Umesh Kumar Das

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Umesh Kumar Das Educator & Social Activist

28/06/2026
🆘 Attention Please 🩷 बाबा साहब  की आगामी 135वीं जयंती के लिए....डॉ० भीमराव अंबेडकर की जयंती कैसे मनाएं ?यह भारत के  #भाग...
12/04/2026

🆘 Attention Please 🩷
बाबा साहब की आगामी 135वीं जयंती के लिए....

डॉ० भीमराव अंबेडकर की जयंती कैसे मनाएं ?

यह भारत के #भाग्य_विधाता का जन्मोंत्सव है, इसे धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ बड़े त्योहार की तरह मनाईए-

1.सर्वप्रथम सुबह 6:00 बजे अपने-अपने घरों पर पंचशील या जय भीम का झंडा फहराएं!

2.प्रातः काल से ही स्वादिष्ट भोजन और नए पकवान बनाएं।

3.इस अवसर पर अपने रिश्तेदारों को आमंत्रित करें। @उमेश

4.अपने अपने घरों में बाबा साहब के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके प्रति अपना कृतज्ञता प्रकट करें।

5.बाबा साहब की जयंती के उपलक्ष्य में आसपास के इलाकों में सभा संगोष्ठी में भाग लें।

6.सामाजिक रूपांतरण के लिए लोगों को जागरूक करने हेतु पदयात्रा/साइकिल/मोटरसाइकिल यात्रा करें। @उमेश

7.बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचने के लिए लोगों को विशेषकर गरीब और स्लम बस्तियों में रहने वाले लोगों को जागरूक करें।

8.अपने घर या गांव में सामाजिक/वैज्ञानिक/तार्किक और मिशनरी पुस्तकों का छोटा-छोटा पुस्तकालय स्थापित करें!

9.संध्या के समय अपने-अपने घरों पर मोमबत्ती जलाकर प्रकाशित करें। @उमेश

10.अपने घरों को झालरों से सजाएं एवं और पटाखे फोडें।

11.अगर संभव हो सके तो संध्या से लेकर मध्य रात्रि तक मिशनरी गीत-संगीत के माध्यम से लोगों तक बाबा साहब के विचारों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य करें!

12.जयंती के अगले दिन Quiz प्रतियोगिता/खेल प्रतियोगिता/भाषण प्रतियोगिता/सेमिनार एवं अन्य मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन करें! @उमेश

यह आपका अपना त्यौहार है। इसे बढ़-चढ़ कर मनाएं और इस मैसेज को अनेक लोगों के बीच शेयर करें।

जय भीम! जय भारत!!
🙏🌹
@उमेश

मा0 कांशीराम साहेब का जन्म 15 मार्च 1934 ई. को ग्राम-खवासपुर, जिला-रोपड़, पंजाब में एक रविदसिया (सिख) परिवार में हुआ था. ...
15/03/2026

मा0 कांशीराम साहेब का जन्म 15 मार्च 1934 ई. को ग्राम-खवासपुर, जिला-रोपड़, पंजाब में एक रविदसिया (सिख) परिवार में हुआ था. उनकी माता का नाम बिसन कौर और पिता का नाम हरीसिंह था. प्रारंभिक शिक्षा गांव खवासपुर में हुई और स्नातक शिक्षा ( रोपड़ राजकीय कालेज) पंजाब विश्वविद्यालय से हुई थी. 1957 में उन्होंने भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग में नौकरी किये बाद में वहां से इस्तीफा देकर सन् 1958 ई. में मा0 कांशीराम जी पूना शहर महाराष्ट्र में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में सहायक वैज्ञानिक के पद पर नियुक्त हुए.
(DRDO) पूना शहर में नौकरी के दौरान सन् 1964 में एक घटना घटती है. महाराष्ट्र सरकार ने डॉ. भीम राव अम्बेडकर जयन्ती और तथागत बुद्ध जयन्ती की छुट्टियाँ समाप्त कर दिया था. राजस्थानी वाल्मीकि जाति के कट्टर अम्बेडकरवादी 'दीना भाना' जी वहीं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे. जिन्होंने छुट्टियाँ खतम करने का विरोध किया. जिसके कारण उन्हें नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया. दीना भाना जी बहुत दुःखी हुए. यह बात मा0 कांशीराम जी को पता चली तो वे दीना भाना से मिलकर पूरी जानकारी लिए तब उन्होंने बताया की अम्बेडकर साहेब मेरे समाज के लिए भगवान से बढ़ कर हैं. इसलिए उनकी जयन्ती मनाने के लिए छुट्टी मांग रहा हूँ. कांशीराम जी ने पूछा कि वे भगवान से बढ़ कर कैसे..? तब दीना भाना ने सवाल किया, आप को नौकरी कैसे मिली? आप इस पद पर कैसे पहुँचे? कांशीराम साहेब ने कहा मैं ने पढ़ा लिखा, डिग्री हासिल की तब इस पद पर पहुँचा हूं. फिर दीना भाना ने कहा क्या आप ये नहीं जानते कि आप बाबा साहेब के द्वारा दिलवाए आरक्षण की वजह से यहां तक पहुंचे हो. जब कांशीराम जी को एहसास हुआ तब बाबा साहेब के बारे में विस्तृत जानकारी चाही. तब दीना भाना ने बाबा साहेब द्वारा लिखित पुस्तक *एनिहिलेशन ऑफ कास्ट* मान्य. कांशीराम जी को दी, जिसे साहब ने लगातार छः बार पढ़ा.

