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The Ravi बिहार में व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प लेकर प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर से जन सुराज पदयात्रा की शुरुआत

02/01/2026

हाड़ कंपाने वाली इस ठंड में गरीबों को आश्रय देने की जगह बिहार की एनडीए उनके आशियाने उजाड़ रही है!!

गरीब बिहार, महंगा पेट्रोल, यह सुशासन नहीं शोषण है....................................................................बिह...
20/12/2025

गरीब बिहार, महंगा पेट्रोल, यह सुशासन नहीं शोषण है....................................................................
बिहार आज देश के सबसे गरीब राज्यों में गिना जाता है। लेकिन इसी गरीब बिहार में पेट्रोल की कीमत ₹105.23 प्रति लीटर है - यानी देश के सबसे महंगे राज्यों में शामिल।
और अब ज़रा तुलना करिए।
दिल्ली ₹94.77,
उत्तर प्रदेश ₹94.69,
गुजरात ₹94.70,
हिमाचल प्रदेश ₹95.34,
हरियाणा ₹95.94,
झारखंड ₹97.86।

ये सभी राज्य बिहार से आर्थिक रूप से बेहतर हैं। यहाँ लोगों की औसत आमदनी ज़्यादा है, रोज़गार ज़्यादा है, सुविधाएँ ज़्यादा हैं। फिर भी पेट्रोल सस्ता। और बिहार? जहाँ युवा पलायन करता है, जहाँ मज़दूर 300 रुपये रोज़ कमाता है, जहाँ किसान डीज़ल-पेट्रोल के भरोसे खेती करता है, ना अच्छे अस्पताल हैं और ना स्कूल, लेकिन पेट्रोल देश में सबसे महंगा।

यह क्या है? यह शासन है या शोषण?

सरकारें जब जवाब नहीं देना चाहतीं, तो “सुशासन” का नारा उछाल देती हैं। लेकिन सवाल यह है कि- अगर सुशासन है, तो बिहार में:
सबसे कम प्रति व्यक्ति आय क्यों?
सबसे ज़्यादा पलायन क्यों?
सबसे कमजोर स्वास्थ्य और शिक्षा क्यों?
और अब एक नया तमगा- गरीब राज्य में महंगा पेट्रोल।

सच यह है कि बिहार सरकार ने पेट्रोल पर जानबूझकर ऊँचा VAT लगाकर गरीब जनता से वसूली को ही नीति बना लिया है। ऑटो चालक, डिलीवरी बॉय, छोटे दुकानदार, किसान, सबसे ज़्यादा मार इन्हीं पर पड़ती है।
सरकार कहती है, “पैसे से विकास करेंगे।” लेकिन सवाल सीधा है, 15-20 साल से टैक्स वसूली चल रही है, विकास कहाँ है? अगर पेट्रोल टैक्स से बिहार समृद्ध होता, तो आज बिहार देश में सबसे आगे होता, ना कि हर सूचकांक में सबसे पीछे। यह आर्थिक मजबूरी नहीं, यह राजनीतिक बेरुख़ी और प्रशासनिक निकम्मापन है।
बिहार की जनता से हर बार कहा जाता है- “थोड़ा सह लीजिए।” लेकिन सत्ता कभी नहीं बताती कि कब तक?
अब समय आ गया है कि बिहार पूछे- जब दिल्ली, यूपी और गुजरात में पेट्रोल सस्ता हो सकता है, तो बिहार में क्यों नहीं?
जब तक यह सवाल नहीं पूछा जाएगा, तब तक गरीब को महंगाई और सत्ता को बहाने मिलते रहेंगे।

जब तक बिहार देश के टॉप राज्यों में खड़ा नहीं होगा,तब तक ये लड़ाई रुकेगी नहीं।हम सत्ता के लिए नहीं, सिस्टम बदलने के लिए न...
20/12/2025

जब तक बिहार देश के टॉप राज्यों में खड़ा नहीं होगा,
तब तक ये लड़ाई रुकेगी नहीं।
हम सत्ता के लिए नहीं, सिस्टम बदलने के लिए निकले हैं। 💪

#जनसुराजकीआवाज

गरीब बिहार, महंगा पेट्रोल, यह सुशासन नहीं शोषण है....................................................................बिह...
19/12/2025

