डॉक्टर अंबेडकर जी ही थे.

जय भीम जय भारत…

#संविधान_निर्माता_बाबा_साहब

संघर्षों के आदि है..........हम अंबेडकवादी हैंये तस्वीर 2020 के औरंगाबाद जिला अंतर्गत दाऊदनगर थाना के अंच्छा गाँव का है द...
15/09/2025

संघर्षों के आदि है..........
हम अंबेडकवादी हैं

ये तस्वीर 2020 के औरंगाबाद जिला अंतर्गत दाऊदनगर थाना के अंच्छा गाँव का है दलित समाज के लोगों को हत्या हो गया था दलित युवा Amar Azad Paswan जी एवं Adv Sudhir Kumar Rajak जी ने जाकर अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करने का मांग किया था

 #कोलकाता से पूर्णिया के बीच IndiGo  ने विमान सेवा की बुकिंग शुरू की 3115 रुपए किराया 17.09.25 को पहले फ्लाइट।कोलकाता प्...
15/09/2025

#कोलकाता से पूर्णिया के बीच IndiGo ने विमान सेवा की बुकिंग शुरू की 3115 रुपए किराया 17.09.25 को पहले फ्लाइट।
कोलकाता प्रस्थान - 12.30
पूर्णिया आगमन - 13.40
पूर्णिया प्रस्थान - 14.30
कोलकाता आगमन - 15.40
परिचालन दिन - सोमवार, बुधवार, शुक्रवार
इस टिकट को IndiGo के Website पे जाकर बुक करना पड़ेगा

07/08/2025

हर बीतता हुआ समय यह बता रहा है, अगर तुम कामयाब नहीं हुवे तो तुम्हारा अपना कोई नहीं है!

 #दलित_मुद्दों_पर_सार्थक_समागमआयोजक - नेशनल दलित सम्मिट, बिहार दलित अधिकार समागम पटना के जगजीवन राम शोध संस्थान में आयोज...
26/07/2025

#दलित_मुद्दों_पर_सार्थक_समागम
आयोजक - नेशनल दलित सम्मिट, बिहार
दलित अधिकार समागम पटना के जगजीवन राम शोध संस्थान में आयोजित हुआ।दलित अधिकार एक्टिविस्ट का अच्छा जुटान हुआ।
समागम का उदघाटन तेलांगना से आए लक्ष्मणैया ने किया।तेलंगाना से आए लक्ष्मणैया जी ने कहा कि बिहार और तेलंगाना दलित वंचितों के साझे संघर्ष का सामान भागीदार रहा।बुद्ध भी इन दोनों राज्यों को जोड़ता है। तेलंगाना का ऐतिहासिक संघर्ष और तेलंगाना विद्रोह की धमक आज भी बिहार में देखने को मिल रहा है।उन्होंने कहा कि बड़ी लड़ाई के बाद सबको बराबर का वोटिंग राइट मिला।बाबा साहेब की इस देन और अधिकार को "SIR" के द्वारा छीनने की कोशिश जारी है।उन्होंने SC /ST Sub plan act बनाने को लेकर संघर्षों का जिक्र किया।समागम को संबोधित करते हुए दलित चिंतक अशोक भारती ने कहा कि हमें राज,समाज और देश के संसाधनों में सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहिए।भाजपा की सरकार अधिकार की बात नहीं करती है,वह हमें लाभार्थी समझती है।हमें चुनाव में अपने सवालों को मजबूती से उठाना होगा।सम्मेलन से प्रस्ताव पारित करके दलित वंचित विरोधी मतदाता पुनरीक्षण को वापस लेने की मांग की गई। ध्वनिमत से यह मांग की गई कि सरकार SC/ST Act के लिए ऑर्डिनेंस लाए।दलितों की हत्या,हमले और हिंसा के मुकदमे पर स्पीडी ट्रायल हो, पदोन्नति में आरक्षण पर रोक को अविलंब हटाओ!समागम से राजनीतिक दलों खासकर महागठबंधन से अपील की गई कि दलित आदिवासियों के मौजूं सवालों को घोषणा पत्र में जगह मिले।समागम में वक्ता के बतौर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, शकील अहमद खान, महबूब आलम, सत्यदेव राम,शशि यादव,विधायक सूर्यकांत पासवान,मनोज मंजिल, कर्मचारी महासंघ के विनोद चौधरी आदि ने भाग लिए।अध्यक्षता प्रो एसएन आर्या ने किया और संचालन ओमप्रकाश मांझी–भोला प्रसाद दिवाकर ने संयुक्त रूप से किया। 5सूत्री प्रस्ताव को अवकाशप्राप्त मुख्य अभियंता विश्वनाथ चौधरी ने प्रस्तुत किया।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 80 प्रतिशत ओबीसी, 83 प्रतिशत एसटी और 64 प्रतिशत एससी प्रोफेसरों के पद खाली- एससी, एसटी और ओ...
24/07/2025