बाबा साहब की इस पुस्तक को पढ़ने के बाद उनका कहना था कि इस पुस्तक ने मुझे जीवन भर का काम दे दिया है. मा0 साहेब ने दीना भाना जी की लड़ाई लड़कर उन्हें पुनः नौकरी में बहाल कराया. उसके साथ ही संकल्पित होकर नौकरी से त्याग पत्र दे दिया और कहा कि मैं छुट्टी न देने वाली सरकार की ही छुट्टी कर देना चाहता हूँ. उन्होंने ‘सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति’ को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया.

इसी बीच पंजाब के एक चर्चित विधायक की बेटी का रिश्ता आया तब उनकी मां ने उन्हें शादी करने के लिए कहा तो "मान्य. कांशीराम जी ने मां को समझाया कि उन्होंने समाज की भलाई के लिए ख़ुद को समर्पित कर दिया है.नौकरी छोड़ने पर अब वे संन्यास ले रहे हैं और परिवार के साथ उनका कोई रिश्ता नहीं है. वे अब परिवार के किसी भी आयोजन में नहीं आ पाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि वे जिंदगी भर शादी नहीं करेंगे और उनका पूरा जीवन बहुजन समाज के उत्थान को समर्पित है".

सबसे पहले बाबा साहेब डॉ0 भीम राव अम्बेडकर द्वारा स्थापित रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के सक्रिय सदस्य बनें. गहराई से अध्ययन करने के बाद उन्हें लगा कि ये लोग बाबा साहेब के विचारों के अनुसार कार्य नहीं कर रहे हैं तो 1971 में उस पार्टी से स्तीफा दे दिया.

मान्य.कांशीराम जी ने ऐसा मार्ग चुना था जिसके नेता एवं कार्यकर्ता स्वयं थे. अतःउन्होंने एक विस्तृत योजना तैयार की इस योजना का पहला बिन्दु विचारधारा का चुनाव था. उसका निरन्तर परिष्कार करना एवं बहुजनवाद की थीसिस विकसित करना था. जिसके अनुसार ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य 15% अल्पजन मनुवादी व्यवस्था के पोषक हैं दलित, पिछड़ा और धार्मिक अल्पसंख्यक 85% बहुजन समाज के शोषक हैं.

अपनी योजना के दूसरे बिन्दु में मा0 कांशीराम जी ने बहुजन समाज बनाने के लिए विशिष्ट समाज सुधारक जो भारतीय मूलनिवासी बहुजन समाज के परिवारों में पैदा हुए थे.जिन्होंने मनुवादी सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ आन्दोलन चलाया था. *तथागत गौतम बुद्ध, सन्त शिरोमणि गुरु रविदास, सद्गुरु कबीर साहेब, गुरु घासीदास, गुरू नारायणा, धरती पुत्र बिरसा मुंडा, पेरियार ई.वी.रामास्वामी नायकर, महात्मा जोतिबा राव फुले, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, सन्त गाडगे बाबा और बाबा साहब डॉ0 आम्बेडकर इनके आन्दोलन को पुर्नजीवित कर अपने मिशन को सामाजिक विस्तार देने की योजना बनाई.

अपनी योजना के तीसरे बिन्दु में उनकी नजर उन लाखों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ी जिनके लिए बाबा साहेब ने कहा था कि मुझे मेरे समाज के पढ़े लिखे लोगों ने धोखा दिया है. मा0 कांशीराम जी को आंदोलन के लिए आवश्यक समय ज्ञान और पैसा तीनों चीजें सरकारी कर्मचारियों के पास नजर आयीं उन्होंने कैडर- कैम्पों के माध्यम से लाखों कर्मचारियों को तैयार किया. विचारधारा, कार्यकर्ता और नेता जैसे आवश्यक अंगों को तैयार करने के बाद मान्यवर कांशीराम जी ने संगठन का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया.

मान्यवर कांशीराम साहब का मिशन
मा0 कांशीराम जी शासन सत्ता को ‘मास्टर चाबी’ कहते थे. वे उसे साध्य नहीं साधन मानते थे.जिससे ‘सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति’ के साध्य को प्राप्त किया जा सके. राजसत्ता की चाबी पाने के लिए मा0 कांशीराम जी ने समय अंतराल योजनाबद्ध तरीके से मुख्य तीन संगठनों की स्थापना की थी.