गरीब बिहार, महंगा पेट्रोल, यह सुशासन नहीं शोषण है....................................................................
बिहार आज देश के सबसे गरीब राज्यों में गिना जाता है। लेकिन इसी गरीब बिहार में पेट्रोल की कीमत ₹105.23 प्रति लीटर है - यानी देश के सबसे महंगे राज्यों में शामिल।
और अब ज़रा तुलना करिए।
दिल्ली ₹94.77,
उत्तर प्रदेश ₹94.69,
गुजरात ₹94.70,
हिमाचल प्रदेश ₹95.34,
हरियाणा ₹95.94,
झारखंड ₹97.86।

ये सभी राज्य बिहार से आर्थिक रूप से बेहतर हैं। यहाँ लोगों की औसत आमदनी ज़्यादा है, रोज़गार ज़्यादा है, सुविधाएँ ज़्यादा हैं। फिर भी पेट्रोल सस्ता। और बिहार? जहाँ युवा पलायन करता है, जहाँ मज़दूर 300 रुपये रोज़ कमाता है, जहाँ किसान डीज़ल-पेट्रोल के भरोसे खेती करता है, ना अच्छे अस्पताल हैं और ना स्कूल, लेकिन पेट्रोल देश में सबसे महंगा।

यह क्या है? यह शासन है या शोषण?

सरकारें जब जवाब नहीं देना चाहतीं, तो “सुशासन” का नारा उछाल देती हैं। लेकिन सवाल यह है कि- अगर सुशासन है, तो बिहार में:
सबसे कम प्रति व्यक्ति आय क्यों?
सबसे ज़्यादा पलायन क्यों?
सबसे कमजोर स्वास्थ्य और शिक्षा क्यों?
और अब एक नया तमगा- गरीब राज्य में महंगा पेट्रोल।

सच यह है कि बिहार सरकार ने पेट्रोल पर जानबूझकर ऊँचा VAT लगाकर गरीब जनता से वसूली को ही नीति बना लिया है। ऑटो चालक, डिलीवरी बॉय, छोटे दुकानदार, किसान, सबसे ज़्यादा मार इन्हीं पर पड़ती है।
सरकार कहती है, “पैसे से विकास करेंगे।” लेकिन सवाल सीधा है, 15-20 साल से टैक्स वसूली चल रही है, विकास कहाँ है? अगर पेट्रोल टैक्स से बिहार समृद्ध होता, तो आज बिहार देश में सबसे आगे होता, ना कि हर सूचकांक में सबसे पीछे। यह आर्थिक मजबूरी नहीं, यह राजनीतिक बेरुख़ी और प्रशासनिक निकम्मापन है।
बिहार की जनता से हर बार कहा जाता है- “थोड़ा सह लीजिए।” लेकिन सत्ता कभी नहीं बताती कि कब तक?
अब समय आ गया है कि बिहार पूछे- जब दिल्ली, यूपी और गुजरात में पेट्रोल सस्ता हो सकता है, तो बिहार में क्यों नहीं?
जब तक यह सवाल नहीं पूछा जाएगा, तब तक गरीब को महंगाई और सत्ता को बहाने मिलते रहेंगे।

18/12/2025

बिहार की गरीबी की प्रमाणित सच्चाई 🙏
जब भी बिहार की बदहाली पर बात होती है, तो कुछ लोग कहते हैं- “नेगेटिव मत बोलिए”, “राजनीति मत कीजिए”, “सब ठीक हो रहा है”। लेकिन आज हम आपके सामने कोई हवाई बात नहीं बल्कि भारत सरकार के आंकड़े रख रहे हैं।

📉 बिहार की प्रति व्यक्ति आय: देश में सबसे नीचे
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार- बिहार की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ ₹54,111 है।

सोचिए…₹54,111 सालाना मतलब ₹4,500 महीना यानि ₹150 प्रतिदिन

❓ क्या ₹150 रोज़ में कोई परिवार सम्मान से जी सकता है?