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 80 प्रतिशत ओबीसी, 83 प्रतिशत एसटी और 64 प्रतिशत एससी प्रोफेसरों के पद खाली- एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण कई तरीकों से खत्म करने के तरीकों में यह भी एक तरीका है।

यह आंकड़े संसद में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा सांसद मनोज झां के सवाल के जवाब में प्रस्तुत किए। ये आंकड़े 30 जून 2025 तक के हैं। प्रोफेसरों के इन पदों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर तीनों के पद शामिल हैं।

ओबीसी के स्वीकृत 423 प्रोफेसरों के पदों में सिर्फ 83 पद भरे गए हैं, 340 पद खाली हैं।

एसटी के स्वीकृत 144 प्रोफेसरों के पदों में सिर्फ 24 पद भरे गए हैं, 120 पद खाली हैं।

एससी के 308 स्वीकृत प्रोफेसरों पदों में सिर्फ सिर्फ 111 पद भरे गए हैं, 197 पद खाली हैं।

इस तरह से कुल मिलाकर देखें तो ओबीसी, एसटी और एससी कुल स्वीकृत 875 पदों में सिर्फ 218 पद भरे गए हैं, 657 पद खाली छोड़ दिए गए हैं।

केंद्र की भाजपा सरकार खुद को ओबीसी की सरकार कहती है। ओबीसी के 423 में सिर्फ 83 पद भरे गए हैं। करीब 80 प्रतिशत पद खाली हैं।

यह सरकार खुद को आदिवासियों की भी सरकार कहती है, उनके 83 प्रतिशत पद खाली हैं।

एससी के 197 पद खाली हैं।

यह सरकार खुद बाबा साहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने वाला सरकार कहती है। ओबीसी की सरकार कहती है।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों के खाली 657 पद 657 नौकरियां नहीं हैं, भारत के शीर्ष विश्वविद्यालयों, शीर्ष शैक्षिक पदों और बौद्धिक गतिविधियों के केंद्रों से ओबीसी, एससी और एसटी को बाहर का रास्ता दिखाने का तरीका है।

भाजपा के ओबीसी नेता, आदिवासी नेता और दलित नेता कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत के इतिहास की पहली सरकार है, जो ओबीसी के हितों को सबसे अधिक प्राथमिकता देती है।

क्या ओबीसी, एससी और एसटी को प्राथमिकता देने का मतलब इन समुदायों के कुछ नेताओं को मंत्री, मुख्यमंत्री या राज्यपाल बनाकर उन्हें मुखौटे की तरह प्रस्तुत करना है।

बथानी टोला नरसंहार की बरसी : जनसंहार और न्याय का उपहासरणबीर सेना द्वारा बथानी टोला (भोजपुर जिला) जघन्य जनसंहार को 11 जुल...
11/07/2025

