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05/10/2026

LIVE : INDIA महागठबंधन की महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता

05/10/2026

मिलन समारोह, औरंगाबाद

04/10/2026

बिहार में ही नहीं बल्कि देश भर में धीरे-धीरे ये राय बनती जा रही है कि BJP चुनावी धांधली के ज़रिए जीत रही है और मोदी सरकार ही नहीं, कई राज्य सरकारें भी इन्हीं धांधलियों के ज़रिए बनाई गई हैं, लिहाज़ा वे नाजायज़ हैं, अवैध हैं, ग़ैर कानूनी हैं, उन्हें बने रहने का कोई हक़ नहीं है, बल्कि ये अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक भी है।

तेजस्वी यादव जब कहते हैं कि बिहार-बंगाल चुनाव अवैध है और आज पूरा देश गैर-कानूनी चुनावों के आधार पर चल रहा है और मोदी एक गैर-कानूनी प्रधानमंत्री हैं, और जहां भी मुख्यमंत्री चुने गए हैं, वे सभी गैर-कानूनी हैं तो ये केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं रह जाता।

ये जन भावना को प्रतिबिंबित करने वाला बयान बन जाता है और इसी की तार्किक परिणति में उनका ये बयान भी जुड़ जाता है कि लोकसभा और सभी राज्य सरकारों को भंग कर दिया जाना चाहिए, नए चुनाव होने चाहिए और चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए जाने चाहिए।

इसमें संदेह नहीं कि खड़गे की मांग का कोई कानूनी और संवैधानिक आधार नहीं है। उनकी मांग करने से न तो लोकसभा भंग होने वाली है और न ही प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या उनकी सरकार अवैध हो जाएगी। लेकिन उनकी मांग नैतिक आधार ज़रूर रखती है। और ये नैतिक आधार किसी खोखली दीवार पर नहीं खड़ा है, बल्कि हाल में हुए तमाम भंडाफोड़ से निकली सचाईयों पर आधारित है।

सुप्रीम कोर्ट चाहे जो भी फ़ैसला करे या मोदी सरकार भले ही ज्ञानेश कुमार एंड कंपनी को बचा ले जाए, मगर क्या अब कोई इस बात को झुठला सकता है कि चुनाव आयोग बीजेपी के लिए चुनावी धांधली करने का अड्डा बना हुआ है...इन खुलासों के बाद क्या बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र, हरियाणा की सरकारों की कोई वैधता है....और क्या ख़ुद मोदी की सत्ता कानूनी है, वैध है?

03/10/2026

पहले CM हाउस में दारू पार्टी, अब शराब माफिया को बना दिया जिलाध्यक्ष।

शराब माफियाओं को मिल रहा सत्ताधारियों का संरक्षण

01/10/2026

जनता चिल्लाती रही - “चोर है, चोर है”

लेकिन बेशर्मी से फोटोशूट कराते रहे सम्राट चौधरी

यह इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ सहायक संपादक संतोष सिंह का पोस्ट है, जिसमें वह इलेक्शन कमिश्नर के भ्रष्टाचार के ऊपर रितिका...
29/09/2026

यह इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ सहायक संपादक संतोष सिंह का पोस्ट है, जिसमें वह इलेक्शन कमिश्नर के भ्रष्टाचार के ऊपर रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के संदर्भ में इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता का गुणगान कर रहे हैं।

कल मैंने इनके इस पोस्ट पर कमेंट किया कि:

“उम्मीद है कि किसी दिन बिहार के घोटालों और सरकारी भ्रष्टाचार पर भी ऐसी ही गहन और निष्पक्ष खोजी पत्रकारिता देखने को मिलेगी। ऋषु श्री टेंडर, डस्टबिन घोटाले और ऐसे कई अन्य मामलों पर द इंडियन एक्सप्रेस की चुप्पी स्पष्ट दिखती है।”

इन्होंने मेरी बात का संज्ञान लेते हुए कमेंट किया कि हम जल्द बात करेंगे और उसके बाद अपने पोस्ट से मेरे कमेंट को डिलीट कर दिया, क्योंकि कुछ लोगों ने मेरी उस बात से सहमति जताई।

