20/12/2025
गरीब बिहार, महंगा पेट्रोल, यह सुशासन नहीं शोषण है....................................................................
बिहार आज देश के सबसे गरीब राज्यों में गिना जाता है। लेकिन इसी गरीब बिहार में पेट्रोल की कीमत ₹105.23 प्रति लीटर है - यानी देश के सबसे महंगे राज्यों में शामिल।
और अब ज़रा तुलना करिए।
दिल्ली ₹94.77,
उत्तर प्रदेश ₹94.69,
गुजरात ₹94.70,
हिमाचल प्रदेश ₹95.34,
हरियाणा ₹95.94,
झारखंड ₹97.86।
ये सभी राज्य बिहार से आर्थिक रूप से बेहतर हैं। यहाँ लोगों की औसत आमदनी ज़्यादा है, रोज़गार ज़्यादा है, सुविधाएँ ज़्यादा हैं। फिर भी पेट्रोल सस्ता। और बिहार? जहाँ युवा पलायन करता है, जहाँ मज़दूर 300 रुपये रोज़ कमाता है, जहाँ किसान डीज़ल-पेट्रोल के भरोसे खेती करता है, ना अच्छे अस्पताल हैं और ना स्कूल, लेकिन पेट्रोल देश में सबसे महंगा।
यह क्या है? यह शासन है या शोषण?
सरकारें जब जवाब नहीं देना चाहतीं, तो “सुशासन” का नारा उछाल देती हैं। लेकिन सवाल यह है कि- अगर सुशासन है, तो बिहार में:
सबसे कम प्रति व्यक्ति आय क्यों?
सबसे ज़्यादा पलायन क्यों?
सबसे कमजोर स्वास्थ्य और शिक्षा क्यों?
और अब एक नया तमगा- गरीब राज्य में महंगा पेट्रोल।
सच यह है कि बिहार सरकार ने पेट्रोल पर जानबूझकर ऊँचा VAT लगाकर गरीब जनता से वसूली को ही नीति बना लिया है। ऑटो चालक, डिलीवरी बॉय, छोटे दुकानदार, किसान, सबसे ज़्यादा मार इन्हीं पर पड़ती है।
सरकार कहती है, “पैसे से विकास करेंगे।” लेकिन सवाल सीधा है, 15-20 साल से टैक्स वसूली चल रही है, विकास कहाँ है? अगर पेट्रोल टैक्स से बिहार समृद्ध होता, तो आज बिहार देश में सबसे आगे होता, ना कि हर सूचकांक में सबसे पीछे। यह आर्थिक मजबूरी नहीं, यह राजनीतिक बेरुख़ी और प्रशासनिक निकम्मापन है।
बिहार की जनता से हर बार कहा जाता है- “थोड़ा सह लीजिए।” लेकिन सत्ता कभी नहीं बताती कि कब तक?
अब समय आ गया है कि बिहार पूछे- जब दिल्ली, यूपी और गुजरात में पेट्रोल सस्ता हो सकता है, तो बिहार में क्यों नहीं?
जब तक यह सवाल नहीं पूछा जाएगा, तब तक गरीब को महंगाई और सत्ता को बहाने मिलते रहेंगे।