बथानी टोला नरसंहार की बरसी : जनसंहार और न्याय का उपहास

रणबीर सेना द्वारा बथानी टोला (भोजपुर जिला) जघन्य जनसंहार को 11 जुलाई 1996 को अंजाम दिया गया था, जिसमें 6 बच्चे एवं 11 महिलायें समेत कुल 21 लोग मारे गए थे। मृतकों में गांवों में घूम-घूम कर चूड़ी बेचने वाले गरीब नइमुद्दीन अंसारी के परिवार के 6 सदस्य भी शामिल थे। उनकी 3 माह की दुधमुंही बच्ची को दरिन्दों ने हवा में उछाल कर तलवार से काट दिया था, जिसकी मीडिया में काफी चर्चा भी हुई थी।

इस हत्याकांड से सम्बन्धित एफ.आई.आर. में कुल 33 हमलावरों को नामजद किया गया था। इन अभियुक्तों के खिलाफ सेशन कोर्ट, आरा में करीब 14 सालों तक सुनवाई चलती रही। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें 3 को फांसी एवं 20 अन्य को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।

लेकिन जब सजायाफ्ता लोगों की ओर से पटना हाई कोर्ट में अपील की गई तो सारा मामला पलट गया। अन्ततः 16 अप्रैल, 2012 को हाई कोर्ट की एक बेंच (जिसमें जस्टिस नवनीत प्रसाद सिंह एवं जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह शामिल थे) ने ‘त्रुटिपूर्ण साक्ष्य’ को आधार बनाते हुए इस जनसंहार के सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।

उपरोक्त विवरण भारतीय न्यायपालिका का कोई नया चेहरा प्रस्तुत नहीं करते हैं। पहले भी सेशन कोर्ट एवं हाई कोर्ट के न्यायाधीश महोदय विभिन्न निजी गुण्डावाहिनियों द्वारा किये गए जनसंहारों के मामलों में आमतौर पर इसी प्रकार के पक्षपातपूर्ण फैसले करते रहे हैं। 1980 एवं 1990 के दशकों में बिहार के विभिन्न जिलों में भूमि सेना, लोरिक सेना, ब्रह्मर्षि सेना, सवर्ण लिबरेशन फ्रंट, सनलाईट सेना और रणवीर सेना द्वारा दर्जनों जनसंहार किये गए, जिनमें सैकड़ों की तादाद में गरीब, दलित एवं अति पिछड़े समुदायों के लोग मारे गए।

ब्रह्मेश्वर सिंह के नेतृत्व में अकेले रणवीर सेना ने भोजपुर, जहानाबाद, गया एवं औरंगाबाद में करीब दो़ दर्जन जनसंहारों को अंजाम दिया। उसने अपनी इस हत्यारी भूमिका को मीडिया एवं पुलिस के सामने स्वीकार भी किया। लेकिन इसके बावजूद उसे जुलाई 2011 में जेल से रिहा कर दिया गया। इसी तरह सावन विगहा एवं मेन-बरसिम्हा जैसे जनसंहारों को अंजाम देने वाली निजी सेना ‘सवर्ण लिबरेशन फ्रंट’ के सरगना रामाधार सिंह उर्फ डायमण्ड को भी कोर्ट ने जेल से मुक्त कर दिया था।

विभिन्न जनसंहारों में पहले तो पुलिस की आधी अधूरी जांच रहती है। सबूतों को छिपाने, नष्ट करने या लापरवाही से इकट्ठा किया जाता है।जिस कारण मुकदमा कमजोर हो जाता है। पुलिस का ऐसा करने में उसके अपराधियों से गहरे रिश्ते और अपराधियों के राजनयिक पहुंच आदि कारण होते हैं। बिहार की राज्य सरकारों (चाहे वह किसी भी दल या गठबंधन की हों) ने इन जनसंहारी ताकतों को शह ही दिया है। नीतिश सरकार ने तो रणबीर सेना के राजनैतिक रिश्तों की जांच कर रही अमीर दास आयोग को भी भंग कर दिया।

अपराधी-पुलिस-राजनीतिक गठजोड़ का कुल जमा परिणाम यह होता है कोर्ट की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अपराधी कानून के शिकंजे से बाहर आ जाते है। पीड़ित पक्ष हार जाता है अन्याय जीत जाता है।

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