मेरे कमेंट को डिलीट किया जाना मुद्दा नहीं है, मगर बड़ा सवाल ये है कि साल 2008 से इंडियन एक्सप्रेस के बिहार के वरिष्ठ सहायक संपादक के पद पर बैठे हुए संतोष सिंह जी ने बिहार में हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार के ऊपर कितनी रिपोर्टिंग की है और इनको निष्पक्ष और क्रांतिकारी पत्रकार का तगमा लेकर सार्वजनिक बखान करने का क्या अधिकार है?

अगर सिर्फ़ पिछले तीन महीने में इनकी रिपोर्टिंग को देखें तो इन्होंने लगभग 85 रिपोर्ट फ़ाइल की हैं।

इस दौरान बिहार में ऋषु श्री घोटाला, डस्टबिन घोटाला समेत कई घोटाले उजागर हुए हैं। विपक्ष के द्वारा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के संदर्भ में कई प्रेस कॉन्फ्रेंस किए गए, मगर आपको उस बारे में एक रिपोर्ट नहीं देखने को मिलेगी।

संतोष सिंह की रिपोर्टों का अवलोकन कीजिएगा तो आप देखिएगा कि 85 में से लगभग 10 से 12 रिपोर्ट ये प्रशांत किशोर और उनका गुणगान करने के लिए कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर की चुनावी जीत और प्रशांत किशोर का गुणगान करते हुए 5 दिन के अंदर 8 लेख लिखे हैं।

फिर इनका दूसरा पसंदीदा टॉपिक है निशांत कुमार और नीतीश कुमार की विरासत, जिस पर इन्होंने चार-पाँच रिपोर्ट की हैं।

उसके बाद ये जदयू के सांसद झा की फ़र्ज़ी प्रायोजित बात कि फरक्का बराज से बिहार में बाढ़ की समस्या हो रही है, बिना किसी एक्सपर्ट या जानकार से राय लिए और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों को देखे बिना, तथ्यों के विपरीत विशुद्ध गलत रिपोर्ट फ़ाइल करते हैं।

जल संसाधन और गंगा संबंधित एक भी विशेषज्ञ से एक स्टेटमेंट तक लेना ज़रूरी नहीं समझा गया। संतोष सिंह चाहते तो उस समय के जल संसाधन मंत्री से मिलकर मुद्दे को समझ ही सकते थे।

मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के भ्रष्टाचार का मामला है तो उस रिपोर्ट की हेडिंग में ही स्पष्टीकरण दे दिया गया है।

पिछले कुछ महीनों में इनके द्वारा लिखी गई कुछ रिपोर्टों का हेडिंग देख लीजिए:

17 जुलाई को: तेजस्वी अंध समर्थकों से घिरे हुए हैं, राजद ने एक प्रवक्ता क्यों खोया?

बिहार में शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े के लिए प्रदर्शन हुआ आक्रामक, 25 लोग हुए गिरफ्तार।

मुख्यमंत्री के द्वारा पोर्टल का उद्घाटन किया गया और आश्वासन दिया कि इससे छात्रों की शिकायतें दूर होंगी।

पेपर लीक के मामलों को देखते हुए बिहार सरकार ने एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया।

इंडस्ट्री मंत्री श्रेयसी सिंह से बातचीत कि बिहार सरकार इथेनॉल को क्यों प्राथमिकता दे रही है।

छात्रों के प्रदर्शन में दो पुलिस वाले हुए घायल, 25 छात्रों को किया गया गिरफ्तार।

फरक्का संधि को बिहार क्यों रद्द करवाना चाहता है।

बिहार को 200 नए कॉलेज मिले, अब आगे क्या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में टीचरों को ट्रेनिंग?