*१.बामसेफ की स्थापना-* रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया से स्तीफा देने के पश्चात् जिस संगठन की रूप रेखा 1971ई. में बनाई थी. जिसका नाम अखिल भारतीय अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यक था. जो आगे चलकर 06 दिसम्बर 1978 को बाबा साहेब के परिनिर्वाण दिवस पर BAMCEF बन गया. BAMCEF बैकवर्ड एन्ड माइनॉरिटीज कम्युनिटीज एम्प्लाइज फेडरेशन. यह ऐसा संगठन था जिसका उद्देश्य Sc,St,Obc and Minorities के शिक्षित सदस्यों को अम्बेडकरवादी सिद्धांतों को समर्थन करने के लिए राजी करना था. यह राजनैतिक एवं धार्मिक संस्था नहीं थी. बल्कि इसके पीछे मा0 कांशीराम जी की मंशा थी कि बामसेफ के कर्मचारी समाज को अपना समय, ज्ञान,पैसा देंगे. बामसेफ बहुजन समाज के लिए टीचर की भूमिका में कार्य करेगा.

परिणामस्वरूप बामसेफ के कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में साहित्यिक, सांस्कृतिक,सामाजिक, बौद्धिक आदि क्षेत्रों में मनुवाद के खिलाफ एक तूफान खड़ा कर दिया तथा जाति धर्म में बंटे हुए बहुजन समाज को सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ जोड़कर प्रशिक्षित कार्यकर्ताओ की फ़ौज खड़ी कर दी.

*२. DS4 की स्थापना-* 06 दिसम्बर 1981 को बाबा साहब के परिनिर्वाण दिवस पर मा0 कांशीराम जी ने DS-4 का गठन किया. इस संगठन का पूरा नाम ‘दलित शोषित समाज संघर्ष समिति’ था. यह संगठन राजनैतिक दल तो नहीं था, लेकिन इसकी गतिविधियाँ राजनैतिक दल जैसी ही थी.मा0 कांशीराम जी के नेतृत्व में मनुवाद के खिलाफ एक जन आंदोलन खड़ा हो गया था0 वे अपने कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविरों में कहा करते थे कि ‘जिन लोगों की गैर-राजनैतिक जड़ें मजबूत नहीं हैं वे राजनीति में सफल नहीं हो सकते’.मा0 कांशीराम जी के सक्षम नेतृत्व से बहुजन समाज में राजनैतिक भूख भी पैदा हो गई.

*३ बहुजन समाज पार्टी की स्थापना-* 14 अप्रैल 1984 को बाबासाहब के जन्म दिन पर मा0 कांशीराम जी ने ‘बहुजन समाज पार्टी’ की स्थापना की उद्देश्य स्पष्ट था पहले राजसत्ता की चाबी पर कब्जा करना फिर सत्ता की चाबी से सम्राट अशोक के श्रमण भारत की पुनर्स्थापना करना. उद्देश्य के अनुरूप जैसे ही बसपा की पहली बार सरकार बनी मा0 कांशीराम जी ने उत्तर प्रदेश को बौद्ध राज्य घोषित कर दिया. इस योजना के तहत बसपा की सरकार ने कहीं पत्थर भी लगवाया तो श्रमण परम्परा के महापुरुषों के नाम का लगवाया. 1991में उ.प्र.के इटावा से 11वीं लोकसभा का चुनाव जीता और दूसरी बार 1996 में होशियारपुर पंजाब से चुनाव चुनाव जीत कर संसद में पहुँचे थे.

2001में बहन कु.मायावती को सार्वजनिक रूप से घोषणा करके अपना उत्तराधिकारी बनाया. 2003 में लकवा ग्रस्त होने के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हो गए.

*बौद्ध धम्म ग्रहण करने की मंशा* सन् 2002 ई.में मा0 कांशीराम साहेब ने घोषणा किया कि 14 अक्तूबर 2006 को बाबा साहब डॉ0 भीम राव अम्बेडकर के धर्म परिवर्तन की 50वीं वर्षगांठ पर बौद्ध धम्म ग्रहण करेंगे.वे चाहते थे कि उनके साथ 5 करोड़ समर्थक भी बौद्ध बनें,किन्तु 9 अक्टूबर 2006 को उनका परिनिर्वाण हो गया.

उनकी दो किताबें " चमचा युग एवं बर्थ ऑफ़ बामसेफ छपी थीं. कांशीराम जी ने कई पत्र- पत्रिकाएं शुरू की जिसमें मुख्यतः बहुजन संगठक (हिन्दी),बामसेफ बुलेटिन(अंग्रेजी), बहुजन नायक ( मराठी एवं बंग्ला)बहुजन टाइम्स दैनिक आदि.

मा0 साहब ने एक संगठन और बनाया था जिसका नाम B.R.C.था. बुद्धिस्ट रिसर्च सेंटर वह संगठन भारतीय मूलनिवासी बहुजन समाज के इतिहास की खोज करता था.

*निष्कर्ष* अन्त में यह कहा जा सकता है कि भारत में अगर अम्बेडकरवाद जिन्दा है तो इसका पूरा श्रेय सिर्फ मान्यवर कांशीराम साहब को ही जाता है.

*कांशीराम तेरी नेक कमाई, तूने सोती कौम जगाई *
* मा0 कांशीराम साहब अमर रहें *
* बाबा साहेब डॉ0 अम्बेडकर अमर रहें *
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नमो बुध्दाय, जय भीम, जय भारत, जय संविधान।

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