- अब ज़रा दूसरे राज्यों से तुलना कीजिए
▪️ दिल्ली – ₹4,30,120
▪️ गोवा – ₹5,32,854
▪️ सिक्किम – ₹5,19,964
▪️ तेलंगाना – ₹3,11,649
▪️ कर्नाटक – ₹3,04,474
और बिहार?
👉 ₹54,111
⚠️ मतलब:
दिल्ली से लगभग 8 गुना कम
गोवा से लगभग 10 गुना कम
यह आंकड़ा नहीं, यह बिहार की दुर्दशा का आईना है।

🚨 उत्तर प्रदेश भी बिहार से आगे
अक्सर कहा जाता है “यूपी–बिहार एक जैसे हैं”। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ और कहते हैं-
▪️ उत्तर प्रदेश – ₹83,636
▪️ बिहार – ₹54,111
यानि यूपी भी बिहार से करीब 55% आगे है। देश का दूसरा पिछड़ा माना जाने वाला राज्य भी आज बिहार से बेहतर स्थिति में है।

🏭 सरकार खुद मानती है: विकास नहीं हुआ
राज्यसभा में दिए गए जवाब में सरकार यह भी स्वीकार करती है कि-
▪️ बिहार में उद्योगों का विकास नहीं हुआ
▪️ कृषि और सेवा क्षेत्र कमजोर हैं
▪️ इसी वजह से गरीबी और बेरोज़गारी बनी हुई है

❓ सवाल ये है-
अगर यह सच्चाई सरकार जानती है, तो पिछले 15–20 सालों में बदला क्या? 10 साल से केंद्र और राज्य में BJP की सरकार है, फिर ऐसी स्थिति क्यों?
😔 यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, चेतावनी है

कम प्रति व्यक्ति आय का मतलब होता है-
▪️ युवा बिहार छोड़कर पलायन करेगा
▪️ मजदूरी सस्ती रहेगी
▪️ पढ़ाई अधूरी रहेगी
▪️ इलाज कर्ज़ लेकर होगा
▪️ अगली पीढ़ी भी गरीब रहेगी
यही आज बिहार के साथ हो रहा है।

🗣️ अब सवाल बिहार के लोगों से

यह पोस्ट किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है। यह बिहार के हक का सवाल है। अगर आज हम इन सरकारी आंकड़ों को भी “नेगेटिविटी” कहकर नजरअंदाज करेंगे, तो कल हमारे बच्चों को भी गरीबी को “नसीब” कहकर स्वीकार करना पड़ेगा।
⚠️ बिहार गरीब नहीं है,
बिहार को गरीब बनाकर रखा गया है।
अब फैसला हमें करना है-
👉 सच्चाई स्वीकार करेंगे?
👉 या चुप रहेंगे?
बदलाव की शुरुआत सच्चाई से होती है।

Nitish Kumar Jan Suraaj Chakia/Pipra Tejashwi Yadav Manish Kasyap

21/11/2025

जनसुराज जनसुराज़

गांधी आश्रम में अपने एक दिन के उपवास के बाद प्रशांत किशोर ने अगले पांच वर्षों में अपनी आमदनी का 90% हिस्सा और अब तक अर्ज...
21/11/2025

गांधी आश्रम में अपने एक दिन के उपवास के बाद प्रशांत किशोर ने अगले पांच वर्षों में अपनी आमदनी का 90% हिस्सा और अब तक अर्जित सारी चल-अचल संपत्ति में से दिल्ली में एक घर को छोड़कर सब कुछ जन सुराज के बिहार सुधारने के अभियान को डोनेट करने की घोषणा कर दी।

साथ ही लोगों से अपील की कि अगर आप बिहार में सुधार चाहते हैं तो जन सुराज को अपनी क्षमता के अनुसार या कम से कम ₹1000 डोनेट कीजिए।

📌 गांधी आश्रम भितिहरवा, पश्चिम चंपारण  मौन उपवास...
21/11/2025

📌 गांधी आश्रम भितिहरवा, पश्चिम चंपारण

मौन उपवास...

20/11/2025

बिहार बदलने की जिद: प्रशांत किशोर के मौन उपवास से बिहार में बदलाव के संकल्प की नयी शुरुआत

📌 गांधी आश्रम, भितिहरवा, पश्चिम चंपारण

I've just reached 100 followers! Thank you for continuing support. I could never have made it without each one of you. 🙏...
20/11/2025

I've just reached 100 followers! Thank you for continuing support. I could never have made it without each one of you. 🙏🤗🎉

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