मोतिहारी के महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी का खर्च बजट से 488 करोड़ ज़्यादा, विश्वविद्यालय ने कहा कि ये आँकड़े अंतिम नहीं, जाँच चल रही है।

संतोष जी के द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ खिंचवाई गई तस्वीर को भी डाल रहा हूँ, जिसको इन्होंने पूरे गर्व के साथ अपने फेसबुक पर डाला है। तस्वीर देखकर यही लग रहा है कि ये सम्राट चौधरी के साथ फोटो खिंचाने के लिए लालायित हैं और सम्राट चौधरी का ध्यान कहीं और है, बस किसी ने फोटो ले लिया है।

इनकी कार्यशैली सरकार के प्रवक्ताओं वाली है और सवाल पूछने पर ऐसे क्रोधित होंगे हैं जैसे कि सवाल पूछने वाला ही गलत हो ।

गनीमत है रितिका चोपड़ा ऐसी तस्वीरों को देखकर प्रभावित नहीं हुईं, नहीं तो उनका भी मन चोर ज्ञानेश, मोदी और शाह के साथ फोटो खिंचाने का कर जाता तो आज हम लोगों के सामने चुनाव आयोग की सच्चाई सामने नहीं आती।

जो पत्रकार सोचते हैं कि वे सरकार में बैठे नेताओं और चोर अधिकारियों का गुणगान करके और उनके साथ फोटो खिंचवाकर देश और दुनिया में क्रांति ला देंगे, वे मूर्ख किसी और को बनाएँ।

Indian Express

28/09/2026

बिहार में महाराक्षसराज, ख़ुद मोदी के सहयोगी ही मोदी को लगा रहे तमाचे

28/09/2026

पाकिस्तान की जनसंख्या 26 करोड़
बांग्लादेश की जनसंख्या 18 करोड़

चुनाव आयोग ने अवैधानिक SIR के द्वारा 13 करोड़ लोगों को भारत की नागरिकता से वंचित कर दिया…

मतलब भारत के अंदर एक नया देश ही बना डाला…

सोचिए ये भारत का चुनाव आयोग है या भारत को टुकड़े-टुकड़े करनेवाला गिरोह…?

इस राष्ट्रविध्वंसक कार्य के लिए ज्ञानेश कुमार सहित तीनों चुनाव आयुक्तों, उन्हें नियुक्त करनेवाले और उनका समर्थन करनेवाले गिरोह को फाँसी की सज़ा से कम कोई भी सजा देश की आज़ादी और लोकतंत्र के लिए मर-मिटने वाले सपूतों का अपमान होगा…!!!

24/09/2026

नीतीश कुमार के मंत्री ने दी 14 करोड़ बिहारियों को गाली #बिहार

24/09/2026

मेरे प्यारे युवा साथियों,

हमारे सामने गंभीर लोकतांत्रिक संकट आ चुका है। सब संस्थाओं पर कब्जा किया जा चुका है। देश में जो कुछ चल रहा है, अगर आप उसे ठीक से समझेंगे तो बहुत संभव है कि आपकी शालीन भाषा त्याग पत्र दे दे और आपके मुँह से भी वैसे सुमधुर सद्वचन निकलें जिनसे आहत होकर प्रधानमंत्री को आधी रात को इंस्टाग्राम पर आना पड़ा था।

हम सब का प्यारा देश इस समय एक संगठित अपराध तंत्र के हवाले है और न्यू इंडिया बनाने में किराये के सरकारी गुंडे और सबसे बड़े मंदिर के काली कोट वाले हाकिम कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दे रहे हैं।

क्या इस बात की कल्पना की जा सकती थी कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को कोई क्रिमिनिल सिंडिकेट चलाएगा और भारी-भरकम शब्दों में खुद को संविधान का रक्षक बताने वाले लोग तमाशबीन बने रहेंगे।

पानी अब गर्दन तक आ चुका है। चीखने चिल्लाने और अपनी जान बचाने की आखिरी कोशिश के अलावा अब कोई रास्ता नहीं। अपराधियों से आप इंसाफ की उम्मीद नहीं कर सकते और इंसाफ देने वाले अपना ईमान बेचने का एलान बहुत पहले कर चुके हैं।

वो वक्त आ रहा है, जब असली इंसाफ के कथित बड़े मंदिरों में नहीं बल्कि इस देश की सड़कों पर होगा।

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